Не попадись на ботовода! Telemetrio знаходить і позначає такі канали мітками 👉 Хочеш бачити мітку, оформляй підписку 👈
काम संहिता🙏
Відкрити в Telegram
सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
Показати більше2 477
Підписники
Немає даних24 години
+237 днів
+3630 днів
2 878
Перегляди допису
~ 53824 години
Немає даних48 годин
116.19%
Коефіцієнт залучення
Немає даних
Дописів на день
Архів дописів
2 477
किसी भी रिश्ते में जब तक एक इंसान जीतता और दूसरा हारता है तब तक रिश्ता कायम रहता है जब दोनों जीतने की कोशिश करते हैं तो रिश्ता टूट जाता है लेकिन जब दोनों हारने लगते हैं तो वो रिश्ता अमर हो जाता है . . . !
दिल💋 विष
2 477
जब कोई प्रेम सम्बन्ध से जल्दी ऊब जाता है तो वह एकदम नही भागता, वह धीरे-धीरे अनदेखा करता है... मतलब एक धीमी मौत!
कह सकते हैं कि, अलग होना अलग होने से पहले शुरू हो जाता है।
😞😭 दिलविष्😢😭
2 477
अपनी हदों पे आके ज़मीं ख़त्म हो गयी
लेकिन मैं इसके बाद भी चलता चला गया।
दिल तो हमारे सीने में भी धड़कता है
तू वो ख्वाब है,अक्सर जिसे मैंने देखा हैं।।
2 477
उम्र में 40+ को पार कर चुकीं महिलाएं बस एक अच्छा दोस्त चाहती हैं।।
वो बांटना चाहती है अपने सफेद होते बालों की सफेदी व अपनी हिना की खुश्बू, जिसके लिए अपनों को अवकाश नही है!
वो चाहती हैं एक ऐसा दोस्त जिससे खुलकर सब-कुछ बोल सके, जिसे कुछ भी बोलने से पहले एक पल को भी सोचना न पड़े...
वो बांटना चाहती है वो पहाड़ जैसे भारी धूप के टुकड़े जो, उससे काटे नही कटते!
2 477
ना जाने कब समझोगे तुम
जाने कब अक्ल पाओगे
कब गोद मे रखोगे सर अपना
कब मुझे गले लगाओगे
कब जुल्फों में फेरोगे उंगलियां
कब आंखों से मुस्कुराओगे तुम
कब लबों पर सौंपोगे मुस्कुराहट
कब कोई नज्म हौले से गुनगुनाओगे तुम
कब करूँगी मैं गलतियां
कब गुस्से से भुनभुनाओगे तुम
कब दौड़ोगे मेरे पीछे
कब वो खींझकर भी गले लगाओगे तुम
कब खामोशी से देखूंगी तुम्हे
कब हौले से दिल में उतर आओगे तुम
कब रख दोगे लब इन अधरों पर
कब जन्मों की प्यास बुझाओगे तुम
कब तक देखूंगी क्षितिज मैं
कबतक बन मृगतृष्णा रह पाओगे तुम
कबतक निखट अकेले राह तकूँगी
कब तक आँगन की तुलसी बन उपज आओगे तुम
कबतक झुंझलाकर झटकूँगी साथ नए
कब माथे पर आँचल बन ढल आओगे तुम
कबतक लिखूँगी तन्हा कविता
कबतक खत दामन में रख जाओगे तुम
कब ओढूंगी मैं लाल चुनरिया
कब दरवाज़े पर आओगे तुम
कब आंखों में भरोगे शरारत
कब नज़रों से सताओगे तुम
अबकी कसकर थामूंगी हाथ
फिर देखूंगी जान ....कैसे बचकर जाओगे तुम
#विरह
2 477
कामुकता विदा हो सकती है लेकिन स्त्री आकर्षण विदा नही होता है। आकर्षण जीवन के अंत तक रहता है। वासना नही जाती सिर्फ वासना परिवर्तन होती है जिसे प्रेम कहते है। वासना का ही दूसरा रूप प्रेम है। वासना और प्रेम अलग अलग नही है। वासना की शुद्ध अवस्था प्रेम है !
