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𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵

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All Rajasthan competition exam

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵

Канал 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺 𝗦𝗶𝗹𝗮𝘆𝗰𝗵 (@vikramsilaych) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 17 167 підписників, посідаючи 11 674 місце в категорії Освіта та 24 445 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 17 167 підписників.

За останніми даними від 26 липня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на -277, а за останні 24 години на -8, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 114.09%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 39.03% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 19 607 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 6 707 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 14.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як सेना, सिंह, परीक्षा, युद्ध, आयोग.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
All Rajasthan competition exam

Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 27 липня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

17 167
Підписники
-824 години
-517 днів
-27730 день
Архів дописів
फ्यूम पर अधिकार चाहता था जो ना मिलने के कारण अपने आप को संधि वार्ता से अलग कर लिया था इस संधि के तहत 1871 मे सेडान के युद्ध के बाद जर्मनी ने फ्रेकंफर्ट की संधि के तहत अल्सास और लारेंस प्रदेश पर अधिकार कर लिया था उसे फ्रांस को वापस लौट आना पड़ा वही पोलैंड को समुद्र तक पहुंचने के लिए जर्मनी के बीच से पोलिश गलियारे का निर्माण किया गया जर्मनी को आर्थिक सामरिक रूप से पंगु बना दिया गया इसी कारण मार्शल फोच ने कहा था कि "यह संधि नहीं बल्कि 20 वर्षों के लिए युद्धविराम है" और ठीक 20 वर्षों के पश्चात दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया...

आज के दिन 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया के द्वारा सर्बिया पर आक्रमण करने के परिणाम स्वरूप प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई थी इस युद्ध का तात्कालिक कारण 28 जून 1914 को आस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिनेन्ड तथा पत्नी सोफी की गैबरिल़ो नामक व्यक्ति के द्वारा सेराजेवो में गोली मार दी गई थी... 1879 में dual alliance के तहत जर्मनी तथा ऑस्ट्रिया के बीच, उसके बाद 1882 में tripple alliance के तहत जर्मनी ,आस्ट्रिया तथा इटली का गठबंधन हुआ जिस के प्रत्युत्तर में 1894 में रूस तथा फ्रांस का गठबंधन हुआ और 1904 में इंग्लैंड ने फ्रांस के साथ हार्दिक समझौता कर लिया और 1907 में रूस के साथ मिलने के बाद ट्रिपिल आतांत के रूप में यह संगठन अस्तित्व में आया ... इससे पूर्व 10 मई 1871 को फ्रेकंफर्ट कि जो संधि हुई थी उसके तहत फ्रांस के अल्सास और लारेंस प्रदेश जर्मनी ने हासिल कर लिए थे पोएंकारे ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि हमारी पीढ़ी अपने छिने हुए प्रांतों को फिर से वापस ले पाने की आशा में नए जी रही हो तो मुझे तो उसके जीवित रहने के लिए कोई अन्य कारण नहीं दिखाई पड़ता फशोदा काडं को लेकर इंग्लैंड व फ्रांस आमने सामने हो चुके थे लेकिन 1904 के समझौते के तहत इंग्लैंड ने फ्रांस को मोरक्को में अपनी इच्छा अनुसार तथा फ्रांस ने इंग्लैंड को मिस्र में अपनी इच्छा के अनुसार शासन करने की अनुमति दे दी थी लेकिन जर्मनी के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं किया गया था तब 1906 मे स्पेन के अल्जेसिरास के अंदर मोरक्को को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया हालांकि बाद में मोरक्को को स्वतंत्रता दे दी गई 1912 के अंदर सर्बिया, बुलगारिया , यूनान तथा मोंटेनीग्रो ने मिलकर बाल्कन संघ का निर्माण किया जोकि मकदूनिया पर तुर्की अत्याचार कर रहा था हालांकि प्रथम बाल्कन युद्ध के पश्चात इस संघ में आपस में फूट पड़ गई इन सबके बाद 28 June 1914 को ऑस्ट्रिया के राजकुमार फर्डिनेंड अपनी यात्रा के दौरान बोस्निया की राजधानी सेराजोवा पहुंचा जहां पर काला हाथ नामक एक समिति के सदस्य प्रिंसेप के द्वारा फर्डिनेडं और इनकी पत्नी सोफी की हत्या कर दी जाती है जिसके कारण 28 जुलाई 1914 को विश्वयुद्ध औपचारिक रूप से शुरु हो गया 3 अगस्त को जर्मनी ने फ्रांस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी और इसके अगले ही दिन ब्रिटेन भी युद्ध में शामिल हो गया हालांकि अमेरिका प्रारंभ में युद्ध में तटस्थ रहा था लेकिन 6 अप्रैल 1917 को वह भी युद्ध में शामिल हो गया क्योंकि जर्मनी ने लुसिटिनिया नामक जहाज डूब गया था प्रथम विश्व के दौरान लड़ी गई लड़ाईयां मार्न कि लड़ाई प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 6 से 10 सितंबर 1914 के मध्य फ्रांस और जर्मनी के बीच लड़ा गया युद्ध इस युद्ध में जर्मनी की पराजय हुई थी और जर्मनी की प्राची की पक्ष फान माल्टके के स्थान पर फान फाकनहाइन को जर्मन सेनाओ का सेनापति नियुक्त किया गया फाकनहाइन ने 1918 में कहा था कि जर्मनी युद्ध हार गया लेकिन युद्ध में जो कुछ रोमांचक्कारी घटनाएं हुई उसे देखकर आनंद आ गया वर्दून की लड़ाई प्रथम विश्व युद्ध के समय यह सबसे लंबी लड़ाई लड़ी गई थी जो 21 फरवरी 1916 से 18 दिसंबर 1916 के बीच लड़ी गई थी सोम की लड़ाई - जुलाई 1916 में लड़ी गई थी, इस लड़ाई में पहली बार टैंको का इस्तेमाल किया गया था जटलैंड का युद्ध - 31 मई से 1 जून 1916, यह समुद्र में लड़ा गया युद्ध था प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 36 राष्ट्रों ने भाग लिया था जिसमें धुरी राष्ट्रों की ओर से 4 राष्ट्र प्रमुख रूप से थे और 32 राष्ट्र मित्र राष्ट्रों की ओर से लड़ाई लड़ रहे थे प्रारंभ धुरी राष्ट्रों का पलड़ा भारी था लेकिन अंत में मित्र राष्ट्रों ने विजय हासिल की युद्ध के दौरान ही बोल्शेविक क्रांति होने के कारण रूस ने जर्मनी के साथ 3 मार्च 1918 को ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि कर ली और अपने आप को युद्ध से अलग कर लिया था और अंत में 11 नवंबर को 11:00 बजे मार्शल फौच के समक्ष काॉम्पेन के जंगलों में हस्ताक्षर कर दिए इस युद्ध को रोकने का सर्वाधिक प्रयास इंग्लैंड के विदेश मंत्री एडवर्ड ग्रै ने किया लेकिन असफल होने पर उन्होंने निराशा पुराने शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब संपूर्ण यूरोप में दिए बुझ रहे हैं हमारे जीते जी यह पुनः नहीं जलेंगे वही जर्मन जनरल फाकनहाइन फिर घटनाओं से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उन्होंने कहा कि हमारा अंत में चाहे सर्वनाश हो जाए लेकिन यह एक खूबसूरत क्षण था इसके पश्चात 28 जून 1919 को पेरिस के इन वर्साय महलो में प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात जर्मनी के साथ वर्साय की संधि की गई थी इसमें 32 राष्ट्र शामिल हुए थे वार्ता को गुप्त रखने के लिए चार बड़े राष्ट्रों कि परिषद का निर्माण किया गया जिसमें अमेरिका के वुड्रो विल्सन, इटली के ओरलेण्डो ,फ्रासं के क्लिमेंशो और इंग्लैड के लायड जार्ज शामिल थे इटली के प्रतिनिधि

