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Vaidic Physics

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If you are interested in VAIDIC PHYSICS and want to promote it, you can join the amazing Research on Aitarey Brahman being done by Rev. Acharya Agnivrat Ji. You can help us as per your interest and ability. Join Channel and contribute in this noble work.

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आत्मीय-आमन्त्रणम् अदृश्य वैश्विक षड्यन्त्र और वैदिक समाधान (वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान — वार्षिक कार्यक्रम) ⬇️ https
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आत्मीय-आमन्त्रणम् अदृश्य वैश्विक षड्यन्त्र और वैदिक समाधान (वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान — वार्षिक कार्यक्रम) ⬇️ https://tinyurl.com/ProgramVP2026 हम आप सभी वेदप्रेमी, राष्ट्रप्रेमी एवं विज्ञानप्रेमी महानुभावों को सादर आमन्त्रित करते हैं। 📢 चलो सिरोही! 🏃 ⏱ 📆 दिनांक— 25, 26 व 27 दिसम्बर (शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार) पौष कृ. २, ३ व ४ वि. सं. २०८३, सृष्टि सम्वत् १,९६,०८,५३,१२७ पंजीकरण करने के लिए लिंक— 🔗 https://tinyurl.com/vaishvikshadyantra 📍स्थान— श्री विजयपताका महातीर्थ, सिरोही 📞 अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें— नरेश चौधरी, कार्यालय सचिव Ph. 9829148400, 9672548851

🔥 नियोग का असली रहस्य क्या है? । सत्यार्थ प्रकाश पर इतना आक्रमण क्यों? क्या आपने कभी इसके मूल सत्य को जानने का प्रयास किया? 🤔 ▶️ पूरी चर्चा देखें– https://youtu.be/X1vIE9VSMpo देखिए और स्वयं निर्णय कीजिए।

