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सत्संग से संजीवनी

सत्संग से संजीवनी

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सत्संग रुपी नौका में बैठकर विचारवान भक्त सहजता से भव सागर पार हो जाता है *जो प्रेम गली में आया ही नहीं* *प्रितम का ठिकाना क्या जाने* *जिसने कभी प्रित लगाई नहीं* *वो प्रितम से मिलना क्या जाने* *❣️💓 !! श्री राधा !! 💓❣️*

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*अपनी पत्नी, माताओं बहनों का हमेशा सम्मान करें :* एक स्त्री वह औरत है जिसे बाकायदा हर महीने माहवारी आती है। वहीं माहवारी जिसको स्त्री अपने 11 साल के उम्र से हर महीने बर्दाश्त करती है। यह माहवारी उनका चॉइस नहीं होता। यह तो कुदरत का दिया हुआ एक वरदान होता है। वहीं माहवारी जिसमे पूरा शरीर अकड़ जाता है। कमर टूटने लगती है। पेट का दर्द असहनीय होता है। और मानसिक तनाव इतना की सामान्य दिनों में सिर्फ सोच कर ही सिहरन पैदा हो जाती है। हर महीने के माहवारी के दर्द को बर्दाश्त कर अपने आप को अगले महीने के लिए फिर से दर्द सहने के लिए तैयार कर लेना किसी जंग जितने से कम नहीं। हर महीने ना जाने कितने वर्षों तक ये जंग हर महीने जीतती है स्त्री। तब जाके किसी पुरुष के चेहरे की लालिमा बढ़ती है, तब जाके कोई परिवार चहकता है। और तब किसी के वंश की वृद्धि होती है। अरे एक लड़की तो अपने 11 वर्ष की उम्र से ही किसी की बहू किसी की पत्नी बनने कि मोल चुकाती है, हर महीने दर्द सहकर, ताकि किसी दिन वो वंश की वृद्धि की गौरव बन सके। https://t.me/sss63 गर्भधारण के बाद 3-4 महीने तो अपने आप से ही परेशान। मूड स्विंग, उल्टी, थकान, मानसिक तनाव, और कमर दर्द तो हिस्सा बनने लगता है जिंदगी का। बढ़ते महीने के साथ उस खुद को उस इंजेक्शन के लिए भी तैयार करना पड़ता है जिसे देखकर ही कभी घर में छुप जाया करती थी। और जब बारी आती है बच्चे को जन्म देने की तो वाहा भी असहनीय दर्द से होकर गुजरती है। 9 महीने तक शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती है खुद को, परम्परा को आगे बढाने के लिए। प्रसव पीड़ा 6-8 घंटे। और कभी कभी तो 2- 3 दिन तक। अगर फिर भी नॉर्मल डिलीवरी संभव ना हो तो गर्भ चिर के भी बच्चे को बाहर लाने कि हिम्मत रखती है। शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स और ऑपरेशन के निशान तक ताउम्र ढोने को तैयार हो जाती है। जो चेहरे पर एक पिंपल आ जाने से पूरा घर सिर पर उठा लेती थी। एक स्त्री की मनोदशा एक पुरुष कभी नहीं समझ सकता। और जो अपनी पत्नी की ये मनोदशा भर बस समझ ले तो वो भगवान का ही रूप होता है। लड़कों के कंधा से कंधा मिलाकर चलना बहुत आसान है। पर लड़कियों की बराबरी कर पाना उतना ही मुश्किल। हर महीने खून पानी की तरह बहाना पड़ता है एक स्त्री होने के लिए। हर दर्द को हस्ते हुए सहना पड़ता है एक स्त्री होने के लिए।💜💜 @वर्षा जैन जी की कलम से *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*शाश्वत सत्य तो यही है :* आपके अंतिम संस्कार के बाद क्या होगा ? कुछ ही घंटों में रोने की आवाज पूरी तरह से बंद हो जाएगी। रिश्तेदारों के लिए खाना बनवाने या मंगवाने में जुटे जायेगा परिवार। कुछ पुरुष सोने से पहले चाय की दुकान पर टहलने निकल जाएंगे। कोई रिश्तेदार आपके बेटे या बेटी से फोन पर बात करेगा कि आपात स्थिति के कारण वह व्यक्तिगत रूप से नहीं आ पा रहा है। और तो और इधर आपका मृत शरीर चिता पर जल रहा होगा, उधर आपको अंतिम विदाई देने आए लोगों में से कोई फोन पर किसी से बतिया रहा होगा, कोई वाट्स एप, फेसबुक पर व्यस्त होगा तो दूर झुंड बनाकर बैठे कुछ लोग घर परिवार, व्यवसाय, खेल आदि अन्य विषयों पर चर्चा कर रहे होंगे। अगले दिन रात के खाने के बाद, कुछ रिश्तेदार कम हो जाएंगे, और कुछ लोग सब्जी में पर्याप्त नमक नहीं होने की शिकायत करते होंगे। भीड़ धीरे धीरे छंटने लगेगी। आपका कार्यालय या आपकी दुकान आपकी जगह लेने के लिए किसी ओर को ढूंढने में जल्दबाजी करेगा। महीने के अंत तक आपका जीवनसाथी कोई कॉमेडी शो देख कर हंसने लगेगा। सबका जीवन सामान्य हो जाएगा। आपको इस दुनिया में आश्चर्यजनक गति से भुला दिया जाएगा। इस बीच आपकी प्रथम वर्ष पुण्यतिथि भव्य तरीके से मनाई जाएगी। पलक झपकते ही साल बीत गए और आपके बारे में बात करने वाला कोई नहीं है। https://t.me/sss63 एक दिन बस पुरानी तस्वीरों को देखकर आपका कोई बेहद करीबी आपको याद कर सकता है। लोग आपको आसानी से भूलने का इंतजार कर रहे हैं, फिर आप किसके लिए दौड़ रहे हो ? और आप किसके लिए चिंतित हैं? क्या आप अपने घर, परिवार, रिश्तेदार को संतुष्ट करने के लिए जीवन जी रहे हैं? जिंदगी एक बार ही होती है, बस इसे जी भर के जी लो… और जितना हो सके इसके परम उद्देश्य के जितना निकट पहुंच सको,परमात्मा के निकट पहुंचने का प्रयत्न करें। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया .... सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् .... *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

