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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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परवाह
प्रेम सिर्फ शारिरिक नही होता हैं ,
प्रेम किसी व्यक्ति से नही होता हैं ,
प्रेम व्यक्तित्व से होता हैं ,
इंसान के वय्वहार से होता हैं ,
किसी की बातो से जब मन को खुशी मिलती हैं ,
किसी की परवाह जब तुम्हें सुकूँ देती हैं ,
तुम कितने अनमोल हो उसके लिए ,
जब कोई तुम्हें ये महसूस कराता हैं ,
अपने व्यस्त समय मे से भी ,
जो आपके लिए समय निकालता हैं ,
जिसको आप समझते हो और
जो तुम्हें समझता हो ,
ऐसे इंसान से हर बार आपको प्यार होगा ,
क्योंकि प्रेम व्यक्ति से नही व्यक्तित्व से होता हैं ।
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*प्रेम पूर्ण विराम नहीं जानता, प्रेम उम्र नहीं मानता...*
प्रेम जुडता तो है लेकिन संबंध नहीं बनता
संबंध का मतलब होता है जो पूर्ण हो गया, बंद हो गया, समाप्त हो गया...
प्रेम कभी संबंध नहीं होता
यह सदैव एक नदी की तरह होता है,
बहती हुई और कभी ना समाप्त होने वाली...
प्रेम पूर्ण विराम नहीं जानता
हनीमून प्रारंभ तो होता है, लेकिन समाप्त नहीं होता...
यह किसी उपन्यास की तरह नहीं है जो एक स्थान पर प्रारंभ होता है और दूसरे स्थान पर समाप्त...
वस्तुतः प्रेम एक ऐसी घटना है जो निरंतर जारी रहती है...
प्रेमी समाप्त हो जाते हैं, लेकिन प्रेम जारी रहता है...
प्रेम एक सातत्य है, एक क्रिया हैं न कि एक संज्ञा...
प्रेम कोई शब्द नहीं, जिसे लिख पाओगे...
प्रेम कोई अर्थ नहीं, जिसे समझ पाओगे...
ये तो वीणा का सफर है...
बह गए तो बस बहते चले जाओगे.....
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P-1
उम्र में 40+को पार कर चुकीं महिलाएं बस एक अच्छा दोस्त चाहती हैं।।
वो बांटना चाहती है अपने रत-जगे जो अक्सर किसी अस्पताल की बेंच पर या किसी दूर जाने वाली गाड़ी के इंतजार में काटे होते हैं!
वो बांटना चाहती है अपने आंसू जो अक्सर रति-क्रीड़ा के बाद,पति के मुंह फेरकर सोने के बाद बहाए होते हैं!
वो बांटना चाहती है वो फस्ट्रेशन जो अक्सर बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करते वक़्त उनके गाल पर जमा देती है!
वो बांटना चाहती है वो जलन जो अक्सर तवे पर रोटी सेंकते वक़्त उसकी अंगुलियों के पोरों पर महसूस होती है!
वो बांटना चाहती है वो बातें जो अक्सर वो किसी को कह नही पाती!
वो बांटना चाहती है वो स्वेद जो अक्सर गृह-कार्यो की थकान के कारण उसकी कमर पर उभर आता है!
वो बांटना चाहती है वो पहाड़ जैसे भारी धूप के टुकड़े जो अक्सर पति व बच्चों के चले जाने के बाद,उससे काटे नही कटते!
वो बांटना चाहती है अपने सफेद होते बालों की सफेदी व अपनी हिना की खुश्बू,जिसके लिए पतिदेव को अवकाश नही है!
वो बांटना चाहती है अपनी सोने के पिंजरे वाली कैद!
वो चाहती हैं एक ऐसा दोस्त जिससे खुलकर सब-कुछ बोल सके,जिसे कुछ भी बोलने से पहले एक पल को भी सोचना न पड़े...
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सारी उम्र बचाया मैंने अपना दामन इश्क से,
जब बाल सफेद हुए तुब इश्क ने रंगना सीखा दिया...