कोई भी पुरुष सीधा स्त्री की ओर आकर्षित होगा प्रथम उसका काम केंद्र जागेगा, उर्जा काम के रूप में प्रकट होती है। लेकिन कामुकता जागते ही हम ध्यानी या द्रष्टा बन जाय तब जागी हुई काम उर्जा , ध्यान से प्रेम में परिवर्तन होती है, लेकिन तुम चाहते हो की काम बिलकुल पैदा ही न हो तब प्रेम का अस्तित्व भी सम्भव नही है।
स्त्री में सीधा प्रेम उठता है क्योंकि उसका मूल उर्जा केंद्र हृदय स्थित है, लेकिन पुरुष में सीधा प्रेम नही उठता है, पुरुष की स्थति एक कुएं जैसी है, कुएं रूपी मूलाधार में दुबकी लगाकर वापस हृदय में उर्जा को लाना पड़ता है, तब काम उर्जा प्रेम बन जाती है। फिर वहाँ से वह उर्जा बहती है तब वह अन्यों के हृदय भी जगाती है। काम से सिर्फ स्त्री का गर्भ केंद्र जगाया जा सकता है। जिससे संसार जन्मता है। उर्जा एक ही है, उससे स्त्री का गर्भ केंद्र जगाओ या स्त्री का हृदय जगाओ।
पुरुष प्रथम काम क्रिया स्वाभाविक है, वह प्राकृतिक है, लेकिन उस उर्जा को हृदय में ले जाना परिश्रम है, पुरुषार्थ है,ध्यान है, तप है। स्त्री एक महीने में एक बार काम में जाने की इच्छा करती है क्योंकि उस ऋतुकाल में गर्भ केंद्र संवेदनशील रहता है इसलिए ऋतुकाल में स्त्री की मनोस्थिति कष्टदायक होती है। उस ऋतुकाल में तब स्त्री की मांग काम रहती है। इसिलए स्त्री ऋतुकाल को अपवित्र कहा गया है।
स्त्री की मांग सदा प्रेम की होती है वह काम में इसलिए जाती है क्योंकि काम पुरुष की सबसे बड़ी कमजोरी है, इस कमजोरी से वह पुरुष के साथ काम में रस लेती है।
गहरे अर्थों में स्त्री काम नहीं चाहती वह पुरुष की काम की मांग से पुरुष का मन चाहा उपयोग करती है। जब तक पुरुष से स्त्री को प्रेम नहीं मिलता है, वहाँ तक स्त्री को पुरुष के साथ काम में रस रहता है।
जब स्त्री को पुरुष से प्रेम मिलना आरम्भ हो जाता है तब स्त्री भी पुरुष से काम नही चाहती है। तब वहाँ से दोनों को ब्रह्मचर्य फलित होता है। वह संन्यास है, वह तन्त्र योग है, जब तक पुरुष प्रेम की कला नही सीखता है वहाँ तक वह स्त्री ( पत्नी) का गुलाम बना रहता है।
2 477
संभोग को इस तरह मत लो जैसे कि कहीं और पहुंचना है। इसे साधन की भांति मत लो—यह अपने में ही साध्य है। इसका कोई लक्ष्य नहीं यह कोई माध्यम नहीं। दूसरी बात भविष्य की मत सोचो, वर्तमान में स्थित रहो। अगर तुम काम-कृत्य के आरंभिक भोग में वर्तमान में नहीं हो सकते तो तुम कभी भी वर्तमान में नहीं टिक सकते, क्योंकि इस कृत्य की प्रकृति ही ऐसी है कि तुम वर्तमान में फेंक दिए जाते हो।
वर्तमान में स्थित रहो। दो शरीरों दो आत्माओं के मिलन का सुख भोगो और एक दूसरे में लीन हो जाओ… एक दूसरे में पिघल जाओ। भूल जाओ कि तुम्हें कहीं पहुंचना है। उस क्षण में स्थित रहो कहीं जाना नहीं है पिघल जाओ। प्रेम की उष्मा पिघल कर एक दूसरे में विलीन हो जाने की परिस्थिति बनाओ।
इसी कारण अगर प्रेम नहीं है तो संभोग शीघ्रता में किया गया एक कृत्य है। तुम दूसरे का उपयोग कर रहे हो दूसरा साधन मात्र है। और दूसरा तुम्हारा उपयोग कर रहा है। तुम दोनों एक दूसरे का शोषण कर रहे हो एक दूसरे में विलीन नहीं हो रहे। प्रेम में तुम एक दूसरे में खो जाते हो। प्रारंभ में यह एक दूसरे में खो जाना एक नई दृष्टि
देगा।
अगर तुम इस कृत्य को समाप्त कर देने की जल्दी में नहीं हो तो धीरे-धीरे यह कृत्य कामुक कम, और आध्यात्मिक अधिक हो जाता है। जननेंद्रिय भी एक दूसरे में विलिन हो जाती हैं। दो शारीरिक ऊर्जाओं के बीच एक घनिष्ठ सहभागिता स्थापित हो जाती है और घंटों तुम्हारा साथ बना रह सकता है। जैसे-जैसे समय बीतता है इस साथ में और-और गहराई आती जाती है। लेकिन सोच-विचार में मत पड़ना।
