𝐕𝐄𝐑𝐒𝐄 𝐕𝐈𝐁𝐄
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"जहाँ अल्फ़ाज़ सिर्फ़ लिखे नहीं जाते... महसूस भी किए जाते हैं. 🖋️🤍" Every verse carries a heartbeat. ✨
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1 022
साल में जैसे अलग-अलग ऋतुएँ आती हैं,वैसे ही हमारे जीवन में भी अलग अलग दौर आते हैं कभी हम बेहद खुश होते हैं कभी बेहद उदास,कभी सब कुछ सामान्य-सा लगता है और कभी ऐसा भी लगता है जैसे जिंदगी अपने ही रंग भूल गई हो...
~ Ashu 🤍🌸
1 022
उसे भी ज़रा मोहब्बत दो,
थोड़ी सम्मान भरी सहानुभूति दो ।।
वो जो हर दर्द पर मुस्कुरा देती है,
उसकी आँखों को भी
कभी रो लेने की इजाज़त दो ।।
बहुत संभाला है उसने
सबको अपने हिस्से से..
अब उसके काँपते हुए हाथों में भी
थोड़ी-सी राहत दो ।।
मोहब्बत सिर्फ़
किसी को चाह लेने का नाम नहीं,
उसके टूटे हुए मन को
बिना छुए समझ लेने का नाम है ।।
उसे भी ज़रा मोहब्बत दो,
मगर इतनी कि
उसकी ख़ामोशी को आवाज़ मिले,
उसकी आँखों को सम्मान मिले ।।
चंदन…✍🏼~शब्द_श्रृंगार🖋️
1 022
🩷✨
हम अपनी ख़ामोशियों का हुनर रखते हैं,
हर बात को लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं करते।
ये जो चेहरे पर सुकून दिखाई देता है,
हम ,
इसके पीछे कितने तूफ़ान छुपाए रखते हैं।
🌷🥀❤️🪷
1 022
वाह माधव… 🍂कैसी दुनिया बनाई आपने, जिसके लिए मैं खुद को मिटाता गया, आज वही मुझे धोखेबाज़ और गद्दार कहते हैं। 😔 जिसके सामने अपनी self-respect तक रख दी थी, आज वही मेरे किरदार पर सवाल उठाते हैं। माधव, ज़रा आप ही बताइए… क्या सच्ची मोहब्बत का यही सिला होता है? 🍂 हाँ, माना मैंने झूठ बोले थे, बहुत से झूठ बोले थे… मगर उन झूठों के पीछे भी एक ही डर था— कहीं मेरी वजह से उन्हें दुख न हो जाए। 💔 उनके वादे झूठे निकले, मगर मेरी मोहब्बत तो सच्ची थी ना माधव… फिर सज़ा सिर्फ मुझे क्यों मिली? उस दिन मैं खुद कहकर गया था कि मैंने वो नहीं किया… मगर बिना मेरी बात जाने मेरे ऊपर इल्ज़ाम लगा दिया गया। फिर एक नहीं, कई नाम दे दिए— धोखेबाज़… गद्दार… बेईमान। 😠 माधव, धोखा तो मुझे मिला है… और जितनी तकलीफ़ उन्होंने दी, उतनी तो मेरे दुश्मनों ने भी नहीं दी। मेरे बारे में जानना हो तो कभी मुझसे पूछ लिया होता, मेरे बारे में किसी और से सुनकर फैसला सुनाने की क्या जल्दी थी? और उनके उस यार को मैं बदनाम करके आख़िर हासिल क्या कर लूँगा? वो कोई मुख्यमंत्री तो है नहीं कि मुझे उसकी CM की कुर्सी चाहिए। 😂 अब तो शायद दोनों खुश रहते होंगे… तो रहने दो माधव, मेरी तरफ़ से भी उन्हें खुशियाँ देना। 