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Rationality (⚛︎) is the New Morality.

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यदि आप पूरा धार्मिक न बनना चाहें तो धर्म आपको थोडा बहुत धार्मिक होने की छूट देता है| एक बार किसी ने मुझे कहा कि "मैं आधा मुसलमान हूँ" मुझे बड़ी हंसी आयी ये सुनकर| परन्तु ये सच है कि धर्म में यह संभावना और लचीलापन है कि आप जितना चाहें उतना धार्मिक हो सकते हैं| 20%, 40% या 60%, शायद ही कोई पूरा 100% धार्मिक होता होगा, परन्तु धर्म इसकी परवाह नहीं करता, वह तो किसी भी तरह आपको अपने वश में रखना चाहता है पूरा नहीं तो आधा ही सही| यह चीनी की परत चढ़े हुए उस जहर की तरह है, एक ऐसे नशे की तरह है जोकि आपसे बहुत वादे करता है, और आप बड़ी सावधानी से उसे लेते हो, परन्तु यह जहर थोड़ी थोड़ी मात्रा में आपको दिया जाता है कि आपको पता भी न चले और आप इसमें धीरे धीरे डूबते चले जाएँ| — बालेन्दु गोस्वामी

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भक्त कैसे पैदा होते हैं? आज की भारत की बर्बादी का कारण भक्त ही है। भक्तो के कारण rss और भाजपा इतने ताकतवर बन गये हैं। सोचने वाली बात ये है कि इतने सारे भक्त कैसे बन गये? अति धार्मिकता के कारण भारत की भूमि इसके लिए तैयार थी। बरसों से मनगढंत धार्मिक कथाएं सुन सुन कर लोगों ने तर्क करना छोड दिया था। पुष्पक विमान की बात हो या गणेश की सर्जरी की बात हो लोगों ने कभी दिमाग लगाकर पूछा ही नहीं कि ऐसा हो सकता है क्या? ईश्वर, धर्म, मंदिर, पूजारी को बहोत उंचा स्थान दे दिया गया। कहा गया कि धर्म की बात में कोई आशंका व्यक्त नहीं करना चाहिए। जो कहा जाय वो मान लेना चाहिए। जो आशंका व्यक्त करते हैं वो नास्तिक है। नास्तिक होना बहोत ही बूरी बात बताया गया। इसलिए सब कोई आस्तिक और धार्मिक दिखना चाहते हैं। यहां तक कि आज भी कुछ नास्तिक भी अपने आप को नास्तिक कहने से डरते हैं। फिर rss और भाजपा ने बाकी काम पूरा कर दिया। जो स्थान ईश्वर का था वो पुरोहित ने ले लिया। बाद में संघ के सर संघचालक ने ले लिया। अब वो स्थान मोदीजी ने ले लिया। मतलब वो जो कहे वो करना है। उनकी हर बात पर ताली बजाना है। उनकी हर बात का समर्थन करना है। उनका विरोध करने का स्वप्न में भी सोचना नहीं है। उनके लिए जीना है। उनके लिए मरना है। उनको आगे बढते हुए देखकर खुश होना है। अपना तन मन धन उनको समर्पित करना है। भक्तो के लिए अपने बीवी बच्चे खुद के लिए नहीं है। साहब के लिए है। ईश्वर को सब कुछ समर्पित करने की आदत के कारण अब सब कुछ साहब को समर्पित करने लगे हैं। उनके एक ईशारे पर दुनिया में आग लगा देते है। उनके दुश्मन भक्तों के दुश्मन हैं। बस उनकी भक्ति करना है। उनकी तरफ से जो मिले प्रसाद मानकर स्वीकार कर लेना है। तो इस तरह बनते हैं भक्त। जिसमें दिमाग नहीं होता है वही लोग किसी का भक्त बनता है। — Rationalist Anil

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धर्म का विरोध क्यों करना जरूरी है? जब हम धर्म और ईश्वर का विरोध करते हैं तो लोग पूछते हैं कि आप धर्म का विरोध क्यों करते हैं? कंई कारण है लेकिन मुख्य कारण नीचे दर्शाये गये है। (1) 1500 या 2500 साल पहले बने हुए धर्म के सिद्धांत आज के समय में बिलकुल प्रस्तुत नहीं रहे हैं। (2) धर्म और ईश्वर मनुष्यजाति के विकास में रुकावट पैदा कर रहे हैं। नवरात्रि में नौ दिन (रात में) गरबा डान्स होता है। रमजान में पूरा महिना अप्राक्रृतिक जीवनशैली अपनाई जाती है। कंई बार सात दिन तक कथा श्रवण चलता है। ये सब समय और पैसों की बर्बादी है। (3) धर्म के कारण लडाई झगड़ा और टंटाफसाद होता है। आज तक धर्म के कारण सैंकड़ों युद्ध हुए हैं। और करोड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। (4) धर्म नागरिक जीवन में अवरोध पैदा करता है। रास्ते पर धार्मिक जुलूस निकलते हैं। धर्म नोइज पॉल्यूशन पैदा करता है। (5) धर्म बहोत महंगा शौक साबित हो रहा है। मंदिर / मस्जिद और चर्च ने हजारों लाखों एकड जमीन पर कब्जा कर रखा है। हर रोज धार्मिक क्रियाओं के पीछे हजारों मानव कलाक (समय) बर्बाद हो रहा है। संपत्ति का व्यय भी बहोत बड़ी मात्रा में हो रहा है। फायदा कुछ नहीं है। (6) धर्म अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। धर्म के कारण लोगों में वैज्ञानिक सोच का विकास नहीं हो सकता है। वैज्ञानिक सोच के बिना मानव जीवन का विकास नहीं हो सकता है। धर्म मानवता के विरुद्ध है। (7) धर्म शोषण करता है। आसाराम रामरहीम जैसे लोग हरेक धर्म में है। जो भोले भाले लोगों का आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण करते हैं। (8) धर्म और धार्मिक संस्थान शोषक वर्ग को साथ देता है। लोगों को हकक के लिए लडने के बजाय धैर्य और सहनशीलता का उपदेश देता है जिससे शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले को सहयोग नहीं मिलता है। क्रांति के लिए धर्म अवरोध रुप है। धर्म पूंजीवाद का साथी है। (9) धर्म शांति बनाए रखने में असफल रहा है। समाज व्यवस्था बनाए रखने में भी असफल रहा है। धर्म के कारण समाज में अशांति और अव्यवस्था है। समय आ गया है धर्म की चुंगल से बाहर निकलने का। डरो नहीं। ईश्वर अल्लाह गोड कोई नहीं है। धर्म छोडो। हिंमत दिखाओ। मैं आपके साथ हूं। लेखक : Anil Rationalist

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