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🧶 CET Exam 2024 😎 ▪️ आधिकारिक नोटिफैक्शन 🥰 👨‍💻 अगस्त से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन 💃 🙌 CET 2.0 की तिथियां 🤞 ▪️ CET (G) : 25 to 28 Sep. ▪️ 12th CET : 23 to 26 Oct.

🔰 अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार- 2024 ✅ यह पुरस्कार 7 अगस्त 2024 को प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में
🔰 अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार- 2024 ✅ यह पुरस्कार 7 अगस्त 2024 को प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में वन महोत्सव के दौरान में कोटा के ASP पवन कुमार जैन को दिया जायेगा। ✅ पुरस्कार राशि- 50,000 ₹ ✅ अमृता देवी पुरस्कार 1994 में प्रारम्भ किया गया था। ✅ प्रथम बार गंगाराम विश्नोई को यह पुरस्कार दिया गया था। ✅ वन तथा वन्यजीव संरक्षण हेतु प्रदान किया जाता हैं। ✅ खेजड़ली कांड- 1730 (अभयसिंह) ✅ खेजड़ली दिवस - प्रतिवर्ष 12 सितम्बर (1978 से शुरुआत) ✅ मेला- भाद्रपद शुक्ल दशमी (खेजड़ली)

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समान पात्रता परीक्षा (CET)-2024 की विस्तृत विज्ञप्ति आज जारी की जाएगी : डॉ. भाग चन्द बधाल
समान पात्रता परीक्षा (CET)-2024 की विस्तृत विज्ञप्ति आज जारी की जाएगी : डॉ. भाग चन्द बधाल

Neeraj ChoprA🫡
Neeraj ChoprA🫡

◾️ एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत हरियाली तीज की दिन राजस्थान में एक करोड़ पौधे लगाकर बनाया जाएगा विश्व जाएगा विश्व रिकॉर्ड
◾️ एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत हरियाली तीज की दिन राजस्थान में एक करोड़ पौधे लगाकर बनाया जाएगा विश्व जाएगा विश्व रिकॉर्ड 🔹 हरियाली तेज - श्रावण शुक्ल तृतीया (7 अगस्त 2024) 🔹 सीएम भजनलाल शर्मा एसडीआरएफ कैंपस गौड़ाता, जिला दूदू से सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारम्भ करेंगे। Smart fact: 🔹 राजस्थान बजट 2024 - 25 के अनुसार 1 वर्ष में 7 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया। 🔹 एक पेड़ मां के नाम अभियान की राष्ट्रीय स्तर पर  शुरूआत 5 जून 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने तथा राज्य स्तर पर शुरुआत 23 जून 2024 को सीएम भजनलाल शर्मा ने की ।

अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार - 2024 पवन कुमार जैन को (अति महत्वपूर्ण) Smart fact खेजड़ली काण्ड:- √1730 अभय सिंह के काल में मारवाड़ में √नेतृत्व- अमृता देवी विश्नोई √शहीद- 363(महिला- 69) 🖋 अमृता देवी पुरस्कार- 1994 से(प्रथम- गंगा सिंह विश्नोई)           √वन तथा वन्यजीव संरक्षण हेतु प्रदान। 🖋खेजड़ी दिवस- प्रतिवर्ष 12सितम्बर (1978 से शुरुआत)            √मेला- भाद्रपद शुक्ल दशमी, खेजड़ली

✅भारत के अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डेदिल्ली ▪इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇मुम्बई ▪छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇चेन्नई ▪चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇कोलकाता ▪नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇बेंगलोर ▪केम्पेगोडा अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇हैदराबाद ▪राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇रांची ▪बिरसा मुंडा अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇अहमदाबाद ▪सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇जयपुर ▪जयपुर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇तिरुवनंतपुरम ▪त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇गोवा ▪दाबोलिम अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇गुवाहाटी ▪लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोइ अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇अमृतसर ▪श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇कोचीन ▪कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇पोर्ट ब्लेयर {अंड मान निकोबार} ▪वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇कोझिकोड ▪कालीकट अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇भुवनेश्वर ▪बिजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇नागपुर ▪बाबा साहेब अम्बेदकर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇लखनऊ ▪चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇वाराणसी ▪लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇मंगलौर ▪मंगलौर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇कोयंबतूर ▪कोयम्बटूर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇तिरुचिरापल्ली ▪तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇इम्फाल ▪इम्फाल अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र ❇श्रीनगर ▪श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र @RasNotesArnav

