Don't get caught by a cheater! Telemetrio finds and tags such channels 👉 If you want to see the tag, subscribe 👈
काम संहिता🙏
Open in Telegram
सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
Show more2 477
Subscribers
No data24 hours
+237 days
+3630 days
2 878
Post views
~ 53824 hours
No data48 hours
116.19%
Engagement rate
No data
Posts per day
Posts Archive
2 477
बड़ा ही ख़ामोश सा है अंदाज़ ए इश्क तुम्हारा
समझ नहीं आता फिदा हो जाऊं या फना हो जाऊं...
2 477
कटि प्रदेश को चूमिये , हल्का सा सहलाय
काँख गन्ध को लीजिए , थोड़ा बाल बढ़ाय।
चित्रा प्रेम बढ़ता जाएगा
2 477
💕💕 इस संसार में रसिकों के देखने योग्य क्या है?
मृगनयनी कामिनियों का प्रेमपूर्ण प्रसन्न मुख । सूंघने योग्य क्या है? उनके मुख की सुगंधित श्वास। सुनने योग्य क्या है? उनके मधुर वचन। स्वादिष्ट पदार्थ क्या है? कलियों सदृश उनके होंठों का मधुर रस। स्पर्श करने योग्य क्या है? उनका फूलों सदृश कोमल शरीर। ध्यान करने योग्य क्या है? उनका नवयौवन और विलास। इनकी भ्रमपूर्ण उपस्थिति सर्वत्र है। 💕💕
(7)
💕💕चंद्रमा सदृश मुखमंडल, कमल को भी लज्जित करने वाली सुंदर आँखें, स्वर्ण को भी फीका करने वाली अंगों की कान्ति, भ्रमरों के समूह को जीतने वाली काली-काली केशराशि, हाथी के गंडस्थल की शोभा को लज्जित करने वाले सुंदर पुष्ट सुडौल उरोज, विशाल नितंब, मनोहर वाणी और कोमलता - ये सब स्त्रियों के स्वाभाविक भूषण हैं। 💕💕 (5)
💕💕 यद्यपि दीपक, अग्नि, तारे, सूर्य और चंद्रमा सभी प्रकाश मान पदार्थ मौजूद हैं पर मुझे एक मृगनयनी सुंदरी बिना सारा संसार अंधकार पूर्ण दिखता है। 💕💕 (14)
💕💕 स्त्रियों की बातों में अमृत और हृदय में हलाहल विष होता है, इसीलिए पुरुष उनका अधरामृत - पान और उनकी छातियों का मर्दन करते हैं। 💕💕 (82)
💖💖 भर्तृहरि कृत श्रंगार शतक से हिन्दी अनुवाद 💖💖
2 477
स्तन भार के कारण देवगुरू बृहस्पति के समान, कान्तिमान होने के कारण सूर्य के समान, चन्द्रमुखी होने के कारण चन्द्रमा के समान, और मन्द-मन्द चलने वाली अथवा शनैश्चर-स्वरूप चरणों से शोभित होने के कारण सुन्दरियां ग्रह स्वरूप ही हुआ करती है।‘‘
2 477
*"सम्भोग ब्रह्म शक्ति है"*
क्योंकि ब्रह्म शक्ति के पास ही
रचना करने की क्षमता होती है ।
ब्रह्म शक्ति ही सँसार को रचने की क्षमता रखता है ।
नवीन की रचना करता है औऱ
सम्भोग भी नयी पीढ़ी की रचना करता है ।
सम्भोग से नयी पीढ़ी सँसार में आती है ।
*"सम्भोग का अर्थ आनन्द ही नहीं है सृजन भी है"*
ध्यान रखो संभोग करो जल्दबाजी का sex नहीं । संभोग मतलब स्त्री और पुरुष बराबर का आनंद सिर्फ पुरुष अपनी स्खलन पर मत ध्यान दो इससे स्त्री असंतुलित और मानसिक पीड़ित हो जायेगी। संभोग में संतुष्ट न होने से चिड़चिड़ा हो जाएगी और जिंदगी नरक ।
देखते होगे आप्लोग कुछ 50 साल के पुरुष स्त्री भी देखने में 20 साल के लगते हैं क्यों ? क्योंकि या तो वो पूर्ण संभोग संतुष्टि से करते हैं ,आनंदित रहते हैं या ध्यान करते हैं जो की सम्भोग से संतुष्ट होकर ही किया जाएगा । अन्यथा आप ध्यान में बैठे और ध्यान में आ रही है कामुक रति ।
2 477
मर्द और औरत का रिश्ता इतना उलझा हुआ क्यों है ...?
