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दोउ चकोर, दोउ चंद्रमा, दोउ अलि, पंकज दोउ।
दोउ चातक, दोउ मेघ प्रिय, दोउ मछरी, जल दोउ॥
आस्रय-आलंबन दोउ, बिषयालंबन दोउ।
प्रेमी-प्रेमास्पद दोउ, तत्सुख-सुखिया दोउ॥
लीला-आस्वादन-निरत, महाभाव-रसराज।
बितरत रस दोउ दुहुन कौं, रचि बिचित्र सुठि साज॥
सहित बिरोधी धर्म-गुन जुगपत नित्य अनंत।
बचनातीत अचिन्त्य अति, सुषमामय श्रीमंत॥
श्रीराधा-माधव-चरन बंदौं बारंबार।
एक तत्त्व दो तनु धरें, नित-रस-पाराबार॥
🌹किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो,
रंगीली कुछ ऐसा कर वा दो ,,
बरसाने में प्रेम झोपड़ियां मेरी बनवा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो।
🌹उठते ही तेरे दर्शन पाउं,
दिन भर तेरो हुकम भजाउं,
जन्म जन्म की पाप गठरिया मेरी धुलवा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो।
🌹जब जब होये आरती तेरी,
गूंजे प्रेम झोपड़ियां मेरी,
यमुना जी के तीर श्याम की मुरली सुनवा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो।
🌹तेरी धुन में जीवन बीते,
जित देखूं तित तू ही दीखे,
मेरे रोम रोम में राधे राधे लिखवा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो ।
🌹जीते जी ब्रिज धाम न छूटे ,
मिले कोर तेरे खाने को झूठे,
बरसाने की रज से चंदन टीका लगवा दो,
किशोरी कुछ ऐसा कर वा दो।
*बरसाना धाम से श्री राधा रानी के आज के सुंदर श्रिंगार दर्शन , 🌹तथा परम भागवत पद रत्नाकर 🌹 पद संख्या 15 🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
🌹करौ कृपा श्रीराधिका, बिनवौं बारंबार।
बनी रहै स्मृति मधुर सुचि, मंगलमय सुखसार॥
🌹श्रद्धा नित बढ़ती रहै, बढ़ै नित्य बिस्वास।
अर्पण हौं अवसेष अब जीवन के सब स्वास॥
*बरसाना धाम से श्री राधा रानी के आज के सुंदर संध्या दर्शन, तथा परम भागवत पद रत्नाकर , पद संख्या 131 🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
🌹नाथ ! थाँरै सरणै आयो जी।
जचै जिस तराँ खेल खिलाओ, थे मन-चायो जी॥
🌹बोझो सभी ऊतर्यो मनको, दुख बिनसायो जी।
चिंता मिटी, बड़े चरणाँको स्हारो पायो जी॥
🌹सोच-फिकर अब सारो थाँरै ऊपर आयो जी।
मैं तो अब न्ङ्क्षिस्चत हुयो अंतर हरखायो जी॥
🌹जस-अपजस सब थाँरो मैं तो दास कुहायो जी।
मन भँवरो थाँरै चरण-कमलमें जा लिपटायो जी॥
*गीता वाटिका, गोरखपुर से , कल फूलों वाली होली के सुंदर दर्शन।🌹 जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹*
*होली त्योहार का आध्यात्मिक महत्व-*
होली त्योहार का सभी के जीवन बड़ा महत्व है,जहाँ जागतिक लोग इसको मौज मस्ती के रूप में मनाते हैं वहीं साधना जगत से जुड़े लोगों के लिये भी यह एक विशेष पर्व है,
वस्तुतः यह विषय विकारों को नष्ट कर अपने को इष्ट की भक्ति के रँग में रंगने का त्योहार है।
होली मुख्यतः दो दिन का त्योहार है,प्रथम दिन होलिका दहन ,दूसरे दिन रंगों की होली।
होलिका दहन अर्थात ह्र्दय में स्थित विकारों का दहन, इन विकारों की उपस्थिति में भक्ति का गाढ़ा रंग चढ़ना बहुत मुश्किल है।अतः भक्ति रूपी रंगों की होली से पहले होलिका दहन का विधान है।
होलिका दहन में दो नाम प्रमुखता से आते हैं। एक होलिका दूसरा प्रह्लाद जी।
होलिका अर्थात भगवदमार्ग में आने वाली बाधा ,इन बाधा को मिटाने के लिए प्रहलाद जी भगवन्नाम का आश्रय लेते है,
यह भगवन्नाम ही सभी अवरोधों को समाप्त कर भगवान की ओर ले जाने का अमोघ साधन है, नाम का सच्चे मन से आश्रय लेने वाला कभी विफल नही हो सकता। तभी तो प्रह्लाद जी के बारे में कहा गया है-
*नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू।*
*भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।*
पूज्य श्रीराधा बाबा कहा करते मन को नियंत्रित करने व भगवान तक पहुचने के जितने साधन हैं उनमें "नाम-जप" प्राकृतिक साधन है,बाकी सभी कृत्रिम साधन है। नाम से भगवान का सम्पूर्ण बोध हो जाता है।
यहाँ होली के प्रसंग में प्रह्लाद का अर्थ है जो भगवन्नाम रस में नित्य आह्लादित रहे।
*बहुत-बहुत सुंदर कीर्तन बरसाना धाम से , 🌹तथा श्रीराधा रानी के आज छतरी में परम दिव्य दर्शन।🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
होली के पावन पर्व पर
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं !!
