𝐕𝐄𝐑𝐒𝐄 𝐕𝐈𝐁𝐄
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"जहाँ अल्फ़ाज़ सिर्फ़ लिखे नहीं जाते... महसूस भी किए जाते हैं. 🖋️🤍" Every verse carries a heartbeat. ✨
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1 014
छूट गया वो यारों का घर, ना नौकरी मिली ना नाम हुआ,
जिस करियर की धुन में जागे, वो भी बस नाकाम हुआ...
घर वालों के ताने सहकर, दिल ही दिल में रोते हैं,
राहें सब खामोश हैं, और हर सपना नीलाम हुआ...
फिर भी दिल में एक उम्मीद की जोत जलाए बैठा हूँ,
टूटा हूँ पर गिरा नहीं, खुद को संभाले बैठा हूँ...
बदलेगा ये दौर भी यारा, वक्त की बाज़ी पलटेगी,
मैं अपनी ही राख से उगने की कसम खाए बैठा हूँ....
Ashu
1 014
जो कभी मेरे ज़ख़्मों का मरहम हुआ करता था, आज उसी को मेरे दर्द की वजह बना दिया।
जिसे देखकर कभी चेहरे पर मुस्कान आती थी, उसी ने मेरी आँखों को अश्कों का शहर बना दिया।
जिसके नाम से सजाया था हमने अपना हर ख़्वाब, वक़्त ने उसी ख़्वाब को अधूरा सफ़र बना दिया।
जो कभी मेरी ख़ामोशी तक पढ़ लिया करता था, आज उसने मेरी चीख़ को भी अनसुना बना दिया।
वाह ख़ुदा, कैसा हिसाब लिखा है तूने मेरी किस्मत में, जिसे अपना कहा था, उसी को बेगाना बना दिया।
हमने तो उसे अपनी आख़िरी साँस तक चाहा था, उसने जीते-जी हमें तन्हाई का क़फ़न पहना दिया।
अब किससे करें शिकायत, किसे अपना दर्द सुनाएँ, जिसे गवाह बनाया था, उसी को क़ातिल बना दिया।
Kanha 📝
1 014
🌸🌸🌼🌻🏵️🪻🍂🪷🌸🌷
गजमुख पे चाँद-सी शांति,आँखों में करुणा अपार,
माथे पे सजे सिंदूर,जैसे उगता हो कोई संसार ।।
चार भुजाओं में आशीष,
एक में मोदक का प्यार,
पाश से बाँधें मोह हमारे,
अंकुश से दिखाएँ सही राह ।।
विशाल उदर में समेटे हुए
जाने कितने जग के राज,
कानों में जैसे वेदों की धुन,
सुनते हर मन की आवाज़ ।।
मस्तक पर मुकुट दमकता,
गले में नाग का हार,
मूषक पर बैठकर आते हैं
फिर भी सबसे ऊँचा तेरा दरबार ।।
हे लंबोदर, हे विघ्नहर्ता,
तेरी महिमा कौन बखाने?
जिसके सिर पर हाथ रख दे तू,
उसके काँटे फूल बन जाएँ ।।
तेरी सूँड जहाँ मुड़ जाए,
वहीं शुभता का दीप जले,
तेरा नाम जहाँ गूँज उठे,
वहाँ भय के बादल दूर चले ।।
हे गणेश भगवान,
मेरी आँखों में अपना रूप बसाए रखना
और जब जीवन की राह कठिन हो,
बस इतना करना…!!
अपनी एक मुस्कान से मेरी दुनिया फिर सजा देना। 🙏
चंदन…✍🏼
~शब्द_श्रृंगार🖋️
1 014
✍🏻एक हवा चूम के निकली है तेरे गुलाबी होंठ जाने कितने आशिक़ आज इत्र से नहाए होंगे....!!
