All India GDS Unity
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Dear SPOCs;
DREAM APP Version 1.0.26 is being pushed to all MDM devices from today 3PM onwards.
The DREAM version 1.0.26 has got below enhancements/bug fixes:
1. PLI Agent code capture while proposal indexing
2. PLI Passing channel type while proposal indexing
3. Office code null issue in PLI indexing
4. PLI new proposal server error issue resolution
5. PLI update transaction- 10 min validation from transaction time
6. DSS DQR modifications - Data saving for refund
7. POP up message in Delivery for registered VAS "To be delivered to addressee only"
8. Day Definite delivery modifications
9. Deposit articles data entry for COD articles API implementation
10. International Bookings
11. EBiller display of transaction id and first field in print receipt
12. COD data fetch validation for biller id 0.
13. Student Mail Discount provisions
All SPOCs may be asked to inform BPMs to get the device upgraded to new version. Any upgradation issues may be taken up with concerned divisional IPPB SPOCs.
5 082
*आज दिल्ली उच्च न्यायालय ने ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) के पेंशन अधिकार बरकरार रखे।*
भारत सरकार की चुनौती खारिज, देशभर के ग्रामीण डाक कर्मचारियों को बड़ी राहत। आज 31 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच–VII, जिसमें माननीय न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं माननीय न्यायमूर्ति मधु जैन सम्मिलित थीं, ने एक ऐतिहासिक निर्णय में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए ग्रामीण डाक सेवकों (Gramin Dak Sevaks) को पेंशन के अधिकार प्रदान किए जाने की पुष्टि की है। यह मामला बूटा राम एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य (W.P.(C) No. 3569/2017 एवं संबद्ध याचिकाएँ) शीर्षक से दर्ज था, जिसमें *याचिकाकर्ताओं* की ओर से *श्री विनोद शर्मा* , श्री अंकुर छिब्बर एवं श्री गौरव कुमार, *अधिवक्ता* और प्रतिवादी पक्ष की ओर से श्री सोमेंदु मुखर्जी, श्री अनिरुद्ध घोष, मेघा शर्मा एवं मेहुल सच्चन, अधिवक्ता उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता, जो ग्रामीण डाक सेवक (पूर्व में एक्स्ट्रा डिपार्टमेंटल एजेंट्स) के रूप में कार्यरत हैं, ने वर्ष 2015 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), नई दिल्ली में मूल आवेदन संख्या 749/2015 दायर किया था। उन्होंने माँग की थी कि — उन्हें भारत सरकार के अधीन “सिविल पोस्ट” धारक घोषित किया जाए; उन्हें केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के अंतर्गत पेंशन व ग्रेच्युटी दी जाए; नियमित डाक कर्मचारियों के समान वेतन व सेवा लाभ दिए जाएँ; तथा ग्रामीण डाक सेवक (आचरण एवं नियुक्ति) नियम, 2011 की नियम 3-A, 6 एवं 12 को असंवैधानिक घोषित किया जाए। CAT ने 17 नवंबर 2016 को यह आदेश में यह घोषित किया कि GDS को CCS (Pension) Rules, 1972 के अंतर्गत पेंशन का अधिकार है हालांकि वेतन समानता और नियमितीकरण की मांग कार्यपालिका के क्षेत्र में होने के कारण अस्वीकार की गई। भारत सरकार ने CAT के इस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या W.P.(C) 832/2018 (Union of India & Ors. v. Vinod Kumar Saxena & Ors.) दाखिल की, जिसमें यह कहा गया कि ग्रामीण डाक सेवक नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, अतः उन्हें CCS (Pension) Rules, 1972 के अंतर्गत पेंशन का अधिकार नहीं दिया जा सकता। साथ ही, बूटा राम एवं अन्य (GDS कर्मचारी) ने भी W.P.(C) 3569/2017 दायर कर CAT द्वारा निर्धारित “5/8वां सूत्र” को चुनौती दी, यह कहते हुए कि हिमाचल प्रदेश के दुर्गम व पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीण डाक सेवक पूर्ण 8 घंटे कार्य करते हैं, इसलिए उनकी पूरी सेवा अवधि को (1:1 अनुपात में) पेंशन के लिए गिना जाना चाहिए। दोनों याचिकाओं को एक साथ सुनने के बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने 17.11.2016 के CAT आदेश को पूर्णतः बरकरार रखा और भारत सरकार की चुनौती को खारिज कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ग्रामीण डाक सेवक “सिविल पोस्ट” के धारक हैं; नियम 6 (पेंशन पर रोक) अवैध है; GDS को CCS (Pension) Rules, 1972 के अंतर्गत पेंशन का अधिकार है;
और CAT द्वारा निर्धारित 5/8वां सेवा गणना सूत्र विधिसम्मत है। यह निर्णय देशभर के हजारों ग्रामीण डाक सेवकों के लिए ऐतिहासिक राहत है। इस फैसले ने न केवल उनके सिविल पोस्ट धारक होने के दर्जे को पुष्ट किया है, बल्कि उन्हें पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार भी दिलाए हैं। यह फैसला उन कर्मचारियों की सेवा, गरिमा और समानता के अधिकारों की पुनः पुष्टि करता है जो वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं।
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🚨 Rule3 खेला will start soon.... 🚨
🔥🔥🔥 Stay Tuned 🔥🔥🔥
*📢 Scheduled Downtime Notice*
Sir/Madam,
In order to carry out *essential Database and Resource optimization activities*, there will be a *scheduled downtime of APT Solution* from
🕙 *10:00 PM on 01-11-2025* till *10:00 AM on 02-11-2025.*
During this period, *all components of the APT Solution (except the Enterprise Portal)* shall *not be available* for operations.
