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राजस्थान के थीम पार्क
1.प्रकृति पार्क - चुरु, लक्ष्मणगढ़ (सीकर)
2.कैक्टस गार्डन - कुलधरा (जैसलमेर)
3.बटरफ्लाई पार्क - उदयपुर (अजमेर में प्रस्तावित)
4.बोगनवेलिया थीम - उदयपुर एवं जयपुर
5.जैव विविधता पार्क - गमधर (उदयपुर)
6.डेजर्ट पार्क - किशन बाग (जयपुर)
7.सिटी पार्क एवं फाउंटेन पार्क - मानसरोवर (जयपुर)
8.संविधान पार्क - जयपुर
9.ऑक्सीजन पार्क - कोटा
10.बटरफ्लाई वैली - कुलिश स्मृति वन जयपुर
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🚀 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) 🏛️
राज्य में मानवाधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के धारा 21(1) के तहत राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन 18 जनवरी, 1999 को किया गया, जिसका मुख्यालय जयपुर में है।
संरचना (धारा-21) 🏢
1. गठन के समय आयोग में 5 सदस्य थे।
2. 2006 के संशोधन के बाद आयोग में कुल 3 सदस्य (1 अध्यक्ष + 2 सदस्य) होते हैं।
3. सदस्यता का विवरण:
• अध्यक्ष: उच्च न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीश।
• एक सदस्य: उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त/कार्यरत न्यायाधीश या जिला न्यायालय का न्यायाधीश (कम-से-कम 7 वर्षों का अनुभव)।
• एक सदस्य: मानवाधिकारों में दीर्घ अनुभव।
• इनमें से एक महिला का होना अनिवार्य।
अब तक के अध्यक्ष 👨⚖️
1. कांता कुमारी भटनागर: 23 मार्च, 2000 – 11 अगस्त, 2000।
2. सैयद सगीर अहमद: 16 फरवरी, 2001 – 3 जून, 2004।
3. नगेन्द्र कुमार जैन: 16 जुलाई, 2005 – 15 जुलाई, 2010।
4. एच.आर. कुड़ी (कार्यवाहक): 14 जून, 2012।
5. प्रकाश टाटिया: 11 मार्च, 2016 – 26 नवंबर, 2019 (त्यागपत्र)।
6. महेश चन्द्र शर्मा (कार्यवाहक): जुलाई 2020 – 2021।
7. गोपाल कृष्ण व्यास: जनवरी 2021 – जून 2024।
8. गंगा राम मूलचंदानी: जून 2024 – वर्तमान।
वित्तीय स्वायत्तता 💰
• आयोग को धारा 33 के तहत वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त है।
नियुक्ति प्रक्रिया (धारा 22) 🏅
1. नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जाती है।
2. समिति में विधानसभा के अध्यक्ष, गृहमंत्री और विपक्ष के नेता भी शामिल होते हैं।
3. नियुक्ति की अंतिम स्वीकृति राज्यपाल द्वारा दी जाती है।
त्यागपत्र और बर्खास्तगी (धारा 23) 📝
1. त्यागपत्र:
• अध्यक्ष/सदस्य राज्यपाल को त्यागपत्र सौंपते हैं।
2. बर्खास्तगी:
• राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर पद से हटा सकते हैं।
• बर्खास्तगी का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है।
कार्यकाल (धारा 24) ⏱️
• 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
जांच एजेंसी 🕵️
• आयोग के पास एक पुलिस अधिकारी (महानिरीक्षक स्तर) की अध्यक्षता में अपनी जांच एजेंसी होती है।
जांच के अधिकार 🔍
आयोग मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जांच कर सकता है:
1. स्वप्रेरणा से।
2. पीड़ित द्वारा अर्ज़ी प्रस्तुत करने पर।
3. किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अर्ज़ी प्रस्तुत करने पर।
पाबंदियां 🚫
1. आयोग 1 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की जांच नहीं करता।
2. सेना संबंधी मामले और न्यायालय में लंबित मामले इसकी जांच के दायरे में नहीं आते।
3. यदि किसी मामले की जांच NHRC या अन्य विधिक आयोग कर रहा हो, तो SHRC वह मामला नहीं देख सकता।
सीमाएं ❌
1. आयोग की सिफारिशें सलाहकारी होती हैं।
2. आयोग को मानवाधिकार उल्लंघन के दोषी को दंडित करने या पीड़ित को आर्थिक सहायता देने का अधिकार नहीं है।
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🚀 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) 🏛️
संवैधानिक प्रावधान 📜
• भारतीय संविधान के भाग-14, अनुच्छेद 315 के तहत राज्यों में राज्य लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान है।
आयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 🏺
1. रियासती काल में निष्पक्ष भर्ती के लिए लोक सेवा चयन समितियों की स्थापना
• जोधपुर में (1939)
• जयपुर में (1940)
• बीकानेर में (1946)
2. राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का गठन
• तत्कालीन राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय ने 16 अगस्त, 1949 को अध्यादेश जारी किया।
• आयोग की स्थापना 20 अगस्त, 1949 को जयपुर में हुई।
• 22 दिसंबर, 1949 को अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी हुई, जिसके बाद RPSC विधिक रूप से अस्तित्व में आया।
• आयोग का स्थापना दिवस 22 दिसंबर को मनाया जाता है।
3. स्थानांतरण
• 1956 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर आयोग को जयपुर से अजमेर (घूघरा घाटी) में स्थानांतरित किया गया।
महत्वपूर्ण अध्यक्ष 👨⚖️
• प्रथम अध्यक्ष (कार्यवाहक): सर एस.के. घोष।
• प्रथम स्थायी अध्यक्ष: एस.सी. त्रिपाठी (जुलाई, 1950)।
• सबसे लंबा कार्यकाल: देवी शंकर तिवाड़ी (1951-1958)।
• सबसे छोटा कार्यकाल: पी.एस. यादव (अक्टूबर 1977 से नवंबर 1977)।
• वर्तमान अध्यक्ष: कैलाश चंद मीणा (कार्यवाहक)।
गठन और संरचना 🏢
1. संविधान का अनुच्छेद 315 प्रत्येक राज्य में एक लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान करता है।
2. अनुच्छेद 316 के तहत आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
3. प्रारंभिक संरचना:
• 1949 में: 1 अध्यक्ष + 2 सदस्य।
• 1985 में बढ़ाकर: 1 अध्यक्ष + 5 सदस्य।
• 2011 में बढ़ाकर: 1 अध्यक्ष + 7 सदस्य, जो अब तक यथावत है।
कार्यकाल 🕰️
• 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)।
• 41वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के तहत आयु सीमा 60 से 62 वर्ष की गई।
• सदस्य कार्यकाल समाप्ति पर पुनः नियुक्त नहीं किए जा सकते, परंतु सदस्य को अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
त्यागपत्र और बर्खास्तगी 📝
1. त्यागपत्र
• अनुच्छेद 316(2) के तहत अध्यक्ष और सदस्य राज्यपाल को त्यागपत्र देंगे।
2. बर्खास्तगी
• अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद सिद्ध कदाचार, दिवालियापन, पागलपन, या लाभ का पद स्वीकारने के आधार पर अध्यक्ष या सदस्य को हटा सकते हैं।
• जांच के दौरान राज्यपाल निलंबन कर सकते हैं।
पुनः नियुक्ति पर प्रतिबंध 🚫
• अनुच्छेद 319 के अनुसार आयोग के अध्यक्ष और सदस्य सेवानिवृत्ति के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या अन्य राज्य लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष या सदस्य बन सकते हैं, लेकिन भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन अन्य पद के लिए पात्र नहीं होंगे।
आयोग के कार्य और कर्तव्य 🏆
1. अनुच्छेद 320 के तहत:
• राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का आयोजन।
• पदोन्नति के लिए सिफारिशें करना।
• अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श देना।
2. प्रतिवेदन:
• अनुच्छेद 323 के तहत आयोग राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य ℹ️
• अधिकारी प्रशिक्षण स्कूल (OTS) की स्थापना:
• 14 नवंबर, 1957 को जोधपुर में।
• 1963 में जयपुर स्थानांतरित।
• 1969 में इसका नाम हरिशचंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान कर दिया गया।
• हरिशचंद्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर की पत्रिका: प्रशासनिका।🏅
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राजस्थान राज्य महिला आयोग
राजस्थान राज्य महिला आयोग का गठन राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1999 की धारा 3 के तहत 15 मई, 1999 को किया गया। यह गैर-संवैधानिक व परामर्शकारी निकाय है।
महत्वपूर्ण तथ्य
• 🏛️ मुख्यालय: जयपुर।
• 📜 प्रथम महिला नीति: 8 मार्च, 2000।
