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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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इश्क़ तो बस नसीब है कोई ख्वाब नहीं,
ये वो मंज़िल है जिस में सब कामयाब नहीं,
जिन्हें साथ मिला उन्हें उँगलियों पर गिन लो,
जिन्हें मिली जुदाई उनका कोई हिसाब नहीं।
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#___प्रेम आखों में बसता है
भोलेनाथ..! सुनो...!! ना
एक स्त्री जब प्रेम में होती है
तो वो प्रेम उसके आखों में झलकता है
जो प्रीतम को देख कर ही झुक जाता है
प्रेम के सार को समझने के लिए
आखों के हया को समझना होता है
कितना प्रेम है
इन आखों में डूब कर पता चलता है
जो बेचैनी बेताबी होती है
मिलने की इन आखों को
पढ़ने से पता चलता है
हां मुझे भी प्रेम है
पर इजहार करने से ये दिल डरता है
होठ कुछ बोल नहीं पाते
नयन भी झुक जाते है
काश वो समझ पाते
कितना हम उन्हे चाहते है
#___प्रेम वो खूबसूरत कसूर है
जो हर इंसान
खुशी-खुशी करता है...!!
पर #प्रेम में इंतजार
वो सजा है...!
जो सिर्फ वही करता है..!
जो सच मे #प्रेम करता है...!!
#___मै #प्रेम #हूं.!!
♥️♥️♥️♥️♥️♥️
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होते हैं ...
कुछ पुरुष भी ऐसे जो अपना सर्वस्व वार देते हैं
स्त्री के प्रेम में
अपना पौरुष भी हार देते हैं
ना देह का लोभ होता है ना होता है कपट मन में
चरणों में भेंट चढ़ाने को
अपना अहम भी मार देते हैं
आलिंगन का लोभ नहीं, ना दर्शन की ही दरकार कोई
ख्यालों में रह कर भी
नजदीकियों सा प्यार देते हैं
जुस्तजू नही कुछ पाने की, उम्मीद भी ना हो निभाने की
बस रह कर मौन, हो कर गौण
अंतर्मन का करार देते हैं .... 🥀🖤 होते हैं ...
۪۪۪۪۪ٜ݊𖤌__𖤌⃟۪۪۪۪۪ٜ݊𖤌__🖤
जैसे में
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प्रेमी-प्रेमिका दिन भर आपस मे बातें करते , चुहलबाजी करते, रुमानियत से भरे रहते। प्रेमिका अलग-अलग विषयो को उठाती उन पर बात करती, प्रेम और प्रेम के दर्शन पर बात करती और प्रेमी बात को घुमा कर अन्ततः सेक्स पर ले आता। प्रेमिका नाराज होती, कहती पुरुष सेक्स के लिए इतना क्रेजी क्यों होता है कि उसे लड़की और सेक्स एक-दूसरे के पूरक शब्द लगते हैं जैसे कि लड़की का मतलब ही सेक्स है। थोड़ा हमारी डिग्निटी का भी ख्याल करो यार!
प्रेमी झेंप जाता या नाराज हो जाता! प्रेमिका उसे मैनेज करती या मनाती। लेकिन प्रेमी फिर-फिर हर वार्ता को सेक्स की ओर ले जाता।
प्रेमिका ने प्रेम की, स्त्री की फीलिंग बताई कि स्त्री जब घूमने जाती हैं तो वह प्राकृतिक सौंदर्य या दुनिया के टूरिज्म के प्रति क्रेजी होती हैं, अपनों के लिए खरीदारी करने के प्रति क्रेजी होती हैं। सेक्स उनका मिशन नही होता। पुरुष सेक्स के लिए इतने क्रेजी होते हैं कि सेक्स उनका मिशन बन जाता है। प्रेमी सुनता और हूं-हां करके बात को टाल देता। बात के अंत में कहता- सुनो, सेक्स करोगी?