*BCP Solution* for *Booking and Bagging operations* shall be made available during this downtime period.
All *RMS Units* can use the *BCP Solution* for their operations from the *night set of 01-11-2025.*
Thanks & Regards,
*Technology Branch*
O/o *General Manager, CEPT Bengaluru*
5 082
🚨 Miss you SS Mahadevaiah Sir! You were fighting for us. Now nobody is with us. Just understand the chronology, why Mahadevaiah was suspended at such a crucial time before final decision by Court for GDS. 🥺😱🤬
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दिल्ली हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर 2025 के फैसले में GDS के लिए पॉज़िटिव बातें
✅ 1. कोर्ट ने दरवाज़ा बंद नहीं किया
भले कोर्ट ने फिलहाल कोई नया लाभ नहीं दिया,
लेकिन उसने साफ कहा —
> “If petitioners have any subsisting grievance, they may approach the appropriate forum again.”
📌 मतलब —
अगर GDS यूनियन या कोई कर्मचारी के पास ठोस कारण है (जैसे वेतन असमानता या सेवा लाभ की कमी),
तो वो फिर से याचिका डाल सकता है।
👉 यानी मामला खत्म नहीं हुआ, रास्ता खुला रखा गया है।
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✅ 2. कोर्ट ने सरकार पर “नीति बदलने” की संभावना खुली छोड़ी
फैसले में लिखा है कि
> “It is a matter of policy, and the government may consider appropriate changes.”
📌 इसका मतलब —
अगर भविष्य में केंद्र सरकार चाहे तो GDS को पेंशन या स्थायी दर्जा देने की नीति बदल सकती है।
कोर्ट ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई।
👉 यानी कानूनी रास्ता खुला है, रोका नहीं गया।
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✅ 3. कोई जुर्माना या नकारात्मक टिप्पणी नहीं
कोर्ट ने यूनियन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया,
ना ही यह कहा कि याचिका बेबुनियाद थी।
सिर्फ इतना कहा गया कि मामला “policy domain” में है।
👉 यानी कोर्ट ने GDS की मांग को गलत नहीं माना, बस कहा — यह नीति का मामला है।
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✅ 4. “कानूनी वैधता” GDS की मांग को मिली
अब क्योंकि यह मामला हाईकोर्ट में सुनकर “disposed of” हुआ,
तो भविष्य में अगर GDS यूनियन फिर से सुप्रीम कोर्ट या सरकार के सामने जाए,
तो यह फैसला एक वैध आधार (legal reference) बनेगा।
👉 यानी आगे की लड़ाई के लिए ये एक वैध स्टेप है।
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❌ लेकिन ध्यान दो – अभी क्या नहीं हुआ:
कोई नई पेंशन मंजूरी नहीं मिली।
कोई वेतन वृद्धि आदेश नहीं।
कोई स्थायी दर्जा निर्णय नहीं।
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📊 संक्षेप में:
पहलू स्थिति
कोर्ट का निर्णय नीति मामला बताया
पेंशन नहीं, पर संभावना खुली
भविष्य की कार्रवाई यूनियन या कर्मचारी पुनः याचिका डाल सकते हैं
कोर्ट का रुख न्यूट्रल लेकिन पॉज़िटिव
अगला कदम सरकार पर निर्भर या सुप्रीम कोर्ट याचिका
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🧮 5. वेतन व लाभ
Kamlesh Chandra Committee के अनुसार जो वेतन व भत्ते 2018 में बढ़े थे, वही लागू रहेंगे।
कोर्ट ने कहा कि यूनियन चाहे तो भविष्य में सरकार या पेंशन आयोग से पुनर्विचार की मांग कर सकती है।
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📌 6. अंतिम आदेश
मामला समाप्त — कोई अतिरिक्त आदेश या जुर्माना नहीं।
> “The writ petition is disposed of. No order as to costs.”