संरचना
• 👩⚖️ एक अध्यक्ष और चार सदस्य।
• 👥 सदस्यों में एक अनुसूचित जाति/जनजाति और एक अन्य पिछड़ा वर्ग से महिला होना अनिवार्य।
• ⏳ कार्यकाल: 3 वर्ष।
प्रथम से वर्तमान अध्यक्ष तक
1. 🏅 प्रथम अध्यक्ष: कांता कथूरिया।
2. 🏅 द्वितीय अध्यक्ष: पवन सुराणा।
3. 🏅 तृतीय अध्यक्ष: तारा भण्डारी।
4. 🏅 चतुर्थ अध्यक्ष: प्रो. लाड कुमारी जैन।
5. 🏅 पंचम अध्यक्ष: सुमन शर्मा।
6. 🏅 वर्तमान अध्यक्ष: रेहाना रयाज चिश्ती।
महिला आयोग के कार्य
1. 🔎 महिलाओं के खिलाफ अनुचित व्यवहार की जांच और निर्णय।
2. 📝 सरकार को आवश्यक सिफारिशें करना।
3. ⚖️ महिला हितों के लिए कानूनों को प्रभावी बनाना।
4. 🚫 राज्य लोक सेवाओं और उपक्रमों में महिलाओं के प्रति भेदभाव रोकना।
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राजस्थान राज्य सूचना आयोग
राजस्थान राज्य सूचना आयोग का गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किया गया, जो 12 अक्टूबर, 2005 से भारत में लागू है।
स्थापना
• 📅 13 अप्रैल, 2006 को राजस्थान राज्य सूचना आयोग का गठन।
• 🏢 18 अप्रैल, 2006 से कार्य प्रारंभ।
• 🏛️ मुख्यालय: जयपुर।
• 👤 प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त: एम.डी. कौरानी (18 अप्रैल, 2006 से पद ग्रहण)।
सूचना का अधिकार आंदोलन
• 🏞️ 6 अप्रैल, 1995 को ब्यावर से अरुणा राय के नेतृत्व में सूचना का अधिकार की मांग का आंदोलन शुरू हुआ।
• 🏛️ 26 जनवरी, 2000 को राजस्थान में सूचना का अधिकार कानून, 2000 लागू हुआ।
संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया
1. 🧑⚖️ आयोग में एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और आवश्यकतानुसार (अधिकतम 10) सूचना आयुक्त हो सकते हैं।
👥 वर्तमान में आयोग में 1 अध्यक्ष और 4 सूचना आयुक्त कार्यरत हैं।
2. 👑 नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा गठित समिति की सिफारिश पर।
• 🏛️ मुख्यमंत्री (समिति के अध्यक्ष)।
• 🏛️ विधानसभा में विपक्ष के नेता।
• 🏛️ मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत एक कैबिनेट मंत्री।
त्यागपत्र
• ✉️ राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंपते हैं।
पद से हटाने की प्रक्रिया
• ⚖️ सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर राज्यपाल द्वारा हटाया जा सकता है।
कार्यकाल
• ⏳ 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
• ❌ पुनर्नियुक्ति का प्रावधान नहीं।
लोक सूचना अधिकारी
• 📜 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 5(1) के तहत प्रत्येक सरकारी विभाग में लोक सूचना अधिकारी नियुक्त।
• 📑 लोक सूचना अधिकारी का दायित्व सूचना उपलब्ध कराना है।
धारा 19(7) के तहत
• 🏛️ राज्य सूचना आयोग का आदेश लोक सूचना अधिकारी पर बाध्यकारी होगा।
जुर्माने का प्रावधान
• ❗ सूचना नहीं देने पर अधिकतम ₹25,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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लोकायुक्त
लोकायुक्त एक संवैधानिक संस्था है जो लोक सेवकों के विरुद्ध जनता की शिकायतों की सुनवाई और जांच करती है। इसे राज्य में लोकपाल के समकक्ष माना जाता है।
राजस्थान में लोकायुक्त का इतिहास
1. 🏛️ राजस्थान लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम, 1973 पारित किया गया।
2. 📜 3 फरवरी 1973 से यह अधिनियम लागू हुआ।
3. 🏛️ 27 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।
4. ⚖️ आई.डी. दुआ बने राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त (28 अगस्त 1973)।
5. ⚖️ के.पी.यू. मेनन बने प्रथम उप लोकायुक्त (5 जून 1973)।
संरचना और नियुक्ति
1. 🧑⚖️ संरचना: 1 लोकायुक्त और 8 अन्य सदस्य।
2. 👑 नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा, मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता से परामर्श के बाद।
कार्यकाल
• ⏳ 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो।
