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नमस्कार, राज्याचे मुख्यमंत्री, मा. देवेंद्र फडणवीस साहेबांच्या सर्व कट्टर चाहत्यांचे या ग्रुप मध्ये स्वागत.
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देवाभाऊंच्या हिंदुत्वावर प्रश्न उपस्थित करणाऱ्या पत्रकाराला देवाभाऊंनी आपल्या नेमक्या आणि ठाम उत्तरानेच गप्प केलं…आता ट्रोल करण्याआधी ‘ताई’ देखील दहा वेळा विचार करतील!
तिजोरीची नाडी ओळखणारा नेता, अर्थशास्त्राचा गाढा अभ्यास आणि स्पष्ट दृष्टी देवाभाऊंच्या कामाची शिंदेंकडून प्रशंसा
पत्रकार- अगर आपको एक दिन मिले राजनीति से हटकर अपनी जेड प्लस सिक्योरिटी को हटाकर एक दिन की छुट्टी मिले और आप को कोई नहीं पहचाने। उस दिन के लिए नोबडी रिकग्नाइज हु इज। तो फडनवीस जी उस एक दिन को कैसे इस्तेमाल करेंगे? ऐसी क्या चीज करना चाहेंगे जो आप नहीं कर पाते हैं?
देवेंद्रजी- देखिए मैं तो पहला काम यह करूंगा कि, मेरे घर से निकलकर वो हमारा जो एमएलए हॉस्टल है उसके नीचे में बहुत अच्छा बन मस्का मिलता है। वो वहां जाकर खाऊंगा चाय पिउंगा.. उसके बाद फिर चौपाटी पे जाऊंगा वहां पानी पूरी खाऊंगा उसके बाद फिर एक पिक्चर देखने जाऊंगा,
उसके बाद एक जमाने में मैं रात को जाकर गेटवे ऑफ इंडिया पर बैठता था और दो-ती घंटे समुद्र देखता था। वो जो लहरें आती है ना वो लहरें देखते रहता था। मुझे उससे बहुत सुकून मिलता है।
पत्रकार-"महाराष्ट्र की राजनीति इतनी रोमांचक है कि इस पर एक वेब सीरीज बन सकती है। अगर ऐसी सीरीज बने तो देवेंद्र फडनवीस का किरदार बॉलीवुड के कौन से एक्टर को निभाना चाहिए और विलेन कौन होना चाहिए?
देवेंद्रजी -देखिए कोई अगर बनाना चाहता है तो मैं थोड़ा समय निकाल के मेरा रोल खुद ही कर लूंगा। विलन वो किसी को भी रख ले।
पत्रकार- रात के 2:00 बजे फडनवीस जी अगर आपका फोन बजता है इट्स एज अ प्राइवेट नंबर यू पिक इट अप इट्स उद्धव ठाकरे जी पहला रिएक्शन क्या होगा?
देवेंद्रजी -वो जल्दी सोते हैं, वो नहीं कर सकते.. अगर उनका फोन आने वाला है ये पता रहा तो, मैं रिंगटोन लगा के रखूंगा दोस्त दोस्त ना रहा.......
पत्रकार-आप, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे आप तीनों विधानसभा के एक लिफ्ट में फंस जाते हैं। क्या बातचीत होगी आप लोग के बीच में?
देवेंद्रजी - "बातचीत तो उनमें होगी। मेरे को तो रेफरी का काम करना पड़ेगा।" "मेरी क्या बातचीत होगी?"
पत्रकार- अगर आपको महाराष्ट्र की पिछले 5 साल की राजनीति पर किताब लिखनी हो तो उसका टाइटल क्या देंगे फडनवीस जी?
देवेंद्रजी - देखिए दो टाइटल दे सकते हैं। एक तो टाइटल पक्का शतरंज के खिलाड़ी ही देना पड़ेगा. और दूसरा, जो टाइटल है वो ये "मैं लौट कर आया"।
पत्रकार- "राजनीति के शतरंज में किसके साथ खेलना आपको ज्यादा मुश्किल लगता है? शरद पवार या उद्धव ठाकरे?