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✅ निष्कर्ष (Summary)
मुद्दा फैसला
स्थायी दर्जा नहीं मिला
7वां वेतन आयोग लाभ पहले से लागू
पेंशन अभी नहीं मिलेगी
ग्रेच्युटी/इंश्योरेंस जारी रहेगा
भविष्य की संभावना नीति बदले तो संभव
कोर्ट का आदेश कोई राहत नहीं, पर दोबारा आवेदन की छूट
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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला – GDS केस (31 अक्टूबर 2025)
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📍 1. मामला क्या था
All India Gramin Dak Sevak Union ने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि GDS को नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसा दर्जा, वेतन और पेंशन मिले।
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⚖️ 2. सरकार का जवाब
भारत सरकार (डाक विभाग) ने कहा कि GDS अंशकालिक (part-time) कर्मचारी हैं।
उन्हें पहले से Severance Amount, Gratuity, और Insurance जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं।
इसलिए GDS को CCS Pension Rules के तहत लाना संभव नहीं है।
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⚖️ 3. कोर्ट का निर्णय
अदालत नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
GDS को नियमित कर्मचारी नहीं कहा जा सकता।
सरकार ने पहले ही Kamlesh Chandra Committee की सिफारिशें लागू की हैं।
यदि किसी को कोई शिकायत (subsisting grievance) है तो वे दोबारा याचिका दाखिल कर सकते हैं।
कोई जुर्माना या खर्च आदेश नहीं दिया गया ("No order as to costs")।
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💰 4. पेंशन पर कोर्ट की बात
पेंशन देना सरकार की नीति का विषय है।
अदालत सरकार को बाध्य नहीं कर सकती कि GDS को पेंशन दी जाए।
भविष्य में नीति बदली जा सकती है — कोर्ट ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई।
📌 मतलब:
अभी GDS को पुरानी पेंशन (CCS Pension) नहीं मिलेगी।
मौजूदा Severance Benefit, Service Discharge Benefit Scheme (SDBS) और Insurance Fund जारी रहेगा।
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🧮 5. वेतन व लाभ
Kamlesh Chandra Committee के अनुसार जो वेतन व भत्ते 2018 में बढ़े थे, वही लागू रहेंगे।
कोर्ट ने कहा कि यूनियन चाहे तो
Sevak Union बनाम Union of India
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⚖️ दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला (31 अक्टूबर 2025)
1. कोर्ट ने CAT (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) के पुराने आदेश (दिनांक 17.11.2016 और 01.12.2016) को रद्द कर दिया, जिसमें ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) की सेवा को पेंशन में गिनने का आदेश दिया गया था।
2. कोर्ट ने CAT का 08.08.2019 वाला आदेश बरकरार रखा, जिसमें GDS कर्मचारियों की याचिका खारिज की गई थी।
3. सुप्रीम कोर्ट के फैसले Union of India vs Gandiba Behera (2021) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा —
• ग्रामीण डाक सेवक (GDS) की सेवा को पेंशन योग्य सेवा में नहीं गिना जा सकता।
• GDS कर्मचारियों को CCS (Pension) Rules, 1972 के तहत पेंशन का अधिकार नहीं है।
• उनकी सेवा और नियम नियमित सरकारी कर्मचारियों से अलग हैं।
4. इसलिए कोर्ट ने साफ कहा —
“GDS के रूप में की गई सेवा पेंशन या नियमितीकरण के लिए नहीं गिनी जाएगी।”
5. सभी याचिकाएँ निस्तारित की गईं और किसी भी पक्ष को लागत (खर्च) नहीं दी गई।
5 082
Today, the Hon’ble Delhi High Court has dismissed the GDS Pro-rata Pension case and set aside the CAT Principal Bench order which had favoured GDS employees. The demand for counting GDS service for pension has been dismissed.
The applicants and supporters have decided to continue the legal fight for justice.
5 082
CAT ne 2016 mein bola tha:
1. Jo GDS baad mein regular Group D bane,
unka GDS period pension ke liye count kiya jaaye.
2. Jo GDS retire ho gaye bina regular bane,
unka 5/8th period pension ke liye count ho.
3. Pension CCS (Pension) Rules, 1972 ke hisaab se mile.
Lekin ye CAT ka order ab Delhi High Court ne radd (cancel) kar diya hai.
High Court ne ab kaha
Court ne Supreme Court ke Union of India vs Gandiba Behera (2021) judgment ko follow kiya aur bola:
GDS ka service period pension ke liye count nahi hoga,
aur GDS ko pension ya regularisation ka adhikar nahi hai.
Court ne ye bhi likha:
GDS ki service part-time nature ki hoti hai,
aur unke liye koi aisa kanooni rule nahi hai
jisse unka period pension mein add kiya ja sake.
5 082
Today, the Delhi High Court held the final hearing in the GDS Pro-rata Pension Case, arising from the Principal Bench, CAT, Delhi.
As per available information, the Hon’ble High Court has upheld the Hon’ble CAT Principal Bench verdict in favour of GDS employees.
Official order details are awaited.
5 082
This is the condition of Governance in India. Received a reply after 1 month, which can be given within a week.