▪️विशेष- शैव सम्प्रदाय के आचार्य मत्स्येन्द्र नाथ की राज्य में एकमात्र प्रतिमा इन्द्रगढ़ से मिली है। 🔷 समेद्धश्वर महादेव मन्दिर(चितौड़) ▪️इस मन्दिर का निर्माण मालवा के राजा भोज ने करवाया लेकिन पुनर्निर्माण महाराणा मोकल ने करवाया इसलिए इसे ’’मोकल जी का मन्दिर’’ भी कहते है। ▪️मध्यकाल में पूर्ण विकसित परमार मूर्तिकला का चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में एकमात्र उदाहरण है। 🔷 मातृकुण्ड़िया का मन्दिर-राश्मि गाँव (चित्तौड़गढ़) ▪️बनास नदी के किनारे स्थित मातृकुण्डिया को ’’मेवाड़ का हरिद्वार’’ कहते हैं। ▪️यहाँ स्थित कुण्ड़ में मृत व्यक्ति की अस्थियों का वि,सर्जन किया जाता है। ▪️हरिद्वार की तरह यहाँ भी लक्ष्मण झूला लगा हुआ हैं।

Hindi_Vyakaran_BSER_9_10_11_12 NEW.pdf47.69 MB

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गणगौर अथवा तीज त्यौहारों के अवसर पर स्त्रियों द्वारा घूमर नृत्य के साथ गाया जाने वाला गीत है, जिसके माध्यम से नायिका अपने प्रियतम से श्रृंगारिक साधनों की मांग करती है। 24. औल्यूं गीत ओल्यू का मतलब 'याद आना' है।बेटी की विदाई के समयय गाया जाने वाला गीत है। 25. लांगुरिया करौली की कैला देवी की अराधना में गाये जाने वाले भक्तिगीत लांगुरिया कहलाते है। 26. गोरबंध गोरबंध, ऊंट के गले का आभूषण है। मारवाड़ तथा शेखावटी क्षेत्र में इस आभूषण पर गीत गाया जाता है। 27. चिरमी चिरमी के पौधे को सम्बोधित कर बाल ग्राम वधू द्वारा अपने भाई व पिता की प्रतिक्षा के समय की मनोदशा का वर्णन है। 28. पणिहारी इस लोकगीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रता धर्म पर अटल रहना बताया गया है। 29. इडुणी यह गीत पानी भरने जाते समय स्त्रियों द्वारा गाया जाता है। इसमें इडुणी के खो जाने का जिक्र होता है। 30. केसरिया बालम यह एक प्रकार का विरह युक्त रजवाड़ी गीत है जिसे स्त्री विदेश गए हुए अपने पति की याद में गाती है। 31. धुडला गीत मारवाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है, जो स्त्रियों द्वारा घुड़ला पर्व पर गाया जाता है। 32. लावणी गीत(मोरध्वज, सेऊसंमन- प्रसिद्ध लावणियां) लावणी से अभिप्राय बुलावे से है। नायक द्वारा नायिका को बुलाने के सन्दर्भ में लावणी गाई जाती है। 33. मूमल जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत, जिसमें लोद्रवा की राजकुमारी मूमल का सौन्दर्य वर्णन किया गया है। यह एक श्रृंगारिक गीत है। 