क्यूँकि मर्द ने औरत के साथ सिर्फ सोना सीखा है जागना नही .
#अमृता_प्रीतम
___________
अमृता जी की बात से
मैं आंशिक रूप से सहमत हूं, (पूर्ण रूप से नहीं)
क्योंकि 90% औरतें मर्द के साथ सोना ही चाहती हैं, (जागना नहीं)
◾यदि कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ में ...जागने वाला संबंध बनाने का प्रयास करेगा तो... वह स्त्री अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए ...किसी लुच्चे लफंगे के साथ में ...ओयो होटल में जाकर अपनी टांगे फैला देगी...
और
जागृति अवस्था वाले पुरुष को , सार्वजनिक रूप से (चू० नंबर वन) घोषित कर देगी। मैंने अपने प्रैक्टिकल लाइफ में ऐसे कई मामले देखे हैं।
अमृता प्रीतम जी शायद यह बात लिखना भूल गई ...
2 477
!! #स्त्रीं_में_कामोत्तेजना !!
शिश्निका (सर्वाधिक सम्वेदनशील),
भगोष्ठ बाह्य एवं आन्तरिक,
जाँघें, नाभि क्षेत्र, स्तन, चुचुक,
गर्दन का पिछला भाग, होंठ एवं जीभ,
कानों का निचला भाग, काँख, रीढ़, नितम्ब,
घुटनों का पृष्ठ मुलायम भाग,
पिण्डलियाँ तथा तलवे ।
स्त्री के इन भागों में
कामोत्तेजना अत्याधिक होती है ।
स्त्री के इन अङ्गों को
कोमलता पूर्वक हाथों से सहलाने से
वह शीघ्र ही द्रवित हो कर
पुरुष से लिपटने लगती है ।
हाथों एवं ऊँगलियों द्वारा इन #अङ्गों को
उत्तेजित करने के साथ ही
यदि इन्हें चुम्बन आदि भी किया जाए तो
नारी की कामाग्नि तेजी से भड़क उठती है एवं
रति क्रीड़ा के आनन्द में अकल्पित वृद्धि होती है ।
कोई अनिवार्य नहीं है कि
स्त्री के सभी अङ्गों को होंठ अथवा
जिव्हा से आन्दोलित किया जाए ।
यह दोनों की परस्पर सहमति एवं
रुचि पर निर्भर करता है कि
#प्रणय_क्रीड़ा के समय
किन स्थानों पर होठ एवं
जीभ का प्रयोग किया जाए ।
ऐसे करने का उद्देश्य यही होता है कि
प्रत्येक #रति_क्रीड़ा में
नर और नारी को
रोमाँचक आनन्द की उपलब्धि
समान रूप से होनी चाहिए ।
नारी की चित्तवृत्ति
सदा एक समान नहीं रहती है ।
किसी दिन यदि वह मानसिक अथवा
शारीरिक रूप से क्षुब्ध हो और
रति-क्रीड़ा के लिए अनिच्छा जाहिर करे तो
उससे किसी भी प्रकार की
मनमानी नहीं करनी चाहिए ।
सामान्य स्थिति में भी
स्त्री को पूर्णतः कामोद्दीप्त कर लेने के पश्चात् ही
यौन-क्रीड़ा में संलग्न होना चाहिए ।
स्त्री भले ही सम्भोग के लिए जल्दी मान जाए ।
पर वह इस क्रिया में
जल्द अपना मन नहीं बनाना चाहती ।
पुरुष इस बात को जल्दी समझ नहीं पाते ।
उनको यह बात समझना थोड़ी मुश्किल होती है ।
स्त्री को बहुत कम सम्भोग में आनन्द प्राप्त होता है ।
स्त्री को जितना आनन्द सम्भोग से पूर्व
काम-क्रीड़ा, अलिंगन, चुम्बन और
प्रेम भरी बातें करने में आता है ।
उतना सन्तुष्टी उसे #सम्भोग में नहीं मिलता है ।
जब तक दोनों सम्भोग के लिए व्याकुल नहीं होते
तब तक सम्भोग करना उचित नहीं होता ।
🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥
2 477
कांख बहुत ही उत्तेजक जगह है स्त्री का खासकर अगर इसे जीभ से चाटो तो नीचे की छेद से पानी जल्दी टपकने लगता है पर ध्यान रखिए कांख की सफाई सही से हो ,बाल रहित कांख ज्यादा स्वच्छ होगा ।
2 477
कामना में डूबी स्त्री की
आँखें लाल ❤️
और होंठ नीले होते हैं
जब तुम इन नीले होंठों को चूमते हो
तो नाभि के पास खिंच जाती हैं दो लकीरें।
एक होती है लज्जा।
और एक अधैर्य की।
वो चाहती है कि आप उसे अपने बाहों मे समा जाने दें।
बाहों में लेने के बाद आप उसे ये एहसास दिलाये कि आप भी कितने अधूरे है उनके बिना।
एक स्त्री यही चाहती है।
उसके अकेलेपन को दूर करें।
उसके अंदर की तड़प को महसूस करें।
वो क्या चाहती है आपसे, उसे सुनो।
फिर उसके चलती हुई साँसो को महसूस करो।
उसके दिल की धड़कन को अपना स्पर्श दो।
तुम्हारे स्पर्श से उपजी कंपकपाहट
और श्वास की सीत्कार से
स्त्री एक स्वप्न को जन्म देती है।
उस स्वप्न में वो तुम्हारा हाथ पकड़
पानी पर चल रही है नंगे पाँव।
सुनो पुरुष
नदी पार करने के बाद
स्त्री के पैरों को भी चूम लेना।
ये पैर तुम्हारे पास
सदियों की दूरी नापकर आये हैं....।।
❤
2 477
!! #स्त्रीं_में_कामोत्तेजना !!
शिश्निका (सर्वाधिक सम्वेदनशील),
भगोष्ठ बाह्य एवं आन्तरिक,
जाँघें, नाभि क्षेत्र, स्तन, चुचुक,
गर्दन का पिछला भाग, होंठ एवं जीभ,
कानों का निचला भाग, काँख, रीढ़, नितम्ब,
घुटनों का पृष्ठ मुलायम भाग,
पिण्डलियाँ तथा तलवे ।
स्त्री के इन भागों में
कामोत्तेजना अत्याधिक होती है ।
स्त्री के इन अङ्गों को
कोमलता पूर्वक हाथों से सहलाने से
वह शीघ्र ही द्रवित हो कर
पुरुष से लिपटने लगती है ।
हाथों एवं ऊँगलियों द्वारा इन #अङ्गों को
उत्तेजित करने के साथ ही
यदि इन्हें चुम्बन आदि भी किया जाए तो
नारी की कामाग्नि तेजी से भड़क उठती है एवं
रति क्रीड़ा के आनन्द में अकल्पित वृद्धि होती है ।
कोई अनिवार्य नहीं है कि
स्त्री के सभी अङ्गों को होंठ अथवा
जिव्हा से आन्दोलित किया जाए ।
यह दोनों की परस्पर सहमति एवं
रुचि पर निर्भर करता है कि
#प्रणय_क्रीड़ा के समय
किन स्थानों पर होठ एवं
जीभ का प्रयोग किया जाए ।
ऐसे करने का उद्देश्य यही होता है कि
प्रत्येक #रति_क्रीड़ा में
नर और नारी को
रोमाँचक आनन्द की उपलब्धि
समान रूप से होनी चाहिए ।
नारी की चित्तवृत्ति
सदा एक समान नहीं रहती है ।
किसी दिन यदि वह मानसिक अथवा
शारीरिक रूप से क्षुब्ध हो और
रति-क्रीड़ा के लिए अनिच्छा जाहिर करे तो
उससे किसी भी प्रकार की
मनमानी नहीं करनी चाहिए ।
सामान्य स्थिति में भी
स्त्री को पूर्णतः कामोद्दीप्त कर लेने के पश्चात् ही
यौन-क्रीड़ा में संलग्न होना चाहिए ।
स्त्री भले ही सम्भोग के लिए जल्दी मान जाए ।
पर वह इस क्रिया में
जल्द अपना मन नहीं बनाना चाहती ।
