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Rajasthan Exam Mission Gyan

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https://youtube.com/channel/UCiw1T-0cSFruBDzH_3_1Y6A यह टेलीग्राम चैनल राजस्थान की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी ,Pdf एवं Test के लिए समर्पित है।

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу Rajasthan Exam Mission Gyan

Канал Rajasthan Exam Mission Gyan (@cetmg) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 11 551 підписників, посідаючи 17 033 місце в категорії Освіта та 33 456 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 11 551 підписників.

За останніми даними від 18 вересня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на 60, а за останні 24 години на 3, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 6.56%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 3.41% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 758 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 394 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 2.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як राजस्थान, जिला, क्षेत्र, उदयपुर, जोधपुर.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
https://youtube.com/channel/UCiw1T-0cSFruBDzH_3_1Y6A यह टेलीग्राम चैनल राजस्थान की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी ,Pdf एवं Test के लिए समर्पित है।

Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 19 вересня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

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Архів дописів
भारत_के_अपवाह_तंत्र_Theory_+_MCQs_+_PYQs_12th_&_Graduation_Level.pdf4.12 MB

प्रत्यय_Part_02_Theory_+_MCQs_+_PYQs_12th_&_Graduation_Level_18.pdf1.42 MB

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👉राजस्थान की चित्रकला व चित्रकार (RBSE 10th Rajasthan Gk) 1️⃣ मेवाड़ - नासिरुद्दीन, साहिबदीन, नुरुददीन, मनोहर, कृपाराम 2️⃣ नाथद्वारा - बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, राम लिंग, चंपालाल, घासीराम, तुलसीराम 3️⃣ देवगढ़ - श्रीधर अधारे, बगता, कंवला प्रथम, कंवला द्वितीय, हरचंद,बैजनाथ, नंगा, चोखा 4️⃣ जोधपुर - अमरदास भाटी, दाना भाटी, शंकर दास, माधोदास, रामसिंह भाटी, शिवदास, रामा, नाथा, छज्जू, सेफु, डालचंद, वीर जी 5️⃣ बीकानेर - उस्ता अली रजा एवं उस्ता हामिद रूकनुद्धीन, जयकिशन मथेरण, शाह मोहम्मद

डेयरी उद्योग ▪️डेयरी उद्योग का सर्वाधिक विकास - जयपुर में ▪️राजस्थान की प्रथम डेयरी - पदमा डेयरी, अजमेर (1938) ▪️राजस्थान डेयरी विकास निगम का गठन 1977 में विश्व बैंक की सहायता से जयपुर में किया गया 🔷 राजस्थान में संचालित प्रमुख डेयरी 1. वरमुल (जोधपुर) 2. उरमूल (बीकानेर) 3. गंगमूल (गंगानगर) 4. मेट्रो डेयरी बस्सी (जयपुर ग्रामीण) ▪️ऊंटनी के दुग्ध विपणन का केंद्र "जयपुर"  में स्थापित किया गया है