उस क्षण के साथ रहो उसकी गहराई में डूब जाओ। वह क्षण परमानंद बन जाता है समाधि बन जाता है। अगर तुम उसे अनुभव कर सको स्पष्ट अनुभव कर सको, तुम्हारे चित्त की कामुकता-विलीन हो जाएगी। और उसके माध्यम से ब्रह्मचर्य उपलब्ध हो सकेगा।
2 477
स्त्री सच्चे प्रेम की चाहत में अपनी देह भी समर्पित करने को तत्पर है....परन्तु पुरुष केवल देह की चाहत में आतुर होकर प्रेम प्रदर्शित करने का स्वांग सदा से रचता आया है।।
क्या यही सत्य है ?*******
पर सोचिए ------------
अधिकांश पुरुष स्त्रियों में सिर्फ सेक्स की तलाश करते हैं। बहुत कम पुरुष है जो स्त्री से सच्चा प्रेम करते हैं परन्तु सच्चा प्रेम करने वाले भी स्त्री के साथ शारिरिक मिलन जरूर चाहते हैं, परन्तु शारिरिक सुख ही उनकी पहली प्राथमिकता नही होती।
उनकी पहली प्राथमिकता तो स्त्री से ह्रदय और आत्मा से ही जुड़ने की होती है। और यदि उनको शारिरिक मिलन भी करना हो तो वो लोकलाज, और स्त्री की इच्छा व सुरक्षा को प्रथम स्थान पर रखकर ही आगे बढ़ते हैं।
पर आजकल न तो ज्यादा स्त्रियां न ही पुरुष दिल से रिश्ता जोड़ते हैं। दोनो कहीं न कहीं एक दूसरे में रिक्तता तलाश करते हैं। देह की लालसा को प्रथम रखते हैं।
मेरा मानना है कि रिश्ता कैसा भी रखो पर रिश्ते को पारदर्शी और धोखाधड़ी से मुक्त रखो। यही सही है।
2 477
किसी स्त्री के गाल पर आए बालों को अपनी उंगलियों से उसके कानों के पीछे कर उसके माथे को चूमना और आलिंगन करना, संभोग से कही अधिक संवेदनशील और स्नेहयुक्त होता है... 😘
2 477
सम्भोग में शर्म क्यों ये गुनाह नहीं । शर्म करना है तो बलात्कार ,स्त्री शोषण,पुरुष शोषण से करो जो गुनाह है ।
2 477
सामने से संभोग नहीं मांग सकते पर प्रेम भरी बातें और संभोग भरी बातें करके लोगों के दिल में ऐसे लोग अच्छी जगह बना रहे हे मजे की बात यह है कि लड़कियां बात भी करती हे 😶
2 477
मरने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं 😡😞😔😔
टूट गए हम
अपने आप का अंत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं 😢😞
2 477
औरो की भेट तो बड़े ही खुश होकर स्वीकार की जाती है
हमारी 😏 में ही चन्द्र सितारे नहीं
#___में___कुछ__नहीं
2 477
Koi Puchenga Mujh Se Meri Mohabbat Ki Kahani Aur Main Dheemi Si Awaz Main Kahonga Mulakat Ko Taras Gaye
#___me___kuch___nhi
2 477
मुझे पता हे
अब बात बंद होगी
फिर कोई नया जीवन में आएगा
फिर उस से मेरी बात होगी की एक ने मेरा दिल तोड़ा था
मैने बस इतना चाहा था कि कोई और मेरे अलावा जीवन में ना आए
पर बहुत ही अच्छे आपके मित्र समूह हे
टूटा हुआ दिल😢😔
2 477
बिखरे हुए ख़्वाबों और रूठे हुए अपनों ने मुझे उदास कर दिया,
वर्ना दुनियावाले रोज मुझसे मेरे मुस्कुराने की वजह पूछते थे
#___में___कुछ___नहीं
2 477
उसे अपनी मोहब्बत जताने के लिए
हमने न जाने कितने शेर लिख दिए जमाने के लिए
#__में___कुछ___नहीं
2 477
जो कभी छोड़कर जाने का मन हो तो
बता देना,
हम कफ़न मंगवाकर रख लेंगे,
और चेहरे की मुस्कान हो आप,हमारे आप चले गए,तो
हम खुद ही अपनी अर्थी सजाकर रख लेंगे.....
#__में__कुछ__नहीं
2 477
तुम हमे क्यों इतना दर्द देते हो,
जब जी में आये तब रुला देते हो,
लफ़्ज़ों में तीखा पन और नजरो में बेरुखी,
ये कैसा इश्क है जो तुम हमसे करते हो।
#__में__कुछ__नहीं
Контент доступний для користувачів 18+
Авторизувавшись на сервісі, ви підтверджуєте, що вам виповнилося 18 років.