✍🏻
1 014
सुनो धनिया........!!!! नयनों से हृदय तक जो मार्ग जाता है, वह तुम्हारी एक मंद मुस्कान से ही पूर्णतः आलोकित हो उठता है.❤️🥀
1 014
सितंबर... मन की वो खिड़की है... जिसके छज्जे पर कुछ भीगी यादें बूँद बनकर ठहरी रहती हैं और... अंदर परदों के पीछे उम्मीद की दो..आँखें राह तकती हैं... किसी की.. हथेलियों की छुअन के गुनगुनी सी धूप का...😭😭❣️ #सूर्य
1 014
सुधा के जाने के बाद चंदर की ज़िंदगी में कोई बड़ा तूफ़ान नहीं आया...
बस छोटी-छोटी चीज़ों का मतलब बदल गया...
वही रास्ते थे, वही कमरे, वही किताबें मगर अब किसी बात पर हँसने से पहले उसे याद आता कि कभी इसी बात पर सुधा हँसती थी...
इंसान अक्सर समझता है कि वह किसी व्यक्ति को याद कर रहा है,
जबकि असल में वह अपने उस रूप को याद कर रहा होता है
जो उस व्यक्ति के साथ रहते हुए हुआ करता था..
चंदर शायद सुधा को ही नहीं,
अपने भीतर के उस पुराने चंदर को भी ढूँढ़ता रहा...
बड़ा कष्टकारी है ~गुनाहों का देवता
1 014
“तेरे क़दमों में”
तेरे इश्क़ में अपना मुक़ाम रख दिया, हमने ख़ुद को तेरे क़दमों में रख दिया।
तूने माँगा भी नहीं था कुछ मुझसे, फिर भी दिल का हर एक जाम रख दिया।
तेरी ख़ुशी के सामने अपनी ख़ुशी, बिना सोचे ही तमाम रख दिया।
तूने ठुकराया तो कोई शिकवा नहीं, हमने किस्मत पर इल्ज़ाम रख दिया।
जिसे दुनिया ने कहा था ख़ुद्दारी, हमने वो भी तेरे नाम रख दिया
तूने समझा ही नहीं दर्द मेरा, मैंने फिर भी तेरा नाम रख दिया।
अब जो आईना देखता हूँ ख़ुद को, लगता है मैंने क्या काम कर दिया..
जिसके आगे कभी झुका नहीं था मैं, उसी के आगे अपना सर झुका दिया।Kanha ✍😢
1 014
ये सुनो न.....!!
होगी जिसमें चर्चा सिर्फ तुम्हारी खूबसूरती पर,
इसके लिए भी एक समिट का आयोजन होना चाहिए.
1 014
“कनेक्शन”
वो हाथों में खेल रही थी, मैं दिल हार बैठा, वो गेम जीतती रही, मैं प्यार हार बैठा।
कहा था उसने—“बस एक मैच और खेलूँगी”, मैं उसके इस बहाने पे ऐतबार कर बैठा।
वो स्क्रीन से जुड़ी थी, मैं धड़कनों से जुड़ा, वो कंट्रोलर थामे थी, मैं इकरार कर बैठा।
मेरे सीने से होकर जो तार गया उसके हाथ, उसे गेम का कनेक्शन था, मैं प्यार कर बैठा।
उसे जीत की खुशी थी, मुझे उसका साथ मिला, वो खेलती रही और मैं संसार कर बैठा।
अजीब रिश्ता है—वो सामने होकर भी दूर, मैं उसकी एक नज़र को ही त्योहार कर बैठा। ❤️
Kanha ✍
1 014
✍🏻उस ने फिर मेरा हाल पूछा है कितना मुश्किल सवाल पूछा है हिचकियों का अजीब लहजा था बात को टाल टाल पूछा है तुम मुझे छोड़ तो न जाओगे वास्ते डाल डाल पूछा है आँसुओं की ज़ुबाँ में उस ने जितना पूछा कमाल पूछा है क्या कभी मिल सकेंगे हम दोनों मुझ से मेरा ख़याल पूछा है उस ने फिर मेरा हाल पूछा है....!!