🙏🏻 बस एक बात समझ नहीं आई— झूठे इल्ज़ाम लगाने की ज़रूरत ही क्या थी? एक बार कह देते, “कान्हा, अब दूर चले जाओ…” मैं हँसते हुए निकल जाता, दिल पर पत्थर रखकर निकल जाता… मगर कम से कम अपने ही लोगों की नज़रों में गद्दार बनकर तो नहीं निकलता। माधव, अब किसी से शिकायत नहीं है… बस आपसे एक सवाल है— जिसे मैंने दिल से चाहा, उसके लिए खुद को खो दिया, अगर वही मेरे हिस्से में नहीं था… तो फिर उसे मेरी ज़िंदगी में लाया ही क्यों था? ❤️🩹 अब जो फैसला आपका होगा, मंज़ूर होगा मुझे… बस इतना करना माधव— अगली बार किसी को मेरा अपना बनाना, तो उसे मेरे दिल को तोड़ने की वजह मत बनाना। 🙏🏻🌸
कान्हा ✍😭🥀
1 022
मैंने भी उसके इंतज़ार में कई रातें जगा दीं,
और वो किसी और की बाँहों में
सुकून से सो रही है।
मैंने उसकी ख़ुशी के लिए
अपने हिस्से के ग़म भी छुपा लिए,
और वो मेरे हिस्से की मोहब्बत
किसी और पर लुटा रही है।
अजीब है ना ये इश्क़ भी,
जिसे हम अपनी दुनिया समझ बैठे,
वो किसी और की दुनिया में
हमें भूलकर मुस्कुरा रहा है।
🥀💔
कन्हा ✍️
1 022
🫂♥️💗
तुम हो तो,
साँसों में इबादत उतर आती है,
दिल की हर धड़कन
तुम्हारा नाम लेकर सजदा करती है ।।
तुम हो तो,
मोहब्बत सिर्फ़ एहसास नहीं रहती,
वो रूह से रूह का
एक पाक रिश्ता बन जाती है ।।
तुम हो तो,
ख़ामोशियाँ भी दुआ बन जाती हैं,
और मेरी हर दुआ में
बस तुम्हारी सलामती उतर आती है ।।
तुम मेरे लिए कोई शख़्स नहीं,
एक रूहानी सुकून हो..
जिसे पाने की चाहत नहीं,
बस उम्र भर महसूस करने की आरज़ू है ।।
तुम हो तो,
मैं अधूरा होकर भी मुकम्मल हूँ,
क्योंकि मेरी रूह का
सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा तुम हो ।।
चंदन…✍🏼~शब्द_श्रृंगार🖋️
1 022
🖤 रूह के जाने के बाद 🕊️
वो जिस्म से निकली तो लगा, साँस भी जाती रही,
मेरी आँखों के सामने मेरी दुनिया जाती रही।
मैंने चाहा था उसे उम्र भर सीने में रखना,
वो धुआँ बनकर मेरी बाँहों से निकलती रही।
उसके जाने का मुझे कोई गिला भी तो नहीं,
बस मेरी रूह ही हर रात उसे ढूँढती रही।
जिसे पाने की दुआ माँगी थी सजदों में कभी,
वहै तस्वीर मेरी नींद से डराती रही।
मैंने हँसकर उसे हर दरद से आज़ाद किया,
और भीतर मेरै हर धडकन सिसकतै रही।
लोग कहते हैं कि मोहब्बत में भुला दो उसको,
कैसे समझाऊँ—वो रूह में उतरती रही।
अब न आवाज़ है उसकी, न कोई खत आया,
फिर भी खामोश हवाओं में वो मिलती रही।
कन्हा इतना भी आसान नहीं होता बिछड़ना,
एक इंसान गया… और पूरी उम्र जाती रही। 🖤🥀
Kanha✍💔
1 022
तुम हो तो, रातें हसीं हैं,
चाँद में नूर, दिल में सुकूँ है ।।
तुम्हें चाहना मोहब्बत नहीं,
मेरी रूह की सबसे पाक इबादत है ।।
फ़ासले चाहे जितने भी हों,
तुम मेरी हर साँस में आबाद हो..!!
तुम हो तो मैं हूँ..