• ❌ पुनर्नियुक्ति का प्रावधान नहीं।
पद से हटाने की प्रक्रिया
• ⚖️ उच्चतम न्यायालय की जांच में कदाचार साबित होने पर।
• 🏛️ राज्यपाल, राज्य विधानमंडल के विशेष प्रस्ताव के बाद लोकायुक्त को हटा सकते हैं।
लोकायुक्त का कार्यक्षेत्र
1. 🕵️♂️ भ्रष्टाचार और अनुचित प्रशासनिक कार्यों की जांच।
2. 🗣️ नागरिकों द्वारा शिकायतों की सुनवाई।
3. 📑 लोकायुक्त प्रतिवर्ष राज्यपाल को रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं।
राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अनुसार आरोपों के प्रकार
1. ⚖️ लोक सेवक द्वारा निजी हित में पद का दुरुपयोग।
2. 💼 लोक सेवक द्वारा किसी को अनुचित लाभ या कष्ट पहुंचाना।
3. 💰 भ्रष्टाचार या ईमानदारी की कमी।
लोकायुक्त के दायरे से बाहर के पदाधिकारी
1. 🏛️ मुख्यमंत्री
2. 👔 पूर्व मंत्री
3. 🏛️ विधायक
4. 🏢 सेवानिवृत्त अधिकारी
5. ⚖️ उच्च न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी
6. ⚖️ जिला न्यायाधीश और राजस्थान न्यायिक सेवा के अधिकारी
7. 🗳️ राज्य निर्वाचन आयुक्त और कर्मचारी
8. 🏛️ राजस्थान विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी
9. 📊 महालेखाकार कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी
10. 🏢 राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य और अधिकारी
11. 🏘️ सरपंच
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राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243K के तहत पंचायती राज संस्थानों और अनुच्छेद 243ZA के तहत नगर निकायों के चुनावों के संचालन के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना जुलाई 1994 में हुई।
मुख्य विशेषताएं
1. 🏛 संवैधानिक मान्यता
👉 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत आयोग को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है।
2. ⚖️ स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय
👉 यह प्रदेश का एक स्वतंत्र व स्वायत्त संस्था है।
3. 🧑⚖️ संरचना
👉 एक सदस्यीय आयोग।
👉 प्रमुख अधिकारी: राज्य निर्वाचन आयुक्त।
राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति और कार्यकाल
• 👑 नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा।
• ⏳ कार्यकाल:
• 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
• ❌ पुनर्नियुक्ति का प्रावधान नहीं।
• ❗ पद से हटाने की प्रक्रिया:
👉 आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के अनुसार ही हटाया जाता है।
👉 राज्यपाल के पास स्वतंत्र रूप से हटाने का अधिकार नहीं।
प्रमुख कार्य
1. 🗳️ पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों का संचालन, अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण।
2. 📋 निर्वाचक नामावली और मतदाता सूची तैयार कराना।
राजस्थान के अब तक के राज्य निर्वाचन आयुक्त
🏅 क्रम 👤 नाम 📆 कार्यकाल
1️⃣ अमर सिंह राठौड़ 1 जुलाई 1994 – 1 जुलाई 2000
2️⃣ एन.आर. भसीन 2 जुलाई 2000 – 2 जुलाई 2002
3️⃣ इन्द्रजीत खन्ना 26 दिसम्बर 2002 – 26 दिसम्बर 2007
4️⃣ अशोक कुमार पाण्डे 1 अक्टूबर 2008 – 30 सितम्बर 2013
5️⃣ राम लुभाया 1 अक्टूबर 2013 – 2 अप्रैल 2017
6️⃣ प्रेम सिंह मेहरा 3 जुलाई 2017 – 3 जुलाई 2022
7️⃣ मधुकर गुप्ता 14 अगस्त 2022 – वर्तमान
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
1. 📝 सचिव:
👉 आयोग का एक सचिव होता है, जो राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी होता है।
2. 🗳️ निर्वाचन का संचालन:
👉 पंचायतों और नगर निकायों के सभी चुनावों का संचालन और नियंत्रण आयोग के अधिकार क्षेत्र में है।
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💰 राजस्थान राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission, Rajasthan) 🏛️
