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UJJWAL IAS AYODHYA®™

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу UJJWAL IAS AYODHYA®™

Канал UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 21 746 підписників, посідаючи 9 249 місце в категорії Освіта та 18 712 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 21 746 підписників.

За останніми даними від 25 жовтня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на 977, а за останні 24 години на 35, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 27.39%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 20.29% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 5 952 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 4 410 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 10.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
“Ujjwal IAS official Telegram channel. Youtube- https://www.youtube.com/@UJJAWALIASAYODHYA App- https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cbbzwd.oggulz”

Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 26 жовтня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

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Архів дописів
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UPPCS/UPSC लक्ष्य 2026: सपनों से सफलता तक का सफर हर साल लाखों विद्यार्थी प्रशासनिक सेवाओं का सपना देखते हैं, लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने का साहस कुछ ही लोग जुटा पाते हैं। UPPCS/UPSC सिर्फ एक परीक्षा नहीं है—यह धैर्य, अनुशासन, निरंतरता और आत्मविश्वास की असली परीक्षा है। 🌟 लक्ष्य बड़ा है, तो तैयारी भी वैसी ही होनी चाहिए 2026 आपका साल हो सकता है—अगर आप आज से ही खुद को पूरी तरह समर्पित कर दें। सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं होती, बल्कि हर दिन की छोटी-छोटी कोशिशों का नतीजा होती है। 📚 सही दिशा + सही रणनीति = सफलता सिलेबस को समझना ही आधी जीत है डेली करंट अफेयर्स से जुड़ाव जरूरी है मॉक टेस्ट आपकी असली तैयारी दिखाते हैं नियमित रिवीजन आपको दूसरों से आगे रखता है 💪 मेंटरशिप का महत्व एक सही मार्गदर्शक आपकी गलतियों को समय पर सुधारता है और आपको सही दिशा में बनाए रखता है। बिना दिशा की मेहनत अक्सर थका देती है, लेकिन सही मार्गदर्शन आपको मंजिल के करीब ले जाता है। ⏳ अनुशासन ही असली ताकत है सुबह जल्दी उठना, तय समय पर पढ़ना, distractions से दूर रहना—ये छोटी आदतें ही आपको बड़ा बनाती हैं। याद रखिए, जो आज कठिन लगता है, वही कल आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। 🔥 खुद पर भरोसा रखें कभी-कभी लगेगा कि रास्ता बहुत लंबा है, लेकिन वही लोग जीतते हैं जो बीच रास्ते में हार नहीं मानते। “Success उन्हीं को मिलती है, जो आखिरी तक कोशिश करते हैं।” 🎯 अंतिम संदेश 2026 सिर्फ एक साल नहीं, आपका लक्ष्य है—आपकी मेहनत का परिणाम है। आज से शुरुआत कीजिए, पूरे विश्वास के साथ। आपकी मेहनत + सही दिशा + अटूट विश्वास = निश्चित सफलता 👉 याद रखिए: “आपका सपना जितना बड़ा होगा, आपकी मेहनत भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए।”

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"🔥 लक्ष्य UPTET 2026 – अबकी बार 130+ पक्का! 🎯 अगर आप सच में UPTET क्रैक करना चाहते हैं, तो अब ऑनलाइन नहीं… सीधा OFFLINE मैद
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"🔥 लक्ष्य UPTET 2026 – अबकी बार 130+ पक्का! 🎯 अगर आप सच में UPTET क्रैक करना चाहते हैं, तो अब ऑनलाइन नहीं… सीधा OFFLINE मैदान में उतरने का समय है! 💥 🏫 UPTET OFFLINE POWER BATCH शुरू हो चुका है! 👉 Classroom में पढ़ाई = फोकस + डिसिप्लिन + रिजल्ट 👉 Experienced Faculty के साथ Direct Interaction ⚡ बैच की दमदार खासियतें: ✨ रोज़ Face-to-Face क्लास – Concept एकदम क्लियर ✨ Handwritten Class Notes – सिर्फ वही जो एग्जाम में आए ✨ PYQs की प्रैक्टिस – बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर पकड़ ✨ Weekly Test Series – हर हफ्ते अपनी तैयारी चेक करो ✨ OMR Practice + Real Exam Feeling 📊 Performance Boost System: 👉 हर टेस्ट के बाद Detailed Analysis 👉 Individual Guidance – आपकी Weakness पर सीधा वार 👉 Doubt Clearing वहीं क्लास में – तुरंत समाधान 🚀 अब बनेगा आपका Selection Plan: 👉 टाइमटेबल + स्ट्रेटेजी + कड़ी प्रैक्टिस 👉 30/30 स्कोर करना बनेगा आपकी आदत 💯 अब Target सिर्फ पास होना नहीं… TOP करना है! ⏳ सीट्स लिमिटेड हैं – देर की तो मौका हाथ से निकल जाएगा! 👉 OFFLINE बैच जॉइन करें और अपने सपने को हकीकत बनाएं!