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प्रेम का अपना आंतरिक आनंद है।
यह तब होता है जब तुम प्रेम करते हो।
परिणाम के लिए प्रतीक्षा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस प्रेम करना शुरू करो।
धीरे-धीरे तुम देखोगे कि बहुत ज्यादा प्रेम वापस तुम्हारे पास आ रहा है।
व्यक्ति प्रेम करता है और प्रेम करके ही जानता है कि प्रेम क्या है।
जैसा कि तैराकी तैरने से ही आती है, प्रेम प्रेम के द्वारा ही सीखा जाता है।
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शादी शुदा स्त्री अक्सर कर बैठती हैं #इश्क़
मांग में सिंदूर होने के बावजूद
जुड़ जाती हैं किसी के अहसासों से
कह देती है उससे कुछ अनकही बातें
ऐसा नहीं की वो बदचलन हैं
या उसके चरित्र पर कोई दाग़ हैं
तो फिर क्या हैं जो वो खोजती हैं
सोचा कभी, स्त्री क्या सोचती हैं
तन से वो हो जाती हैं शादीशुदा
पर मन कुंवारा ही रह जाता हैं
किसी ने मन को छुआ ही नहीं
कोई मन तक पहुंचा ही नही
बस वो रीती सी रह जाती हैं
और जब कोई मिलता हैं उसके जैसा
जो उसके मन को पढ़ने लगता हैं
तो वो खुली किताब बन जाती हैं
खोल देती है अपनी सारी गिरहें
और नतमस्तक हो जाती हैं सम्मुख
स्त्री देह से परे प्यार करती हैं
जहां वो बोल सके खुद की बोली
जी सके खुद के दो पल
बता सकें बिना रोक टोक अपनी बातें
हंस सके एक बेख़ौफ़ सी हसीं
हां लोग इसे इश्क ही कहते है
पर स्त्री तो बस दूर करती हैं
अपने मन का कुंवारापन
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जिस तरह चंदन घिसने से ज्यादा असर से महकता है उसी तरह जितना संभोग करो ,संभोग की प्यास बढ़ती है । खास कर अगर कामुक स्त्री बाहों में हो तो क्या कहना ! चुम्बन माथे से शुरू करो और पांव तक करो फिर स्त्री की प्रेम समर्पण की बराबरी पुरुष नही कर पाता है ।
मेरी रती के साथ मेरा स्वप्न अनुभव
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प्रेम नाजुक बात है। प्रेम को अगर ठीक से समझा, तो उसमें यह बात समाहित है कि दूसरे का ध्यान रखना।
प्रेम तो रत्ती - रत्ती संभलकर चलता है, इंच - इंच संभलकर चलता है। प्रेम तो देखता है कि दूसरा कितने दूर तक चलने को राजी है, उससे इंच भर ज्यादा नहीं चलता। क्योंकि प्रेम का अर्थ ही है कि तुम्हें दूसरे का खयाल आया। दूसरे का मूल्य! दूसरा साध्य है, साधन नहीं! तुम गले लगना चाहते हो; दूसरा लगना चाहता है या नहीं ? दूसरे को देखकर कदम उठाना। और धीरे - धीरे कदम उठाना, अन्यथा दूसरा घबड़ा ही जाएगा। तब तुम्हारा प्रेम आक्रमण जैसा मालूम पड़ेगा। तुमने दूसरे की चिंता ही न की। तुम इतनी देर भी न रुके कि पूछ तो लेते कि मैं पास आता हूं, आ जाऊं ?
प्रेम सदा द्वार पर दस्तक देता है। पूछता है, क्या भीतर आ सकता हूं? अगर इनकार आये, तो प्रतीक्षा करता है, नाराज नहीं हो जाता। क्योंकि यह दूसरे की स्वतंत्रता है। दूसरे का स्वत्व है, अधिकार है कि वह कब तुम्हारे गले लगे, कब न लगे। तुम्हें प्रेम का अवरतण हुआ है, उसे तो नहीं हुआ। तुम्हारे भीतर प्रेम फैलना शुरू हुआ है, उसे तो तुम्हारे प्रेम का कोई पता नहीं। और वह दूसरा व्यक्ति तो प्रेम के नाम पर इतने धोखे खा चुका है कि उसे क्या पता कि फिर कोई नया धोखा नहीं पैदा हो रहा है। प्रेम के नाम पर ही लोगों को सताया गया है, इसलिए लोग सकुच गये हैं। परिवार ने किया प्रेम, पत्नी ने किया प्रेम, पति ने किया प्रेम,मित्रों ने किया प्रेम, और सबने प्रेम के नाम पर कोई अपेक्षा रखी, और सबने प्रेम के नाम पर भावनाओं से खेला। बहाना प्रेम था, काम कुछ और लिया। जिसने भी कहा, मुझे तुमसे प्रेम है, उसी से तुम डरने लगे। क्योंकि अब कुछ और होगा! इस प्रेम के पीछे छिपा हुआ कोई न कोई रोग होगा। कम से कम प्रेम के नाम पर माँग ना रखो। जब तुम प्रेम दोगे तो चारों और से प्रेम बरस उठेगा और माँग रखोगे तो माँग की ही पुकार सुनोगे।
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प्रेम की सारी यात्रा का प्राथमिक बिंदु सेक्स है'