🔔 🚩 जय श्री राम 🚩 राजस्थान के प्रमुख सभ्यता स्थल 📌 👉कालीबंगा सभ्यता  =घगघर नदी = हनुमानगढ 👉रंगमहल सभ्यता = घगघर नदी = हनुमानगढ 👉गणेशवर सभ्यता = कांतली नदी = नीम का थाना 👉सुनारी सभ्यता = कांतली नदी = नीम का थाना 👉बालाथल सभ्यता = बेङच नदी = उदयपुर 👉आहङ सभ्यता = बेङच नदी = उदयपुर 👉बागोर सभ्यता = कोठारी नदी = भीलवाड़ा 👉ओझियाना सभ्यता = कोठारी नदी = ब्यावर 👉बैराठ सभ्यता = बाणगंगा नदी = कोट. बहरोङ 👉जोधपुरा सभ्यता = साबी नदी = कोट. बहरोङ 👉नोह सभ्यता = रूपारेल नदी = भरतपुर 👉गरदङा सभ्यता = छाजा नदी = बूंदी 👉तिलवाङा सभ्यता = लूनी नदी = बालोतरा 👉नगरी सभ्यता = बेङच नदी = चितोङगढ 👉जहाजपुर सभ्यता = कोठारी नदी = शाहपुरा 👉तिपटिया सभ्यता =   कोटा 👉सोथी सभ्यता = बीकानेर       ---------- ♣️ राजस्थान के क्षेत्रीय लोक नृत्य 🔷 घूमर नृत्य ▪️स्थान – मारवाड़, जयपुर ▪️विशेष विवरण – राजस्थान के लोक नृत्यों की  आत्मा। 🔷 ढोल नृत्य ▪️स्थान – जालौर ▪️विशेष विवरण – शादी के अवसर पर पुरुषों द्वारा समूह-नृत्य। 🔷 चंग नृत्य ▪️स्थान – शेखावाटी ▪️विशेष विवरण – होली पर पुरुषों का समूह-नृत्य। 🔷 गीदड़ नृत्य ▪️स्थान – शेखावाटी ▪️विशेष विवरण – होली से पूर्व डांडा रोपण से होली के सप्ताह भर बाद तक चलता है। 🔷 झूमर नृत्य ▪️स्थान – हाड़ोती ▪️विशेष विवरण – स्त्रियों द्वारा त्योहारों व मांगलिक अवसरों पर। 🔷 बिंदौरी नृत्य ▪️स्थान – झालावाड़  ▪️विशेष विवरण – होली व विवाह पर पुरुषों द्वारा समूह- नृत्य। 🔷 घुड़ला नृत्य ▪️स्थान – मारवाड़  ▪️विशेष विवरण – लड़कियाँ नाचती हुई घर-घर तेल मांगती है। 🔷 अग्नि नृत्य ▪️स्थान – कतरियासर (बीकानेर) ▪️विशेष विवरण – बीकानेर के जसनाथी सिद्धों द्वारा फतै-फतै के उद्‌घोष के साथ जलते अंगारोंं पर किया जाता है। 🔷 बम नृत्य ▪️स्थान – भरतपुर, अलवर ▪️विशेष विवरण – होली पर ढ़ाईं-तीन फुट ऊंचे नगाड़े पर पुरुषों का समुह-नृत्य। 🔷 लांगुरिया नृत्य ▪️स्थान – करौली  ▪️विशेष विवरण – करौली में कैला देवी के मेले में किया जाने वाला नृत्य। 🔷 डांग नृत्य ▪️स्थान – नाथद्वारा (राजसमंद) ▪️विशेष विवरण – होली के अवसर पर किए जाने वाला नृत्य। 🔷 डांडिया नृत्य ▪️स्थान – मारवाड़ ▪️विशेष विवरण – पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य। 🔷 नाहर नृत्य ▪️स्थान – मांडल (भीलवाड़ा) ▪️विशेष विवरण – शेर की वेशभूषा में किया जाता है। 🔷 ढप नृत्य ▪️स्थान – शेखावाटी ▪️विशेष विवरण – बसंत पंचमी पर किया जाता है। 🔷 चोगोला नृत्य ▪️स्थान – डूंगरपुर ▪️विशेष विवरण – होली पर स्त्रियों-पुरुषों का सामूहिक नृत्य। 🔷 रण नृत्य ▪️स्थान – मेवाड़ ▪️विशेष विवरण – पुरुषों द्वारा हाथों में तलवार लेकर किया जाता है। 🔷 पेजण नृत्य ▪️स्थान – वागड़ (डूंगरपुर, बांसवाड़ा) ▪️विशेष विवरण – दीपावली के अवसर पर किया जाता है। 🔷 चारकुला ▪️स्थान – भरतपुर,अलवर  ▪️विशेष विवरण – महिलाएं  सिर पर बर्तन के ऊपर दीपक जलाकर करती है।

