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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу UJJWAL IAS AYODHYA®™

Канал UJJWAL IAS AYODHYA®™ (@ujjawaliasayodhya) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 19 798 підписників, посідаючи 10 074 місце в категорії Освіта та 21 487 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 19 798 підписників.

За останніми даними від 02 липня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на 131, а за останні 24 години на 23, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 24.55%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 20.10% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 4 859 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 3 978 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 12.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як टेस्ट, सफलता, मेहनत, तैयारी, सीरीज.

📝 Опис та контентна політика

Автор описує ресурс як майданчик для висловлення суб'єктивної думки:
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Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 03 липня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

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Архів дописів
विश्व मत्स्य दिवस • प्रतिवर्ष 21 नवंबर को विश्व मत्स्य दिवस मनाया जाता है। • इसे वर्ष 1997 में शुरू किया गया था जब 'वर्ल्ड फो
विश्व मत्स्य दिवस •  प्रतिवर्ष 21 नवंबर को विश्व मत्स्य दिवस मनाया जाता है। •  इसे वर्ष 1997 में शुरू किया गया था जब 'वर्ल्ड फोरम ऑफ फिश हार्वेस्टर्स एंड फिशवर्कर्स' की मीटिंग नई दिल्ली में हुई, इसमें 18 देशों के प्रतिनिधियों के साथ 'वर्ल्ड फिशरीज़ फोरम' का गठन किया गया था तथा स्थायी मछली पकड़ने की प्रथाओं और नीतियों के वैश्विक जनादेश की वकालत करते हुए एक घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए। •  भारत सस्टेनेबिलिटी, आजिविका और ब्लू इकॉनमी ग्रोथ पर ज़ोर देते हुए वर्ल्ड फिशरीज़ डे 2025 मना रहा है। •  विश्व मत्स्य दिवस 21 नवम्‍बर को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में मनाया जाएगा। •  इस वर्ष का विषय है “भारत का नीला परिवर्तन: समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्य संवर्धन को सुदृढ़ बनाना”। •  भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और दुनिया के सबसे बड़े झींगा उत्पादकों में से एक है। •  भारत का मछली उत्पादन 2013-14 में 96 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 195 लाख टन हो गया है।

🔳 *मानव रोग और उपचार –* ▪️पीलिया रोग में यकृत प्रभावित होता है। ▪️पीलिया रोग में पीला बिलिरुबीन रुधिर में ही रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। ▪️कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री जीवाणु द्वारा फैलता है। ▪️थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है , इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन के संश्लेषण की क्षमता नहीं होती है। ▪️एल्जाइमर रोग से मानव का मस्तिष्क प्रभावित होता है । ▪️EEG की खोज हंसबर्गर नामक वैज्ञानिक ने की। ▪️जलीय पौधों को हाइड्रोफाइट कहते हैं। ▪️सिनकोना पौधे की छाल से कुनैन प्राप्त की जाती है। ▪️फीता क्रीमी अवयवीय श्वसन करते है। ▪️वाष्पोत्सर्जन पोटोमीटर से मापा जाता है। ▪️सर्वाधिक प्रकाश संश्लेषण प्रकाश के नीले व लाल क्षेत्र में होता है। ▪️रानीखेत बीमारी मुर्गियों की एक संक्रामक बीमारी है। ▪️वृक्ष की आयु का निर्धारण उसमें उपस्थित वार्षिक वलय की संख्या के आधार पर किया जाता है। ▪️ नेत्रदान में आंख का कॉर्निया नामक भाग उपयोग में लाया जाता है। ▪️

🔳 *एड्रिनल ग्रंथि–* ▪️ *कोर्टिसोल:* यह एक ग्लूकोकोर्टिकॉइड हार्मोन है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपयोग को नियंत्रित करता है. यह रक्तचाप, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है और हड्डियों के निर्माण को कम करता है. ▪️ *एल्डोस्टेरोन:* यह एक मिनरलोकॉर्टिकॉइड हार्मोन है जो रक्तचाप और रक्त पीएच स्तर को नियंत्रित करता है. यह रक्त में सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स को नियंत्रित करता है. ▪️ *एड्रेनालाईन (एपिनेफ्रीन):* यह एक आपातकालीन हार्मोन है जो "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है. यह हृदय गति, श्वसन दर और रक्तचाप को बढ़ाता है. ▪️ *नॉरएड्रेनालाईन (नॉरएपिनेफ्रीन):* यह भी एक आपातकालीन हार्मोन है जो एड्रेनालाईन के साथ मिलकर "लड़ाई या उड़ान" प्रतिक्रिया को शुरू करता है.