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भौतिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष सन्देश मेरे प्रिय छात्र-छात्राओ! कक्षा ११वीं से लेकर बी.एस-सी. और एम.एस-सी. तक आप सभी जो भौतिक विज्ञान पढ़ रहे हैं, एक बात अपने मन में भली-भाँति बैठा लें कि संसार की सभी विद्याओं में साइंस सबसे महत्त्वपूर्ण है और साइंस का मूल आधार फिजिक्स है। ज़ूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री और गणित जैसी अन्य शाखाएँ भी अन्ततः भौतिकी (फिजिक्स) पर ही आकर समाप्त होती हैं। फिजिक्स दुनिया की दिशा तय करने वाला विषय है। फिजिक्स सही दिशा में रहेगा तो पूरी दुनिया सही दिशा में रहेगी। यह गलत दिशा में गया, तो दुनिया भी गलत दिशा में जाएगी। अन्य सभी विषय चाहे आर्ट्स हों, कॉमर्स हों या साइंस इसी से प्रभावित होते हैं। इसलिए संसार को बदलने, भारत को विश्वगुरु बनाने और विश्व में सुख-शान्ति लाने का बहुत बड़ा उत्तरदायित्व आपके कंधों पर है। यह तभी सम्भव होगा, जब आप सही ढंग से पढ़ना सीखेंगे और एक महान् वैज्ञानिक बनने का प्रयास करेंगे। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों के अलग-अलग तरीके देखने को मिलते हैं– पहली श्रेणी: वे जो केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहते हैं। शिक्षक या पुस्तक में जो लिखा है, उसे बिना सोचे-समझे सत्य मान लेते हैं और कोई प्रश्न नहीं उठाते। दूसरी श्रेणी: वे जो बोर्ड पर लिखे शब्दों को बिना समझे केवल कॉपी में उतारते रहते हैं। उन्हें इसके पीछे के 'क्यों' और आधार से कोई मतलब नहीं होता। तीसरी श्रेणी (सच्चे अन्वेषक): वे जो पुस्तकों और सूत्रों को भी शंका की दृष्टि से देखते हैं। वे सोचते हैं कि इसमें कोई त्रुटि तो नहीं या इसे और गहराई से समझने की आवश्यकता है? वे गणित और भौतिकी के सूत्रों को स्वयं सिद्ध करते हैं और पाठ्यक्रम से बाहर जाकर भी प्रश्न पूछते हैं। वैज्ञानिक बनने की यात्रा यहीं (तीसरी श्रेणी के विद्यार्थी) से प्रारम्भ होती है। जिसके मन में प्रश्न हैं और जो किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता, क्योंकि वह किसी किताब या शिक्षक ने कही है, वही भविष्य में वैज्ञानिक बनता है। वैज्ञानिक बनने का अर्थ केवल अधिक अंक या मेरिट लाना नहीं है। कई छात्र अच्छे अंक तो ले आते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम से बाहर कुछ पूछने पर निरुत्तर हो जाते हैं। जैसे मजहबों में अंधविश्वास होता है कि किसी धर्मग्रन्थ, बाबा, मौलवी या पादरी ने कह दिया तो वह अंतिम सत्य है। वैसे ही शिक्षक या पुस्तक की बात को बिना तर्क स्वीकार करना भी एक अंधविश्वास है। केवल साइंस की बातें करना या खुद को आधुनिक व वामपंथी मान लेना ही वैज्ञानिक होना नहीं है। यदि उसमें प्रश्न पूछने की स्वतन्त्रता नहीं है, तो वह भी एक पन्थ या मजहब जैसा ही है। शिक्षकों का पूरा सम्मान करें, लेकिन उनसे प्रश्न अवश्य पूछें। अच्छे शिक्षक प्रश्नों से कभी परेशान नहीं होते, बल्कि प्रसन्न होते हैं। यदि शिक्षक उत्तर न दे पाएँ, तो– पुस्तक के लेखक से पूछिए। वहाँ समाधान न मिले, तो यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर से पूछिए। फिर भी उत्तर न मिले, तो बड़े वैज्ञानिकों से संपर्क कीजिए और जब सभी कह दें कि इसका उत्तर उपलब्ध नहीं है, तब हमारे पास आइए! हम उन प्रश्नों का समाधान वैदिक विज्ञान के माध्यम से देने का प्रयास करेंगे। प्रतिभा का कुछ हिस्सा जन्मजात होता है और कुछ निरन्तर अभ्यास से विकसित होता है। एक महान् वैज्ञानिक बनने के लिए निम्न संकल्प अनिवार्य हैं– 1. पूर्ण एकाग्रता: एक समय में पचास काम करने से बचें। पढ़ते समय मोबाइल का अनावश्यक उपयोग ध्यान भटकाता है। 2. गैजेट्स का सीमित प्रयोग: मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग केवल अध्ययन के लिए करें। मनोरंजन, समय नष्ट करने या चरित्र पतन के लिए बिल्कुल नहीं। 3. ब्रह्मचर्य का पालन: विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। आज आईआईटी जैसे संस्थानों में भी नशे की गंभीर समस्या देखने को मिलती है (जैसा कि फ़रीदाबाद में एक आईआईटी छात्र ने स्वयं स्वीकार किया)। ब्रह्मचर्य से मन एकाग्र रहता है, शरीर स्वस्थ होता है और बुद्धि तीव्र होती है। 4. प्राणायाम और व्यायाम: नियमित व्यायाम और प्राणायाम से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता और सोचने की शक्ति बढ़ती है। आज ही यह दृढ़ संकल्प लें कि आपको भौतिकी में एक सच्चा वैज्ञानिक बनना है। गणित और फिजिक्स के सभी फ़ॉर्मूलों को रिव्यू करें, उन पर विचार और शंकाएँ करें। मनन-चिन्तन से स्वयं समाधान खोजें, शिक्षकों से पूछें और अन्त में जिन प्रश्नों के उत्तर कहीं न मिलें, उन्हें लेकर हमारे पास आएँ, हम आपके प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक रूप से देंगे। —आचार्य अग्निव्रत संस्थापक प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित)

