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आत्महत्या (Suicide) अपनी जान देने में कोई नफा नहीं
@esatsang
रा धा/ध: स्व आ मी! 13-06-2026-आज शाम सतसंग में पढे गये शब्द पाठ:- (1) चरन गुरु हिरदे आन बहार। सरन में निस दिन उमँगत धाय।। (संस्कृत)(प्रेमबानी- 2-शब्द-4- पृ.सं.7)(अधिकतम् उपस्थिति- स्वामीनगर ब्राँच दिल्ली- @-15:15- दर्ज-226) (2) गुरु का संग मोहि मिलिया कोई बड़ा भाग जागा है। जगत का संग मन तजिया चरन में गुरु के लागा है।।(प्रेमबिलास- शब्द-48- पृ.सं.60,61)(स्वामीनगर मोहल्ला) (3) मेरे प्यारे रँगीले सतगुरु। मेरी सुरत चुनरिया रँग दो।। (रत्नांजली- शब्द-12- पृ.सं.31-33)(महिला पाठ पार्टी दयालबाग) (4) रोजाना वाक़िआत- भाग-2- एवं परम गुरु हुजूर मेहता जी महाराज के बचन- भाग-2 सतसंग के बाद:- (1) रा धा/ध: स्व आ मी मूल नाम। (2) हे दयाल सद् कृपाल! (3) रा धा/ध: स्व आ मी,रा धा/ध: स्व आ मी, रा धा/ध: स्व आ मी,रा धा/ध: स्व आ मी,रा धा/ध: स्व आ मी, रा धा/ध: स्व आ मी,रा धा/ध: स्व आ मी,रा धा/ध: स्व आ मी! 🙏🏻रा धा/ध: स्व आ मी🙏🏻
रा धा/ध: स्व आ मी! 13-06-2026- आज शाम सतसंग में पढ़ा गया बचन- कल से आगे:- (28, 29.3.33 मंगल व बुध का पाँचवा भाग)- यह दुरुस्त है कि चालीस पचास बरस की उम्र को पहुँच कर सतसंगी अपनी ज्यादा से ज्यादा तवज्जुह परमार्थ की जानिब देता है और अपने जिस्म व दुनिया के सामान से लापरवाह हो जाता है लेकिन जो लोग सैर के आदी नहीं है और जिन्हें हाथ पाँव चलाकर मशक्कत (परिश्रम) करने का मौका नहीं है. उनके लिये निहायत जरूरी है कि थोड़ी सी वर्जिश करके अपनी कुवाए जिस्मानी (शारीरिक शक्ति) को मुतहर्रिक (गतिमान) कर लें। इससे दो फ़ायदे होंगे। अब्बल खुद उनके जिस्म सही रहेंगे दोयम उन्हें वर्जिश करते देखकर उनके बाल बच्चों को वर्जिश का शौक़ पैदा होगा। मर्दों व औरतों दोनों ही को वर्जिश करनी चाहिये। क्रमशः----- 🙏🏻रा धा/ध: स्व आ मी🙏🏻 रोजाना वाक़िआत- भाग-2- परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!
रा धा/ध: स्व आ मी! परम गुरु हुजूर मेहताजी महाराज के बचन- भाग-2 कल से आगे:- (१२१- ही का तीसरा भाग)- पाठ समाप्त होने पर फ़रमाया दयालबारा में अभी हाल ही में दो एक अवसर ऐसे देखने में आये कि घर की जीविका कमाने वाले मनुष्य की अचानक या असमय मौत हो जाने से उसके बाकी परिजनों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा । इसलिए आवश्यक मालूम हुआ कि कोई ऐसा उचित प्रबंध होना चाहिए कि किसी की अचानक मौत हो जाने से उसके घर के लोगों को आर्थिक कठिनाइयाँ न उठानी पड़ें। इसलिए यहाँ पर ३० मार्च और ६ अप्रैल के पब्लिक जलसों में इसी विषय पर विचार होता रहा और अंत में दयालबारा के तमाम कार्यकर्त्ताओं के जीवन का बीमा कराने का फैसला किया गया। क्रमशः----- 🙏🏻रा धा/ध: स्व आ मी🙏🏻
@esatsang
. *दिनाँक : 12 अप्रैल 2026, रविवार*
*भण्डारा (प्रीतिभोज) अवसर पर*
*"सायंकाल सतसंग" में पढ़ा गया बचन*
8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance साढ़े चार बजे होती है, और सत्संग की proceedings अभी पौने छ: बजे तक चल रही है, इसका मतलब लोग पहले छोड़ जाते हैं, आखिर तक नहीं बने रहते। इस सम्बन्ध में जो फरमाया, वे मुख्य बातें नीचे प्रस्तुत हैं:
*"1. Video Attendance, audio attendance की 1/4th है, यह बढ़नी चाहिए।
2. Video attendance के लिए 5 initiated Satsangis होने चाहिए। Audio attendance के लिए तो कोई specification नहीं है, तो लोग आखिर तक क्यों नहीं बने रहते? यह बात उन्हें बताई जाए।
3. लोग जहां भी हों, सेवा करें। अगर outdoor सेवा नहीं है, तो indoor करें। अगर सेवा नहीं है तो राधास्वामी (*R͟a͟ D͟h͟a͟ S͟v͟a͟ A͟a͟ M͟i͟* / *रा̲ ̲धा̲/̲धः̲ ̲स्व̲ ̲आ̲ मी̲*
) chant होती है, ध्यान भजन करें।
4. यह तो हुज़ूर राधास्वामी दयाल की देन है कि राधास्वामी (*R͟a͟ D͟h͟a͟ S͟v͟a͟ A͟a͟ M͟i͟* / *रा̲ ̲धा̲/̲धः̲ ̲स्व̲ ̲आ̲ मी̲*)
chant होती है। इसके सुनने से ही बेड़ा पार हो जाएगा। इससे सहज और क्या हो सकता है। इसलिए अगर सेवा नहीं है तो सुमिरन ध्यान भजन करें और आखिर तक बने रहें।
5. जब आप ऊपर उठ जाते हैं तो काल का ज़ोर नहीं रहता। नहीं तो मौत के वक्त काल बहुत परेशान करता है। हुज़ूर साहबजी महाराज ने जब चोला छोड़ा था तो बताते हैं कि वो (काल) मारने पीटने आ गये थे लेकिन राधास्वामी (*R͟a͟ D͟h͟a͟ S͟v͟a͟ A͟a͟ M͟i͟* / *रा̲ ̲धा̲/̲धः̲ ̲स्व̲ ̲आ̲ मी̲*) नाम का जाप हो रहा था, तो भाग गये। यह reality है, fable नहीं है।
6. तो आप सबको बताएं कि लोग आखिर तक बने रहें, पहले छोड़कर न जाएं, इसमे उन्हीं का फायदा है।"*
सभी सतसंगी भाईयों और बहनों से निवेदन है कि उपरोक्त गुरू आज्ञा का आज शाम से ही अक्षरक्ष: पालन करें।
*रा̲ ̲धा̲/̲धः̲ ̲स्व̲ ̲आ̲ मी̲* 🙏🙏
@esatsang
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