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I.A.S.(हिंदी माध्यम)

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1 मई, 2020 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.62 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 481.08 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत 8वें स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है। विदेशी मुद्रा भंडार इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये परन्तु इसमें विशेष आहरण अधिकारों , सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थितियों को शामिल किया जाता है। इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भंडार अथवा अंतर्राष्ट्रीय भंडार की संज्ञा देना अधिक उचित है। 1 मई, 2020 को विदेशी मुद्रा भंडार विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए): $443.316 बिलियन गोल्ड रिजर्व: $ 32.277 बिलियन आईएमएफ के साथ एसडीआर: $ 1.426 बिलियन आईएमएफ के साथ रिजर्व की स्थिति: $ 4.059 बिलियन

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक ने हाल ही में कोविड-19 निपटने के लिए भारत को 500 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी। यह ऋण विश्व बैंक द्वारा सह-वित्तपोषित है। एआईआईबी ने यह भी रेखांकित किया कि COVID-19 रोगियों के प्रभावी उपचार के लिए एक लचीली स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण और इसके प्रसार को रोकना तत्काल प्राथमिकता है। पिछले महीने बैंक ने अपनी आरंभिक COVID-19 क्राइसिस रिकवरी फैसिलिटी को दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर से 10 बिलियन डॉलर कर दिया था। एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) एआईआईबी चीन द्वारा शुरू किया गया बहुपक्षीय विकास बैंक है। जिसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आधारभूत संरचना विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है। यह आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2015 में एशिया में सामाजिक और आर्थिक परिणामों में सुधार करने तथा जनवरी 2016 में व्यवसाय के लिए खोले जाने के मिशन के साथ स्थापित किया गया था। इसका मुख्यालय बीजिंग, चीन में स्थित है। इसका लक्ष्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, आधारभूत संरचना प्रदान करना और क्षेत्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र और उसकी साझेदार एजेंसियों ने COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए 6.7 बिलियन डालर की वैश्विक अपील शुरू की है। मुख्य बिंदु प्रारंभ में, संगठन ने COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए कमजोर देशों को 2 बिलियन अमरीकी डालर प्रदान करने का संकल्प लिया था। हालांकि, अब यह राशि बढ़कर 6.7 बिलियन डॉलर हो गई है। इस योजना को “वैश्विक मानवीय प्रतिक्रिया योजना” नाम दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कोरोना वायरस ने दुनिया के हर देश को प्रभावित किया है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित सबसे गरीब देश होंगे। इस वायरस का सबसे खराब और विनाशकारी प्रभाव सबसे गरीब देशों पर पड़ेगा। इसलिए, इन देशों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अब तक जुटाई गई धनराशि ब्रिटेन, जर्मनी, यूरोपीय आयोग, जापान, फारस की खाड़ी के देशों और कनाडा जैसे देशों से प्राप्त की गयी है। महत्व संयुक्त राष्ट्र ने आय में गिरावट, खाद्य आपूर्ति गिरने, नौकरियों के कम होने, कीमतों के बढ़ने और बच्चों को भोजन न मिलना और टीकाकरण के अभाव के साक्ष्य की पहचान की है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, वर्ष के अंत तक लगभग 26.5 करोड़ लोगों को अकाल का सामना करना पड़ता है। इसलिए, खाद्य श्रृंखलाओं को चलाने के लिए धन में वृद्धि करना महत्वपूर्ण है। कवर किये गये देश संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही 54 देशों को कवर किया था। अब इसमें अतिरिक्त 9 देशों को जोड़ा गया है। इसमें लाइबेरिया, जिबूती, पाकिस्तान, मोजाम्बिक, सिएरा लियोन, फिलीपींस, जिम्बाब्वे और टोगो शामिल हैं।

