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अच्छी बातें, अच्छे विचार और अच्छे संस्कार!!आध्यात्मिक संसार!! ये हैं सफलता के मंत्र अपार!! 👉खुद से वादा 👉मेहनत ज्यादा 👉मजबूत इरादा Share channel link everywhere t.me/positivetalk
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. *मनुष्य* की *प्रतिक्रियाए*
*ही उसकी*
*समझदारी* और *मूर्खता* का
*परिचय देती* हैं
*🙏शुभ प्रभात 🙏*
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*ब्रह्मानन्दं परम सुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं ।*
*द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम् ।*
*एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षीभूतम् ।*
*भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरूं तं नमामि।।*
✍️ सनातन धर्म/संस्कृति में जो व्यक्ति *बिना गुरु बनाये संसार से प्रस्थान* कर जाता है, उसे *निगुरा मृत्यु/ नरकगामी* माना जाता है ।
✍️ रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते हैं कि दुनियारूपी भवसागर को सफलतापूर्वक पार करने के लिए भगवान शंकर जैसों को भी अपना गुरु बनाना पड़ता है ।
✍️ *गुरु को ईश्वर का दर्शनीय रूप* माना जाता है ।
✍️ *ईश्वर है, का ज्ञान* गुरु द्वारा ही बताया गया है ।
✍️ *आध्यात्मिक सदगुर* हमे मायारूपी दुनिया में विवेकरूपी आचरण कराते हुए *मोक्ष का मार्ग* प्रशस्त करते है ।
🙏
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*कबीर जीवन कुछ नहीं, खिन खारा खिन मीठ ।*
*कलहि अलहजा मारिया, आज मसाना ठीठ ।।*
✍ कबीर कहते है की जीवन दिन-रात की तरह है। किसी क्षण दुख/कष्ट और किसी क्षण जीवन सुखमय हो जाता है।
✍ जो जीवित व्यक्ति कल अपने अहम/घमण्ड में था, आज वह स्वयं मरा पड़ा अपने तथाकथित बलशाली/सुंदर शरीर की अंतिम क्रिया हेतु दूसरों पर निर्भर है।
✍ जीवन मे प्रतिपल स्थितियाँ बदलती रहती हैं । राजा से रंक और रंक से राजा बनने के अनगिनत उदाहरण हैं ।
✍ अपने को निष्काम कर्मयोगी मानकर, ईश्वर की कठपुतली की भाँति निःस्वार्थ भाव से कर्म करने में ही भलाई है ।
🙏🙏
@positivetalk
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*विचार जब संयम से जन्म लेते हैं,...कर्म जब निष्ठा से आगे बढ़ते हैं... और उद्देश्य जब लोकहित से जुड़ जाता है...तब साधारण जीवन भी असाधारण उदाहरण बन जाता है।*
🌹🌹सुप्रभात🌹🌹
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*कबीर गाफिल क्यों फिरे, क्या सोता घनघोर ।*
*तेरे सिरहाने जम खड़ा, ज्यों अंधियारे चोर ।।*
✍ प्रत्येक कार्य के पीछे एक उद्देश्य निहित होता है ।
✍ जब हम अपने उद्देश्य से भटक जाते है तो सफलता/मंजिल प्राप्त नही होती है ।
✍ कबीर कहते है कि ऐ मनुष्य तुम भ्रम में भटक रहे हो ।क्या तुम अपना उद्देश्य भूल गए ?
✍ तुम्हारे सिरहाने तो मौत छुपकर खड़ी है जैसे अंधेरे में चोर छिपा रहता है यानि संसार से विदाई का कोई समय नहीं है।
✍ इसलिए अपने मनुष्यत्व प्राप्ति के उद्देश्य में, बिना विलम्ब तत्परता से लग जाओ ।
🙏🙏
@positivetalk
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*सकल पदारथ है जग माही ।*
*कर्महीन नर पावत नाही ।।*
✍ ईश्वर ने संसार में मनुष्य को बिना किसी भेदभाव के सभी साधन और साध्य उपलब्ध कराये है ।
✍ कलियुग में कर्म को प्रधान बताया गया है ।
✍ कर्म को सुख-दुख, लाभ-हानि, आनंद-शोक का मूल माना गया है ।
✍ निष्काम कर्मयोगी जीवन में सुख, लाभ और आनंद पाता है ।असफलता पर अपनी कमियाँ ढूंढ़कर सुधार करता है ।
✍ अकर्मण्य और भाग्यवादी मनुष्य, असफल होने पर सारा दोष, भाग्य, दूसरों पर तथा समदर्शी, न्यायवादी ईश्वर पर डालता है ।
🙏🙏