🔳 *प्रमुख अंतः स्रावी ग्रंथि –* ▪️ *पीयूष ग्रंथि–* इसे मास्टर ग्रंथि के नाम से जाना जाता है। ▪️ *प्रमुख हार्मोन–* ▪️ *सोमेट्रोटेपिन –* यह शरीर की वृद्धि तथा हड्डियों की वृद्धि का नियंत्रण करता है। ▪️इसकी कमी से बौनापन होता है । ▪️इसकी अधिकता से गीगांटिज्म की समस्या हो जाती है। ▪️ *थायराइड उत्तेजक हार्मोन–* थायरॉयड ग्रंथि को थायरोइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो चयापचय को नियंत्रित करते हैं. ▪️ *एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन–* अधिवृक्क ग्रंथियों को कोर्टिसोल हार्मोन का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है, जो तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. ▪️ *फॉलिकल -उत्तेजक हार्मोन –* महिलाओं में अंडाशय को उत्तेजित करता है और पुरुषों में शुक्राणु उत्पादन को उत्तेजित करता है. ▪️ *ल्यूटीनाइजिंग हार्मोन* –महिलाओं में ओव्यूलेशन को ट्रिगर करता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करता है ▪️ *थायराइड ग्रंथि–* ▪️थायराइड ग्रंथि से मुख्य रूप से दो हार्मोन स्रावित होते हैं: ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) और थायरोक्सिन (T4)। ▪️ ये चयापचय दर को नियंत्रित करते हैं. शरीर के तापमान, हृदय गति और अन्य शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं. विकास और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

🔳 *स्वसन तंत्र–* ▪️ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के आदान-प्रदान की क्रिया। ▪️ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज के दहन से ऊर्जा मुक्त होती है ,तथा जल और कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होता है। ▪️ग्रसनी 13 सेंटीमीटर लंबी कीप के आकार की गुहा होती है। ▪️एपिग्लोटिस, भोजन के समय यह ढक्कन की भांति कार्य करती है जिससे भोजन श्वास नली में प्रवेश नहीं करता। ▪️ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन नामक लाल वर्णक द्वारा होता है, हिमोग्लोबिन लाल रुधिर कणिका में पाया जाता है । ▪️ फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर की समस्त कोशिकाओं तक तथा कोशिकाओं से कार्बनडाइऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचाना रुधिर का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। ▪️ *अवायवीय श्वसन–* यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। ▪️ इसमें खाद्य पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड और एथील अल्कोहल बनते हैं। ▪️ इसमें अपेक्षाकृत बहुत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है। ▪️ *ऑक्सी श्वसन –* यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है तथा इस क्रिया में खाद्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। ▪️ इसमें कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनते हैं तथा अधिक मात्रा में उर्जा उत्पन्न होती है।

