𝐎𝐟𝐟𝐢𝐜𝐞 𝐨𝐟 𝐏𝐚𝐧𝐜𝐡𝐚𝐲𝐚𝐭 𝐒𝐚𝐡𝐚𝐲𝐚𝐤 𝐔𝐧𝐢𝐨𝐧 𝐔𝐭𝐭𝐚𝐫 𝐏𝐫𝐚𝐝𝐞𝐬𝐡
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منشورات القناة
| 2 | जनपद फतेहपुर से जो मानदेय वृद्धि का आदेश जारी हुआ वह त्रुटि से 20 जुलाई को लीक हुए प्रस्ताव के कारण जारी हो गया था उसे कृपया कही शेयर करने से बचे। | 782 |
| 3 | psulko18.pdf | 1 370 |
| 4 | 9000 से 18 करिए 15 करिए मंजूर है पर 9000 मंजूर नहीं है अगले 5 साल के लिए ✊ | 1 935 |
| 5 | हमारी लड़ाई है पंचायत सहायकों को न्यूनतम मानदेय दिलाने की 18 हजार के आस पास तो जाना चाहिए.....
पंचायत सहायक कुशल श्रेणी के तहत कर्मचारी है इसलिए 15224 श्रेणी तो सर्वप्रथम लागू हो जाती है।
इसके साथ ही पंचायत सहायक संयुक्त रूप से तीन पदों का योग है इसलिए मानदेय कुशल श्रेणी से भी अधिक यानी न्यूनतम 18 हजार होना चाहिए | 2 007 |
| 6 | एक और महत्वपूर्ण बात समझिए।
किसी भी कर्मचारी से जुड़े निर्णय पर अंतिम सहमति तभी बनती है, जब सभी प्रमुख पक्षों की बात सुनी जाए। अभी तक विभाग की धारणा यह थी कि पंचायत सहायकों का केवल या एक संगठन द्वारा किया जा रहा है। संख्या बल का लाभ लेकर यदि कोई एक संगठन आगे बढ़कर किसी प्रस्ताव पर सहमति जताने लगे, तो स्वाभाविक है कि अधिकारी भी यही सोचते हैं कि कम से कम खर्च और बिना विरोध के मामला समाप्त हो जाए।
लेकिन 20 जुलाई के धरने ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। विभाग को यह स्पष्ट हुआ कि पंचायत सहायकों का प्रतिनिधित्व केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि कई संगठन और बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी अलग-अलग मांगों और विचारों के साथ मौजूद हैं।
यदि विभाग को पहले से इस वास्तविक स्थिति की जानकारी होती, तो संभवतः सभी संगठनों को साथ बैठाकर व्यापक चर्चा के बाद ही कोई प्रस्ताव आगे बढ़ता। क्योंकि किसी एक पक्ष की सहमति पूरे पंचायत सहायक समुदाय की सहमति नहीं मानी जा सकती।
अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। विभाग के सामने यह स्पष्ट है कि पंचायत सहायकों की आवाज़ विविध है और किसी भी निर्णय को व्यापक स्वीकार्यता दिलाने के लिए सभी पक्षों से संवाद आवश्यक है।
इसलिए यह समय निराश होने का नहीं, बल्कि संगठित रहकर अपनी बात मजबूती से रखने का है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष और संवाद—दोनों जारी रहने चाहिए। | 1 960 |
| 7 | साथियों, ज़रा पूरी स्थिति को समझिए।
जानकारी के अनुसार पंचायत सहायकों के लिए O Level योग्यता के साथ ₹9,000 मानदेय किए जाने का प्रस्ताव तैयार था और आदेश भी लगभग अंतिम चरण में था। इसे मुख्यमंत्री जी के किसी आगामी कार्यक्रम/अधिवेशन (अगस्त या सितंबर) के दौरान लागू किए जाने की चर्चा थी।
लेकिन 20 जुलाई के धरने के बाद राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर श्रेय लेने की होड़ में वह पत्र समय से पहले वायरल कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जो बात गोपनीय थी, वह सार्वजनिक हो गई। इसके बाद पंचायत सहायकों के बीच यह स्पष्ट हो गया कि प्रस्तावित मानदेय केवल ₹9,000 है। इससे स्वाभाविक रूप से निराशा और असंतोष बढ़ा। साथ ही, गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला भी चर्चा का विषय बना और बताया जा रहा है कि जानकारी लीक करने वालों सगंठन के तत्वों को भी फटकार मिली।
