Evoke IAS : BPSC | UPPSC | UPSC
Відкрити в Telegram
CIVIL SERVICES EXAM {UPSC/UPPSC/BPSC/JPSC/OTHER} KI PREPRATION SE RELATED COMPLETE GUIDANCE,BOOK,NOTES,ETC..EVERYTHING IS RECEIVED THROUGH THIS "CHANEL". "EVOKE IAS" my youtube chanel.visit my chanel share and subscribe. 👉 लाइव क्विज ग्रुप @EvokeIAS_Quiz
Показати більше7 210
Підписники
Немає даних24 години
-17 днів
-130 днів
Архів дописів
Join now 👉 72nd bpsc mains batch. GS paper 2- Geography & economy को शुरू किया जा रहा है |
आगामी test geography & economy से होगा.
Topics:
१. भौतिक विभाजन (भारत और बिहार)
• भू गर्भिक संरचना के आधार पर
• भू आकृति प्रक्रम के आधार पर
• खनिजों की खनन विधियां
२. मृदा (भारत और बिहार) & आद्रभूमि
३. प्राकृतिक वनस्पति
निबंध का विषय- "जितना अधिक हमारे पास होता है, उतना ही कम हम उसका मूल्य समझते हैं |"Next test will be held 18 October (sunday) | time- evening 8 to 10 PM.
सबूत तो मांगेंगे हीवही सबूत लेकर आप SC में भी जाइए। जब तक मामला न्यायालय में है, तब तक आप इंतजार कर लीजिए बाकी जनता 2029 में तय ही करेगी कौन सही है, कौन गलत?
इस तरह सड़क पर भीड़तंत्र के द्वारा कौन सा लोकतंत्र बचेगा?
सबसे Fraud Line - कम्पनी का प्रचार आप सबका फायदा😂 सावधान रहो सतर्क रहो। 🤣🤣गांव घर पर अपने आसपास के लोगों खासकर महिलाओं को जागरुक करिए कि ऐसे लोगों के संपर्क में आकर कोई भी उल्टा सीधा प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें
◼️संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि अहम प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन जिला प्रशासन को किसी भी रैली जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं देनी चाहिए
◼️ताकि किसी भी परीक्षार्थी को बाहरी प्रावधानों का सामना न करना पड़े
मैने चीन ताइवान सहित 8 युद्ध रुकवाए लेकिन उन्होंने नोबेल प्राइज उसको दे दिया
जिसका नाम भी कोई नहीं जानता !
#NobelPeacePrize2026 को लेकर Donald Trump का दर्द फिर छलका 😂
बाकी देश में इस समय दो पक्ष बन चुके हैं
एक पक्ष को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भरोसा है
एक पक्ष ऐसा है जिसे चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भरोसा हैलेकिन एक तीसरा पक्ष हम जैसे लोगों का भी है जो यह मानता है कि भारत जैसे लोकतंत्र में भीड़ तंत्र के माध्यम से
सड़क पर किसी भी फैसले को करने से पहले सुप्रीम कोर्ट में वही सबूत क्यों ना रखे जाएं, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे जा रहे हैं?बाकी रही सही कसर सरकार के preventive measures (कुछ पत्रकार इन्हें दमनकारी नीतियाँ कह रहे) पूरी कर दे रही है।
मूल अधिकार सबको चाहिए मूल कर्तव्य किसी को नहीं निभाना ?
#copied but relatable in today's scenario
तुम्हारा गुस्सा नया नहीं है प्यारे, जिन दिनों हम अन्ना आंदोलन में डफली बजाकर चंदा माँगते थे, उन दिनों हमें भी कोई समझाता था, तो हमें भी ऐसे ही बुरा लगता था..