⚠️24 APRIL UPP FULL MOCK TEST [SET-22] ANSWERKEY

🔳 *मानव रोग और उपचार –* ▪️पीलिया रोग में यकृत प्रभावित होता है। ▪️पीलिया रोग में पीला बिलिरुबीन रुधिर में ही रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। ▪️कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री जीवाणु द्वारा फैलता है। ▪️थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है , इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण की क्षमता नहीं होती है। ▪️एल्जाइमर रोग से मानव का मस्तिष्क प्रभावित होता है । ▪️EEG की खोज हंसबर्गर नामक वैज्ञानिक ने की। ▪️जलीय पौधों को हाइड्रोफाइट कहते हैं। ▪️सिनकोना पौधे की छाल से कुनैन प्राप्त की जाती है। ▪️फीता क्रीमी अवयवीय श्वसन करते है। ▪️वाष्पोत्सर्जन पोटोमीटर से मापा जाता है। ▪️सर्वाधिक प्रकाश संश्लेषण प्रकाश के नीले व लाल क्षेत्र में होता है। ▪️रानीखेत बीमारी मुर्गियों की एक संक्रामक बीमारी है। ▪️वृक्ष की आयु का निर्धारण उसमें उपस्थित वार्षिक वलय की संख्या के आधार पर किया जाता है। ▪️ नेत्रदान में आंख का कॉर्निया नामक भाग उपयोग में लाया जाता है।

🔳 *मानव रोग एवं उपचार –* ▪️पेनिसिलिन प्रथम एंटीबायोटिक है। ▪️पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने किया था। ▪️टाइफाइड रोग में मुख्यतः मानव की आत प्रभावित होती है। ▪️प्लाज्मोडियम का वाहक कार्य मादा एनाफिलीज मच्छर करती है ▪️मलेरिया में लाल रुधिर कणिका नष्ट हो जाती है तथा रुधिर की कमी हो जाती है। ▪️डेंगू को हड्डी तोड़ ज्वार भी कहते हैं। ▪️डेंगू से पीड़ित रोगी के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। ▪️जल में नाइट्रेट की मात्रा 10ppm से अधिक होने पर ब्लू बेबी सिंड्रोम रोग हो जाता है। ▪️ पोटेशियम की कमी से निम्न रक्तचाप की बीमारी हो जाती है। ▪️मूत्र में एल्बुमिन की अधिक उपस्थिति एवं उसके प्रभाव से किडनी के फेल हो जाने के आशंका होती है। ▪️हीमोफीलिया एक अनुवांशिक लिंग सहलग्न रोग है। ▪️हीमोफीलिया रोग का वहन स्त्रियां करती हैं। ▪️डाउन सिंड्रोम एक अनुवांशिक विकार है। ▪️ मिनीमाता एक तंत्रिका संबंधी रोग है।