सुंदरबन डेल्टा, जो भारत और बांग्लादेश में फैला हुआ है, विश्व में बाघों का एकमात्र मैंग्रोव वन निवास हैं। पश्चिम बंगाल वन विभाग के नवीनतम अनुमान के अनुसार, बाघों की संख्या 2019-20 में 88 से बढ़कर 96 हो गई है। सुंदरबन एक विश्व धरोहर स्थल और रामसर स्थल है। मुख्य बिंदु 2017-18 में, सुंदरबन में रॉयल बंगाल टाइगर्स की कुल संख्या 87 थी। 2018-19 की जनगणना में यह बढ़कर 88 हो गई। संख्या 96 तक पहुंचने के साथ, एक बड़ी छलांग लग गई है। वन विभाग के वीडियो फुटेज के अनुसार बाघ स्वस्थ हैं। 4,200 वर्ग किलोमीटर में कैमरे लगाए गए हैं। इसमें से 3,700 वर्ग किलोमीटर को बाघ क्षेत्र कहा जाता है। IUCN के तहत, रॉयल बंगाल टाइगर्स को लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सुंदरबन सुंदरबन का सार्वभौमिक महत्व है और यह दुनिया में सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। यह विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। सुंदरवन के मैंग्रोव वन गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर बने हुए हैं। ग्लोबल टाइगर फोरम ग्लोबल टाइगर फोरम एकमात्र अंतर-सरकारी संगठन है जो बाघों के संरक्षण को बढ़ावा देने में शामिल है। भारत भी इस कार्यक्रम का एक हिस्सा है। इस फोरम के अनुसार, बाघों की 97% आबादी कम हो चुकी है और इनके 94% आवास स्थल नष्ट हो चुके हैं।

COVID-19 परीक्षण किट को लगभग 200 प्रयोगशालाओं में पहुंचाने के लिए भारतीय डाक ने ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के साथ समझौता किया है। इन प्रयोगशालाओं को ICMR द्वारा नामित किया गया है। मुख्य बिंदु ICMR ने पूरे देश में प्रति दिन 1 लाख COVID-19 परीक्षण करने की योजना बनाई है। इसे हासिल करने के लिए, भारतीय डाक ने अपने 1,50,000 डाकघरों के साथ ICMR के साथ समझौता किया है। महत्व भारतीय डाक उत्तर पूर्वी क्षेत्र जैसे डूंगरपुर, झालवार में दूरदराज के स्थानों तक पहुंचने में मदद करेगा। इसके अलावा यह इम्फाल, कोलकाता, आइजोल, जोधपुर, राची, भुवनेश्वर, उदयपुर और कोटा जैसे अन्य शहरों में भी किट वितरित करेगा। भारतीय डाक की अन्य पहलें लॉक डाउन के दौरान लोगों की सेवा में रेलवे और इंडिया पोस्ट का बहुत योगदान रहा। भारतीय डाक लॉक डाउन के दौरान भोजन, राशन, दवाइयां, मेल और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। किटों का वितरण इन किटों को ड्राई आइस की पैकिंग के साथ डिलीवर जाता है। ड्राई आइस ड्राई आइस (शुष्क बर्फ) कार्बन डाइऑक्साइड का एक ठोस रूप है। इसका उपयोग कूलिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। शुष्क बर्फ का मुख्य लाभ यह है कि इसका तापमान पानी की बर्फ की तुलना में कम होता है। शुष्क बर्फ रंगहीन होती है और इसमें खट्टेपन की गंध होती है। यह गैर-ज्वलनशील होती है।

प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) 9 मई को विश्व प्रवासी दिवस के रूप में मनाता है। यह एक वार्षिक अभियान है जो प्रवासी पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करता है। थीम : पक्षी हमारी दुनिया को जोड़ते हैं इस थीम के द्वारा मुख्य रूप से पारिस्थितिकीय कनेक्टिविटी और पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता पर बल दिया गया है। यह थीम ट्रैकिंग तकनीकों पर भी केंद्रित है जो दुनिया में प्रवासी पक्षियों के मार्गों का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती हैं। मुख्य बिंदु विश्व प्रवासी दिवस की शुरुआत पहली बार 2006 में वन्य जीवों के प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन में की गयी थी। विषय का महत्व प्रवासी प्रजातियों के लिए कनेक्टिविटी आवश्यक हो गई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वर्तमान में 1 मिलियन प्रजातियां कनेक्टिविटी के नुकसान के कारण विलुप्त होने के जोखिम का सामना कर रही हैं। प्रवासी पक्षी विभिन्न देशों को जोड़ते हैं और इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए उनके बीच सहयोग आवश्यक है। जब पक्षी प्रवास करते हैं, तो वे अपने रास्तों के साथ कुछ आवासों पर निर्भर होते हैं। कुछ देशों में शहरीकरण, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, आदि की कमी के कारण मार्ग खो गए हैं। महत्वपूर्ण मुद्दे मानव निर्मित संरचनाएं विशेष रूप से रात में प्रवासी पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियों के लिए बहुत खतरा पैदा करती हैं। कांच जैसी परावर्तनशील सामग्रियों से बनी संरचनाएं कई प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण बनती हैं। इमारतों के अलावा पवन टरबाइन भी इन पक्षियों के लिए बहुत खतरा हैं।