15. ग्रीष्म कालीन महोत्सव -- माउण्ट आबू -- मई 16. शेखावटी महोत्सव -- चुरू - सीकर - झुंझुनू -- फरवरी 17. ब्रज महोत्सव -- भरतपुर -- फरवरी 👍 यहां से लगभग हर साल Bstc में एक प्रश्र छपता है रट लो 🔥 ♣️ गणगौर स्पेशल ✅ ▪️उक्ती 👉 तीज त्योंहार बावडी ले डुबी गणगौर ▪️गणगौर की प्रसिद्ध मिठाई -- गुणे / ढोकला ▪️पूजा - शिव - पार्वती की 🔷 नोट - गण/ईसर --शिव का प्रतीक ,गौर/गौरी --- पार्वती का प्रतीक 🔸काष्ठ की गणगौर -- बस्सी (चितौडगढ) 🔸 गुलाबी गणगौर- नाथद्वारा (राजसमंद) (चैत्र शुक्ल पंचमी ) 🔸 बिना ईसर की गवर - जैसलमेर ( चैत्र शुक्ल चतुर्थ) 🔸 धींगा गवर - मेवाड (वैशाख कृष्ण तृतीय ) 🔸धींगा बेंतमार ---मारवाड (वैशाख कृष्ण तृतीय) ▪️गणगौर घाट - पुष्कर / पिछौला झील किनारे ▪️गणगौर होटल प्रसिद्ध है - जयपुर 🔷 गणगौर महोत्सव प्रसिद्ध है - जयपुर 🔷 गणगौर पर प्रतिबंध लगाया --बूंदी रियासत 🔷 गीदड़ नृत्य के कलाकार -गणगौर कहलाते है ▪️चन्ना की किस्म - गणगौर ♣️ राजस्थान में महत्वपूर्ण बांधों की‌ ऊंचाई ▪️सबसे ऊंचा - जाखम बांध ( प्रतापगढ़ ) ▪️ऊंचाई - 81 मीटर ▪️राणा प्रताप सागर बांध ( चितौड़गढ़ ) ▪️ऊंचाई - 54‌‌ मीटर ▪️जवाहर सागर बांध (कोटा) ▪️ऊंचाई - 45‌‌ मीटर ▪️माही बजाज सागर बांध (बांसवाड़ा) ▪️ऊंचाई - 43 मीटर ▪️राजस्थान का सबसे बड़ा बांध ( 3109 मीटर लम्बा) ▪️कोटा बैराज (कोटा) ▪️ऊंचाई - 37 मीटर ▪️गांधी सागर बांध (मध्य प्रदेश) ▪️ऊंचाई - 62 मीटर ♣️ राजस्थान के लोक गीत 1. झोरावा गीत जैसलमेर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो पत्नी अपने पति के वियोग में गाती है। 2. सुवटिया उत्तरी मेवाड़ में भील जाति की स्त्रियां पति -वियोग में तोते (सूए) को संबोधित करते हुए यह गीत गाती है। 3. पीपली गीत मारवाड़ बीकानेर तथा शेखावटी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के समय स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है। 4. सेंजा गीत यह एक विवाह गीत है, जो अच्छे वर की कामना हेतु महिलाओं द्वारा गया जाता है। 5. कुरजां गीत यह लोकप्रिय गीत में कुरजां पक्षी को संबोधित करते हुए विरहणियों द्वारा अपने प्रियतम की याद में गाया जाता है, जिसमें नायिका अपने परदेश स्थित पति के लिए कुरजां को सन्देश देने का कहती है। 6. जकडि़या गीत पीरों की प्रशंसा में गाए जाने वाले गीत जकडि़या गीत कहलाते है। 7. पपीहा गीत पपीहा पक्षी को सम्बोधित करते हुए गया गया गीत है। जिसमें प्रेमिका अपने प्रेमी को उपवन में आकर मिलने की प्रार्थना करती है। 8. कागा गीत कौवे का घर की छत पर आना मेहमान आने का शगुन माना जाता है। कौवे को संबोधित करके प्रेयसी अपने प्रिय के आने का शगुन मानती है और कौवे को लालच देकर उड़ने की कहती है। 9. कांगसियों यह राजस्थान का एक लोकप्रिय श्रृंगारिक गीत है। 10. हमसीढो भील स्त्री तथा पुरूष दोनों द्वारा सम्मिलित रूप से मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला गीत है। 11. हरजस यह भक्ति गीत है, हरजस का अर्थ है हरि का यश अर्थात हरजस भगवान राम व श्रीकृष्ण की भक्ति में गाए जाने वाले भक्ति गीत है। 12. हिचकी गीत मेवात क्षेत्र अथवा अलवर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत दाम्पत्य प्रेम से परिपूर्ण जिसमें प्रियतम की याद को दर्शाया जाता है। 13. जलो और जलाल विवाह के समय वधु पक्ष की स्त्रियां जब वर की बारात का डेरा देखने आती है तब यह गीत गाती है। 14. दुप्पटा गीत विवाह के समय दुल्हे की सालियों द्वारा गया जाने वाला गीत है। 15. कामण कामण का अर्थ है - जादू-टोना। पति को अन्य स्त्री के जादू-टोने से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत है। 16. पावणा विवाह के पश्चात् दामाद के ससुराल जाने पर भोजन के समय अथवा भोजन के उपरान्त स्त्रियों द्वारा गया जाने वाला गीत है। 17. सिठणें विवाह के समय स्त्रियां हंसी-मजाक के उद्देश्य से समधी और उसके अन्य सम्बन्धियों को संबोधित करते हुए गाती है। 18. मोरिया गीत इस लोकगीत में ऐसी बालिका की व्यथा है, जिसका संबंध तो तय हो चुका है लेकिन विवाह में देरी है। 19. जीरो जालौर क्षेत्र का लोकप्रिय गीत है। इस गीत में स्त्री अपने पति से जीरा न बोने की विनती करती है। 20. बिच्छुड़ो हाडौती क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जिसमें एक स्त्री जिसे बिच्छु ने काट लिया है और वह मरने वाली है, वह पति को दूसरा विवाह करने का संदेश देती है। 21. पंछीडा गीत हाडौती तथा ढूढाड़ क्षेत्र का लोकप्रिय गीत जो त्यौहारों तथा मेलों के समय गाया जाता है। 22. रसिया गीत रसिया होली के अवसर पर ब्रज, भरतपुर व धौलपुर क्षेत्रों के अलावा नाथद्वारा के श्रीनाथजी के मंदिर में गए जाने वाले गीत है। 23. घूमर