देवेंद्रजी - खिलाड़ी तो शरद पवार जी हैं। उद्धव ठाकरे तो मोहरे हैं। हमने क्या किया ये आपको ही समझ में नहीं आया अभी तक।"
जहां तक नितेश राणे का सवाल है कभी-कभी बोलने में वह जब ज्यादा बात बोल जाते हैं तो मैं उनको कह देता हूं कि आपका यह कहना सही नहीं है
मैं आपको यह बताना चाहता हूं। पिछले साल डावोस में 14 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट लाया था। जो एमओयूस थे उनमें से 88% एमओयूस पे काम शुरू हो गया।"
पत्रकार- जिन कंपनियों के साथ फडनवीस जी यहां मंत्रालय में समझौता कर सकते थे उनके साथ वो वहां स्विट्जरलैंड(दावोस) में जाके समझौता कर रहे थे। वहां जाके क्यों किया?
देवेंद्रजी - आपके चैनल का मेन ऑफिस दिल्ली में है। आपने यहां आकर क्यों किया कॉन्क्लेव?
आज श्री रोहित पवार इन्होंने मेरी भी मुलाकात की। उन्होंने मुझे एक पत्र दिया है।
उनका जो पत्र है उसमें जो शंकाएं उन्होंने व्यक्त की है। उस पत्र को मैं मेरा पत्र जोड़कर डीजीसीए को भेजने वाला हूं और उनको कहने वाला हूं। इन सब मुद्दों की भी जांच की जाए।
"ये रॉन्ग नंबर है क्योंकि उनकी पार्टी है मेरी पार्टी थोड़ी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने बैठकर यह निर्णय किया कि सुनेत्रा पवार जी को डिपुटी चीफ मिनिस्टर बनना चाहिए डेट उन्होंने तय की वह मेरे पास आए
देवाभाऊंच्या हिंदुत्वावर प्रश्न उपस्थित करणाऱ्या पत्रकाराला देवाभाऊंनी आपल्या नेमक्या आणि ठाम उत्तरानेच गप्प केलं…आता ट्रोल करण्याआधी ‘ताई’ देखील दहा वेळा विचार करतील!
मैं हमेशा कहता हूं कि अजीत दादा एक ऐसे पॉलिटिशियन थे जो बहुत प्रैक्टिकल विचार करने वाले थे। एकदम हर पॉलिटिक्स में समय कि मांग क्या है? यह समझने वाले आदमी वो थे। कभी ईगो में नहीं अटकते थे या कभी एक प्रकार से पॉलिटिक्स में जिस समय जो निर्णय लेना चाहिए निर्णय लेने वालों में से वो थे
बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल से सारे कागजात बनाकर आते हैं तो और भी मुश्किल जाता है।
लेकिन अभी हम लोगों ने काफी इनके रैकेट्स भी ढूंढे और अब आईआईटी बॉम्बे के साथ हम एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का टूल तैयार कर रहे हैं।
जिसमें अभी तक हमको 60, 65% सफलता मिली है
मैं आपको इतना पक्का बता देता हूं कि, आज तक के इतिहास में सबसे ज्यादा बांग्लादेशी हम लोगों ने पिछले 1 साल में पकड़ कर बांग्लादेश वापस भेजे
मराठी की बात करके कोई अगर यहां पर इस प्रकार से भेदभाव करेगा हम चलने नहीं देंगे।
ऐसी कोई बात यहां नहीं चलेगी। कानून का ही राज चलेगा। कोई ऐसा करता है तो उसके ऊपर कारवाई होगी.
जब मैंने मेट्रो का नेटवर्क तैयार करना शुरू किया, तो उद्धव जी ने कहा कि हम एक पैसा नहीं देंगे।
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