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शब्दों का कारवां🌸🌺

शब्दों का कारवां🌸🌺

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Ik Reej adhuri h tenu seene laun layi,,, Tera nam tarsda h bula te aaun layi ....🍀🌸

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जब तुम मिलोगे तेरी आँखों में गुम हो जाऊंगी मैं कहीं बिछड़े दिनों का हिसाब करने बैठ जाऊंगी मैं वहीं मेरी और देख कर तुम बस थोड़ा सा मुस्कुरा देना मैं सारे गिले शिकवे भूला दूँगी वहीं के वहीं.....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

शिक्षक दिवस की तुझे भी शुभकामनाएँ ए ज़िंदगी जो हर मोड़ पर कितना कुछ सिखाये जा रही है....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #Rubiya

ए शाम थोड़ी धीरे ढला कर ना मेरे साथ भी थोड़ा वक़्त बिताया कर ना मुझको भी छुपा ले इस अंधेरे में कहीं जा कर आसमां से मेरे लिए थोड़ी सी जगह की सिफारिश कर ना....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

स्त्री अगर ठान ले तो पुरुष की बराबरी क्या उनसे आगे भी निकल सकती हैं इसलिए तो समाज ने उन्हें प्रेम, त्याग, संस्कार और शृंगार की बेड़ियों में बांध कर उन्हे आगे बढ़ने ना दिया...... !!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

📖 आख़िरी-ए-शब कुछ अल्फ़ाज़ काग़ज़ पर नहीं, सीधे दिल पर लिखे जाते हैं… ❤️ “आख़िरी-ए-शब” — मेरा एक ख़्वाब, अब एक किताब बन चुका है। आपका प्यार और आपकी पढ़ाई ही इसकी असली पहचान है। 📚✨ 🛒 अपनी कॉपी मंगाने के लिए Amazon or Flipkart पर आज ही ऑर्डर करें...! आपका एक ऑर्डर मेरे लिए सिर्फ़ किताब की बिक्री नहीं, बल्कि मेरे ख़्वाब को मिली एक नई उड़ान है। ❤️ लेख़क: @Husain_Writes Amazon 🔗 https://www.amazon.in/dp/8168720229 Flipkart 🔗 https://www.flipkart.com/aakhir-e-shab/p/itmf92d72fdc0bbb

Shayad har kisi ko nhi milta 😒 (mum)

ये ढलती शाम ये छाये हुए बादल और इक अजनबी की यादें आये हाय अजनबी फ़िर भी यादें एक तरफ़ा ये यादें, क्या उसको भी महसूस हुआ कभी प
ये ढलती शाम ये छाये हुए बादल और इक अजनबी की यादें आये हाय अजनबी फ़िर भी यादें एक तरफ़ा ये यादें, क्या उसको भी महसूस हुआ कभी पता नहीं फ़िर भी ना जाने कितना सुकून देती हैं ये यादें खुली आँखों का ये सपना उसमें महसूस होता कभी कभी कोई अपना पता नहीं दिन भर क्या सोचती हूँ क्या लिखती हूँ ये हर बात में पता नहीं पता नहीं कहना तकिया कलाम बन चुका हैं मेरा अब शायद खुद को जितनी बार समझा हैं उतनी बार कुछ अधूरा ही पाया हैं एक डर सा रहता हैं दिल में कुछ तो अधूरा सा छुपा हैं दिल में पता नहीं क्या लिख रही हूँ क्या खोज रही हूँ मैं ख़ुद में खुद को ही ढूँढ रही हूँ........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

कितने खुश हो तुम खुद के साथ कभी गौर किया हैं ना किसी का इंतज़ार ना किसी की फिक्र बस तुम और तुम्हारी तन्हाई जहाँ किसी को तुमसे कोई मतलब नहीं बस एक छोटे बच्चे की तरह ख़ुद की खुद से पहचान कर लेना उस दिन कितने सुखी होंगे तुम कभी गौर किया हैं........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