🔳 *कंकाल तंत्र–* ▪️वयस्क मनुष्य का अंतः कंकाल 206 हड्डियों का बना होता है। ▪️मनुष्य की खोपड़ी में कुल 29 अस्थियां होती हैं। ▪️मनुष्य का कशेरुक दंड 26 हड्डियों से मिलकर बना होता है। ▪️गर्दन का पहला कशेरुक एटलस कशेरुक कहलाता है , यह खोपड़ी को सीधे रखता है। ▪️कशेरुक दंड का कार्य मेरूरज्जूको सुरक्षा प्रदान करना है । ▪️ *प्रमुख अंगों में पाई जाने वाली हड्डियां* – ▪️सिर की कुल हड्डियां – 29 ▪️कपाल – 8 ▪️फेसियल – 14 ▪️ कान – 6 ▪️ रीड की कुल हड्डियों की संख्या – 26 ▪️ पसलियों की कुल संख्या – 24 ▪️ऊपरी बाहु – 2 ▪️कलाई( कार्पुलस )– 16 ▪️हथेली( मेटाकारपल्स) – 10 ▪️ जांघ ( फीमर) – 2 ▪️घुटना( पटेला) – 2 ▪️टखना( टार्सल्स) – 14 ▪️तलवा( मेटा टार्सल्स) – 10 ▪️अंगुलियों( फार्लेंजेज) – 28

▪️ *मेंड्यूला* – इसका कार्य हृदय स्पंदन की दर को प्रबलता, श्वसन दर , खांसना, छींकना, स्वाद, लार का निकलना , जीभ की गति का नियंत्रण करना है। ▪️ *मेरुरज्जू* – इसका कार्य प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय है। ▪️यह मस्तिष्क से आने जाने वाली उद्दीपनों का संवहन करती है। ▪️प्रतिवर्ती क्रियाओं की खोज सर्वोत्तम मार्शल हाल ने किया था। ▪️मानव शरीर में 12 जोड़ी कपालीय तंत्र तथा 31 जोड़ी मेरुरज्जू पाई जाती है। ▪️ *अनुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य–* आंख की पुतली को फैलाना ,हृदय स्पंदन की दर को बढ़ाना, पसीने के श्रावण को उत्तेजित करना, मूत्राशय के पेशियों को शिथिल करना आदि। ▪️परानुकंपी तंत्रिका तंत्र के कार्य– आंखों की पुतली को संकुचित करना, हृदय स्पंदन की दर को घटाना, मूत्र त्याग के लिए पेशियों को सिकोड़ना, बाह्य जननांगों को उत्तेजित करना आदि। ▪️ तंत्रिका ऊतक की इकाई को न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका कहते हैं। ▪️ तंत्रिका कोशिकाएं शरीर की सबसे लंबी कोशिकाएं होती हैं।

🔳 *तंत्रिका तंत्र –* ▪️यह वातावरण में परिवर्तन की सूचनाओं को संवेदी अंगों से प्राप्त करके उसका तीव्र गति से प्रसारण करती है। ▪️यह शरीर के विभिन्न अंगों के बीच कार्यात्मक समन्वय स्थापित करती है। ▪️ *केंद्रीय तंत्रिका तंत्र –* इसके अंतर्गत मस्तिष्क एवं मेरुरज्जू आते है। ▪️ *मस्तिष्क* – इसका वजन 1.3 से 1.4 किलोग्राम तक होता है। ▪️ *अग्रमस्तिष्क* में सेरीब्रम, थैलेमस और हाइपोथैलेमस होता है। ▪️सेरीब्रम मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। ▪️सेरीब्रम में इच्छा शक्ति, बुद्धि, ज्ञान, स्मृति, चिंतन का केंद्र होता है। ▪️थैलेमस में ताप, स्पर्श आदि का केंद्र है। ▪️हाइपोथैलेमस का कार्य अन्तःस्त्रावी ग्रंथियों से स्रावित होने वाले हार्मोस का नियंत्रण करना है। ▪️यह भूख , प्यास, क्रोध का भी नियंत्रण केंद्र है। ▪️ *सीरीबेलम –* यह मस्तिष्क का दूसरा बड़ा भाग है। ▪️यह पश्च मस्तिष्क में पाया जाता है। ▪️इसका कार्य शरीर का संतुलन बनाए रखना है।