प्रेमिका इस वाक्य से पहले एक दो बार असहज हुई लेकिन फिर उसने मीठी डांट लगाकर बात को टाल देने की नीति अपनाई। सुबह गुड मॉर्निंग मेसेज के बाद यह वाक्य इनबॉक्स में पड़ा होता शाम को गुड नाईट के पहले यह वाक्य प्रेमिका की आंखों से टकराता और आँखों में अजीब सा तीखापन उतर जाता।
प्रेमिका पूछती कि सुबह-शाम टॉर्चर क्यों करते हो। तब प्रेमी कहता, मेटाबोलिज्म क्रिएट करता हूं, खुशी का केमिकल। प्रेमिका पूछती, अपना मेटाबॉलिज्म या मेरा? वह इस दर्शन को भीतर ले जाती कि स्त्रियां पुरुषों के मेटाबोलिज्म का ही तो सामान हैं। स्त्री तमाम रासायनिक वृत्तियों गणनाओं फार्मूलों से आगे बढ़कर प्रेम को जीती है, भीतर एक वृहद संसार विकसित करती है जिसमे हजारो हजार सम्भयताएँ पल्ल्वित हो सकती हैं। मनुष्यता का नया द्वार जो दुनिया ने कभी देखा ही नही , वह खुल सकता है, लेकिन पुरूष को सिर्फ मेटाबॉलिज्म क्रिएट करना है।
रोज की तरह एक दिन प्रेमी ने फिर वही सवाल किया,
"सुनो, सेक्स करोगी?" प्रेमिका ने सहज भाव से कहा, "कर लो, लेकिन उसके बाद प्रेम करोगे?"
प्रेमी अवाक था
प्रेम के समस्त दर्शन को स्त्री ने एक सवाल में लपेट कर पुरुष के सामने रख दिया था ।🖤🖤
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तेरे प्यार की हिफाज़त ..
कुछ इस तरह की मैंने,
जब भी किसी ने प्यार से देखा..
नज़रे झुका लीया मैंने।
💎❤️🌹
#प्रियत्मा💎
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सेक्सुअल फैंटेसी
हम सभी सेक्स के बारे में कल्पना करते हैं। हम सभी की कोई न कोई सेक्सुअल फैंटेसी होती ही है। कुछ इसे स्वीकार कर सकते हैं लेकिन कई लोग अपने बुत सपने को छिपाते हैं। लेकिन आपको बता दें कि यौन कल्पनाएं काफी सामान्य होती हैं। सेक्सुअल फैंटेसी हर किसी व्यक्ति की होती है। वहीं, एक अध्ययन के दौरान ये भी पता चल पाया है कि पुरुषों और महिलाओं की ज्यादातर सेक्सुअल फैंटेसी आम होती हैं। अगर आपको लगता है कि आपकी सेक्सुअल फैंटेसी बहुत अजीब है, तो आपको बता दें कि ये हर किसी को लगता है। बहुत से पुरुष और महिलाओं की सेक्सुअल फैंटेसी एक जैसी ही होती है, जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।
थ्रीसम
यह एक और आम यौन कल्पना है। थ्रीसम सुनने में तो बहुत ही अच्छा लगता है और पोर्न फिल्मों में भी इसे बहुत ही अच्छी तरीके से दर्शाया जाता है। लेकिन यह खतरनाक और अधिकतर वर्जित भी है। आप या आपका साथी एक दूसरे को दूसरे व्यक्ति के साथ अंतरंग होते हुए देखने की कल्पना करेंगे। इस यौन फैंटेसी को लाना, वास्तव में, आपके यौन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है और साथ ही लंबे समय में आपके साथी के साथ आपकी बॉन्डिंग को प्रभावित कर सकता है। हालांकि बावजूद इसके लोग ऐसी कल्पनाएं करते ही हैं
रोल प्ले
आम यौन कल्पनाओं में से एक भूमिका निभाना है। बहुत से लोगों कल्पना होती है कि उनकी पार्टनर एक स्कूल टीचर बने जिनके साथ में है यौन संबंध बना सकें। बहुत सी महिलाएं भी अपने स्कूल टीचर के साथ यौन संबंध बनाने की कल्पना कर सकती हैं। यह कुछ भी हो सकता है कि आप चाहते हैं कि आपका साथी एक कामुक सेशन के समय स्कूल शिक्षक से लेकर लुटेरा तक बने।
पार्टनर की प्लेट बनना
जो महिलाएं कल्पना करती हैं, बल्कि पुरुष भी इस तरह की कल्पनाएं करते हैं। वे चाहते हैं कि व्हीप्ड क्रीम, चॉकलेट सॉस या आइसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थ उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर लगाए जाएं और उनका पार्टनर उसे चाटे। यह फोरप्ले सत्र अत्यधिक संतोषजनक सेक्स में समाप्त हो सकता है।
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सच मे एक औषधि ही है ....... प्रेम........
