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शब्दों का कारवां🌸🌺

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Ik Reej adhuri h tenu seene laun layi,,, Tera nam tarsda h bula te aaun layi ....🍀🌸

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जब तुम मिलोगे तेरी आँखों में गुम हो जाऊंगी मैं कहीं बिछड़े दिनों का हिसाब करने बैठ जाऊंगी मैं वहीं मेरी और देख कर तुम बस थोड़ा सा मुस्कुरा देना मैं सारे गिले शिकवे भूला दूँगी वहीं के वहीं.....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya

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शिक्षक दिवस की तुझे भी शुभकामनाएँ ए ज़िंदगी जो हर मोड़ पर कितना कुछ सिखाये जा रही है....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #Rubiya
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ए शाम थोड़ी धीरे ढला कर ना मेरे साथ भी थोड़ा वक़्त बिताया कर ना मुझको भी छुपा ले इस अंधेरे में कहीं जा कर आसमां से मेरे लिए थोड़ी सी जगह की सिफारिश कर ना....!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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https://youtube.com/shorts/QsSPUc8W1t0?si=kfkR1E9VO_MIDGsm
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स्त्री अगर ठान ले तो पुरुष की बराबरी क्या उनसे आगे भी निकल सकती हैं इसलिए तो समाज ने उन्हें प्रेम, त्याग, संस्कार और शृंगार की बेड़ियों में बांध कर उन्हे आगे बढ़ने ना दिया...... !!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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https://youtu.be/wAlsnlkBXrg?si=hxe3xpV1u-nq5XnI
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📖 आख़िरी-ए-शब कुछ अल्फ़ाज़ काग़ज़ पर नहीं, सीधे दिल पर लिखे जाते हैं… ❤️ “आख़िरी-ए-शब” — मेरा एक ख़्वाब, अब एक किताब बन चुका है। आपका प्यार और आपकी पढ़ाई ही इसकी असली पहचान है। 📚✨ 🛒 अपनी कॉपी मंगाने के लिए Amazon or Flipkart पर आज ही ऑर्डर करें...! आपका एक ऑर्डर मेरे लिए सिर्फ़ किताब की बिक्री नहीं, बल्कि मेरे ख़्वाब को मिली एक नई उड़ान है। ❤️ लेख़क: @Husain_Writes Amazon 🔗 https://www.amazon.in/dp/8168720229 Flipkart 🔗 https://www.flipkart.com/aakhir-e-shab/p/itmf92d72fdc0bbb
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Shayad har kisi ko nhi milta 😒 (mum)
Shayad har kisi ko nhi milta 😒 (mum)
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ये ढलती शाम ये छाये हुए बादल और इक अजनबी की यादें आये हाय अजनबी फ़िर भी यादें एक तरफ़ा ये यादें, क्या उसको भी महसूस हुआ कभी प
ये ढलती शाम ये छाये हुए बादल और इक अजनबी की यादें आये हाय अजनबी फ़िर भी यादें एक तरफ़ा ये यादें, क्या उसको भी महसूस हुआ कभी पता नहीं फ़िर भी ना जाने कितना सुकून देती हैं ये यादें खुली आँखों का ये सपना उसमें महसूस होता कभी कभी कोई अपना पता नहीं दिन भर क्या सोचती हूँ क्या लिखती हूँ ये हर बात में पता नहीं पता नहीं कहना तकिया कलाम बन चुका हैं मेरा अब शायद खुद को जितनी बार समझा हैं उतनी बार कुछ अधूरा ही पाया हैं एक डर सा रहता हैं दिल में कुछ तो अधूरा सा छुपा हैं दिल में पता नहीं क्या लिख रही हूँ क्या खोज रही हूँ मैं ख़ुद में खुद को ही ढूँढ रही हूँ........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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कितने खुश हो तुम खुद के साथ कभी गौर किया हैं ना किसी का इंतज़ार ना किसी की फिक्र बस तुम और तुम्हारी तन्हाई जहाँ किसी को तुमसे कोई मतलब नहीं बस एक छोटे बच्चे की तरह ख़ुद की खुद से पहचान कर लेना उस दिन कितने सुखी होंगे तुम कभी गौर किया हैं........