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UJJWAL IAS AYODHYA®™

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу UJJWAL IAS AYODHYA®™

Канал UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 20 949 підписників, посідаючи 9 411 місце в категорії Освіта та 19 508 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 20 949 підписників.

За останніми даними від 29 вересня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на 1 006, а за останні 24 години на 46, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 26.25%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 20.53% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 5 497 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 4 299 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 13.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
“Ujjwal IAS official Telegram channel. Youtube- https://www.youtube.com/@UJJAWALIASAYODHYA App- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cbbzwd.oggulz”

Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 30 вересня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

20 949
Підписники
+4624 години
+3307 днів
+1 00630 днів
Архів дописів
निम्नलिखित में से कौन आंतरिक प्रेरणा से संबंधित है-
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प्राथमिक स्तर पर यौन शिक्षा किस रूप में प्रस्तावित की जा सकती है-
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निम्नलिखित में से कौन सा सृजनात्मक चिंतन का अनिवार्य गुण है-
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निम्नलिखित में से कौन सी समस्या-समाधान की वैज्ञानिक पद्धति का पहला चरण है-
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अब इन दिनों छात्रों में शैक्षिक रुचि नहीं रही क्योंकि-
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छात्रों को सुनहरे भविष्य के लिए करना चाहिए-
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जीवन की प्रक्रियाओं की अवहेलना करते हुए एक स्तर पर जीना ........... का कारण बनता है-
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📢📢📢📢सूचना📢📢📢📢 05 सितंबर STET/UPP में आयोजित हुए टेस्ट का रिजल्ट एवं चेक्ड OMR संस्थान के रिजल्ट मैनेजमेंट पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। अभ्यर्थी इस लिंक पर क्लिक करके अपना रिजल्ट देख सकते हैं- https://ujjwalias.com/

UPSSSC- PET महत्वपूर्ण सूचना- संस्थान में यूपीएसएससी-पीईटी का नया बैच संस्थान में सुबह 10’45 से 02.30 बजे तक चल रहा है। इस बैच में प्रतिदिन क्लास के साथ नोट्स दिया जा रहा है। साथ में टापिक टेस्ट सीरीज आयोजित की जा रही है।

📢📢📢📢सूचना📢📢📢📢 ⚠️05 सितंबर को STET में आयोजित हुए टेस्ट का रिजल्ट एवं चेक्ड OMR संस्थान के रिजल्ट मैनेजमेंट पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। अभ्यर्थी इस लिंक पर क्लिक करके अपना रिजल्ट देख सकते हैं- https://ujjwalias.com/

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महत्वपूर्ण सूचना- संस्थान में आज दिनांक- 08 सितम्बर दिन मंगलवार से जूनियर सुपर टेट का नया बैच प्रारम्भ हो गया है। इसमें जूनियर सुपर टेट के अन्तर्गत सभी विषयों की क्लास प्रारम्भ की गयी है। बैच से सम्बन्धित जानकारी के लिये कॉल करें- 9451223855

महत्वपूर्ण सूचना- सुपर टेट कल दिनांक- 09 सितम्बर को सुपर टेट के बैच में जितने भी टापिक कम्प्लीट हुए है। सभी के टापिक टेस्ट कराये जायेगें।

महत्वपूर्ण सूचना- UPSSSC PET कल दिनांक- 09 सितम्बर 2026 को UPSSSC- PET के सभी बैचों में हिन्दी विषय के अर्न्तगत Passage और गणित विषय के अर्न्तगत DI की सीट वितरित की जाएगी

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🏆 शानदार सफलता 🏆 दिनांक 05 सितम्बर, शनिवार को संस्थान में आयोजित फुल मॉक टेस्ट सीरीज में 🎓 छात्रा — मुस्कान सिंह ने SUPER
🏆 शानदार सफलता 🏆 दिनांक 05 सितम्बर, शनिवार को संस्थान में आयोजित फुल मॉक टेस्ट सीरीज में 🎓 छात्रा — मुस्कान सिंह ने SUPER TET के सभी बैचों में प्रथम स्थान (TOP RANK) प्राप्त कर अपनी प्रतिभा एवं मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया। 🌟 इस उत्कृष्ट सफलता के लिए मुस्कान सिंह को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ। मेहनत जारी रखें 🌟