कल हुई वार्ता में भी अधिकारियों की ओर से इस प्रस्ताव का कोई स्पष्ट समर्थन या पुष्टि नहीं की गई।
यही समय है जब हमें सोचना होगा। यदि 20 जुलाई का धरना न हुआ होता, तो संभव है कि ₹9,000 का मानदेय बिना किसी बड़े विरोध के लागू हो जाता और वही अंतिम मान लिया जाता।
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। पंचायत सहायकों को वास्तविकता पता चल चुकी है। इसलिए आज भी हमारे पास अवसर है कि हम केवल ₹9,000 पर रुकने के बजाय अपने अधिकारों सम्मानजनक वेतनमान, स्थायी सेवा व्यवस्था और न्यायपूर्ण सेवा शर्तों के लिए संगठित होकर संघर्ष करें।
लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। फैसला अभी होना बाकी है। | 1 608 |
| 8 | لا يوجد نص... | 1 480 |
| 9 | वार्ता विफल रही... अगली वार्ता शासन स्तर पर श्रीमान प्रमुख सचिव से होगी।। | 1 806 |
| 10 | आज कारगिल विजय दिवस है।
26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। इस जीत के पीछे हमारे वीर सैनिकों का अदम्य साहस, त्याग और सर्वोच्च बलिदान था। उन सभी वीर जवानों और शहीदों को मैं दिल से नमन करता हूँ।
मेरे लिए यह दिन सिर्फ इतिहास का एक पन्ना नहीं है, बल्कि गर्व का दिन है। क्योंकि मेरे पापा भी कारगिल युद्ध का हिस्सा थे। बचपन से उनकी वर्दी, उनके अनुभव और देश के प्रति उनका समर्पण देखकर हमेशा गर्व महसूस हुआ है।
आज उन सभी सैनिकों को सलाम, जिन्होंने देश के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया।
जय हिंद..🇮🇳🇮🇳 | 2 291 |
| 11 | لا يوجد نص... | 2 443 |
| 12 | निदेशालय जाने वाले प्रतिनिधि मंडल के संबंध में जो वार्ता होनी है वह सभी पंचायत सहायको से संबद्ध है यानि यह 57 हजार पंचायत सहायकों का भविष्य निर्धारित करती है
ऐसे में सभी का सुझाव बहुत जरूरी है
आप सभी साथियों का सुझाव आमंत्रित है.......अपने बहुमूल्य सुझाव विस्तृत रूप से साझा करे ताकि हम उनकी प्रतिनिधि मंडल के साथ संयुक्त रूप से पहुंचाए और अपनी बात मजबूती से रखी जा सके | 2 484 |
| 13 | निदेशालय जाने वाले प्रतिनिधि मंडल के संबंध में जो वार्ता होनी है वह सभी पंचायत सहायको से संबद्ध है यानि यह 57 हजार पंचायत सहायकों का भविष्य निर्धारित करती है
ऐसे में सभी का सुझाव बहुत जरूरी है
आप सभी साथियों का सुझाव आमंत्रित है....... | 2 296 |
| 14 | 20 जुलाई के धरने में संबोधित की गई 4 बिंदु मांगे | 2 151 |
| 15 | वेतन न्यूनतम 18000 से 25000 प्रतिमाह कर भुगतान सीधा राजकोष माध्यम से हो
अनुबंध प्रणाली समाप्त कर स्थाई कर्मी का दर्जा दिया जाए
नगर पंचायत प्रभावित पंचायत सहायकों का समायोजन एवं विवाहित महिला पंचायत सहायकों का स्थानांतरण नीति
सचिव भर्ती में आरक्षण | 2 561 |
| 16 | 20 जुलाई के धरने के बाद श्रीमान निदेशक महोदय के साथ प्रतिनिधि मंडल की बैठक के संबंध में
4 सूत्री मांगों पर होगी वार्ता | 2 563 |
| 17 | لا يوجد نص... | 2 277 |
| 18 | DOC-20260721-WA0028..pdf | 2 187 |