आज क्या आंदोलन हो रहा. ये तो कुछ नहीं, असली आंदोलन तो वो था.. और तुम क्या नारे लगा रहे हो, हमने भी क्या नारे लगाए थे..ओहो हो हो…
”अन्ना नहीं आंधी है, देश का दूसरा गांधी है…”आज क्या जंतर-मंतर देख रहे हो. तब गांव-गाँव गली-गली ही जंतर-मंतर बन गया था. लेकिन प्यारे,
दस साल बाद समझ आया कि इस देश में अब व्यवस्था परिवर्तन के नारे दरअसल भीड़ की भावना का दोहन करके सत्ता तक पहुँचने का एक मात्र टूल है. जनता की नाराज़गी और असंतोष एक कंधा मात्र है.इसमें फ़ायदा हमेशा राजनीति करने वालों को होता है. जनता को नहीं. तुम कहते हो भगत सिंह का जमाना और आजादी का वक़्त…अरे वो वक़्त दूसरा था, ये वक़्त दूसरा है.
तब आदर्श, नैतिकता और स्वाभिमान का मोल था, आज नहीं हैआज का भगत सिंह भाषण देकर राजनीतिक फायदा उठाता है और फिर ऐसे चुप होता है जैसे कुछ हुआ ही न हो. अन्ना आंदोलन में लोकपाल, सिटीजन चार्टर, राइट टू रिकाल जैसे सपने का लालीपॉप दिखाकर एक दिन मुख्यमंत्री शीशमहल में विराजते पाए गए. ये कौन नहीं जानता? 2016 में जेएनयू की क्रांति हुई तो लगा कि आरएसएस की लंका लग जाएगी और देश में क्रांति होकर रहेगी लेकिन प्यारे, तब कन्हैया कुमार, उमर खालिद के साथ काश्मीर की आजादी का नारे लगाने वाली हमारे जमाने की नेहा वोरा, शहला राशिद बाद में मोदी की कश्मीर अच्छी नीतियों पर किताब लिखती पाई गईं. Left wing के poster boy रहे बहुते क्रांतिकारी कन्हैया कुमार बाद में जाकर राहुल गांधी से ज्यादा गांधी परिवार के जानकार बन गए. उस वक्त मोदी विरोध की सबसे बड़ी ओबीसी युवा आवाज हार्दिक पटेल बाद में कट्टर भाजपाई बने.. क्रांतिकारी जिग्नेश मेवानी क्रांति छोड़ कांग्रेस विधायक बन गए..और सोशल मीडिया पर दलितों और पिछड़ों की सबसे बड़े हिमायती और ब्राह्मणवाद के कट्टर विरोधी दिलीप मंडल साहब बाद में मोदी के सरकारी सलाहकार बनते पाए गए…
और इनके पीछे भागने वाले तुम्हारे जैसे लाखों युवा ठगे रह गए.बस, मेरे कहने का आशय इतना ही है कि आज तुमको जिसका भाषण, जिसकी पोस्ट, जिसके नारे बहुत क्रांतिकारी और आग लगाने वाला लग रहे हैं, वो कल क्या हो जाएँगे, भगवान भी नहीं जानते. मैंने बस इसी से आगाह किया था कि चिल्ला-चिल्लाके व्यवस्था बदलने वाले लोग एक दिन जाकर उसी व्यवस्था में सेट हो जाते हैं और उनके पीछे भगाने वाली तुम्हारे जैसी भीड़ हमेशा ठगी रह जाती है. ये नारे क्रांतिकारी लगते तो हैं, इसमें दो राय नहीं है.
किसी जमाने में ग़रीबी हटाओ,
अच्छे दिन आने वाले हैं ,जैसे नारे भी वही काम करते थे, जो आज कुछ नारे कर रहे हैं. लेकिन जनता से पूछो कि कितनी ग़रीबी हटी, कितने अच्छे दिन आए ? आज अच्छे दिन का नाम लो तो कांग्रेसी से ज़्यादा भाजपाई ही मोदी जी को बुरा भला सुना देते हैं. लेकिन दुखद सत्य ये है कि आज देश में जो हालात हैं, वहाँ संतुलित और सत्य कहने वालों का जमाना लद चुका है.