🤷 क्या ईश्वर को केवल मान लेना ही पर्याप्त है? यदि हम ईश्वर को मानते हैं, तो हमारे आचरण में सत्य, ईमानदारी, अहिंसा, चरित्र और धर्म क्यों दिखाई नहीं देते? “अथातो ब्रह्मजिज्ञासा” के आधार पर इस व्याख्यान में विचार किया गया है कि ब्रह्म को जानने की वास्तविक जिज्ञासा क्या है। क्या हमें पहले यह जानने का प्रयास नहीं करना चाहिए कि ईश्वर है भी या नहीं? और यदि है, तो कैसा है? 🎥 वीडियो देखें और इस मूल प्रश्न पर विचार करें— https://youtu.be/JVBT0zx2KdA 👉 क्या हम वास्तव में ईश्वर को जानते हैं या केवल ईश्वर को मानते हैं?

आरक्षण हटाओ या आरक्षण बचाओ? आरक्षण और जातिवाद की समस्या का वास्तविक समाधान क्या हो सकता है? इस वीडियो में इसी प्रश्न पर गम्भीर विचार किया गया है। वीडियो देखें और अपनी राय अवश्य दें– https://youtu.be/JMed6AmNT2g

CJP Protest- समीक्षा | CJP के विरोध प्रदर्शन का विश्लेषण https://youtu.be/vCsfN0tqZqU

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📖 सर्वाधिक विवादित विषय (नियोग) की विवेचना https://youtube.com/shorts/AG6wZZz8DTU नियोग-मीमांसा लेख डाउनलोड करें– ⬇️ https://tinyurl.com/niyog-mimansa यदि विषय उपयोगी लगे, तो इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।

वेद पर 'श्रद्धा' क्यों? क्या आपने कभी स्वयं वेद पढ़े? क्या वेद केवल पूजा-पाठ और परम्परा तक सीमित हैं? अगर हम वेदों का वास्तविक विज्ञान (Science) नहीं समझ पाए, तो हमारी संस्कृति की जड़ें खोखली हो जायेंगी। इस वीडियो में जानिए वेद को बचाने का एकमात्र मार्ग—प्रचार नहीं, शोध है। ◼ क्या वेद केवल परम्परा है? ◼ वेद और आधुनिक विज्ञान का सम्बन्ध? ◼ हमारा कर्तव्य? ◼ वेद को बचाने के लिए किसकी आवश्यकता? 🗓️ 13/07/2026 🕣 08:00PM https://youtube.com/live/EfIl2t8bKc4