राजस्थान के प्रमुख पठारों का विवरण इस प्रकार है [Special RAS Pre, Sub Inspector, ‌CET Exam] 1. उड़िया का पठार ▪️स्थान : सिरोही (गुरु शिखर के पास) ▪️विशेषता : यह (1360) मीटर की ऊँचाई के साथ राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार है। 2. भोराट का पठार ▪️स्थान : गोगुन्दा (उदयपुर) से कुम्भलगढ़ (राजसमंद) के मध्य ▪️विशेषता :(1225) मीटर ऊँचा यह पठार राज्य का दूसरा सर्वोच्च पठार है। 3. आबू पर्वत ▪️स्थान- सिरोही ▪️विशेषता : (1200) मीटर ऊँचा यह पठार राजस्थान का तीसरा सबसे ऊँचा पठार माना जाता है। 4. मेसा का पठार ▪️स्थान : चित्तौड़गढ़ ▪️विशेषता : इसकी ऊँचाई (620) मीटर है। ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ का किला इसी पठार पर स्थित है। 5. ऊपरमाल का पठार ▪️स्थान : भैंसरोडगढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजोलिया (भीलवाड़ा) के बीच ▪️विशेषता : यह एक उपजाऊ पठारी क्षेत्र है जो मुख्य रूप से दक्कन के पठार का ही हिस्सा है। 6. लसाडिया का पठार ▪️स्थान : जयसमंद झील (उदयपुर/सलुंबर) के पूर्व में ▪️विशेषता : यह अत्यधिक कटा-फटा और असमान धरातल वाला पठार है। 7. हाड़ौती का पठार (दक्षिणी-पूर्वी पठार) ▪️स्थान : कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ ▪️विशेषता : यह राजस्थान का सबसे बड़ा और विस्तृत पठार है, जहाँ मुख्य रूप से काली मिट्टी पाई जाती 8.पीड़मांड का पठार - ▪️स्थान- यह पठार देवगढ़ (राजसमंद) में स्थित है| ▪️विशेषता इसे पीड़मांड का मैदान भी कहते हैं| 9. काकनवानी या कासना का पठार ▪️स्थान - यह पठान अलवर के सरिस्का अभ्यारण में स्थित है| ▪️विशेषता जिस पर मुख्य रूप से बंदर पाए जाते हैं| सरिस्का में चार धार्मिक स्थलों है | 10.धोराजी का पठार - ▪️स्थान- यह पठार चित्तौड़गढ़ में स्थित है 11.मानदेसरा का पठार - ▪️स्थान यह पठार चित्तौड़ जिले में स्थित है|

घन वाद्य यंत्रः- वे वाद्य यंत्र जो धातु से बने होते हैं।🔰 प्रमुख घन वाद्य यंत्र:- 1. मंजीराः- ▪️यह पीतल तथा काँसा की मिश्रित धातु का बना होता हैं। ▪️इसकी आकृति गोलाकार हैं। ▪️यह हमेशा जोड़े में बजाया जाता हैं। कामड़ जाति की महिलाएँ तेरहताली नृत्य करने समय बजाती हैं। 2. झाँझः- ▪️यह मंजीरे की बड़ी अनुकृति हैं। ▪️यह बड़े ढ़ोल तथा तासा के वादन के साथ बजाया जाता हैं। शेखावाटी क्षेत्र में कच्छी घोड़ी नृत्य करते समय बजाया जाता हैं। 3. थालीः- ▪️यह काँसे की बनी होती हैं। चरी नृत्य के समय प्रयोग किया जाता हैं। 4. चिमटाः- ▪️यह लाहे की दो पतली पट्टिकाओं से मिलकर बना होता हैं। इन पट्टियों के बीच में लोहे की गोल-गोल छोटी पत्तियों लगा दी जाती हैं। ▪️इसे बायें हाथ में पकड़कर दाएँ हाथ की अँगुलियों से भजन कीर्तन के समय बजाया जाता हैं। 5. घण्टा (घड़ियाल)ः- ▪️यह पीतल तथा अन्य धातु का बना होता हैं इसकी आकृति गोलाकार होती हैं। ▪️इसे डोरी से लटकाकर हथोड़े या डंडे से चोट मारकर बजाया जाता हैं। इसका प्रयोग मंदिरों में होता हैं। ▪️इसका छोटा रूप घण्टी कहलाता हैं। 6. झालरः- ▪️काँसे या ताँबे की बनी मोटी चक्राकार प्लेट (तश्तरी) जैसी होती हैं। जिस पर लकड़ी की डंडी से चोट मार कर बजाया जाता हैं। यह मंदिरों में सुबह-शाम आरती के समय बजाई जाती हैं। 7. भरनीः- ▪️मिट्टी के मटके के संकरे मुँह पर कांसे की प्लेट ढककर दो डंडियों की सहायता से बजाया जाने वाला वाद्य। ▪️यह अलवर-भरतपुर जिलों के सर्प के काटे हुए का लोक देवताओं के यहाँ इलाज करते समय बजाया जाता हैं। 8. घड़ाः- ▪️मिट्टी का बना होता हैं। इसका मुँह छोटा होता हैं, वादक इसे दोनों हाथों में उटाकर मुँह से उसके अंदर फूँक मारते हुए उसे अपने अंददाज में हिलाता रहता हैं जिससे मधुर संगीत निकलता हैं। ▪️यह मुख्य रूप जैलमेर-बाड़मेर में भक्ति संगीत के दौरान बजाया जाता हैं। 9. घुँघरूः- ▪️यह पीतल या कांसे का बना छोटा गोल (घण्टाकार) वाद्य हैं, जिनके अंदर लोहे के छोटे गोल छर्रे या कंकड़ रहते हैं। ▪️नृत्य करते समय कलाकार पैरों में बांधता हैं। 10. करतालः- ▪️इसमें दो चैकोर लकड़ी के टुकड़ों के बीच में पीतल की छोटी-छोटी गोल तश्तरियाँ लगी रहती हैं जो कि लकड़ी के टुकड़ों को परस्पर टकराने के साथ मधुरता से झंकृत होती हैं। ▪️यह हाथ की अँगुलियों एवं अंगूठे में पहनकर बजाया जाता हैं। इसका मेल मंजीरे एवं इकतारे से हैं। 11. खड़तालः- ▪️लकड़ी के चार छोटे-छोटे चिकने एचं पतले टुकड़ों से बना होता हैं। ▪️यह दोनों हाथों में लेकर बजाया जाता हैं। ▪️इसका प्रसिद्ध कलाकार स्व. सद्दीक खाँ मांगणियार था। 12. रमझोलः- ▪️चमड़े की पट्टी पर बहुत सारे छोटे-छोटे घुँघरू सिले होते हैं, जिन्हें दोनों पैरों पर नृत्य करते समय घुटनों तक बाँधा जाता हैं। ▪️होली के अवसर पर गैर नृत्य करते समय लोग बाँधते हैं। 13. घुरालियोंः- ▪️यह पाँच-छः अंगुल लम्बी बाँस की खपच्ची से बना होता हैं। ▪️इसके एक ओर छीलकर मुख पर धागा बाँध दिया जाता हैं। ▪️इसे दाँतों के बीच दबाकर धागे को ढील एवं तनाव देकर बजाया जाता हैं। ▪️यह कालबेलिया एवं गरासिया जाति का प्रमुख वाद्य हैं।