🔳 *मानव रोग एवं उपचार –* ▪️ *जीवाणु जनित रोग तथा वाहक जीवाणु* ▪️टिटनेस – क्लोस्ट्रीडियम टेटानी ▪️टाइफाइड – साल्मोनेला टाइफी ▪️हैजा– विब्रियो कोलेरा ▪️निमोनिया – स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया ▪️क्षय रोग– माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस ▪️प्लेग –यर्सिनिया पेस्टिस ▪️डिप्थीरिया – कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया ▪️काली खासी – बोर्डेटेला पर्टुसिस ▪️सिफलिश – ट्रेपोनेमा पैलिडम ▪️ *विषाणु जनित रोग तथा वाहक विषाणु* ▪️एड्स – एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी ▪️इन्फ्लूएंजा – इन्फ्लूएंजा वायरस ▪️चेचक – वेरियोला वायरस ▪️चिकेनपॉक्स– वेरिसेला-ज़ोस्टर वायरस ▪️खसरा – पैरामिक्सोवायरस ▪️रेबीज –रेबीज वायरस ▪️हर्पीज – हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस

🔳 *कार्बोहाइड्रेट –* ▪️यह हाइड्रोजन कार्बन तथा ऑक्सीजन के मिश्रण से मिलकर बना होता है। ▪️कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड। ▪️मोनोसैकेराइड सरल शर्करा होते हैं, जैसे ग्लूकोज और फ्रुक्टोज। ▪️ओलिगोसैकेराइड दो से दस मोनोसैकेराइड अणुओं से जुड़े होते हैं, जैसे सुक्रोज और लैक्टोज। ▪️पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides): 10 से अधिक मोनोसैकेराइड अणुओं से बने होते हैं। उदाहरण के लिए, स्टार्च (अनाज, आलू में) और सेल्यूलोज (पौधों के तने में). । ▪️चावल, मक्का ,गेहूं, बाजरा आलू, शकरकंद आदि कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं। ▪️ कार्बोहाइड्रेट शरीर को गर्मी एवं ऊर्जा प्रदान करते हैं। ▪️यह न्यूक्लिक अम्ल ( RNA एवं DNA) का निर्माण करते हैं

🔳 *प्रोटीन–* ▪️ यह एक जटिल कार्बनिक यौगिक है। ▪️यह 20 प्रकार के अमीनो अम्ल से मिलकर बना है। ▪️बाल किरेटिन नामक प्रोटीन का बना होता है। ▪️दूध में कैसीन नामक प्रोटीन उपस्थित होता है जिसके कारण दूध का रंग सफेद होता है। ▪️गाय का दूध पीला कैरोटीन की उपस्थिति के कारण होता है । ▪️दुग्ध प्रोटीन को पचाने वाला एंजाइम रेनिन होता है। ▪️प्रोटीन एक जटिल नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक पदार्थ है। ▪️अमीनो अम्ल प्रोटीन की संयोजक इकाइयां होते हैं। ▪️अमीनो अम्ल त्वचा ,मांसपेशियों तथा हड्डियों के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। ▪️भोजन में वसा में प्रति यूनिट कैलोरी की मात्रा सर्वाधिक होती है। ▪️प्रोटीन शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है। ▪️शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है। ▪️कुछ प्रोटीन हार्मोन के रूप में कोशिकाओं की क्रिया का नियमन करती है। ▪️संकुचन शील प्रोटीन( एक्टिन और मायोसीन) पेशीयो को सिकोड़कर शरीर एवं अंगों को गति प्रदान करती है।

🔳 *विटामिन* – ▪️ *खोज* – फंक ने किया था। ▪️यह जटिल कार्बनिक यौगिक है। ▪️शरीर में उपापचई अभिक्रियाओं में उत्प्रेरकों की क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं। ▪️ *जल में घुलनशील विटामिन* – B और C ▪️ *वसा में घुलनशील विटामिन* – A, D E,K ▪️ *विटामिन और उसका रासायनिक नाम और उसकी कमी से उत्पन होने वाला रोग –* ▪️विटामिन ए: रेटिनॉल – रतौंधी ▪️विटामिन बी1: थायमिन – बेरी बेरी ▪️विटामिन बी2: राइबोफ्लेविन– किलोसिस ▪️विटामिन बी3: नियासिन (निकोटिनिक एसिड)– प्लेग्रा ▪️ विटामिन बी5: पैंटोथेनिक एसिड– चर्म रोग, बाल सफेद ▪️ विटामिन बी6: पाइरिडोक्सिन– चर्म रोग , पेशीय ऐंठन ▪️विटामिन बी7: बायोटिन – बाल झड़ना ▪️ विटामिन बी9: फोलिक एसिड– कुण्डित वृद्धि ▪️विटामिन बी12: साइनोकोबालामिन – तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी ▪️विटामिन सी: एस्कॉर्बिक एसिड – स्कर्वी ▪️विटामिन डी: कैल्सिफेरॉल – रिकेट्स ▪️विटामिन ई: टोकोफेरोल – जनन क्षमता की कमी ▪️विटामिन के: फाइलोक्विनोन – रक्त थक्का न जमना