▪️राजसिंह ➙ विजय कटकातू (सेनाओ को जीतने वाला), हाइड्रोलिक रूलर 🔷 मारवाड़ के शासक ▪️मालदेव ➙ हिंदू बादशाह, हसमत वाला राजा (वैभव वाला राजा) ▪️चंद्रसेन ➙ मारवाड़ का प्रताप, प्रताप का अग्रगामी, मारवाड़ का भूला बिसरा राजा ▪️गजसिंह ➙ दल थंबन की उपाधि (जहांगीर) द्वारा ▪️अमर सिंह राठौड़ ➙ कटार का धणी ▪️दुर्गादास राठौड़ ➙ राठौड़ों का यूलीसेज (जेम्स टॉड), राजपूताने का गैरीबाल्डी, मारवाड़ का अणबिंदिओ मोती 🔷 बीकानेर के शासक ▪️राव लूणकरण ➙ बिट्टू सुजा ने लूणकरण को कलयुग का कर्ण कहां है ▪️कर्ण सिंह ➙ जांगल धर का बादशाह ▪️रायसिंह ➙ मुंशी देवी प्रसाद ने राजपूताने का कर्ण कहा 🔶 चौहान वंश के शासक ▪️विग्रहराज चतुर्थ ➙ बीसलदेव, कवि बंन्धु ▪️पृथ्वीराज चौहान तृतीय ➙ राय पिथौरा दल पुंगल ♣️ ♣️ राज्य में घटित प्रमुख घटनाएं ▪️मानगढ हत्‍याकांड - 17 नवम्बर 1913 ▪️निमडा हत्याकांड(विजयनगर) - 7 मार्च 1922 ▪️डाबी हत्याकांड(बूंदी) - 2 अप्रैल 1923 ▪️गोविंदपुरा हत्याकांड(चित्तौड़) - 13 जुलाई 1923 ▪️नीमूचणा हत्याकांड - 14 मई 1925 ▪️बीकानेर षड्यंत्र केस - 13 जनवरी 1932 ▪️डोगरा काण्ड (अजमेर) - 4 अप्रैल 1935 ▪️चंडावल घटना (पाली - मारवाड) - 28 मार्च 1942 ▪️दूधवा खारा किसान आंदोलन - 2 जून 1945 ▪️सारगमल गोपा हत्याकांड (जैसलमेर) - 4 अप्रैल 1946 ▪️कांगड कांड(बीकानेर) - 1946 ▪️कृष्णा दिवस (मारवाड) - 1936 ▪️बीरबल कांड (रायसिंह नगर कांड) - 1 जुलाई 1946 ▪️बीरबल दिवस (बीकानेर) - 17 जुलाई 1946 ▪️डाबड़ा कांड ( डीडवाना नागौर) - 13 मार्च 1947 ▪️तसीमौ कांड ( धौलपुर) - 11 अप्रैल 1947 ▪️पुनवाडा कांड ( डूंगरपुर) - 30 मई 1947 ♣️ 👍❤️1857 की क्रान्ति के दौरान राजपूताना के शासक❤️👍 👉राज्य - ☑️ शासक ✅ धौलपुर - महाराजा भगवन्त सिंह ✅ जोधपुर - महाराज तख्त सिंह ✅ बीकानेर - महाराजा सरदार सिंह ✅ टोंक - नवाब वजीरुदौला ✅ जयपुर - महाराजा सवाईरामसिंह - ॥ ✅ प्रतापगढ - महारावल दलपत सिंह ✅ डूँगरपुर - महारावल उदयसिंह ✅ जैसलमेर - महारावल रणजीतसिंह ✅ सिरोही - महारावल शिवसिंह ✅ भरतपुर - महाराजा जसवंतसिंह ✅ उदयपुर(मेवाड़ ) - महाराणा स्वरूपसिंह ✅ करौली - महाराजा मदनपाल ✅ बूँदी - महाराव रामसिंह ✅ अलवर - महाराजा विनयसिंह ✅ बाँसवाड़ा - महारावल लक्ष्मणसिंह ✅ झालावाङ - राजराणा पृथ्वीसिंह ✅ कोटा - महारावल रामसिंह - ॥ TOPPER VILLAGE CLASSES: 🟢 राजस्थान के पशु मेले ✅ ▪️राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेले आयोजित होने वाले जिले - नागौर(3 मेले), झालावाड़(2 मेले)। ⬤ वीर तेजाजी पशु मेला - परबतसर(नागौर) ⬤ बलदेव पशु मेला - मेड़ता शहर(नागौर) ⬤ रामदेव पशु मेला - नागौर ⬤ चन्द्रभागा पशु मेला - झालावाड़ ⬤ गोमती सागर पशु मेला - झालावाड़ ⬤ मल्लीनाथ पशु मेला - तिलवाड़ा (बाड़मेर) ⬤ गोगामेड़ी पशु मेला - गोगामेड़ी (नोहर) ⬤ कार्तिक पशु मेला - पुष्कर(अजमेर) ⬤ जसवन्त पशु मेला - भरतपुर ⬤ महाशिवरात्री पशु मेला - करौली ♣️ ढोला मारू संबंधित तथ्यात्मक जानकारी 🔷 ढोला मारू नृत्य - झालावाड़ 🔶 ढोला मारू चित्रशैली - जोधपुर 🔷 ढोला मारू गीत - सिरोही 🔶 ढोला मारू रा दुहा- कवि कल्लोल 🔷 ढोला मारू री चौपाई- कुशललाभ 🔶 ढोला मारू री कविता - चंदू डाडी ♣️ राजस्थान की प्रमुख औद्योगिक नीतियां 💎 1. प्रथम औद्योगिक नीति 24 जून 1978 2. द्वितीय औद्योगिक नीति अप्रैल 1991 3. तृतीय औद्योगिक नीति 15 जून 1994 4. चतुर्थ औद्योगिक नीति 4 जून 1998 5. पाँचवी नई औद्योगिक व निवेश नीति अगस्त, 2010 6. छठी नई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग नीति • 20 नवम्बर 2015 7. सातवीं नई औद्योगिक विकास नीति 1 जुलाई 2019 RAS ,SI, EO exam स्पेशल ✌️ ♣️ राजस्थान के प्रमुख महोत्सव क्र. स. -- महोत्सव -- स्थान -- तिथि 1. अन्तराष्ट्रीय मरू महोत्सव -- जैसलमेर -- जनवरी - फरवरी 2. अन्तर्राष्ट्रीय थार महोत्सव -- बाड़मेर -- फरवरी - मार्च 3. तीज महोत्सव(छोटी तीज) -- जयपुर -- श्रावण शुक्ल तृतीया 4. कजली/बड़ी/सातूडी तीज -- बूंदी -- भाद्र कृष्ण तृतीया 5. गणगौर महोत्सव -- जयपुर -- चैत्र शुक्ल तृतीया 6. कार्तिक महोत्सव -- पुष्कर, अजमेर -- कार्तिक पूर्णिमा 7. वेणेश्वर महोत्सव -- डुंगरपुर -- माघ पूर्णिमा 8. ऊंट महोत्सव -- बीकानेर -- जनवरी 9. हाथि महोत्सव -- जयपुर -- मार्च 10. पतंग महोत्सव -- जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर -- जनवरी 11. बैलून महोत्सव -- बाड़मेर -- वर्ष में चार बार 12. मेवाड़ महोत्सव -- उदयपुर -- अप्रैल 13. मारवाड़ -- जोधपुर -- अक्टुबर 14. शरद कालीन महोत्सव -- माउण्ट आबू -- नवम्बर