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Om digital study

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📈 Аналітичний огляд Telegram-каналу Om digital study

Канал Om digital study (@omdigitalstudy) у мовному сегменті Хінді є активним учасником. На даний момент спільнота об'єднує 19 371 підписників, посідаючи 10 304 місце в категорії Освіта та 21 851 місце у регіоні Індія.

📊 Показники аудиторії та динаміка

З моменту свого створення невідомо, проект продемонстрував стрімке зростання, зібравши аудиторію у 19 371 підписників.

За останніми даними від 08 липня, 2026, канал демонструє стабільну активність. Хоча за останні 30 днів спостерігається зміна кількості учасників на -89, а за останні 24 години на -12, загальне охоплення залишається високим.

  • Статус верифікації: Не верифікований
  • Рівень залученості (ER): Середній показник залученості аудиторії становить 29.58%. Протягом перших 24 годин після публікації контент зазвичай збирає 11.46% реакцій від загальної кількості підписників.
  • Охоплення публікацій: В середньому кожен допис отримує 5 730 переглядів. Протягом першої доби публікація в середньому набирає 2 219 переглядів.
  • Реакції та взаємодія: Аудиторія активно підтримує контент: середня кількість реакцій на один пост – 5.
  • Тематичні інтереси: Контент зосереджений навколо ключових тем, таких як जनवरी, 2026, राजस्थान, ऑफर, दिवस.

📝 Опис та контентна політика

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Завдяки високій частоті оновлень (останні дані отримано 09 липня, 2026), канал підтримує актуальність та високий рівень охоплення публікацій. Аналітика показує, що аудиторія активно взаємодіє з контентом, що робить його важливою точкою впливу в категорії Освіта.

19 371
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Архів дописів

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राव बीका एवं बीकानेर – राव बीका मारवाड़ के शासक राव जोधा का पुत्र था। अपने पिता के द्वारा व्यंग्य किये जाने पर 1465 ई. में वह
राव बीका एवं बीकानेरराव बीका मारवाड़ के शासक राव जोधा का पुत्र था। अपने पिता के द्वारा व्यंग्य किये जाने पर 1465 ई. में वह जांगल प्रदेश में आ गया। किंवदंती है कि करणी माता की कृपा से उसे नवीन राज्य स्थापित करने में सहायता मिली। एक दूसरी मान्यता के अनुसार जांगल प्रदेश को राव बीका व जाट सरदार नरा ने मिलकर जीता, दोनों के नाम पर इसे बीकानेर कहा गया। पूंगल के राव शेखा की पुत्री से विवाह कर उसने अपनी स्थिति को मजबूत किया। 1488 ई. में आखातीज के दिन बीकानेर की स्थापना कर इसे राठौड़ सत्ता का दूसरा केन्द्र बनाया। इन्होंने देशनोक में करणीमाता के मूल मंदिर का निर्माण करवाया।
पन्द्रह सौ पैंतालवे सुद बैसाख सुमेर । थावर बीज थरपियो बीके बीकानेर।।
रायसिंह द्वारा जूनागढ़ दुर्ग की स्थापना : 1574 ई. में रायसिंह 'महाराजाधिराज' की उपाधि के साथ बीकानेर का शासक बना। रायसिंह ने बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया तथा किले के दरवाजे पर जयमल-फत्ता की पाषाण मूर्तियाँ लगवाई।मुंशी देवीप्रसाद ने इसे 'राजपूताने का कर्ण' की संज्ञा दी है। Special Offer ! Click here

अक्षय तृतीया एवं बीकानेर स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐 आज के इस विशेष और पवित्र दिवस पर सभी स्मार्ट कोर्सेज & टेस
अक्षय तृतीया एवं बीकानेर स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐 आज के इस विशेष और पवित्र दिवस पर सभी स्मार्ट कोर्सेज & टेस्ट सीरीज पर 70% तक की विशेष छूट का उपहार !

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Combined Merit List (After Intv.) For RAS 2024

स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली छोड़ना सरकार की एक 'मौन साधना' है, ताकि छात्र शोर न मचाएं और सरकार चैन की नींद सो सके। रही बात किताबों की, तो भारी बस्ते का बोझ कम करके सरकार बच्चों के कंधों का ख्याल रख रही है, दिमाग का क्या है, वो तो सोशल मीडिया से भी चल जाएगा! https://youtu.be/u4ASiX3Crm4?si=6y3TNkbPwvr7N2k2