होली जहाँ एक ओर एक सामाजिक एवं धार्मिक त्योहार है, वहीं यह रंगों का त्योहार भी है | आबाल-वृद्ध, नर-नारी-सभी इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं | यह एक देशव्यापी त्योहार भी है | इसमें वर्ण अथवा जातिभेद को कोई स्थान नहीं है | इस अवसर पर लकडियों तथा कंडों आदि का ढेर लगाकर होलिकापूजन किया जाता है फिर उसमें आग लगाई जाती है | पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण किया जाता है –
‘असृक्पाभयसन्त्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: |
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव ||’
इस पर्व को नवान्नेष्टि पर्व भी कहा जाता है | खेत से नवीन अन्न को यज्ञ में हवन करके प्रसाद लेने की परम्परा भी है | उस अन्न को होला कहते हैं | इसी से इसका नाम होलिकोत्सव पड़ा |
होलिकोत्सव मनाने के सम्बन्ध में अनेक मत प्रचलित हैं | यहाँ कुछ प्रमुख मतों का उल्लेख किया गया है –
(१). ऐसी मान्यता है कि पर्व का सम्बन्ध ‘काम दहन’ से है | भगवान् शंकर ने अपनी क्रोधाग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था | तभी से इस त्योहार का प्रचलन हुआ |
(२). फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमापर्यंत आठ दिन होलाष्टक मनाया जाता है | भारत के कई प्रदेशों में होलाष्टक शुरू होने पर एक पेड की शाखा काटकर उसमें रंग बिरंगे कपडों के टुकड़े बांधते हैं | इस शाखा को जमीन में गाड दिया जाता है | सभी लोग इसके नीचे होलिकोत्सव मनाते हैं |
(३).यह त्योहार हिरण्यकशिपु की बहन की स्मृति में भी मनाया जाता है | ऐसा कहा जाता है कि हिरण्यकशिपु की बहन होलिका वरदान के प्रभाव से नित्यप्रति अग्नि-स्नान करती और जलती नहीं थी | हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन से प्रह्लाद को गोद मेंलेकर अग्नि-स्नान के लिए कहा | उसने समझा था कि ऐसा करने से प्रह्लाद जल जायेगी तथा होलिका बच निकलेगी |
हिरण्यकशिपु की बहन ने ऐसा ही किया, होलिका तो जल गयी किन्तु प्रह्लाद बच गए | तभी से इस त्योहार के मनाने की प्रथा चल पडी |
(४).इस दिन आम्र-मंजरी तथा चन्दन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है | कहते हैं कि जो लोग फाल्गुन पूर्णिमा के दिन एकाग्र-चित्त से हिंडोले में झूलते हुए श्री गोविन्द पुरुषोत्तम के दर्शन करते हैं, वे निश्चय ही वैकुंठलोक में वास करते हैं |
(५).भविष्यपुराण में कहा गया है कि एक बार नारदजी ने महाराज युधिष्टिर से कहा—राजन् ! फाल्गुन पूर्णिमा के दिन सब लोगों को अभयदान देना चाहिए, जिससे सम्पूर्ण प्रजा उल्लासपूर्वक हँसे | बालक गाँव के बाहर से लकडी-कंडे लाकर ढेर लगाएं | होलिका का पूर्ण सामग्रीसहित विधिवत् पूजन करें | होलिका दहन करें | इस से सारे अनिष्ट दूर हो जाते हैं |
होली सम्मिलन, मित्रता एवं एकता का पर्व है | इस दिन द्वेषभाव भूलकर सब से प्रेम और भाईचारे से मिलना चाहिए | यही इस पर्व का मूल उद्देश्य एवं सन्देश है |
…………….{कल्याण—व्रतपर्वोत्सव अंक}
*बोलो राधे कृष्ण 🌹 राधे कृष्ण 🌹 कृष्ण कृष्ण 🌹 राधे राधे 🌹 बोलो राधे श्याम 🌹 राधे श्याम 🌹 श्याम श्याम 🌹 राधे राधे 🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
*🌹आज के सुंदर दर्शन 🌹परम भागवत पद रत्नाकर 🌹 पद संख्या 26 🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
🌹जयति राधिकाजीवन, राधा-बन्धु, राधिकामय चिद्घसन।
जय राधाधन, राधिकाङ्ग, जय राधाप्राण, राधिका-मन॥
🌹जय राधा-सहचर, जय राधारमण, राधिका-चित्त-सुचौर।
जय राधिकासक्त-मानस, जय राधा-मानस-मोहन-मौर॥
🌹जय राधा-मानस-पूरक, जय राधिकेश, राधा-आराध्य।
जय राधाऽराधनतत्पर, जय राधा-साधन, राधा-साध्य॥
🌹जय सब गोपी-गोप- गोपबालक-गोधनके प्राणाधार।
जय गोविन्द गोपिकानन्दन पूर्ण सच्चिदानन्द उदार॥
*श्री राधा रानी के आज संध्या के लड्डू मार होली के दिव्य दर्शन।🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