मरे मन में प्राण का संचार कर देता है...... प्रेम....
हर उम्र में जवान कर देता है...... प्रेम.....
दिल की उमंगो को पर लगा देता है........ प्रेम........
रंग विहीन जीवन को भर देता है अपनी रंगीनियां से...... प्रेम.....
हर पल का इंतजार...... प्रेम......
उसका मनन चितंन है ..... प्रेम...
हर वक़्त का ध्यान है..... प्रेम....
सिर्फ प्रेम, प्रेम और प्रेम 💕💕
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बच्चो को सेक्स एजुकेशन कब और कैसे दे
डॉ. सुभद्रा मेरी एक कॉलेज प्रोफेसर थीं,
एक दिन लंच में हम सब साथ बैठे थे, और ‘सोसियो साइकोलॉजी’ पर बात हो रही थी। अचानक बात में मोड़ आ जाता है, और बच्चों को सेक्स के बारे में बताना चाहिए या नहीं, बताएं तो कब जैसे मुद्दों पर बहस होने लगी, जिसे बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना भी कहा जाता है। दरअसल, इस बीच हमारी प्रोफेसर ने अपने बच्चे के बारे में एक बात बताई जो बीती रात घटी थी ‘मॉम, सेक्स क्या जरूरी है? जन्म देने के लिए?’ यह सवाल प्रोफेसर के बेटे (12 वर्ष) ने उनसे पूछा था। जाहिर है, इस तरह अचानक से आए सवाल से प्रोफेसर घबरा गईं, लेकिन उन्होंने सूझ-बूझ का रास्ता अपनाया।
डॉ. सुभद्रा कहती हैं कि “अगले दिन मैंने बेटे को पास बिठाया और सेक्स क्या होता है? साथ-साथ उसकी अच्छाइयों-बुराइयों और क्या ये कानूनी रूप से सही है या नहीं ये सारी बातें बताईं। इसमें कोई दो राय नहीं कि बच्चे को इनमें से बहुत बातें समझ नहीं आई होंगी, लेकिन इस व्यवहार और कम्युनिकेशन से कभी भी बच्चे के मन में अब ऐसे सवाल परेशानी नहीं बनेगा।
हर माता-पिता से उनके बच्चों का यह सवाल रहता है, कि बेबी कहां से और कैसे आता है? यह सवाल सुन पेरेंट्स सकपका जाते हैं, और जवाब देने से कतराते हैं। बात जब बच्चों को सेक्स के बारे में बात करने की आती है, तो ऐसा लगता है, जैसे यह कोई बुरा सपना हो। आज जबकि, कई बड़े स्कूल और शिक्षाविद् ‘सेक्स इन एजुकेशन‘ मॉडल की तरफदारी कर रहे हैं, कई पेरेंट्स ऐसे भी हैं, जो इन सबसे कोई वास्ता नहीं रखते।
जब बच्चा होश संभाल लेता है, तो अक्सर वह परिवार में किसी दूसरी महिला या खुद की मां का फुला हुआ पेट देखकर तरह-तरह के सवाल पूछता है। ऐसे में परिवार के सदस्य बच्चों से काल्पनिक कहानी जैसा ताना-बाना बुन कर उनकी जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश करते हैं। लेकिन, यकीन मानिए, यही सही समय होता है जब बच्चों को सेक्स एजुकेशन की प्रक्रिया को धीरे-धीरे शुरू कर देनी चाहिए। माता-पिता को ऐसे सवालों से कतराने की बजाए बैठकर सेक्स से सम्बंधित शिक्षाप्रद जानकारियों पर खुलकर बात करना चाहिए।