🔳 *एड्रिनल ग्रंथि–* ▪️ *कोर्टिसोल:* यह एक ग्लूकोकोर्टिकॉइड हार्मोन है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपयोग को नियंत्रित करता है. यह रक्तचाप, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है और हड्डियों के निर्माण को कम करता है. ▪️ *एल्डोस्टेरोन:* यह एक मिनरलोकॉर्टिकॉइड हार्मोन है जो रक्तचाप और रक्त पीएच स्तर को नियंत्रित करता है. यह रक्त में सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स को नियंत्रित करता है. ▪️ *एड्रेनालाईन (एपिनेफ्रीन):* यह एक आपातकालीन हार्मोन है जो "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है. यह हृदय गति, श्वसन दर और रक्तचाप को बढ़ाता है. ▪️ *नॉरएड्रेनालाईन (नॉरएपिनेफ्रीन):* यह भी एक आपातकालीन हार्मोन है जो एड्रेनालाईन के साथ मिलकर "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है.

🔳 *प्रमुख अंतः स्रावी ग्रंथि –* ▪️ *पीयूष ग्रंथि–* इसे मास्टर ग्रंथि के नाम से जाना जाता है। ▪️ *प्रमुख हार्मोन–* ▪️ *सोमेट्रोटेपिन –* यह शरीर की वृद्धि तथा हड्डियों की वृद्धि का नियंत्रण करता है। ▪️इसकी कमी से बौनापन होता है । ▪️इसकी अधिकता से गीगांटिज्म की समस्या हो जाती है। ▪️ *थायराइड उत्तेजक हार्मोन–* थायरॉयड ग्रंथि को थायरोइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो चयापचय को नियंत्रित करते हैं. ▪️ *एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन–* अधिवृक्क ग्रंथियों को कोर्टिसोल हार्मोन का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. ▪️ *फॉलिकल -उत्तेजक हार्मोन –* महिलाओं में अंडाशय को उत्तेजित करता है और पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन को उत्तेजित करता है. ▪️ *ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन* –महिलाओं में ओव्यूलेशन को ट्रिगर करता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करता है ▪️ *थायराइड ग्रंथि–* ▪️थायराइड ग्रंथि से मुख्य रूप से दो हार्मोन स्रावित होते हैं: ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) और थायरोक्सिन (T4)। ▪️ ये चयापचय दर को नियंत्रित करते हैं. शरीर के तापमान, हृदय गति और अन्य शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं. विकास और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

🔳 *स्वसन तंत्र–* ▪️ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के आदान-प्रदान की क्रिया। ▪️ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज के दहन से ऊर्जा मुक्त होती है ,तथा जल और कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होता है। ▪️ग्रसनी 13 सेंटीमीटर लंबी कीप के आकार की गुहा होती है। ▪️एपिग्लोटिस, भोजन के समय यह ढक्कन की भांति कार्य करती है जिससे भोजन श्वास नली में प्रवेश नहीं करता। ▪️ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन नामक लाल वर्णक द्वारा होता है, हिमोग्लोबिन लाल रुधिर कणिका में पाया जाता है । ▪️ फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर की समस्त कोशिकाओं तक तथा कोशिकाओं से कार्बनडाइऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचाना रुधिर का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। ▪️ *अवायवीय श्वसन–* यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। ▪️ इसमें खाद्य पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड और एथील अल्कोहल बनते हैं। ▪️ इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। ▪️ *ऑक्सी श्वसन –* यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है तथा इस क्रिया में खाद्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। ▪️ इसमें कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनते हैं तथा अधिक मात्रा में उर्जा उत्पन्न होती है।