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एसईसीआई ने आरटीसी आपूर्ति के साथ 400 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ई-रिवर्स नी‍लामी का संचालन किया परिणामस्‍वरूप प्रथम वर्ष के लिए ऐतिहासिक 2.90 रुपये/किलोवाट ऑवर शुल्‍क भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षेत्र आज एक ऐतिहासिक दिन का गवाह बना, क्‍योंकि चौबीसों घंटे (राउंड द क्‍लॉक-आरटीसी) आपूर्ति के साथ 400 मेगावाट आरई परियोजनाओं के लिए की गई ई-रिवर्स नी‍लामी हैरतंगेज 2.90 रुपये/ किलोवाट ऑवर शुल्‍क के साथ संपन्‍न हुई। यह नीलामी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसयू) सोलर एनर्जी कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने संचालित की। नीलामी में कड़ी स्‍पर्धा के बाद 400 मेगावाट क्षमता की निविदा मैसर्ज रिन्‍यू सोलर पॉवर प्राइवेट लिमिटेड को प्रदान की गई है, जिसमें लगभग 3 घंटों में सबसे कम शुल्‍क में 69 पैसे की कमी देखी गई। इस प्रयास के लिए एसईसीआई की सराहना करते हुए केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्‍य मंत्री श्री आर के सिंह ने कल शाम एक ट्वीट में कहा, “एसईसीआई द्वारा चौबीसों घंटे (राउंड द क्‍लॉक- आरटीसी) आपूर्ति के साथ 400 मेगावाट आरई परियोजनाओं के लिए संचालित की गई ई-रिवर्स नी‍लामी की परिणति प्रथम वर्ष के ऐतिहासिक 2.90 रुपये/ किलोवाट ऑवर शुल्‍क में होने से भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक स्‍वर्णिम अध्‍याय जुड़ गया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 100 प्रतिशत आरई विद्युत के माध्‍यम से पुख्‍ता, सारिणी अनुसार और किफायती दाम पर आरटीसी आपूर्ति की दिशा में नई शुरुआत की है।” 400 मेगावाट क्षमता के लिए जारी निविदा में प्रबल भागीदारी देखने को मिली, जिसमें 4 बोलीकर्ताओं ने 950 मेगावाट की कुल क्षमता के लिए बोलियां प्रस्तुत कीं। ई-रिवर्स नीलामी के लिए 4 बोलीकर्ताओं में से 3 अर्थात – मैसर्ज रिन्‍यू सोलर पॉवर प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्ज ग्रीनको एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड और एचईएस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड का अंतत: चयन किया गया। मैसर्ज अयाना रिन्यूएबल पावर प्राइवेट लिमिटेड चौथी बोलीकर्ता था। इस परियोजना से एनडीएमसी तथा दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली में से प्रत्‍येक इकाई को 200 मेगावाट क्षमता बेचने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं के लिए कोई सीलिंग टैरिफ नहीं था, और डेवलपर्स अखिल भारतीय के आधार पर परियोजना स्थापित करने के लिए स्वतंत्र हैं। इस निविदा के तहत परियोजनाएं निर्माण-स्‍वामित्‍व- परिचालन (यानी बिल्ड-ओन-ऑपरेट) मॉडल के तहत स्थापित की जाएंगी। यह शुल्‍क ऐतिहासिक इसलिए है, क्‍योंकि यह निविदा 100 प्रतिशत आरई आधारित ऊर्जा उत्‍पादन स्रोतों जैसे पवन और सौर पीवी के माध्‍यम से भंडारण सहित चौबीसों घंटे आपूर्ति का प्रावधान करती है। डेवलपर को पीपीए की प्रभावी तिथि से अधिकतम 24 महीने की समयावधि प्रदान की जाएगी। प्रथम वर्ष के शुल्‍क को वार्षिक आधार पर 3 प्रतिशत की दर से पीपीए की 25 वर्ष की अवधि में से 15 वर्ष तक बढ़ाया जाएगा। नतीजतन, उक्त परियोजना के लिए प्रभावी शुल्क 3.59 रुपये किलोवाट ऑवर है। उत्‍पादन के पारंपरिक स्रोतों में देखे गए शुल्‍कों की तुलना में यह शुल्‍क 100 प्रतिशत आरई आपूर्ति के माध्यम से बिजली वितरण कम्‍पनियों के लिए उनकी ऊर्जा की मांग को पूरा करने की दिशा में बेहतर प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करता है। बोली की शर्तों के अनुसार, डेवलपर वार्षिक न्यूनतम सीयूएफ (क्षमता उपयोग कारक-सीयूएफ) आवश्यकता का 80 प्रतिशत और मासिक सीयूएफ आवश्यकता का 70 प्रतिशत पूरा करने के लिए अधिदेशित है। पीपीए के संदर्भ में उपरोक्त आवश्यकताओं को प्राप्त करने में विफल रहने पर बाद के वर्ष (वर्षों) में शुल्‍क में वृद्धि नहीं होगी, जब तक कि किसी वर्ष विशेष में उपरोक्त आवश्यकताओं को प्राप्त नहीं कर लिया जाता। इसलिए उपरोक्त आवश्यकताओं के संदर्भ में यह निविदा पुख्‍ता, सारिणी के अनुसार भरोसेमंद आरई बिजली आपूर्ति मॉडल को साकार करने के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और एसईसीआई के प्रयासों की दिशा में एक प्रमुख उपलब्धि है, जो निश्चित रूप से, ज्‍यादा व्‍यवहार्य शुल्‍क पर पारंपरिक परियोजना का स्‍थान ले सकता है।