तुम हो तो मोहब्बत मुकम्मल है ।। ❤️✨
चंदन…✍🏼~शब्द_श्रृंगार🖋️
1 022
🖤 “हम बोलें तो झूठे”उसकी ख़ुशी के वास्ते, ख़ुद को मिटाते रहे, वो ख़ुश रहे बस इसीलिए, हम मुसकुराते रहे। अपनी ही नज़रों में गिरकर उसे संभालते रहे, हम अपनी ख़ुददारी भी उसके लिए गवाते रहे। हाँ, माना हमने उससे कुछ झूठ बोलें थे, मगर हर झूठ में उसे खोने से घबराते रहे। हमने नज़रें फेर लीं कि उसे कोई देख न ले, वो समझा हम उसे दुनिया से छुपाते रहे। वो झूठ बोलें तो डर था कि हम छोड़ देंगे, हम झूठ बोलें तो वो हमें झूठा बताते रहे। एक झटके में उसने रिश्ते से बाहर कर दिया, जिसे अपना समझकर हम उम्र भर निभाते रहे। अजीब फैसला था उसकी मोहब्बत का भी, वो ग़लत होकर भी सही, हम सही होकर हारते रहे। कान्हा, बस इतनी-सी बात समझ न आई हमें, जिसे खोने से डरते थे, वही हमें खोकर मुसकुराते रहे। 🥀🖤
Kanha✍😭
1 022
एक मुकम्मल नज़्म आखिरी दीदार मैंने सुना है कि मरने के बाद लोग बहुत दूर-दूर से आते हैं, मेरे मरने पर तुम नहीं आओगी क्या? मेरी तो साँसों का ठहराव भी तुमसे है, मेरी साँसों को उनके आखिरी मुकाम तक नहीं पहुँचाओगी क्या? तेरी खातिर ही तो ये साँसे थामी थी मैंने, क्या इन थामी हुई साँसों को छुड़ाने नहीं आओगी क्या? वादा तो तुम्हारा भी था साथ मरने का, मेरी आखिरी साँस में मेरा साथ नहीं निभाओगी क्या? टूटती साँसों से टूटता है दिल मेरा, इस दिल की आखिरी धड़कन को नहीं बचाओगी क्या? माना रास्ता अलग चुन लिया है तुमने, फिर कभी मेरे कदमों से कदम नहीं मिलाओगी क्या? और रह गई मेरी मोहब्बत की अधूरी कहानी, क्या इस कहानी को आखिरी मुकाम तक नहीं पहुँचाओगी क्या? और ये आखिरी साँस है मेरी, चला जाऊँगा, मेरे चेहरे से कफ़न हटा के आखिरी दीदार को नहीं आओगी क्या? कब्र पर मेरी दिया जलाने की रस्म तो है, पर मेरी कब्र को अपने आँसू से सजाने नहीं आओगी क्या? लोग कहेंगे मर गया वो तेरे इंतज़ार में, इस इल्ज़ाम से खुद को बचाने नहीं आओगी क्या? मिट्टी में मिल रहा हूँ, राख हो रहा हूँ मैं, इस राख को हवाओं में बिखराने नहीं आओगी क्या? तुमने कहा था - तुम्हारे बिना जीना नहीं है मुझे, तो फिर मेरे जनाज़े में खुद को भी मिटाने नहीं आओगी क्या? और अगर आना ही नहीं है तो इतना बता दो, मेरी इस अधूरी मोहब्बत को भुलाने के लिए, मेरी कब्र पर ही सही, दो फूल चढ़ाने नहीं आओगी क्या? Writing by Avi Kashyap ✍️✍️✍️✍️और फिलहाल ये पोस्ट भी आखरी ही समझे😂 कुछ टाईम में पुराने अंदाज में वापस आऊंगा🤗🥰
1 022
बात पसंदीदा स्त्री के आदर और सम्मान की थी, तो
उसकी भावनाओं का आदर करना आपका धर्म है🤗🥰
#सीताराम🙏
1 022