माता-पिता ऐसे सवालों को सुन कर, या फिल्म-टीवी में बच्चों के सामने एडल्ट सीन देखते हुए शर्मा जाते हैं। यह नेचुरल है। लेकिन, बच्चों को सेक्स के बारे में बात करना और बताना आज के समय की जरूरत है। वही कुछ बच्चे अपने माता पिता को सेक्स करते हुए भी देखते है तब बच्चे में मन मे भी इच्छा होती है कि वो भी सेक्स करे। सोशल मीडिया के आ जाने से आजकल के बच्चे बहुत स्मार्ट हो गए हैं। जिन पर वह किसी भी चीज की जानकारी के लिए भरोसा करते हैं, लेकिन वहां से मिली जानकारियां अक्सर गलत और अधूरी होती हैं। इसलिए बच्चों को सेक्स के लिए जो जिज्ञासा होती हैं, उन्हें बेसिक परिचय जरूर दें। सारी बातें विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन कम-से-कम उनका परिचय दें। उन्हें इंसान के रीप्रोडक्टिव सिस्टम की बुनियादी समझ दें। लेकिन शुरुआत करनेवालों के लिए यही सलाह है कि उन्हें उनकी जिज्ञासाओं को शांत करने जितनी ज़रूरी जानकारी दें, क्योंकि बच्चे अब किसी भी तरह की किसी कहानी पर विश्वास नहीं करने वाले हैं
जरूरी नहीं कि, सारे बच्चे अपने पेरेंट्स से सवाल पूछ पाने में सक्षम हो ही। कुछ बच्चों का ही पेरेंट्स के साथ इस तरह का कम्युनिकेशन होता है कि, वे उनसे सेक्स पर कुछ सवाल कर सके। घर पर बच्चों की एक्टिविटी को ध्यान में रखेंगे, तो समझ जाएँगे कि कब बच्चों के साथ सेक्स एजुकेशन देना शुरू करना चाहिए? अगर बच्चे टीवी पे एडल्ट कंटेंट जैसे शोज देख रहा है, तो यह अच्छा संकेत है, जब आपको बच्चों से सेक्स एजुकेशन के बारे में बात करनी चाहिए।
सेक्स के बारे में बच्चों से बात करते हुए यह बहुत अहम है कि, आप बिलकुल भी बच्चों के लिए जजमेंटल नहीं बनें। 13-14 साल की उम्र में बच्चों में हॉर्मोन सक्रिय हो जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप बच्चे प्राकृतिक रूप से अपोजिट जेंडर के प्रति उत्सुक रहते हैं। इस समय बच्चों को कम उम्र की संबंधों से रूबरू कराएं और उन्हें एचआईवी/एड्स और अन्य संबंधित बीमारियों के बारे में जानकारी दें। जब आप बच्चे से सेक्स के ऊपर बात कर रहे हों तो उन्हें किसी भी तरह का सवाल पूछने दें और आप यथासंभव उनकी सवालों का न्यूट्रल होकर जवाब दें। आपका बच्चा अब भी माइनर यानी नाबालिग है, तो उसे इस समय संबंध बनाने से होने वाली परिणामों के बारे आगाह करें।
Cp
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परेशान इसलिए हैं कि आप हटाने की कोशिश कर रहे हैं तीन हजार साल से, उससे परेशान हैं। और परेशानी देखकर आप यह नतीजा लेते हैं कि हटाओ इसको, बिलकुल खतम करो, इसकी परेशानी बंद होनी चाहिए। हम सिखाते हैं कि बच्चों को स्कूल में गीता पढ़ाओ, कुरान पढ़ाओ। नहीं साहब, बच्चों को स्कूल में सेक्स के बाबत सब कुछ पढ़ाओ। गीता-कुरान की कोई जरूरत नहीं है। ये बच्चे स्कूल से स्वस्थ होकर बाहर आएं। इनका मन साफ, अनसप्रेस्ड हो; ये दमन से मुक्त हों। ये स्वस्थ हो सकें, ये संतुलित हो सकें। लेकिन हम नतीजे उलटे लेते हैं।