कब तक इंतज़ार में रहोगे कि कोई तुम्हें हँसाने आयेगा तुम्हारे आँसुओ को पोंछने आयेगा वो दौर कब के बीते जब दिलों की बातें दिलों तक जाती थी अब तो तुम्हें खुद का हमसफर बनना हैं वो दौर गया जब किसी की ख़ुशी में ख़ुशी ढूँढ ली जाती थी.......!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

Armaan Bedil - Udeekan Vich.mp36.58 MB

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान नें इस्तीफा दिया
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान नें इस्तीफा दिया

फ़िर से ना होने दो भारत की दुर्दशा आज शायरी नहीं बस कुछ दिलों की बातें लिखनी हैं आजादी से पहिले भी तो प्यार था और शायद उस दौर की मोहब्बत ही सच्ची थी यूँ चंद दिनों की मेहमान ना थी अपने दिलों के अरमानो को उपन्यासों में संजो कर रखते थे जिनकी महक आज भी हमारे दिलों तक पहुंचती है औरते उस वक़्त ज्यादा पढ़ी लिखी ना थी फिर भी अपने अहसास को उपन्यासों और कहानियों में बखूबी लिखना जानती थी वो दौर सिर्फ यहाँ तक सीमित ना था उस वक़्त के राजनीतिक मामलों में भी सबका योगदान रहा देश को आजाद कराने में सबने अपनी भूमिका निभाई, किसी ने अखबारों के जरिये तो किसी ने उपन्यासों, कहानियों और व्यंग्यो के जरिये,,,, एक वक़्त था जब आज की तरह संचार की कोई सुविधा ना थी फ़िर भी भरततेंदु हरिश्चंद्र ने भारत दुर्दशा जैसे नाटक को लिख कर लोगों को एकजुट किया पर आज की विडम्बना देखो आज का समाज शिक्षित भी है सब सुविधा भी हैं संचार के ना जाने क्या क्या साधन हैं फ़िर भी वो अपने आँखों पर पट्टी बांधे हुए हैं बस वो खो गये हैं अपनी ही फेन्टेंसि में एक बार कि उनको धोख़ा दे गया फ़िर सारी अपनी उम्र अपने टूटे दिल लिए खराब कर देते हैं उन्हें कोई मतलब नहीं हैं देश में क्या हो रहा क्या नहीं , उन्हे बस अपने टूटे दिल की फ़िकर इस देश की फ़िकर बस चंद हाथों में सिमट गयी हैं जरा तो गौर से सोचो अगर युवा पीढी ही खुद को निराशा में घेर लेगी तो वो दिन दूर नहीं जब हम फ़िर से अपने हाथों ग़ुलाम हो जायेंगे उस दौर में भी मोहब्बत पनपति थी पर वे लोग अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा करते थे उठो जागो देखो क्या हो रहा हैं ये मोहब्बत तक सिकुड़ कर बैठने से काम नहीं चलेगा कोई आयेगा हमें फ़िर से बाँट कर चला जायेगा........ फ़िर से भारत दुर्दशा को चरितार्थ मत होने दो अब भी वक़्त हैं एक जुट होने का अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का.......!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya #utho jago

तुम कहते हो, कि लौटकर आना पड़ता हैं आखिर किस के लिए? जब उम्मीदों की रोशनी ना बची हो ठहरने के लिए एक सुकूँ भरी आवाज़ कानों में ना पड़ी हों किसी के जाने का दर्द होठों तक काँप ना उठा हो तो आखिर किस के लिए लौट कर आना पड़ता हैं? मेरे आँसू की हर एक बूँदों का अहसास था तुम्हें फिर भी उनको ना जाने क्यों अनदेखा किया तुमने बार बार रूठ कर जाने वाले इस उमीद से जाते है कि कोई पुकार लगा उन्हें पर हर बार में एक एक अहसास मर जाता हैं और फ़िर लौट कर नहीं खुद में कहीं गुम हो जाना पड़ता हैं.........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

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