सन 1757 में जून की गर्मी में बंगाल में एक इतिहास प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया था। नाम था प्लासी का युद्ध। इस समय बंगाल का एक व्यापारी था सेठ अमीचंद। बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ओर सेठ अमीचंद के रिश्ते काफी करीबी थे। क्योंकि सेठों की आवश्यकता नवाबों को तो होती ही थी। उसी काल में अमीचंद ने इस बात का फायदा उठाया ओर नवाब के सारे षडयंत्रों की जानकारी वो अंग्रेजों को देता रहा। क्योंकि अमीचंद ने अंग्रेजों से सांठ गांठ कर ली की उसे भी ढेर सारा धन ओर खजाने से हिस्सा मिलना चाहिए। क्लाइव ने भी मजबूरी में हामी भर ली लेकिन सिराजुद्दौला को पद से हटाने के बाद क्लाइव इस बात से मुकर भी गया था। खैर कोई बात नहीं अमीचंद के बेटे फतेहचंद ने कलकत्ता छोड़ दिया ओर वाराणसी आ गए तथा यहां आकर अपने बलबूते पर अमीर भी बन गए। इन्हीं सेठ अमीचंद का पड़पोता हुआ - आधुनिक हिंदी साहित्य का पिता भारतेंदु हरिश्चंद्र। इन्होंने कहा मेरे पूर्वजों को यह धन खा गया अब मैं इस धन को खाऊंगा। आपने भारत दुर्दशा ओर अंधेर नगरी लिखा था। 35 वर्ष की अल्प आयु में आपका देहांत हो गया। निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल

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संवाद एवं असहमति की जगह भी होनी चाहिए यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।

ये कोई विक्रम सिंह है जिन्होंने कोटा से एम ए किया होगा तो इनकी डिग्री मेरे पास आ गई विश्वविद्यालय की गलती से तो इनको कोई जानत
ये कोई विक्रम सिंह है जिन्होंने कोटा से एम ए किया होगा तो इनकी डिग्री मेरे पास आ गई विश्वविद्यालय की गलती से तो इनको कोई जानता है तो...

Photo from Rajveer Singh
Photo from Rajveer Singh

CamScanner 06-07-2026 13.40 (1)(1).pdf79.19 MB

वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा (सामाजिक विज्ञान) में इतिहास विषय के सिंधु घाटी सभ्यता टॉपिक से वर्ष 2011 से 2025 तक की परीक्षाओं में पूछे गए सभी प्रश्न...... https://youtu.be/DwYprXPToD8