असंभव क्रांति
ओशो
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*दमन*
अगर बच्चे को हम बचपन से ही सेक्स के सारे तथ्य स्पष्ट बताना शुरू करें, बताने चाहिए, और सेक्स के प्रति एक आदर का भाव पैदा करें, क्योंकि वही जीवन का जन्म देने वाला केंद्र और सूत्र है, तो बच्चे के मन में यह घाव कभी पैदा नहीं होगा। उसे कभी भय होने का कारण नहीं होगा। वह कभी डरेगा नहीं। वह जीवन की इस केंद्रीय शक्ति से कभी आंख नहीं छिपाएगा। उसके मन में घाव पैदा नहीं होगा, चोट पैदा नहीं होगी। उसका मन स्वस्थ रह सकेगा।
हम सबका मन अस्वस्थ हो गया है। फिर यह अस्वास्थ्य जीवनभर चक्कर काटता है क्योंकि बच्चे के मन में जो केंद्र बन जाते हैं, उनको पोंछना और मिटाना बहुत कठिन हो जाता है। एक अच्छी दुनिया तभी बनेगी जब वह सेक्स को परमात्मा की अनूठी बात स्वीकार करके आदर देना शुरू करेगी, नहीं तो अच्छी दुनिया नहीं बन सकती।
जितना-जितना आदर, जैसे कोई मंदिर में प्रवेश करता है, सेक्स की भावना में प्रवेश करना मंदिर में प्रवेश जैसा होना चाहिए। और आप शायद खयाल भी नहीं कर सकते, कल्पना भी नहीं कर सकते कि सेक्स के प्रति निंदा के कारण पति और पत्नी दो शत्रु हैं, मित्र नहीं। मित्र हो नहीं सकते, क्योंकि मित्रता का सेतु घृणा और कंडेमनेशन लिए हुए है। जिससे वे जुड़े हैं; वह चीज ही, जोड़ने वाली चीज ही गलत और बुरी भाव लिए हुए है तो वह जोड़ने वाली चीज मित्रता कैसे बन सकती है? और इस शत्रुता में से बच्चे पैदा होते हैं, वे बच्चे बहुत शुभ, बहुत सुंदर और श्रेष्ठ नहीं हो सकते। इसी तनाव, कांफलिक्ट, इस शत्रुता में से बच्चे आते हैं। इन दोनों का मन भयभीत, घबड़ाया हुआ, पाप से ग्रसित, पाप से दबा हुआ, डरा हुआ, और फिर इससे बच्चे आते हैं! इन दोनों के इस चित्त की अनिवार्य छाप उस आने वाले बच्चे में छूट जाती है।
जिस दिन पति और पत्नी एक-दूसरे से एक पवित्रतम संबंध अनुभव करेंगे, होलीएस्ट कि ये सेक्स के क्षण, ये काम के संबंध के क्षण पवित्रतम क्षण हैं, प्रार्थना के क्षण हैं। जिस दिन उनका यह मिलन एक प्रेयर, एक प्रार्थना बन जाएगा, उस दिन जो बच्चे पैदा होंगे वे बहुत दूसरा संस्कार, बहुत दूसरे बीज की तरह जगत में आएंगे। तब हम एक दूसरी प्रजा के जन्मदाता हो सकते हैं।
फिर ये बच्चे पैदाइश से ही रोग चित्त में लेकर पैदा होते हैं। और उस रोग को फिर समाज और बढ़ाता है, और बढ़ाता है। फिर उस रोग का शोषण करने वाले लोग हैं, वे शोषण करते हैं। और एक चक्कर शुरू होता है जिस पर एक छोटा सा आदमी पिस जाता है बुरी तरह से।