विद्या एक रहस्य https://youtu.be/cgpAW0U38ew

विवाह की आयु — ऋषि की भूल या वैज्ञानिक रहस्य कुछ लोग ऋषि दयानन्द द्वारा सत्यार्थ प्रकाश में विवाह की आयु को लेकर उपहास करते हैं। सत्यार्थ प्रकाश चतुर्थ समुल्लास में विवाह की आयु को इस प्रकार दर्शाया है— विवाह की आयु कन्या— १६ वर्ष, पुरुष— २५ वर्ष कन्या— १८-२० वर्ष, पुरुष— ३५-४० वर्ष कन्या— २४ वर्ष, पुरुष— ४८ वर्ष वस्तुतः यह विषय आयुर्वेद का है— जिसके अन्तर्गत शरीर की रचना व क्रिया विज्ञान को गहराई समझने वाला व्यक्ति ही इस विषय पर गम्भीरता से विचार कर सकता है, सामान्य व्यक्ति नहीं। ऋषि दयानन्द ने यह विचार आयुर्वेद के प्रामाणिक ग्रन्थ सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान, अध्याय ३५ में लिखा है— पञ्चविंशे ततो वर्षे पुमान् नारी तु षोडशे। समत्वागतवीर्यौ तौ जानीयात् कुशलो भिषक्॥ १५॥ अर्थात्‌ पुरुष पच्चीसवें वर्ष तथा स्त्री सोलहवें वर्ष में समान वीर्य या परिपूर्ण वीर्य हो जाते हैं ऐसा कुशल वैद्य जान लेवे ॥१५॥ षोडशसप्तत्योरन्तरे मध्यं वयः। तस्य विकल्पो वृद्धियौवनं सम्पूर्णता हानिरिति। तत्र, आविंशतेर्वृद्धिः, आत्रिंशतो यौवनम्, आचत्वारिंशतः सर्वधात्विन्द्रियबलवीर्य्यसम्पूर्णता, अत ऊर्ध्वमीषत्परिहाणिर्यावत् सप्ततिरिति ॥ ३५॥ अर्थात्‌ सोलह वर्ष की आयु से लेकर सत्तर वर्ष की अवस्था पर्यन्त मध्य अवस्था होती है उसके भी वृद्धि, यौवन, सम्पूर्णता और हानि ऐसे चार भेद होते हैं। उनमें बीस वर्ष की आयु तक शरीर के अङ्ग प्रत्यङ्गों की वृद्धि की अवस्था होती है तथा तीस वर्ष तक यौवन एवं चालीस वर्ष तक रस-रक्तादि सर्व धातु, इन्द्रिय, बल और वीर्य इनकी सम्पूर्णता की अवस्था तथा उसके पश्चात् सत्तर वर्ष की आयु तक कुछ-कुछ क्षीणता होने की आयु मानी जाती है।॥ ३५॥ आचार्य सुश्रुत के इन वचनों को पढ़कर कोई भी बुद्धिमान् व्यक्ति सहजता से समझ सकता है कि ऋषि दयानन्द ने विवाह की जो आयु बतलायी है, उसका आधार सुश्रुत संहिता ही है। हाँ, हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि ऋषि दयानन्द ने भगवान् मनु का प्रमाण देकर यह भी बताया है कि विवाह करने के अधिकारी वे कुमार वा कुमारी ही हैं, जिन्होंने आखण्ड ब्रह्मचारी रहकर सङ्गोपाङ्ग न्यूनतम एक वेद का तो विधिवत् अध्ययन कर लिया हो। इसका अर्थ है कि वे शरीर से भी बहुत बलवान् तथा महान् विद्वान् व वैज्ञानिक हों, वे ही विवाह के अधिकारी हैं, अन्य नहीं, क्योंकि अविद्वान्, दुर्बल, रोगी एवं पापी लोग विवाह करके तथा अपने जैसी सन्तान पैदा करके धरती पर भार ही बढ़ाने वाले होंगे। वे न तो किसी दूसरे का भला करेंगे और न स्वयं की ही भलाई कर पायेंगे। स्वप्न में भी शुक्र रज का क्षय न होवें, तब से ४८ वर्ष तक पूर्ण युवा रहेंगे और पूर्ण विद्वान् भी बन जायेंगे। उन्हें सम्पूर्ण आध्यात्मिक व पदार्थ विज्ञान का पूर्ण ज्ञान होगा, जिससे वे संसार का कल्याण करने की योग्यता से युक्त होंगे। इसलिए वर्तमान पतनकाल में यह आयु सीमा उचित नहीं है, क्योंकि ४८ वर्ष में तो व्यक्ति अधेड हो जाता है और वेदादि शास्त्रों के ज्ञान से तो उसका दूर का भी सम्बन्ध नहीं है। आयु का अनुपात शरीरशास्त्र के विज्ञान पर ही आधारित है। कन्या का विवाह २४ वर्ष के पश्चात् करने से सन्तानोत्पत्ति की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती होगी, इसलिए आचार्य सुश्रुत ने १६ः२५ लिखा। उसी के आधार पर ऋषि दयानन्द ने तीन अनुपात बताते हुए उत्तरोत्तर को श्रेष्ठतर माना है। https://audiomack.com/vaidicphysics/song/6a527058173b6 —आचार्य अग्निव्रत प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित)

चुनौती— वेद विज्ञान ही है । Acharya Agnivrat । Vaidic Physics

क्या ब्रह्म को भी भ्रम हो सकता है? ❓प्रश्न जो देते हैं अद्वैतवाद को चुनौती 😱 ▶️ अवश्य देखें— https://youtu.be/Mtu3umuRFPo
क्या ब्रह्म को भी भ्रम हो सकता है? ❓प्रश्न जो देते हैं अद्वैतवाद को चुनौती 😱 ▶️ अवश्य देखें— https://youtu.be/Mtu3umuRFPo