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BPSC- "THE AiM"

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#लिखते तो वह लोग हैं,जिनके अंदर कुछ दर्द है,अनुराग है,लगन है, विचार है।जिन्होंने धन और भोग-विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया,वह क्या लिखेंगे? #प्रेमचंद🙏🙏💐 🌻🌻 आज प्रेमचंद का जन्मदिन है, यह एक आम दिन हो सकता था अगर आज के दिन प्रेमचंद पैदा ना हुए होते। प्रेमचंद मतलब हिन्दी साहित्य की रीढ़़। ना जाने कितने साहित्यकार आये गये, लेकिन प्रेमचंद जैसा कोई नहीं हुआ। प्रेमचंद एकमात्र ऐसे लेखक हैं जिन्होंने ग्रामीण भारतीय समाज को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया है। वे आपको उंगली पकड़कर पूरे ग्रामीण भारतीय समाज से अवगत करा देंगे। प्रेमचंद होना विरला है, यूँ ही कोई प्रेमचंद नहीं हो सकता। अपने लेखन की तपस्या से धनपतराय प्रेमचंद हुए और जनमानस के लेखक बन गये। उनके साथ रहते हुए ना जाने कितने लोगों ने पढ़ना और लिखना सीखा। आज भी लोग उनको पढ़कर लिखना सीखते हैं। सच कहा जाये तो वे समस्त लेखकों के गुरु के रूप में भी याद किये जायेंगे। ऐसे गुरु जो अप्रत्यक्ष रूप से किसी को दीक्षा दे रहा हो। प्रेमचंद ने यही कमाल अपनी लेखनी से किया है। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की जो तस्वीर खींची वह सच में अविस्मरणीय है। चाहे ईदगाह का हामिद हो या गोदान का होरी सब पात्रों की पीड़ा को प्रेमचंद इस आसानी से कह गये कि वह हमें अपनी सी लगती है। प्रेमचंद ने ना केवल ग्रामीण भारतीय परिवेश को अपनी कहानियों में दिखाया है बल्कि उन्होंने बहुत सी जगहों पर इसके इतर भी लिखा और हर तरह के शोषण, जातिगत व्यवस्था आदि पर करारा प्रहार किया। अगर आप लिखते हैं तो आपने कभी ना कभी प्रेमचंद को ज़रूर पढ़ा होगा। यह बात बिल्कुल सच है, कम से कम इतनी तो है ही जितनी होने से प्रेमचंद आज भी हमारे मानस पटल पर अंकित हैं। प्रेमचंद ख़ुद ग़रीबी में जिये और आजीवन लिखकर रोजी रोटी की लड़ाई लड़ते रहे। लेकिन इस बात से भी उनके जुनून पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा, उन्होंने हमेशा सच का साथ दिया और यही कारण है कि वे जनता के लेखक बने। प्रेमचंद को आदर्श मानकर ना जाने कितने लोगों ने लिखना शुरु किया, ऐसे लोगों को अगर कतार में खड़ा किया जाये तो निश्चित तौर पर कई मील लंबी कतार आपको देखने के लिये मिलेगी। प्रेमचंद का प्रभाव ऐसा है कि वह हर किसी पर अपना स्थायित्व बना लेता है, यही कारण है कि प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक हैं। जातिवाद, स्त्री-शोषण आज भी अपना थोड़ा स्वरूप बदलकर मौजूद हैं। ऐसे में प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को न्यूनाधिक आईना दिखाता ही है, मानवीय स्वभाव के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वन्द्व को भी प्रेमचंद ने उकेरा है इसलिए भी प्रेमचंद की प्रासंगिकता बनी रहेगी।

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बलिदानियों की याद में मेरी माटी मेरा देश अभियान ✔️ इस अभियान के तहत देशभर में उन लोगों के सम्मान में कार्यक्रम होंगे जिन्होंन
बलिदानियों की याद में मेरी माटी मेरा देश अभियान ✔️ इस अभियान के तहत देशभर में उन लोगों के सम्मान में कार्यक्रम होंगे जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए ✔️ इस अभियान के तहत वीर बलिदानियों की स्मृति में देश भर के ग्राम पंचायतो में विशेष शिलालेख स्थापित किए जायेंगे। ✔️ एक अमृत कलश यात्रा निकाली जाएगी जो देश के अलग अलग कोनो से गांव की मिट्टी के साथ दिल्ली में कलश लाए जाएंगे। ✔️ इस मिट्टी से अमृत वाटिका तैयार की जायेगी जो एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रतीक होगी ✔️ पिछले साल शुरू किए गए हर घर तिरंगा अभियान इस साल भी चलेगा Thnx Civil adda

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NB-2023-07-27-01.pdf

#BPSC69th 63 more seats added in Integrated 69th CCE ☑️अब कुल रिक्तियों की संख्या 442 है।

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