जीवन कौशल कितनी सामान्य श्रेणियों में विभाजित है-
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जीवन कौशल कितनी सामान्य श्रेणियों में विभाजित है-
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ओजोन प्रदूषण पर सेन्टर फॉर साइंस एण्ड एनवायरनमेन्ट की रिपोर्ट ·         'सेंटर फॉर साइंस एण्ड एनवायरनमेंट' (CSE) के नए विश्लेषण के अनुसार, भारत के शहरों में भू-स्तरीय ओजोन (Ground-Level Ozone) अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि पूरे वर्ष बना रहने वाला एक गम्भीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट बन गया है. ·         उल्लेखनीय है कि ओजोन कोई सीधे उत्सर्जित होने वाला प्रदूषक नहीं है. यह तेज धूप और गर्मी की उपस्थिति में वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाली गैसों जैसे—नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और वोलेटाइल ऑर्गेनिक कम्पाउण्ड्स की रासायनिक अभिक्रिया से बनता है. ·         रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष ·         जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर ओजोन प्रदूषण का सबसे बड़ा केन्द्र है. अध्ययन के सभी 71 दिनों में यहाँ ओजोन का स्तर राष्ट्रीय मानक (100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से ऊपर दर्ज किया गया. यहाँ प्रमुख हॉट-स्पॉट क्षेत्र पूसा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद रहे हैं. ·         गर्मियों के दौरान चण्डीगढ़ देश में ओजोन प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित शहर रहा, जिसके बाद जयपुर और अहमदाबाद का स्थान आता है. ·         इस अध्ययन में 'टॉक्सिक नाइट्स' यानी रात के समय भी हवा में ओजोन के जमा रहने का एक नया और गम्भीर खतरा सामने आया है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर 46 रातों के साथ सबसे ऊपर है, जबकि बेंगलुरू में 14 और भोपाल में 13 ऐसी रातें दर्ज की गईं. ·         इसके अलावा, ओजोन के हवा में बने रहने की अवधि भी काफी चिंताजनक है; भोपाल में इसका स्तर रोजाना औसतन 17 घण्टे सुरक्षित सीमा से अधिक रहता है, वहीं लखनऊ, मुम्बई और बेंगलुरू में यह अवधि प्रति दिन 16 घण्टे पाई गई है. ·         गौरतलब है कि यह ओजोन प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण तीनों के लिए गम्भीर संकट पैदा कर रहा है. ·         स्वास्थ्य के लिहाज से यह फेफड़ों को अत्यधिक नुकसान पहुँचाता है, जिससे अस्थमा, आँखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याओं के साथ-साथ लम्बे समय तक इसके सम्पर्क में रहने से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ·         कृषि क्षेत्र पर इसका असर यह है कि देश में प्रति वर्ष गेहूँ की पैदावार में लगभग 14 से 15 प्रतिशत की कमी आ रही है. पर्यावरण के दृष्टिकोण से, यह प्रदूषक उड़कर हिमालयी क्षेत्रों तक पहुँच रहा है, जिससे ग्लेशियरों के पिघलने की गति और तेज हो सकती है. ·         इस संकट से निपटने के लिए सेंटर फॉर साइंस एण्ड एनवायरनमेंट (CSE) ने 'NCAP 2.0' के तहत् एक नई रणनीति अपनाने का सुझाव दिया है. ·         वर्तमान 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) मुख्य रूप से धूल और PM कणों को नियंत्रित करने पर केन्द्रित है, इसके तहत् ओजोन को बनने से रोकने के लिए नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और वोलेटाइल ऑर्गेनिक कम्पाउण्ड्स उत्सर्जित करने वाले स्रोतों जैसे—वाहनों, उद्योगों और खुले में कचरा जलाने पर एक साथ लगाम लगानी होगी.