ये सारी गंदी फिल्में, ये सारे गंदे चित्र, यह सारा गंदा वातावरण आपकी सेक्स के संबंध में यह भ्रांत धारणा कि प्रतिक्रिया है, उसका फल है। यह उससे पैदा हुआ है। और जो कौम जितनी ज्यादा सेक्स के प्रति भयभीत और घबड़ाई हुई है, उस कौम का चित्त उतना ही ज्यादा सेक्सुअलिटी से भरा हुआ है।
लेकिन हम तथ्यों को देखना नहीं चाहते, हमने हिम्मत खो दी है। हम सोचना नहीं चाहते, हम विचार नहीं करना चाहते। हम आंख बंद करके जैसा चल रहा है चलते रहना चाहते हैं। ऐसे नहीं हो सकता है। इस संबंध में हमारी पूरी धारणा परिवर्तित होनी चाहिए।
सेक्स के संबंध में किसी तरह की निंदा का कोई कारण नहीं है। और जब निंदा करते हैं और भयभीत होते हैं, घबड़ाते हैं तब भीतर से धक्के आते हैं, चोटें आती हैं, लहरें आती हैं उनमें हम बहते हैं तो पश्चात्ताप होता है। सब मुश्किल हो जाता है। आनंद असंभव हो जाता है। नहीं बहते हैं, रुकते हैं तो पीड़ा हो जाती है। जाते हैं, बहते हैं तो पीड़ा हो जाती है। सब तरफ, दोनों तरफ कुएं-खाई खड़े हो जाते हैं। इस तरफ गिरते हैं तो तकलीफ, उस तरफ गिरते हैं तो तकलीफ।
फिर आदमी क्या करे? तो फिर आदमी आवागमन से छुटकारे का उपाय सोचने लगता है कि किसी तरह से संसार से ही छुटकारा हो जाए। यह संसार बड़ा गड़बड़ है।
यह गड़बड़ हमने किया हुआ है। यह संसार गड़बड़ नहीं है। यह संसार बहुत अदभुत रस, बहुत अदभुत आनंद को देने में समर्थ है। लेकिन हमने सब रस विकृत कर लिया, हम पागल हो गए हैं। और इस पागल के केंद्र पर, हमारे पागलपन के सारे केंद्र पर कामवासना बैठी हुई है।
जितने लोग पागल होते हैं उनके अध्ययन से जाहिर होता है कि उनमें से नब्बे प्रतिशत लोग सेक्स की ही रोग के कारण पागल होते हैं। और हम भी जो डांवाडोल होते हैं जीवन में, वह भी सेक्स है। इससे हम यह नतीजे लेने लगते हैं, और नतीजे बिलकुल गलत होते हैं, हम अजीब नतीजे लेने के आदी हो गए हैं। हमें क्या नतीजा लेना चाहिए यह बड़ी मुश्किल हो गई है। देखते हैं कि सारे लोग सेक्स के कारण परेशान हैं तो हम सोचते हैं सेक्स को हटाओ, खतम करो जीवन से।
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प्रेम...
प्रेम यह तो नहीं कि... मैं जैसे चाहूँ
तुम वैसे ही हो जाओ...!
प्रेम तो यह है कि... मैं तुम्हें बेपनाह चाहूँ
चाहे तुम जैसे भी हो जाओ...!! ♥️♥️
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मोहब्बत की हवा ज़िस्म की
दवा बन गयी...
दूरी आप की मेरी चाहत की
सज़ा बन गयी...
कैसे भूलूँ आप को एक
पल के लिए भी...
आप की याद हमारे जीने की
वज़ह बन गयी...
किसी के लिए समर्पित
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मोहब्बत की हवा ज़िस्म की
दवा बन गयी...
दूरी आप की मेरी चाहत की
सज़ा बन गयी...
कैसे भूलूँ आप को एक
पल के लिए भी...
आप की याद हमारे जीने की
वज़ह बन गयी...