🔳 *उत्सर्जन तन्त्र –* ▪️ *फेफड़ा* – इससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन श्वसन क्रिया के द्वारा होता है। ▪️ लहसुन प्याज और कुछ मसाले के वाष्पशील घटकों का भी उत्सर्जन होता है। ▪️ *यकृत* – इससे अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करता है। ▪️एमिनो अम्ल के नाइट्रोजनी पदार्थों का उत्सर्जन करता है। ▪️ *वृक्क( किडनी)–* यह स्तनधारियों में एक जोड़ी पाया जाता है। ▪️यह लगभग 10 लाख वृक्क नलिकाओं( नेफ्रॉन) से मिलकर बना होता है। ▪️नेफ्रांस , वृक्को की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। ▪️इसका कार्य मूत्र निर्माण एवं परासरण नियंत्रण( जल एवं खनिज का नियंत्रण) है। ▪️मूत्र का निर्माण वृक्क नलिकाओं में ही होता है। ▪️मूत्र में लगभग 95% जल ,2% अनावश्यक लवण , 2.3 % यूरिया , यूरिक अम्ल आदि पाए जाते है। ▪️मूत्र का pH मान 6 होता है। ▪️वृक्क की पथरी कैल्सियम ऑक्जेलेट की बनी होती है।

▪️ *प्लाज्मा* – यह निर्जीव तरल भाग है। ▪️इसके माध्यम से रासायनिक पदार्थों का संवहन होता है। ▪️ *रुधिर कणिकाएँ–* ▪️1. *लाल रुधिर कणिकाएँ (इरिथ्रोसाइट्स):* ये कणिकाएँ ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को बांधता है, ▪️ *(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स):* ये कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। वे हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। ▪️( *3) प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स):* ये रुधिर के थक्का बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्तस्राव बंद हो जाता है। ▪️प्लाज्मा की कुल मात्रा कुल रुधिर का 55% होती है। ▪️एक सामान्य मनुष्य में हीमोग्लोबिन की मात्रा 15 ग्राम प्रति 100ml रुधिर होता है। ▪️शरीर में रुधिर का निर्माण लाल अस्थि मज्जा में होता है। ▪️लाल रुधिर कणिका का जीवन का लगभग 120 दिन होता है। 🔳 *रक्त समूह –* ▪️ *खोज* – कार्ल लैंडस्टीनर ▪️ *एंटीजन 2 प्रकार के होते है–* A और B ▪️ *एंटीबॉडी 2 प्रकार के होते है–* a और b ▪️ *रक्त समूह 4 प्रकार के होते है–* A, B ,AB और O ▪️ *AB रक्तसमूह को सर्वग्राही कहते है* । ▪️ *O रक्त समूह को सर्वदाता कहते है* ।

▪️हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त तथा दाहिने भाग में अशुद्ध रक्त बहता है। ▪️हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते है। ▪️ *लसिका* – यह हल्का पीला द्रव्य होता है। ▪️इसमें मात्र श्वेत रूधिराणु पाए जाते हैं। ▪️ इसका बहाव केवल अंगों से हृदय की ओर होता है। ▪️ इसका कार्य लिंफोसाइट्स का निर्माण करना होता है। ▪️ इसमें उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करता है। ▪️ यह घाव भरने में सहायक होती है ▪️ *रुधिर* – यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है। ▪️यह क्षारीय प्रकृति का होता है, इसका PH मान 7.4 है। ▪️वयस्क मनुष्य में लगभग 5 से 7 लीटर रुधिर होता है। ▪️ रुधिर के दो भाग होते हैं: प्लाज्मा और रक्तकणिका

🔳 *प्रमुख पादप हार्मोन –* ▪️ *ऑक्सिन* – यह खोजा गया प्रथम पादप हार्मोन था। ▪️ यह पौधे के ऊपरी भाग में पाया जाता है। ▪️ इससे पौधों की वृद्धि होती है। ▪️ *जिब्रेलिन* – यह पौधों को लंबा करने में सहायक होता है। ▪️ यह बीजों को अंकुरण के लिए प्रेरित करता है। ▪️ *साइटोकायनिन* – यह कोशिका विभाजन और विकास में मदद करता है। ▪️यह प्रोटीन एवं RNA के निर्माण में सहायक है ▪️ *एब्सिसिक एसिड* – यह एक वृद्धि रोधी हार्मोन है। ▪️यह बीजों को सुप्ता अवस्था में रखने में सहायक होता है। ▪️ *एथलीन* – यह गैसीय अवस्था में पाया जाने वाला एकमात्र हार्मोन है। ▪️ यह फलों को पकाने तथा पुष्पों की संख्या में वृद्धि में सहायक होता है। ▪️इसे फूल खिलाने वाला हार्मोन कहते हैं ।