पुरुष इस बात को जल्दी समझ नहीं पाते ।
उनको यह बात समझना थोड़ी मुश्किल होती है ।
स्त्री को बहुत कम सम्भोग में आनन्द प्राप्त होता है ।
स्त्री को जितना आनन्द सम्भोग से पूर्व
काम-क्रीड़ा, अलिंगन, चुम्बन और
प्रेम भरी बातें करने में आता है ।
उतना सन्तुष्टी उसे #सम्भोग में नहीं मिलता है ।
जब तक दोनों सम्भोग के लिए व्याकुल नहीं होते
तब तक सम्भोग करना उचित नहीं होता ।
🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥❤️🔥
2 477
मैं चाहता हूँ तुम
मुझे ऐसे चूमो
जैसे चूमती है हवा
फूलों को
और बिखेर देती है
अपनी गंध ।।
मैं चाहता हूँ तुम
मुझे ऐसे चूमो
जैसे चूमती है नदी
पाषाणों को
और अंकित कर देती है
अपने चिन्ह ।।
मैं चाहता हूँ तुम
मुझे ऐसे चूमो
जैसे चूमती है माँ
चोट को
और समाप्त कर देती है
सारी पीड़ा
एक फूँक में ।।
मैं चाहता हूँ तुम
मुझे ऐसे चूमो
जैसे चूमती है
बारिश धरा को
और समाप्त कर लेती है
अपना अस्तित्व ।।
क्योंकि मैं जानता हूँ
तुम्हारा चूमना समाप्त कर देगा
उस “पाषाण” हृदय के
“अस्तित्व” की
“गंध” को जिसकी
“पीड़ा” की फूँक ने
पसारे है
उदासी के अंधेरे ।।
और ये उदासी के अंधेरे
बंद आँखों के अंधेरों से
ज़्यादा स्याह नहीं ....
मुझे इन स्याह होती रातों में
डूबना है
हाँ, मुझे भी तुम्हें चूमना है ।।❤️❤️
2 477
नमस्कार दोस्तों
आपकी कोई भी समस्या है तो आप इनबॉक्स में मुझे मैसेज कर सकते हैं और अपना नाम, पता जरूर लिखे, जैसे ही मुझे समय मिलेगा मैं आपके सवाल का जवाब जरूर दूंगा, आप की समस्या को दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे,
नोट - आपको कोई समस्या है तो ही इनबॉक्स में मेसेज करे #धन्यबाद
जरूरतमंदों की सेवा, सहायता ही सर्वोपरि #धर्म है
#यौन #सेक्स #पुरुष #संबंध #कामसूत्र #कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
2 477
#तीसरी_आँख
हर औरत के पास तीसरी आँख होती है,
जिससे वो पुरुषो की निगाहें देख लेती है
भाप लेती है पुरुषो के भाव को
पढ़ लेती है उनके अनकहे को
उनकी छुअन को महसूस कर लेती है
और समेट लेती है अपनी इज्जत
बांध लेती है अपना बोरिया बिस्तर
और उनके भावो को वही मरोड़ देती है
ये तीसरी आँख ही उन्हें बचाती है
पुरुषो के नापाक इरादे जताती है
इस आँख को सदा खोले रखना
इसकी अनसुनी तुम न करना
रोक देना उनके बढ़ते कदमो को
उनकी लालसा का अंत कर देना
शिव की तरह इस तीसरी आँख से
उनके इरादे वही भस्म कर देना
#सुनो_ना♥️♥️♥️
2 477
भारत के सभी स्त्री और पुरुषों को
प्यार और सेक्स की शिक्षा
अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए।
इसके अतिरिक्त
जीवनोपयोगी व्यवहारिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
Content available for users 18+
By signing in to the service, you confirm that you are 18 years of age or older.