🔳 *कंकाल तंत्र–* ▪️वयस्क मनुष्य का अंतः कंकाल 206 हड्डियों का बना होता है। ▪️मनुष्य की खोपड़ी में कुल 29 अस्थियां होती हैं। ▪️मनुष्य का कशेरुक दंड 26 हड्डियों से मिलकर बना होता है। ▪️गर्दन का पहला कशेरुक एटलस कशेरुक कहलाता है , यह खोपड़ी को सीधे रखता है। ▪️कशेरुक दंड का कार्य मेरूरज्जूको सुरक्षा प्रदान करना है । ▪️ *प्रमुख अंगों में पाई जाने वाली हड्डियां* – ▪️सिर की कुल हड्डियां – 29 ▪️कपाल – 8 ▪️फेसियल – 14 ▪️ कान – 6 ▪️ रीड की कुल हड्डियों की संख्या – 26 ▪️ पसलियों की कुल संख्या – 24 ▪️ऊपरी बाहु – 2 ▪️कलाई( कार्पुलस )– 16 ▪️हथेली( मेटाकारपल्स) – 10 ▪️ जांघ ( फीमर) – 2 ▪️घुटना( पटेला) – 2 ▪️टखना( टार्सल्स) – 14 ▪️तलवा( मेटा टार्सल्स) – 10 ▪️अंगुलियों( फार्लेंजेज) – 28

▪️ *मेंड्यूला* – इसका कार्य हृदय स्पंदन की दर को प्रबलता, श्वसन दर , खांसना, छींकना, स्वाद, लार का निकलना , जीभ की गति का नियंत्रण करना है। ▪️ *मेरुरज्जू* – इसका कार्य प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय है। ▪️यह मस्तिष्क से आने जाने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। ▪️प्रतिवर्ती क्रियाओं की खोज सर्वोत्तम मार्शल हाल ने किया था। ▪️मानव शरीर में 12 जोड़ी कपालीय तंत्र तथा 31 जोड़ी मेरुरज्जू पाई जाती है। ▪️ *अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य–* आंख की पुतली को फैलाना ,हृदय स्पंदन की दर को बढ़ाना, पसीने के श्रावण को उत्तेजित करना, मूत्राशय के पेशियों को शिथिल करना आदि। ▪️परानुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य– आंखों की पुतली को संकुचित करना, हृदय स्पंदन की दर को घटाना, मूत्र त्याग के लिए पेशियों को सिकोड़ना, बाह्य जननांगों को उत्तेजित करना आदि। ▪️ तंत्रिका ऊतक की इकाई को न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका कहते हैं। ▪️ तंत्रिका कोशिकाएं शरीर की सबसे लंबी कोशिकाएं होती हैं।

🔳 *तंत्रिका तंत्र –* ▪️यह वातावरण में परिवर्तन की सूचनाओं को संवेदी अंगों से प्राप्त करके उसका तीव्र गति से प्रसारण करती है। ▪️यह शरीर के विभिन्न अंगों के बीच कार्यात्मक समन्वय स्थापित करती है। ▪️ *केंद्रीय तंत्रिका तंत्र –* इसके अंतर्गत मस्तिष्क एवं मेरुरज्जू आते है। ▪️ *मस्तिष्क* – इसका वजन 1.3 से 1.4 किलोग्राम तक होता है। ▪️ *अग्रमस्तिष्क* में सेरीब्रम, थैलेमस और हाइपोथैलेमस होता है। ▪️सेरीब्रम मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। ▪️सेरीब्रम में इच्छा शक्ति, बुद्धि, ज्ञान, स्मृति, चिंतन का केंद्र होता है। ▪️थैलेमस में ताप, स्पर्श आदि का केंद्र है। ▪️हाइपोथैलेमस का कार्य अन्तःस्त्रावी ग्रंथियों से स्रावित होने वाले हार्मोस का नियंत्रण करना है। ▪️यह भूख , प्यास, क्रोध का भी नियंत्रण केंद्र है। ▪️ *सीरीबेलम –* यह मस्तिष्क का दूसरा बड़ा भाग है। ▪️यह पश्च मस्तिष्क में पाया जाता है। ▪️इसका कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना है।