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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कब तक इंतज़ार में रहोगे कि कोई तुम्हें हँसाने आयेगा तुम्हारे आँसुओ को पोंछने आयेगा वो दौर कब के बीते जब दिलों की बातें दिलों तक जाती थी अब तो तुम्हें खुद का हमसफर बनना हैं वो दौर गया जब किसी की ख़ुशी में ख़ुशी ढूँढ ली जाती थी.......!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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Armaan Bedil - Udeekan Vich.mp3
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शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान नें इस्तीफा दिया
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रदान नें इस्तीफा दिया
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फ़िर से ना होने दो भारत की दुर्दशा आज शायरी नहीं बस कुछ दिलों की बातें लिखनी हैं आजादी से पहिले भी तो प्यार था और शायद उस दौर की मोहब्बत ही सच्ची थी यूँ चंद दिनों की मेहमान ना थी अपने दिलों के अरमानो को उपन्यासों में संजो कर रखते थे जिनकी महक आज भी हमारे दिलों तक पहुंचती है औरते उस वक़्त ज्यादा पढ़ी लिखी ना थी फिर भी अपने अहसास को उपन्यासों और कहानियों में बखूबी लिखना जानती थी वो दौर सिर्फ यहाँ तक सीमित ना था उस वक़्त के राजनीतिक मामलों में भी सबका योगदान रहा देश को आजाद कराने में सबने अपनी भूमिका निभाई, किसी ने अखबारों के जरिये तो किसी ने उपन्यासों, कहानियों और व्यंग्यो के जरिये,,,, एक वक़्त था जब आज की तरह संचार की कोई सुविधा ना थी फ़िर भी भरततेंदु हरिश्चंद्र ने भारत दुर्दशा जैसे नाटक को लिख कर लोगों को एकजुट किया पर आज की विडम्बना देखो आज का समाज शिक्षित भी है सब सुविधा भी हैं संचार के ना जाने क्या क्या साधन हैं फ़िर भी वो अपने आँखों पर पट्टी बांधे हुए हैं बस वो खो गये हैं अपनी ही फेन्टेंसि में एक बार कि उनको धोख़ा दे गया फ़िर सारी अपनी उम्र अपने टूटे दिल लिए खराब कर देते हैं उन्हें कोई मतलब नहीं हैं देश में क्या हो रहा क्या नहीं , उन्हे बस अपने टूटे दिल की फ़िकर इस देश की फ़िकर बस चंद हाथों में सिमट गयी हैं जरा तो गौर से सोचो अगर युवा पीढी ही खुद को निराशा में घेर लेगी तो वो दिन दूर नहीं जब हम फ़िर से अपने हाथों ग़ुलाम हो जायेंगे उस दौर में भी मोहब्बत पनपति थी पर वे लोग अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा करते थे उठो जागो देखो क्या हो रहा हैं ये मोहब्बत तक सिकुड़ कर बैठने से काम नहीं चलेगा कोई आयेगा हमें फ़िर से बाँट कर चला जायेगा........ फ़िर से भारत दुर्दशा को चरितार्थ मत होने दो अब भी वक़्त हैं एक जुट होने का अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का.......!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya #utho jago
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तुम कहते हो, कि लौटकर आना पड़ता हैं आखिर किस के लिए? जब उम्मीदों की रोशनी ना बची हो ठहरने के लिए एक सुकूँ भरी आवाज़ कानों में ना पड़ी हों किसी के जाने का दर्द होठों तक काँप ना उठा हो तो आखिर किस के लिए लौट कर आना पड़ता हैं? मेरे आँसू की हर एक बूँदों का अहसास था तुम्हें फिर भी उनको ना जाने क्यों अनदेखा किया तुमने बार बार रूठ कर जाने वाले इस उमीद से जाते है कि कोई पुकार लगा उन्हें पर हर बार में एक एक अहसास मर जाता हैं और फ़िर लौट कर नहीं खुद में कहीं गुम हो जाना पड़ता हैं.........!!?? ☘️🌹Rubiya🙃🌸 #review #Rubiya
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