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Obunachilar
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*बात चली चांद से सुंदर कौन, हम गुलाब बता बैठें...*
*झुंझलाए वो इस कदर नकाब उठा बैठे...*
बस ये कहकर टाँके लगा दिये उस हकीम ने.!!
कि__ तू जब भी बोलता है रिश्ते टूट जाते हैं ... S...
नज़रे करम मुझ पर इतना न कर,
की तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं,
मुझे इतना न पिला इश्क़-ए-जाम की,
मैं इश्क़ के जहर का आदि हो जाऊं।
हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो,
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो।
कब तक वो मेरा होने से इंकार करेगा; खुद टूट कर वो एक दिन मुझसे प्यार करेगा; इश्क़ की आग में उसको इतना जला देंगे; कि इज़हार वो मुझसे सर-ए-बाजार करेगा।
❤️❤️❤️