मूर्ख लोगों की मान्यताओं और अज्ञानी जनों के अभिप्रायों पर कब तक जीवन व्यर्थ बिताओगे ? जरा सोचोः यहाँ क्यों आये हो और क्या कर रहे हो ? अपना नाम लेकर सुबह संकल्प करो। यदि आपका नाम गोविंद है तो कहो: “देख गोविंद ! आज कम से कम बोलना है । वाणी की रक्षा करनी है । जो ज्यादा और अनावश्यक बोलता है उसकी वाणी का प्रभाव क्षीण हो जाता है । जो ज्यादा बोला करता होगा वह झूठ जरुर बोलता होगा, पक्की बात है । कम बोलने से, नहीं बोलने से, असत्य भाषण और निन्दा करने से हम बच जायेंगे । राग-द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध व अशांति से भी बचेंगे । न बोलने में छोटे-मोटे नौ गुण हैं । इस प्रकार मन को समझा दो । ऐसे ही यदि ज्यादा खाने का या कामविकार का या और कोई भी दोष हो तो उसे निकाल सकते हैं । https://t.me/sss63 जो मनुष्य गुरुभक्तियोग के मार्ग से विमुख है वह अज्ञान, अन्धकार और मृत्यु की परंपररा को प्राप्त होता है। - पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

🌻 प्राणिमात्र का मंगल चाहो। यहाँ हम जो देते हैं, वही हमें वापस मिलता है और कई गुना होकर मिलता है। यदि आप दूसरों को सुख पहुँचाने का भाव रखेंगे तो आपको भी अनायास ही सुख मिलेगा। अतः प्राणिमात्र को सुख पहुँचाने का भाव रखो। 🌻 रात्रि में निद्राधीन होने से पहले बिस्तर पर सीधे, सुखपूर्वक बैठ जाओ | आँखें बंद करो | नाक से श्वास लेकर फ़ेफ़ड़ों को भरपूर भर दो | फ़िर उच्च स्वर से ‘ॐ…’ का लंबा उच्चारण करो | फ़िर से गहरा स्वास लेकर ‘ॐ…’ का लंबा उच्चारण करो | इस प्रकार दस मिनट तक करो | कुछ ही दिनों के नियमित प्रयोग के बाद इसके चमत्कार का अनुभव होगा । https://t.me/sss63 रात्रि की नींद साधना में परिणत हो जायेगी | दिल-दिमाग में शांति एवं आनंद की वर्षा होगी | आपकी लौकिक निद्रा योगनिद्रा में बदल जयेगी | 🌻भगवान ने हमें बुद्धि दी है तो उसका उपयोग बन्धन काटने में करें न कि बन्धन बढ़ाने में, हृदय को शुद्ध करने में करें न कि अशुद्ध करने में। यह तभी हो सकता है जबकि हम सत्संग करें। - पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*भय दूर करने हेतु मंत्र :* आनंद रामायण में आता है कि सोते समय या प्रात: अथवा यात्रा के आरम्भ के समय कोई भयभीत व्यक्ति हनुमानजी के ये १२ नाम लेता है तो उसका भय दूर हो जाता है : https://t.me/sss963 १] हनुमान २] अंजनीसुत (अंजनीपुत्र) ३] वायुपुत्र ४] महाबली ५] रामेष्ट अर्थात रामजी के प्रिय ६] फाल्गुनसखा ( अर्जुन के मित्र) ७] पिंगाक्ष (भूरे नेत्रवाले) ८] अमिताविक्रम ( अनंत बलशाली) ९] उदधिक्रमण (समुद्र लाँघनेवाले ) १०] सीताशोकविनाशन ११] लक्ष्मणप्राणदाता १२] दशग्रीवदर्पहा अर्थात रावण के घमंड को दूर करनेवाले । ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०२१ *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl

*भगवान सूर्य नारायण की कष्ट नाशक कथा :* प्राचीन काल की बात है। एक बुढ़िया थी जो नियमित तौर पर रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर अपने आंगन को गोबर से लीपती थी जिससे वो स्वच्छ हो सके। इसके बाद वो सूर्य देव की पूजा-अर्चना करती थी। साथ ही रविवार की व्रत कथा भी सुनती थी। इस दिन वो एक समय भोजन करती थी और उससे पहले सूर्य देव को भोग भी लगाती थी। सूर्य देव उस बुढ़िया से बेहद प्रसन्न थे। यही कारण था कि उसे किसी भी तरह का कष्ट नहीं था और वो धन-धान्य से परिपूर्ण थी। जब उसकी पड़ोसन ने देखा कि वो बहुत सुखी है तो वो उससे जलने लगी। बुढ़िया के घर में गाय नहीं थी इसलिए वो अपनी पड़ोसन के आंगन गोबर लाती थी। क्योंकि उसके यहां गाय बंधी रहती थी। पड़ोसन ने बुढ़िया को परेशान करने के लिए कुछ सोचकर गाय को घर के अंदर बांध दिया। अगले रविवार बुढ़िया को आंगन लीपने के लिए बुढ़िया को गोबर नहीं मिला। इसी के चलते उसने सूर्य देवता को भोग भी नहीं लगाया। https://t.me/sss63 साथ ही खुद भी भोजन नहीं किया और पूरे दिन भूखी-प्यासी रही और फिर सो गई। अगले दिन जब वो सोकर उठी को उसने देखा की उसके आंगन में एक सुंदर गाय और एक बछड़ा बंधा था। बुढ़िया गाय को देखकर हैरान रह गई. उसने गाय को चारा खिलाया। वहीं, उसकी पड़ोसन बुढ़िया के आंगन में बंधी सुंदर गाय और बछड़े को देखकर और ज्यादा जलने लगी। पड़ोसन ने उसकी गायब के पास सोने का गोबर पड़ा देखा तो उसने गोबर को वहां से उठाकर अपनी गाय के गोबर के पास रख दिया। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिन में धनवान हो गई। ऎसा कई दिनों तक चलता रहा। कई दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता नहीं था। ऐसे में बुढ़िया पहले की ही तरह सूर्यदेव का व्रत करती रही और साथ ही कथा भी सुनती रही। इसके बाद जिस दिन सूर्यदेव को पड़ोसन की चालाकी का पता चला। तब उन्होंने तेज आंधी चला दी तो बुढ़िया ने अपनी गाय को अंदर बांध दिया। अगले दिन जब बुढ़िया उठी तो उसने सोने का गोबर देखा तब उसे बेहद आश्चर्य हुआ। तब से लेकर आगे तक उसने गाय को घर के अंदर ही बांधा। कुछ दिन में ही बुढ़िया बहुत धनी हो गई। बुढ़िया की सुखी और धनी स्थिति देख पड़ोसन और जलने लगी। पड़ोसने उसने अपने पति को समझा-बुझाकर उसे नगर के राजा के पास भेजा और बुढिया की उस चमत्कारिक गाय के बारे में बताया। तो राजा ने अपने अनुचर भेजकर गाय को अपने पास मंगवा लिया। जब राजा ने उस सुंदर गाय को देखा तो वो बहुत खुश हुआ। सोने के गोबर को देखकर तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। वहीं, बुढ़िया भूखी-प्यासी रहकर सूर्य भगवान से प्रार्थना कर रही थी। उसी रात सूर्यदेव राजा के सपने में आए और उससे कहा कि हे राजन, बुढ़िया की गाय व बछड़ा तुरंत वापस कर दो। अगर ऐसा नहीं किया तो तुम पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ेगा। सूर्यदेव के सपने ने राजा को बुरी तरह डरा दिया। इसके बाद राजा ने बुढ़िया को गाय और बछड़ा लौटा दिया। *स्वस्थ,सुखी व सम्पन्न जीवन के लिए ये टेलिग्राम चैनल जोईन करें व औरों से भी करवाएं और शेयर करते जाएं :* https://t.me/sss63 https://t.me/sss963 https://t.me/sss981 *टेलीग्राम ऐप पर हमसे जुड़ें* *इसे यहां से डाउनलोड करें:* https://telegram.org/dl