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जैसलमेर में ओरण संरक्षण के लिए राज्य सरकार की बड़ी पहल ओरण के लिए कुल 3666 हैक्टेयर भूमि आरक्षित जयपुर, 16 अप्रैल | पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने जैसलमेर जिले के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए ओरण भूमि के आरक्षण हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संरक्षण और आस्था का संगम— ओरण प्राचीन काल से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थानीय लोग इन पवित्र उपवनों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन क्षेत्रों में पेड़ों को काटना या कुल्हाड़ी का उपयोग करना वर्जित है, जिससे यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र स्वतः ही सुरक्षित रहता है। राज्य सरकार द्वारा जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में ओरण के लिए कुल 3666.2139 हैक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है, जिसमें रामगढ़ तहसील के ग्राम दिलावर का गांव में 124.9502 हैक्टेयर, कुछड़ी ग्राम में 1084.8043 हैक्टेयर और पूनमनगर ग्राम में 583.9876 हैक्टेयर, फतेहगढ़ तहसील के ग्राम भीमसर में 952.2752 हैक्टेयर और बींजोता में 96.7716 हैक्टेयरभूमि ओरण क्षेत्र के लिए आरक्षित की गई है। । जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला के तीन खण्डों में क्रमशः 187.364, 256.2511 और 253.4034 हैक्टेयर तथा बीरमा काणोद 126.4065 हैक्टेयर भूमि आरक्षित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला में 1457.4991 हैक्टेयर, नाचना तहसील के ग्राम आसकन्द्रा में 225.03 हैक्टेयर एवं ग्राम दिधू में 229.5067 हैक्टेयर, ग्राम मोहनगढ़ बारानी/पन्नोधराय में 333.9165 हैक्टेयर क्षेत्रों को भी ओरण के रूप में आरक्षित करने की कार्यवाही की जा रही है। 'ओरण' जो संस्कृत शब्द 'अरण्य' से बना है और जिसका अर्थ 'बिना छेड़ा हुआ जंगल' होता है। यह न केवल हमारी प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है बल्कि मरुस्थलीकरण को रोकने में भी सहायक है। यह पहल न केवल जैसलमेर के पारंपरिक आस्था स्थलों का संवर्धन करेगी बल्कि मरुस्थलीय क्षेत्र में हरियाली और जैव विविधता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

राजस्थान में कराकल संरक्षण हेतु “प्रोजेक्ट कराकल” का शुभारंभ राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्
राजस्थान में कराकल संरक्षण हेतु “प्रोजेक्ट कराकल” का शुभारंभ राजस्थान वन विभाग द्वारा सवाई माधोपुर स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 15 अप्रैल, 2026 को “राजस्थान में कराकल संरक्षण” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन कर प्रोजेक्ट कराकल का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में एशियाई कराकल, जो एक दुर्लभ एवं कम दिखाई देने वाली जंगली बिल्ली है, के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रोजेक्ट कराकल के अंतर्गत प्रजाति के वितरण का वैज्ञानिक आकलन, महत्वपूर्ण आवासों की पहचान एवं संरक्षण, निगरानी एवं अनुसंधान तंत्र को सुदृढ़ करना तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में रणथम्भौर, मुकुंदरा हिल्स एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में कराकल की स्थिति का आकलन, संरक्षण रणनीतियों का निर्धारण एवं निगरानी प्रणाली को प्रभावी बनाना शामिल रहा। राजस्थान वन विभाग द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान, SACON एवं टाइगर वॉच के सहयोग से प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सुजस ई प्रश्नोत्तरी सही उत्तर: 1-C, 2-B, 3-D, 4-A, 5-B
सुजस ई प्रश्नोत्तरी सही उत्तर: 1-C, 2-B, 3-D, 4-A, 5-B

✍️ राष्‍ट्रीय पोषण पखवाड़ा : 9 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026
✍️ राष्‍ट्रीय पोषण पखवाड़ा : 9 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026

विश्व बैंक ने राजस्थान में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए 225 मिलियन डॉलर की परियोजना को दी मंजूरी — जयपुर, 15 अप्रैल । विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स ने राजस्थान में राज्य राजमार्गों की दक्षता, मजबूती और सुरक्षा सुधार के लिए 225 मिलियन डॉलर (लगभग 2 हजार करोड़ रुपये) से अधिक की राजस्थान राजमार्ग आधुनिकीकरण परियोजना को मंजूरी प्रदान की है। विश्व बैंक के अनुसार इस परियोजना से औद्योगिक, खनन, पर्यटन और कृषि से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, 30 लाख से अधिक लोगों को बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी का लाभ भी मिलेगा। यह परियोजना राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को आधुनिक और सेवा केन्द्रित बनाने में मददगार साबित होगी। इससे प्राधिकरण प्रदेश में लगभग 800 किलोमीटर के चयनित राजमार्गों का उन्नयन और रखरखाव करेगा। साथ ही, राजस्थान में सड़क सुरक्षा प्रबंधन को और बेहतर बनाएगा। इस स्वीकृत प्रोजेक्ट से भारत में पहली बार स्टेप-अप लोन की शुरूआत होगी। विश्व बैंक के भारत में कार्यवाहक निदेशक पॉल प्रोसी ने कहा है कि इस परियोजना से युवाओं को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे वे आर्थिक गतिविधियों वाले विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ ले पाएंगे। इससे प्रदेश में औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) से प्राप्त 225 मिलियन डॉलर के ऋण की अंतिम परिपक्वता अवधि 35 वर्ष है। जिसमें स्टेप-अप लोन की सुविधा तथा 5 वर्ष की अनुग्रह अवधि भी शामिल है।

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