अब या तो आप पक्ष में हैं या विपक्ष में नहीं तो आपका सर नोच लिया जाएगाफिर भी मैनें इतनी जमीर बचाकर रखी है कि जरूरत पड़ने पर मोदी और राहुल गांधी किसी के विरोध में कभी भी लिख सकता हूँ. क्योंकि अंधभक्ति और अंध समर्थन नहीं हो पाता. ये सब राजनीतिक कार्यकर्ता का काम है, मेरा नहीं. #copied Author Atul ( जो कुछ edit करना जरूरी था उन्हें हटा दिया है)
आप किस मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं 👉 याद रखिए, जिन्हें सफल होना है वो mains का तैयारी कर रहे हैं, आप देख लीजिए क्या कर रहें हैं ??
Hello everyone, आज का test अपने नियत समय पर होगा [शाम 7 से 10 तक (3 hour)] | सभी विद्यार्थी test के लिए तैयार रहिएगा | Question paper answer writing practice group (Sankalp Batch 3.0) में शाम 7 बजें भेज दिया जाएगा जाएगा | @EvokeIAS 🙏
प्रोटेस्ट कवर रहे इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के 3 पत्रकारों शाश्वत, सिया और विजय को दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन.
इसके पहले भी कुछ स्वतंत्र पत्रकारों / यूट्यूब influencers को पुलिस वालों ने बस में बिठाकर प्रदर्शन स्थल से दूर ले जाकर के छोड़ा।
अभी आज ही सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन आई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ना लिया जाए।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल समेत 124 पूर्व नौकरशाहों ने भारत की चुनावी प्रक्रिया के समर्थन में देश की जनता के नाम लेटर लिखा है।पूर्व राजदूतों और रिटायर्ड IAS अधिकारियों ने लिखा,
"हम यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं, क्योंकि आजकल हमारे चुनावों के लिए बिना किसी सबूत के 'धांधली' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस शब्द को बार-बार दोहराने से लोकतंत्र में लोगों का वह भरोसा कमजोर होता है।"यह पत्र ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग और मतदाता सूची के SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्ष के साथ कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन कर रही है। 8 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के सपोर्ट में 42 पूर्व जजों ने लेटर लिखा था।
11 अक्टूबर : अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस
थीम : बाल विवाह समाप्त करें और बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करें
नवरात्र के ये नौ दिन आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां सकारात्मकता और माता रानी का आशीर्वाद लेकर आए।
आप सभी को नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएं!
नवरात्र का प्रथम दिन — माँ शैलपुत्री की आराधना को समर्पितमाँ शैलपुत्री आपके जीवन से हर संकट दूर करें, घर में सुख-समृद्धि लाएँ और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। 🙏❤️ माँ के चरणों में शीश झुकाएँ, श्रद्धा और शक्ति का आशीर्वाद पाएँ! 🚩
🌼 बोलो सच्चे दरबार की जय!🔱 जय माता दी! 🔱
सोशल मीडिया पर आज एक वीडियो खूब वायरल रहा है, जिसे देखकर आप अपनी हँसी नहीं रोक पाएंगे!
क्या हुआ वीडियो में?एक प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस एक लड़की को हिरासत में ले रही थी। तभी एक आंटी जी (बड़ी उम्र वाली महिला) की एंट्री होती है फुल बॉलीवुड ड्रामा स्टाइल में! आंटी: "ये मेरी बच्ची है, आप इसे नहीं ले जा सकते!" 🗣️😭 लेडी पुलिसकर्मी (एकदम शांत होकर):
"कोई बात नहीं मैम, आप भी साथ आ जाओ" 🙂आंटी: "नहीं, नहीं... [ प्यार फुर्र, टाटा, बाय-बाय!" 🏃♀️💨] जैसे ही पुलिस ने आंटी को साथ चलने का ऑफर दिया, आंटी ने अपनी 'बच्ची' को वहीं छोड़ा और निकल लीं
पुलिस constable भी ज्यादातर GenZ हैं