कोविड - 19 महामारी से पैदा हुई भारी चुनौतियों के बावजूद, आरसीएफ ने एनपीके उर्वरक सुफला की बिक्री में 35 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की कोविड-19 लॉकडाउन के कारण पैदा हुई लॉजिस्टिक और अन्य गंभीर चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालयके अधीन पीएसयू, राष्ट्रीय केमिकल्स फ़र्टिलाइज़र्स लिमिटेड(आरसीएफ) ने बेहतर प्रदर्शनकरते हुए एनपीके उर्वरक सुफलाकी बिक्री मेंअप्रैल, 2019 के मुकाबले अप्रैल, 2020 में 35.47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री डीवी सदानंद गौड़ा ने खेती के पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आरसीएफको बधाई दी। इससे किसानों को उच्च पैदावार का लाभ मिलेगा। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि उनके मंत्रालय के तहत विभिन्न उर्वरक पीएसयू, कोविड–19 महामारी की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन की कठिनाइयों का सामना करने में भारतीय किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरक विभाग के अलावा, वे स्वयं केंद्र और राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि मंत्रालयों / अन्य सम्बंधित विभागों के अपने समकक्षों के साथ संपर्क में हैं, ताकि बुवाई के मौसम के दौरान आवश्यक उर्वरकों के उत्पादन, परिवहन और वितरण की सुविधा प्रदान की जा सके। आरसीएफ के सीएमडी श्रीएससी मुदगेरिकर ने एक ट्वीट में कहा कि कोविड-19 महामारी के इस कठिन समय के दौरान, आरसीएफ नेमहारष्ट्र के कृषि विभाग की मदद से किसानों को उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की है। किसानों की सुरक्षा के लिए, उर्वरकों का वितरण खेत की सीमा पर किया जा रहा है। इसके अलावा,आरसीएफकी ट्रॉम्बे इकाई ने 6.178 एमके सीएएल / एमटी के साथ ऊर्जा दक्षता में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। आरसीएफ काकॉरपोरेट सामाजिक दायित्व में पूर्ण विश्वास है। इसके तहत जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने और समाज के सामान्य हित के लिए, आरसीएफ ने पीएम केयर फंड में83.56 लाख रुपये और महाराष्ट्र के सीएमआरएफ में 83.50 लाख रुपयेका योगदान दिया है। उपक्रम के कर्मचारियों ने भी उपरोक्त कार्य के लिए एक दिन के वेतन का योगदान दिया है। यह सीएसआर के अंतर्गत आरसीएफ द्वारा पहले योगदान किए गए 50 लाख रुपये के अतिरिक्त है। आरसीएफ एक "मिनी रत्न" उपक्रम है, जो देश में उर्वरकों और रसायनों का एक प्रमुख उत्पादक है। कंपनी यूरिया, कॉम्प्लेक्स उर्वरक, जैविक- उर्वरक, सूक्ष्म पोषक– तत्व,पानी में घुलनशील उर्वरक, मृदा अनुकूलक (कंडीशनर) और कई तरह के औद्योगिक रसायन बनाती है। "उज्ज्वला" (यूरिया) और "सुफला" (कॉम्प्लेक्स उर्वरक) ब्रांडों के साथ कंपनी, ग्रामीण भारत में एक घरेलू नाम है। इन दोनों ब्रांडों की ब्रांड इक्विटी उच्च है। उर्वरक उत्पादों के अलावा, आरसीएफ बड़ी संख्या में औद्योगिक रसायनों का भी उत्पादन करता है जो डाई, सॉल्वैंट्स, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Indian History in Hindi