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स्थूल स्तन औषधि
कुच-संस्कार- स्त्री के व्यक्तित्व का निखार उसके उन्नत-उरोजों (कुचों) पर आधारित है। कुच का उभार उसके यौवन अवस्था का परिचायक है। पुरुष स्त्री के इस उभार के कारण उससे आकृष्ट होता है और मैथुन काल में स्त्री उत्तेजित एवं द्रवित तब होती है जब उसका प्रियतम उसके दोनों कुचों का परिमर्दन करता है। जब तक कुच कठोर नहीं होंगे तब तक वे मसले नहीं जा सकते। स्तनमर्दन करने पर ही स्त्री की भगनासा प्रहर्षित हो जाती है और स्त्री को मैथुन जन्य आनन्द मिलता है। आर्तव प्रवृत्ति होते ही स्तनों में उभार आना प्रारम्भ हो जाता है और ५० वर्ष के पश्चात् आर्त्तव निवृत्ति होने पर कुचों में शिथिलता आ जाती है। कभी-कभी कतिपय कारणों से कुच शिथिल हो जाते हैं ऐसी स्थिति में पुरुष उनसे आकृष्ट नहीं होता अतएव कामशास्त्रियों ने कुचों में कठिनता या कठोरता लाने के लिए अनेक योगों का विधान किया है जिनका विशद विवरण यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है-
अनंगरंग के अनुसार कुच संस्कार-
(१) असगन्ध, वच, कूठ, पीपल, कनेर और लवंग को मक्खन के पानी में मिलाकर लगाने से स्तन स्थूल हो जाते हैं।
(२) वेर की गुठली का गूदा, कनेर एवं नागकेसर का गूदा इनको समान भाग लेकर स्तनों पर रगड़ने से स्तन बड़े तथा कठोर हो जाते हैं।
(३) गम्भारी की छाल का रस और उससे चौथाई तिलों का तेल लेकर उष्ण करके (तेल शेष रहने पर) उसके लेप करने से स्त्री के गिरे हुए भी स्तन मोटे और खड़े हो जाते हैं।
(४) अनारदानों को पीसकर कडुये तेल में पकाकर छाती पर मलने से मृगनयनी के स्तन अधिक सुन्दर तथा स्थूल हो जाते हैं।
(५) तिलों का तेल, गाय का घी, मदार (अर्क) का दूध समान भाग लेकर खरेंटी, अनन्तमूल, त्रिकुटा, लाजवन्ती, हल्दी और दारुहल्दी इनके मिश्रण को उसमें डालकर कोमल आंच पर पका लेना चाहिए उसके नस्य से स्तन अतिशीघ्र विशाल हो जाते हैं।
(६) यदि कोई लड़की उक्त तेल को चावल के धोवन के साथ पिये तो उसके मोटे और उठे हुए स्तन कभी नहीं गिरते।
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संभोग में सीधे घुसने की जगह एक-दूसरे को चूमना, सहलाना और छेड़छाड़ करने से प्यार प्रगाढ़ होता है। फिर संभोग केवल एक वासना नहीं होकर, प्यार बन जाता है। कामसूत्र में प्यार में गहरे उतरने से पहले चुंबन की सलाह दी गई हैा ऊपरी होंठ व अधर (निचले होंठ) के चुंबन में एक नशा सा छाता जाता है और स्त्री पुरुष प्यार में सरोबार होते चले जाते हैं।
जब नशा धीरे-धीरे बढ़ने लगात है तो चुंबन का दायरा, होंठ, मस्तक, आंख और गाल से नीचे उतरते हुए स्तन, उसके चुचूक, बगलों, नाभी, जांघों के जोड़ और फिर उसके नीचे सरकता चला जाता है। बदन के हर हिस्से में किया गया चुंबन, प्रेमियों के अंदर प्यार की ज्वार उत्पन्न कर देता है जो आखिर में संभोग में स्खलन के बाद ही उतरता है।
वात्स्यायन ने लिखा है कि होंठों व मुख के अलावा किए जाने वाले चुंबन का चार भेद है