▪️ *पौधे नाइट्रेट के रूप में नाइट्रोजन लेते हैं* ,नाइट्रोजन का नाइट्रेट्स में परिवर्तन जीवाणुओं द्वारा होता है। ▪️एजोटोबेक्टर, क्लॉडीस्ट्रेडियम आदि जीवाणु पृथ्वी पर मिट्टी में स्थित वायु के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️एनाबीना और नॉस्टॉक आदि सायनोबैक्टीरिया वायुमंडल नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। ▪️नायट्रोसोकोकस एवं नाइट्रोसोमोनस जीवाणु अमोनिया को नाइट्राइट में बदलते हैं। ▪️ जीवाणुओं का उपयोग चर्म शोधन तथा रेशे की रेटिंग में भी होता है। ▪️ब्रायोफाइटा भ्रूण बनाने वाले पादप समूह का एक सरल व आद्य समूह है। ▪️इसे वनस्पति जगत का एंफीबिया वर्ग भी कहा जाता है। ▪️आवृतबीजी पौधों में बीज फल के अंदर होते हैं। ▪️आवृतबीजी पौधों के जड़, तना ,पत्ती, फल फूल सभी पूर्ण विकसित होते हैं। ▪️अनावृतबीजी पौधों में अंडाशय का पूर्णता अभाव होता है। ▪️एकबीज पत्री पौधों में एक बीज पत्र पाया जाता है। ▪️द्विबीजपत्री पौधों में दो बीज पत्र पाया जाता है ।

🔳 *विषाणु –* ▪️ *खोज* – 1892 ईस्वी में इवानोवश्की द्वारा। ▪️यह केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ▪️इन्हें सजीव एवं निर्जीवों के बीच की कड़ी कहा जाता है। ▪️ यह कोशिका के बाहर निष्क्रिय रूप में होते हैं तथा जीवित कोशिका में पहुंचते ही सक्रिय हो जाते हैं। ▪️ इनकी रासायनिक संरचना में न्यूक्लिक अम्ल का एक केंद्रीय कोड होता है, जो एक प्रोटीन आवरण से ढका होता है । ▪️ *पादप विषाणु–* इनमें RNA होता है, परंतु कभी कभी DNA पाया जाता। ▪️ *जंतु विषाणु–* इनमें DNA होता है, कभी कभी RNA भी होता है। ▪️ *कवक* – इसका अध्ययन *माइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️यह क्लोरोफिल रहित संकेंद्रीय संवहन ऊतक रहित थाइलोफाइट है। ▪️इनकी कोशिका भित्ति सैलूलोज से बनी होती है। ▪️ *जीवाणु –* इनका अध्ययन *बैक्टीरियोलॉजी* कहलाता है। ▪️इनकी *खोज* 1683 ईस्वी में *ल्यूवेनहॉक* ने किया। इन्हें जीवाणु विज्ञान का पिता कहा जाता है। ▪️ *रॉबर्ट कोच ने कालरा* तथा *क्षय रोग* के जीवाणुओं की खोज की। ▪️ *लुई पाश्चर ने रेबीज* के टीके की खोज की।

