636
Підписники
Немає даних24 години
-37 днів
-1530 день
Архів дописів
मंजिल से गुमराह कर देते हैं लोग,
हर मुसाफिर को हमराह कर देते हैं लोग।
हर किसी से रास्ता पूछना सही नहीं,
क्योंकि नक्शे में भी गलत राह भर देते हैं लोग।
बिन अर्थों के शब्द भी अब है,
खामोशी का जादू हर जबां पर अब है।
रंग थे जो कभी सपनों के,
वो भी अब धुंधले नक्श हैं।
लफ़्ज़ों की दुनिया में खो गए,
जहाँ हर दर्द का अपना जश्न है।
चाहतें जो थीं, अब ख़्वाब सी लगें,
सपनों का शहर भी वीरान सा अब है।
हवा में बिखरी सी कोई बात है,
जैसे सन्नाटे में कोई सुराग है।
शब्द मूक हैं, पर सुनाई देते हैं,
जैसे आँखों में छिपे कुछ सवालात हैं।
बिन अर्थों के शब्द भी अब है,
खामोशी का जादू हर जबां पर अब है।
जो कहना था, वो कभी कहा नहीं गया,
और जो लिखा, वो कभी सुना नहीं गया।
बिन अर्थों के शब्द भी अब है,
खामोशी का जादू हर जबां पर अब है।
रंग थे जो कभी सपनों के,
वो भी अब धुंधले नक्श हैं।
लफ़्ज़ों की दुनिया में खो गए,
जहाँ हर दर्द का अपना जश्न है।
चाहतें जो थीं, अब ख़्वाब सी लगें,
सपनों का शहर भी वीरान सा अब है।
हवा में बिखरी सी कोई बात है,
जैसे सन्नाटे में कोई सुराग है।
शब्द मूक हैं, पर सुनाई देते हैं,
जैसे आँखों में छिपे कुछ सवालात हैं।
बिन अर्थों के शब्द भी अब है,
खामोशी का जादू हर जबां पर अब है।
जो कहना था, वो कभी कहा नहीं गया,
और जो लिखा, वो कभी सुना नहीं गया।
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फासला रखना, जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता।
Вже доступно! Дослідження Telegram за 2025 — головні інсайти року 