✍🏻
1 014
मुबारक हो मेरे यार”
मुबारक हो मेरे यार, तुझे तेरा प्यार मिल गया, जिसे माँगा था दुआओं में, वो किरदार मिल गया।
तेरी आँखों में अब जो सुकून दिखाई देता है, लगता है जैसे तुझे अपना संसार मिल गया।
मैंने रब से बस इतनी-सी दुआ की है तेरे लिए, तेरे हिस्से में हर मौसम में बहार मिल गया।
कभी टूटे न ये रिश्ता, कभी कम न हो ये प्यार, तेरे हाथों में हमेशा उसका हाथ यार मिल गया।
खुश रहो तुम दोनों, यही दिल से दुआ है मेरी, मेरे यार को आखिर उसका सच्चा प्यार मिल गया। ❤️
भगवान जी हमेशा तुम्हें खुश रखें, मेरे यार। 🤲❤️
Kanha✍
1 014
Repost from Ɇⱨ₴₳₳₴- Ɇ- ł₴ⱨq....🍷🍷
मुबारक हो मेरे यार”
मुबारक हो मेरे यार, तुझे तेरा प्यार मिल गया, जिसे माँगा था दुआओं में, वो किरदार मिल गया।
तेरी आँखों में अब जो सुकून दिखाई देता है, लगता है जैसे तुझे अपना संसार मिल गया।
मैंने रब से बस इतनी-सी दुआ की है तेरे लिए, तेरे हिस्से में हर मौसम में बहार मिल गया।
कभी टूटे न ये रिश्ता, कभी कम न हो ये प्यार, तेरे हाथों में हमेशा उसका हाथ यार मिल गया।
खुश रहो तुम दोनों, यही दिल से दुआ है मेरी, मेरे यार को आखिर उसका सच्चा प्यार मिल गया। ❤️
भगवान जी हमेशा तुम्हें खुश रखें, मेरे यार। 🤲❤️
Kanha✍
1 014
कुछ कमी रह जाएँगी, कुछ फ़ासले रह जाएँगे,
हम मिल भी गए तो दिल में सवाल रह जाएँगे ।।
तेरी आँखों में जो ख़्वाब सजाए थे कभी,
वो ख़्वाब पलकों के नीचे बेहिसाब रह जाएँगे ।।
तेरे जाने से ख़ामोश हो जाएगी शामें,
मेरी साँसों में मगर तेरे जवाब रह जाएँगे ।।
हमने चाहा था तुझे उम्र की तरह,
अब तेरे नाम के बस कुछ ख़त रह जाएँगे ।।
तू किसी और की दुनिया में मुस्कुराती रहना,
हम तेरी याद में थोड़े ख़्वाब से रह जाएँगे ।।
मुकम्मल इश्क़ की ख़्वाहिश तो बहुत थी मगर,
कुछ कमी रह जाएँगी, हम अधूरे रह जाएँगे ।।
चंदन...✍🏼~शब्द_श्रृंगार🖋️
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Hello....एक etu 🤏🏻 si help चाहिए...
यहाँ Teligram के किसी chaanl पर या किसी ग्रुप या किसी और प्लेटफार्म पर,,,,,
जहाँ रोजाना दैनिक भास्कर न्यूज papr
मिल जाए फ्री में,,,, तो बताना जरूर
दैनिक भास्कर app को छोड़कर...!!
мєєт...✍️•
1 014
चंदर और सुधा की कहानी में सबसे दुखद बात यह नहीं थी कि वे बिछड़ गए...
दुख तो यह था कि दोनों एक-दूसरे के इतने अपने थे
कि उन्हें अलग करने के लिए किसी दुश्मनी की ज़रूरत ही नहीं पड़ी...
समाज, संस्कार, संकोच और कुछ अनकहे फ़ैसले
धीरे-धीरे उनके बीच ऐसी दीवार बनाते गए
जिसे दोनों देखते थे, मगर गिरा नहीं सके...
किताब - गुनाहों का देवता