🔳 *वनस्पति विज्ञान –* ▪️ *जनक* – थ्रियोफ्रेस्टस ▪️पौधों में कोशिका भित्ति पाई जाती है, जंतुओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती। ▪️पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन तैयार करते हैं,इसलिए पौधों को स्वपोषी कहते हैं। ▪️ऐसे पौधे जिनमें बीज तथा पुष्प नहीं पाए जाते हैं क्रिप्टोगेम्स कहते हैं। ▪️ *शैवाल* – इसका अध्ययन *फ़ाइकोलॉजी* कहलाता है। ▪️ये क्लोरोफिल युक्त, संवहन उत्तक रहित स्वपोषी होते हैं। ▪️शैवाल का उपयोग भोजन के रूप में( अल्वा , सारगासम, एलेरिया, लेमिनेरिया) ,औषधीय बनाने में ( क्लोरला),खाद बनाने में(एनाबीना, नॉस्तोक),आयोडीन बनाने (लिमिनोरिया) में किया जाता है। 🔳 *पौधों में तत्वों की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग–* ▪️धान का खैरा रोग – जस्ता की कमी ▪️चुकंदर का हार्ट रॉट – बोरान की कमी ▪️नींबू में डाईबैंक रोग – तांबा की कमी ▪️नींबू में लिटिल लीफ रोग – जस्ता ( जिंक) की कमी ▪️फूलगोभी में ब्राउनिंग रोग – बोरान की कमी ▪️सेब में आंतरिक काग – बोरान की कमी ▪️पत्तागोभी में व्हिपटेल रोग – मालीब्लेडनम की कमी

▪️ *DNA अणु की डबलकुंडली त्रिविम प्रतिरूप* वाटसन एवं क्रिक ने वर्ष 1953 में प्रस्तुत किया। ▪️कोशिकाओं में DNA अनुवांशिक पदार्थ होता है। ▪️ *DNA की खोज* फेड्रिक मिंसर ने 1869 ईस्वी में की। ▪️DNA सभी अनुवांशिक क्रियाओं का संचालन करता है, और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है। ▪️ जीन DNA से बने होते है। ▪️ *मानव में कुल 23 जोड़ी, अर्थात 46 गुणसूत्र होते है।* ▪️ *22 जोड़ी गुणसूत्र को ऑटोसोम्स* कहते है, ये एक समान होते है। ▪️ *23वा जोड़ी गुणसूत्र स्त्री और पुरुष में समान नहीं होते है, इन्हें हिट्रोसमस कहते है।* ▪️डॉली नमक भेड़ का क्लोन विश्व में किसी स्तनधारी जीव का प्रथम क्लोन था। ▪️पौधों के जड़ तना एवं पत्ती द्वारा जनन कायिक प्रवर्धन कहलाता है। ▪️स्टेम सेल में शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता होती है। ▪️डीएनए फिंगरप्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग शिशु का पितृत्व स्थापित करने, मानसिक रोगों की पहचान, पशुओं की वंशावली स्थापित करने में किया जाता है। ▪️ गोल्डन राइस जैव प्रौद्योगिकी की उपलब्धि है इसके जन्मदाता प्रोफेसर इंगो पैट्रिक्स एवं डॉक्टर पीटर बियर है। .

🔳 *जैव विकास–* ▪️जैव विकास का पहला सिद्धांत फ्रांसीसी जीव वैज्ञानिक डी लैमार्क ने 1809 में अपनी पुस्तक फिलासफी जूलॉजी में प्रकाशित किया। ▪️जीवो के शरीर में जो भी परिवर्तन होता है उन्हें उपार्जित लक्षण कहते हैं। यह वंशानुगत होता है। ▪️ जैव विकास परिकल्पना का दूसरा सिद्धांत 1831 में डार्विन ने दिया था । ▪️डार्विनवाद को प्राकृतिक वरर्णवाद भी कहते हैं। ▪️ह्यूगो डी ब्रिज द्वारा उत्परिवर्तनवाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया। ▪️सभी जीव जंतुओं में उत्परिवर्तन का प्राकृतिक गुण होता है। ▪️ *आनुवांशिकी –* ▪️ ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का पिता कहा जाता है। ▪️विलियम बैटसन ने वर्ष 1905 में सर्वप्रथम जेनेटिक्स का नाम का उपयोग किया। ▪️जीन शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोहांसन ने किया। ▪️1888 ईस्वी में सर्वप्रथम डब्लू वालडेयर ने गुणसूत्र नामक शब्द का प्रयोग किया। ▪️गुणसूत्र सभी अनुवांशिक गुण को निर्धारित व संचारित करता है। प्रत्येक जीन में गुणसूत्र की संख्या निश्चित होती है। ▪️DNA पॉलिमरेज नामक एंजाइम से डीएनए का संश्लेषण होता है ,इसकी खोज कार्नबर्ग ने की।