| 19 | O Level से ऊपर (Higher than O Level)
B.Sc. Computer Science (तीनों वर्ष Computer Science)
B.Sc. Computer Application
B.Sc. (IT)
MCA
BCA
IGNOU की BCA एवं MCA
O Level के समकक्ष (Equivalent)
B.Sc. Computer Science (यदि अंतिम वर्ष में Computer Science विषय रहा हो)
B.Sc. Computer Application (यदि अंतिम वर्ष में Computer Application विषय रहा हो)
BBA
ITI का COPA (Computer Operator & Programming Assistant) – 52 सप्ताह (1 वर्ष) का कोर्स
UPDESCO का 480 घंटे/1 वर्ष का Diploma
केंद्र/राज्य सरकार द्वारा स्थापित या मान्यता प्राप्त Board/University/UGC/AICTE/IGNOU/NIELIT (DOEACC) से 1 वर्ष या अधिक अवधि का Diploma in Computer Engineering / Information Technology / Electronics Engineering
राष्ट्रीय कंप्यूटर साक्षरता मिशन (Rashtriya Computer Saksharta Mission) का डिप्लोमा, यदि उपरोक्त मान्यता की शर्तें पूरी करता हो।
O Level के समकक्ष नहीं
CCA (Certificate Course in Computer Applications) – 6 माह का कोर्स, समकक्ष नहीं।
PGDCA – बिना PCM वाले मामले में इस दस्तावेज़ में पात्र नहीं माना गया है। | 2 211 |
| 20 | पंचायत सहायकों को 4–5 साल में कंप्यूटर की कितनी ट्रेनिंग दी गई, ये तो आप सभी जानते हैं। आज अचानक एक प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जा रहा है। अगर उसी प्रमाणपत्र के आधार पर हमें कुशल श्रेणी में माना जा रहा है, तो फिर उसी अनुरूप सैलरी क्यों नहीं दी जा रही हम मानते हैं कि अगर कुशल श्रेणी में लाने के लिए O Level या कोई प्रमाणपत्र जरूरी है, तो ठीक है। लेकिन जब उसे अनिवार्य किया जा रहा है, तो कुशल श्रेणी का वेतन भी लागू होना चाहिए। क्या कोई केंद्र सरकार का ऐसा हस्तक्षेप है जिसकी वजह से सही वेतन नहीं दिया जा सकता? अगर है तो बताइए। और अगर नहीं है, तो फिर दिक्कत क्या है सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या कोई गारंटी देगा कि O Level करने के बाद सैलरी बढ़ेगी? क्योंकि पिछले 5 साल से हम संघर्ष कर रहे हैं। हमारी सुनने वाला कोई नहीं था। अब चुनाव का समय आया है तो थोड़ी-बहुत बातें होने लगी हैं। चुनाव निकलते ही फिर पंचायत सहायकों को भूल जाया जाएगा। इसकी गारंटी कौन लेगा? बात साफ है ये 9,000 स्वीकार नहीं है। भले 6,000 ही रहने दो, लेकिन इस तरह O Level लागू करके नाममात्र का प्रसाद मत दीजिए।
पंचायत सहायक बिना किसी प्रमाणपत्र के भी उससे कहीं ज़्यादा डिज़र्व करते हैं। हमने इन 4 सालों से न जाने कितने योजनाओं परियोजनाओं को कई गुना प्रगति देकर अपनी क्षमता साबित की है। लेकिन आप लोग क्या समझेंगे... क्योंकि शासन के पास पंचायत सहायकों के वास्तविक कार्यों की कोई सही रिपोर्टिंग ही नहीं पहुँचती। जब हमारे काम का सही आकलन ही नहीं होगा, तो हमारे साथ न्याय कैसे करोगे आपके पास हमारा बस 2021 वाला नियुक्ति आदेश ही दिखाई देता उसी से कमजोरी निकाल लेते पर वर्तमान से अंतर कभी नहीं किया जाता।
O Level लागू करना है तो कीजिए, लेकिन उसके साथ न्यूनतम 18000 वेतन भी लागू कीजिए। वरना नहीं स्वीकार ये 9000 ....गलती अपने लोगों की है जो सही से बात न रख पाए खैर | 1 786 |