*सम- यह चुंबन दोनों जांघों के जोड़, नितंब, बगलों और स्त्री द्वारा पुरुष के सीने पर किया जाता है
*पीडि़त- यह चुंबन स्तनों, दोनों गालों, नाभी और नाभी के नीचे पेड़ू पर किया जाता है
*अंचित- यह स्तनों और दोनों बगलों(कांख) पर किया जाता है
*मृदु- यह ललाट एवं आंखों पर किया जाता है
चुंबन भड़काती है वासना की आग- यह स्त्री या पुरुष में से कोई सो रहा हो और उसके दूसरे साथी का मन प्यार के लिए मचल रहा हो तो वह सोते हुए साथी पर चुंबनों की बौछार करते हुए उसे जगाने की चेष्टा करता है। इससे सोए हुए साथी के अंदर भी वासना भड़क उठती है और दोनों प्यार में सराबोर हो जाते हैं।
काम में मशगुल साथी को रिझाए- जब एक साथी काम में मशगुल हो और दूसरे का मन प्यार करने के लिए तड़प रहा हो तो वह उस पर सवार होकर चुंबनों की बौझार कर सकता है। इससे दूसरा साथी समझ जाता है कि उसका साथी क्या चाह रहा है। आज के संदर्भ में लैपटॉप और फेसबुक पर व्यस्त साथी को बिस्तर पर लाने के लिए चुंबन से बेहतर कोई हथियार नहीं हो सकता। यह चुंबन हर तरह के मर्यादा को तोड़ने वाली हो तो कितना ही व्यस्त साथी हो, संभोग के लिए मचल उठेगा।
संभोग के प्रति उदासीन साथी में भी भरता है रोमांच- संभोग के प्रति यदि एक साथी काफी दिनों से उदासीनता भरा बर्ताव कर रहा हो तो उसके अंदर इच्छा जागृत करने के लिए पहले उसके शरीर की मालिश से शुरुआत करनी चाहिए। फिर मसाज के साथ-साथ एक-एक अनावृत अंग पर गर्म होठों की तपिश उसके अंदर चिंगारी भड़काना शुरू कर देता है।
ऐसे क्षण में जांघों पर किया जाने वाला चुंबन सीधे तीर की तरह सारे बदन में उतर जाता है और सिहरन पैदा कर देता है। फिर पैर, उसकी ऊंगलियों व उसके पोरों पर चुंबन और उसे मुंह में भरकर चूसने की प्रक्रिया उदासीन साथी को संभोग के लिए आतुर कर देगा।
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रहने दो कि अब ,
तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे,
बरसात में काग़ज़ की तरह ,
भीग गया हूँ मैं।
😢😢
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स्त्री की योनि में आठ हजार नसें होती हैं और पुरुष के लिंग में चार हजार नसें होती है। इसीलिए स्त्री में कामेच्छा जादा होती है! और योनि का अग्रभाग यानी एक दो इंच पर ज्यादा संवेदशीलता पायी जाती है।अगर उंगलियों से,जीभ के स्पर्श से,या लिंग से उस अग्रभाग को रगड़े या सहलाये तो स्त्री चरम सुख प्राप्त करती है।मगर अक्सर कर ऐसा नहीं कर केवल लिंग को कई बार आगे पीछे करके सीमेन निकाल कर ही आनंदित हो जाती है।जबकी स्त्री असंतुष्ट रह जाती है। पुरूष को स्त्री के साथ फोरप्ले भी करना चाहिए। जैसे चूमना, चाटना, होंठों और जीभ से स्त्री के होठ और जीभ से चुमना इत्यादि। इसके अलावा उसकी स्तनों को दबाना,सहलाना, चूसना,चूमना करते रहना चाहिए। स्तनों की निपिल कड़ी होते ही स्त्री को सुख मिलता है। एक अच्छी सैक्स लाइफ के लिए पुरुष का स्त्री को सहयोग जरूरी है।
मुझे मालूम पड़ा,लिख दिया। और अन्यथा ना लें।।।
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