मैंने इश्क़ को किताबों में बहुत पढ़ा था— मगर उसका पहला अर्थ तुम्हारी आँखों में देखा। तुम सामने आईं तो मेरी सारी यात्राएँ एक ही जगह आकर रुक गईं। तुम्हारी आँखें— जैसे रात के बीच दो गहरे कुएँ, जिनमें उतरते ही मन अपनी प्यास भूल जाए। मैं तुम्हें देखता हूँ और जाने क्यों मेरी निगाह झुक जाती है। शायद इसलिए कि तुम्हारी आँखों में सिर्फ़ सुंदरता नहीं, एक ऐसी पुकार है जिसके सामने मेरी सारी बेचैनी फ़क़ीर हो जाती है। तुम थोड़ा करीब आती हो— मेरी साँस बदल जाती है। तुम्हारी पलकों का वह धीमा उठना-गिरना जैसे किसी दरवेश की मद्धम घूमती हुई चादर हो, और मैं उसमें अपना होश खोता चला जाऊँ। मैं तुम्हारी हथेली छूता हूँ। एक हल्की सिहरन उँगलियों से होकर सीधे सीने तक जाती है। फिर तुम्हारी आँखों में देखता हूँ— वहाँ झिझक है, वहाँ चाहत है, वहाँ वह मौन है जो किसी भी शब्द से ज़्यादा मादक होता है। मैं और करीब आता हूँ। हमारी साँसों के बीच बस उतनी जगह बचती है जितनी दो दुआओं के बीच आमीन की। तुम्हारी आँखें एक पल को बंद होती हैं— और मुझे लगता है मैं किसी पवित्र चौखट पर सिर रख आया हूँ। तुम्हारी देह की गर्मी मेरे पास है, तुम्हारी साँसों की खुशबू मेरे भीतर उतर रही है, और मेरी प्यास— वह अब केवल तुम्हें छू लेने की प्यास नहीं। वह तुम्हारे भीतर एक सुरक्षित जगह पा लेने की प्यास है। तुम्हारे चेहरे पर चाँदनी का एक टुकड़ा ठहरा है। मैं उसे देखता हूँ तो लगता है जैसे रात ने अपनी सबसे सुंदर रोशनी तुम्हारे लिए बचाकर रखी हो। फिर तुम मेरी ओर देखती हो। बस एक नज़र। और मैं समझ जाता हूँ— इश्क़ में कभी-कभी एक आँख पूरी किताब होती है। उस रात मैंने कोई रास्ता नहीं खोजा। न कोई मंज़िल। न कोई और दिशा। बस तुम्हारी आँखों में देखता रहा— जैसे मुसाफ़िर रेगिस्तान में अचानक पानी पा जाए। जैसे दरवेश भटकते-भटकते अपनी ख़ानकाह पा ले। जैसे कोई प्यासा अपने ही भीतर समंदर खोज ले। और तब जाना— मेरा काबा कोई पत्थर की इमारत नहीं, तुम्हारी आँखों का वह कोना है जहाँ मेरी निगाह पहुँचकर हर बार झुक जाती है। तुम्हें चाहना मेरे लिए इबादत इसलिए नहीं कि तुम मुकम्मल हो— बल्कि इसलिए कि तुम्हारे सामने मैं अपने भीतर का सबसे सच्चा इंसान बन जाता हूँ। और जब तुम मेरे पास सिर रखकर आँखें बंद करती हो, तो मेरी सारी यात्राएँ वहीं समाप्त हो जाती हैं। क्योंकि जिस आँख में इश्क़ का घर मिल जाए, उस आशिक़ को फिर किसी काबे की तलाश नहीं रहती। #सूर्य
1 022
एक बिटिया की चाह
विरासत में मिला यह घर
पापा को अपने पिता से,
यही घर मिलेगा मेरे भैया को मेरे पिता से।
पर मैं और मेरी माँ—
हमारा क्या?
बता दिया गया है मुझे,
पिता के घर में हिस्से की बात
औरतें नहीं किया करतीं।
लेकिन मुझे चाहिए एक घर—
अपना, बिल्कुल मेरा अपना।
नहीं चाहिए दहेज में रेशम और सोना,
बस चाहिए अपने नाम की एक छत।
राधा፝֟፝֟ रानी𝅯𓂃🦚