ओशो कहते हैं कि प्रेम का प्राथमिक बिंदु सेक्स ही है और जो लोग सेक्स को घृणा के नजरिए से देखते हैं, वे कभी प्रेम कर ही नहीं सकते। ओशो के मुताबिक संभोग और समाधि के बीच एक सेतु है, एक यात्रा है, एक मार्ग है। समाधि जिसका अंतिम छोर है और संभोग उस सीढ़ी का पहला सोपान है।
ओशो ने कहा है कि हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम सेक्स की बात करते वक्त भी भयभीत होते हैं। लेकिन सच तो ये है कि मनुष्य के जीवन में इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ है ही नहीं।
ओशो समाज के युवाओं को सेक्स के संबंध में चेताते हुए कहते हैं कि हजारों साल से पीढ़ियां सेक्स से भयभीत रही हैं। तुम भयभीत मत रहना। तुम समझने की कोशिश करना उसे। तुम बात करना। तुम सेक्स के संबंध में जो आधुनिक खोजे हुई हैं उनके बारे में पढ़ना। चर्चा करना और समझने की कोशिश करना।
ओशो सेक्स को जहां थकान वाला बताते हैं वहीं उसकी सबसे ज्यादा महत्व की भी बात करते हैं। उनके मुताबिक सेक्स थकान लाता है। इसकी अवहेलना मत करना। जबतक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा सकते।
प्रेम की सारी यात्रा का प्राथमिक बिंदु काम है, सेक्स है। सेक्स की शक्ति ही प्रेम बनती है। सेक्स ऊर्जा का अधोगमन है, नीचे की तरफ बह जाना है, ब्रह्माचर्य ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन है, ऊपर की तरफ उठ जाना है। जिस दिन इस देश में सेक्स की सहज स्वीकृति हो जाएगी, उस दिन इतनी बड़ी ऊर्जा मुक्त होगी भारत में कि हम आइंस्टीन पैदा कर सकते हैं।
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*🔞सेक्स ज्ञान🔞*
*★संभोग क्या है..*
समान रूप से शारीरिक सम्बन्धों द्वारा भोगा गया आनन्द ही सम्भोग है। इसमें सेक्स का आनन्द स्त्री-पुरुष को समान रूप से प्राप्त होना आवश्यक है। स्खलन के साथ ही पुरुष को तो पूर्ण आनन्द की प्राप्ति हो जाती है और सेक्स सम्बन्ध स्थापित होते ही पुरूष का स्खलन निश्चित हो जाता है। यह स्खलन एक मिनट में भी हो सकता है तो दस मिनट में भी। अर्थात् पुरुष को पूर्ण आनन्द की प्राप्ति हो जाती है। इसलिए मुख्य रूप से स्त्री को मिलने वाले आनन्द की तरफ ध्यान देना आवश्यक है। अगर स्त्री इस आनन्द से वंचित रहती है, इसे सम्भोग नहीं माना जाना चाहिए। इस वास्तविकता से व्यक्ति पूरी तरह से अनभिज्ञ होकर अपने तरीके से सेक्स सम्बन्ध बनाता है और स्त्री के आनन्द की तरफ कोई ध्यान नहीं देता है। इसे केवल भोग ही मानना चाहिए। सम्भोग की वास्तविकता को समझे बिना इसे जानना मुश्किल होगा। विवाह के बाद व्यक्ति सम्भोग करने के स्थान पर भोग करता है तो इसका मतलब यह है कि वह इस तरफ से अनजान है कि स्त्री को सेक्स का पूरा आनन्द मिला कि नहीं। सम्भोग शब्द की महत्ता को समझें। स्त्री को भोगें नहीं, समान रूप से आनन्द को बांटे। यही संभोग
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#चूसना और चाटना संसार की सबसे #श्रेष्ठ क्रिया है वास्तविकता में जो आनंद #चूसकर चाटकर प्राप्त होता है वह बहुत अलग होता है उसका स्वाद निराला होता है #आइस्क्रीम हो या शरीर।🍌👅👅💦💦
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गठीला बदन, स्तनों का यह उभार और कमर मानो आमंत्रित करती हो प्रणय के लिए पुरुषों के लिए मेरी ये कामुक अदाएं जो उन्हें रिझाने के लिए होती है उनमें उत्तेजना उत्पन्न कर देती है और मुझे भी और ज़्यादा कामुक बना देती है जब कोई पुरुष इस नजर से मुझे देखता है तो जैसे एक आग लग जाती है बदन में…😌
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!!उम्र भी धीरे धीरे दस्तक दे रही है...
ओर मन बडा चंचल होते जा रहा है....अब उम्र के उस पडाव मे आ गये हम...☝
सोचते है...मस्ती करें या भक्ती...
💝🥀🥀✍️✍️
मेरी रती को समर्पित 💋💋😘❤️
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मयखाने का पता मुझे क्यो देते हो दोस्तो
मुझे तो उसके गर्दन का पसीना भी शराब लगता है..
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