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (जुलाई 1994 जयपुर)➡️आयोग की स्थापना ▪️आदेश - 17 June 1994 ▪️कार्य प्रारंभ - 1 July 1994 ▪️पंचायती राज - भाग 9 / अनु. 243 K (ट) ▪️नगरीय संस्था - भाग 9 क / अनु. 243 ZA (य क) ▪️नियुक्ति - राज्यपाल ▪️त्याग पत्र - राज्यपाल ▪️कार्यकाल - 5/65 वर्ष ▪️हटाना - महाभियोग राष्ट्रपति (नोट: प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी) वेतन भत्ता निर्धारण - राज्यपाल ▪️कार्यकाल - 5/65 वर्ष (2002 से), 6/62 वर्ष (पहले) ▪️प्रथम आयुक्त - अमरसिंह राठौड़ (6 वर्ष) ▪️वर्तमान आयुक्त - राजेश्वर सिंह ▪️सर्वाधिक कार्यकाल - अमरसिंह राठौड़ (6 वर्ष) ▪️न्यूनतम कार्यकाल - नेकम राम भसीन ▪️संवैधानिक निकाय ▪️पुनर्नियुक्ति प्रावधान नहीं ▪️एकल सदस्य आयोग ▪️शपथ प्रावधान नहीं ▪️पंचायती राज & नगरीय शासन का चुनाव कराना

Use_of_Prepositions_Part1_Theory_+_MCQs_+_PYQs_12th_&_Graduation.pdf3.47 MB

Simple_Interest_Part_01_साधारण_ब्याज_Theory_+_MCQs_+_PYQs_17_Sep.pdf6.41 MB