▪️ Vigyan Pragati ▪️ May 2020 ▪️ #Hindi Medium ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआइ) से कोविड-19 से मुकाबले के लिए दो दवाओं- फेविपिरविर (favipiravir) और फाइटोफार्मास्युटिकल (phytopharmaceutical) के क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी मिल गई है. बताया जा रहा है कि यदि ट्रायल कामयाब रहा तो कोरोना के इलाज का रास्ता खुल जाएगा और सभी लोगों को इसका फायदा मिलेगा और सस्ते में दवा उपलब्ध हो पाएगी. कोरोना वायरस (कोविड-19) से लड़ाई में दुनिया के कई देश लगे हुए हैं लेकिन इसके इलाज में कारगर दवा की खोज अभी तक नहीं हो पाई है. सीएसआईआर के महानिदेशक शेखर मंडे ने फेवीपिरवीर को एक सुरक्षित दवा बताया है और उम्मीद जताई है कि इसका ट्रायल डेढ़ महीने में पूरा हो सकता है. सीएसआइआर के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर इन दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल शुरू होगा. उन्होंने कहा कि सीएसआइआर कई प्रसिद्ध दवा कंपनियों के साथ काम कर रहा है. सीएसआइआर के मुताबिक, फेविपिरविर दवा चीन और जापान में इंफ्लूएंजा के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. वह आगे बताते हैं, 'जब भी एक वायरस एक कोशिका में प्रवेश करता है, तो यह कई प्रतिकृतियां बनाता है. फेविपिरविर इस प्रतिकृति को बनने से रोकने का काम करता है. सीएसआइआर फाइटोफार्मास्युटिकल के रूप में जैविक दवा की खोज कर रहा है, जिसे पहले से ही डेंगू के इलाज में सफल पाया गया है. अब कोविड-19 के खिलाफ इसके प्रभाव की जांच की जा रही है. सीएसआइआर कई प्रसिद्ध दवा कंपनियों के साथ काम कर रहा है. वह यह देखने की कोशिश कर रहा है कि क्या कोविड-19 के खिलाफ एक निश्चित समाधान ला सकता है. इस संबंध में कुछ कंपनियों के साथ हाल ही में क्लीनिकल ट्रायल शुरू किए गए हैं. सीएसआइआर के मुताबिक फेविपिराविर एक सुरक्षित दवा है इसलिए इसके ट्रायल में सीधे फेज-2 के परीक्षण शुरू किए जा सकते हैं. वहीं अगर परीक्षण अपेक्षित नतीजों के साथ कामयाब होते हैं तो यह दवा जल्द और किफायती दामों पर उपलब्ध होगी. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि फेविपिराविर एक पुरानी दवा है जिसका पेटेंट अब खत्म हो चुका है. फेविपिरावीर को फ्यूजीफिल्म टोयामा केमिकल लिमिटेड ने विकसित किया था और सामान्य इंफ्लुएंजा के लिए एक स्वीकृत उपचार है. इसका विपणन रूस, चीन तथा जापान में किया जाता है. फेविपिरावीर एक जेनरिक दवा है और इसे पहले से इंफ्लुएंजा के उपचार के लिए उपयोग किया जा रहा है. चीन, जापान और इटली जैसे कई देशों में इस दवा के जरिए कोविड-19 के इलाज के लिए परीक्षण चल रहा है. आईसीएमआर के संरक्षण में सिप्ला, सिप्लेंजा के रूप में उत्पाद के विपणन से पहले उपयुक्त सीमित परीक्षण कराएगी. यह दवा मुख्य रूप से जापान की फ्यूजीफिल्‍म समूह बनाती है और जापान ने पहली बार साल 2014 में इसे दवा के रूप में इस्तेमाल करने को मंजूरी दी थी साल 2016 में फ्यूजीफिल्‍म ने इसका लाइसेंस चीन की एक फार्मास्यूटिकल्स कंपनी को दिया और साल 2019 में यह एक जेनेरिक मेडिसिन बन गई. फाइटोफार्मास्युटिकल मूल रूप से एक हर्बल दवा है जिसे पौधों से निकाला जाता है. यह विभिन्न यौगिकों का मिश्रण है, लेकिन एक पौधे से जैविक उत्पत्ति है. डेंगू की दवा के रूप में इसका पहले ही परीक्षण किया जा चुका है.

History & Polity Disha Experts PANORAMA.pdf14.97 MB

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▪️ Current Affairs ▪️ May 2020 ▪️ Hindi Medium ▪️ Edristi Publications ▪️ Size 1 MB | Page 130