📝 राज्य वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 243-I (झ) और 243-Y (म) के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना और उन्हें वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सुझाव देना है।
🕰️ • कार्यकाल: 5 वर्ष
राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्षों की सूची
1. 👔 प्रथम - कृष्ण कुमार गोयल (कार्यकाल: 1 अप्रैल, 1995 – 31 मार्च, 2000)
2. 👨💼 द्वितीय - हीरालाल देवपुरा
3. 👨💼 तृतीय - माणिक चंद सुराणा
4. 👩⚖️ चतुर्थ - डॉ. बी.डी. कल्ला
5. 👩🔬 पंचम - डॉ. ज्योति किरण
6. 👨⚖️ छठा - प्रद्युम्न सिंह (कार्यकाल: 1 अप्रैल, 2020 – 31 मार्च, 2025)
छठे राज्य वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशें 📋: (2020 - 2025)
📊 इस आयोग द्वारा प्रस्तुत अंतरिम प्रतिवेदन में निम्नलिखित अनुशंसाएं की गईं:
1. 💰 राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व का 6.75% हिस्सा पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय स्थानीय निकायों को दिया जाए।
2. 📈 वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर वितरण:
• 🌳 पंचायती राज संस्थाओं को 75.1%
• 🏙️ शहरी स्थानीय निकायों को 24.9%
3. 💵 पंचायती राज संस्थाओं में राशि का जिलेवार वितरण:
• 🏘️ जिला परिषद: 5%
• 🏛️ पंचायत समितियां: 20%
• 🌱 ग्राम पंचायतें: 75%
💼 इस प्रकार, राजस्थान राज्य वित्त आयोग राज्य के पंचायती राज और शहरी निकायों के वित्तीय विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 🏦📈
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Repost from Ras Notes Omendra.... ✍️
सभी विधार्थीयों को सूचित किया जाता हैं की हमारा मुख्य चैनल @rasnotesomiii
copyright में आने के कारण कुछ समय के लिए बंद हो चुका हैं आप तब तक हमारा चैनल https://t.me/rasnotesomiiii
या @rasnotesomiiii जाॅइन करे आपसे सहयोग की अपेक्षा हैं।
धन्यवाद
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नीरज चौधरी जयपुर के पर्वतारोहीं है.... इन्होने ग्रीनलेंड के पश्चिम तट से पूर्वी तट तक स्कीइंग के जरिये बिना किसी सहायता के पहुंचने वाले पहले भारतीय बने...... 👍🏻❤️👆🏻
हाल हीं में इन्हे राज्य स्टेट इलेक्शन का आइकॉन बनाया है..... 👍🏻❤️ महत्वपूर्ण है 👍🏻
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⭕️ गणतंत्र समारोह - 2025 के लिए इंडोनेसिया के राष्ट्रपति - प्रबोवो सुबियांतो होंगे मुख्य अतिथि
╭─❀⊰╯टेलीग्राम पर जुड़े 👇
🥇 @ManishKiPathshala
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🇮🇳 पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत और राजस्थान का प्रदर्शन 🏅
🔹 भारत का प्रदर्शन
1. 🇮🇳 कुल पदक – 6 पदक (1 रजत 🥈, 5 कांस्य 🥉)
2. 🏹 पदक विजेता खिलाड़ी
• 🏆 नीरज चोपड़ा – पुरुषों की भाला फेंक में रजत पदक
• 🏏 भारतीय पुरुष हॉकी टीम – कांस्य पदक
• 🥋 अमन सेहरावत – कुश्ती (57 किग्रा फ्रीस्टाइल) में कांस्य पदक
• 🔫 मनु भाकर – 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक
• 🎯 मनु भाकर और सरबजोत सिंह – 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में कांस्य पदक
• 🏋️ स्वप्निल कुसाले – 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में कांस्य पदक
🔹 राजस्थान का योगदान
1. 🏹 महेश्वरी चौहान – महिला स्कीट और मिश्रित स्कीट टीम स्पर्धा में भाग लिया
2. 🏹 अनंतजीत सिंह नरूका – पुरुष स्कीट और मिश्रित स्कीट टीम स्पर्धा में हिस्सा लिया
📈 महत्वपूर्ण आंकड़े
• 🇮🇳 भारत का कुल दल – 16 खेलों में 117 खिलाड़ी (70 पुरुष और 47 महिलाएं)
• 🏆 टोक्यो 2020 में भारत ने 7 पदक (1 स्वर्ण, 2 रजत, 4 कांस्य) जीते थे
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आरबीआई ने एआई के फाइनेंस क्षेत्र में नैतिक और उत्तरदायित्व प्रयोग के लिए कौनसी समिति की स्थापना की
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निम्न में से किस शहर के एयरपोर्ट को जगद्गुरु तुकाराम एयरपोर्ट नाम दिया गया है