▪️ *गाल्जीकाय* – *खोज* – कैमिलो गाल्जी द्वारा। ▪️यह जीवाणु एवं नीले हरे शैवालों में अनुपस्थित होता है। ▪️यह कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम का निर्माण करता है। ▪️इसे कोशिका का ट्रैफिक पुलिस कहा जाता है। ▪️ *लाइसोसोम* – *खोज* – डी डुवे द्वारा। ▪️इसे आत्महत्या की थैली कहा जाता है। ▪️इसका कार्य वाह्य पदार्थ का पाचन करना है। ▪️ *सेंट्रोसोम* – *खोज* – एडुआर्ड वान बेनेडेन द्वारा। ▪️ यह केवल जंतु कोशिका में पाया जाता है। ▪️ यह कोशिका विभाजन में भाग लेता है। ▪️ *लवक* – *खोज* – हेकल द्वारा। ▪️यह प्रायः पादप कोशिकाओं में पाया जाता है। ▪️हरित लवक में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का वर्णक पाया जाता है। ▪️हरित लवक को कोशिका का रसोई घर कहते हैं। ▪️ *केंद्रक* –केंद्रक के चार भाग होते हैं –केंद्रककला ,केंद्रकद्रव्य, केंद्रिका एवं क्रोमेटीनधागे ▪️ *केंद्रीका की खोज* फोंटना ने की। ▪️ क्रोमेटिन एक न्यूक्लियोप्रोटीन है जो न्यूक्लिक अम्ल एवं छारिया प्रोटीन के मिश्रण से बना होता है। ▪️ *न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार का होता है–* DNA एवं RNA ▪️

🔳 *कोशिका के मुख्य भाग–* ▪️ *कोशिका झिल्ली* – यह एक अर्धपारगम्य झिल्ली होती है। ▪️यह कोशिका की निश्चित आकृति बनाए रखती है। ▪️यह लिपिड की बनी होती है। ▪️इसमें प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। ▪️ *कोशिका भित्ति* –यह केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है। ▪️यह सैलूलोज की बनी होती है। ▪️जीवाणुओं की कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। ▪️माइट्रोकंडिया–इसकी खोज अल्टमैन ने 1886 ईस्वी में की। ▪️यह कोशिका का श्वसन स्थल है। ▪️सी बेंडा ने सर्वप्रथम माइट्रोकंडिया नाम दिया। ▪️इसे पावरहाउस ऑफ द सेल कहा जाता है। ▪️ इसे यूकैरियोटिक कोशिकाओं के भीतर प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं माना जाता है। ▪️ *राइबोसोम–* ▪️सर्वप्रथम जॉर्ज पैलेड ने इसे देखा। ▪️इसे प्रोटीन की फैक्ट्री कहा जाता है।

🔳 *कोशिका–* ▪️कोशिका *2 प्रकार* की होती है– ▪️ *प्रोकैरियोटिक* –हिस्टोन प्रोटीन नहीं होता। ▪️ केंद्रक अविकसित होता है। ▪️राइबोसोम 70S प्रकार का होता है। ▪️श्वसन प्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है। ▪️कोशिका विभाजन अर्ध सूत्री प्रकार का होता है। ▪️माइट्रोकंडिया अनुपस्थित होता है। ▪️डीएनए एकल सूत्र के रूप में उपस्थित होता है। ▪️ *यूकैरियोटिक कोशिका–* ▪️डीएनए के साथ हिस्टोन प्रोटीन लगे होते हैं। ▪️ केंद्रक पूर्ण विकसित होता है। ▪️माइट्रोकंडिया उपस्थित होता है । ▪️राइबोसोम 80S प्रकार का होता है। ▪️ डीएनए पूर्ण विकसित एवं दोहरे सूत्र के रूप में होता है।