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13 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 1643 – चिली में भूकंप से कुल आबादी के एक तिहाई लोगों की मौत। 1648 – दिल्ली में लाल किले का निर्माण कार्य पूरा हुआ। 1666 – पुरंदर की संघि के तहत शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा पहुंचे।  1779 - बवेरियन उत्तराधिकार युद्ध के समाप्त होने की घोषणा की गई। 1830 - इक्वेडोर गणराज्य की स्थापना, जुआन जोस फ्लोरेंस पहले राष्ट्रपति बने। 1830 - इक्वाडोर को ग्रैन कोलंबिया से अलग लिया। 1846 - मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध: संयुक्त राज्य अमेरिका ने मेक्सिको से युद्ध की घोषणा की। 1848 - फिनलैंड के राष्ट्रीय गान का प्रथम प्रदर्शन किया गया। 1861 – ब्रिटेन ने अमेरिकी गृह युद्ध में अपनी तटस्थता की घोषणा की। 1899 - एसपोर्टे क्लब विटोरिया एसोसिएशन फुटबॉल क्लब साल्वाडोर ब्राजील में स्थापित किया गया। 1930 - ब्रिटिश श्रम मंत्रालय 1.7 मिलियन बेरोजगारो की लिस्ट बनायीं। 1931 – पॉल डाउमर फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए। 1935 - लंदन की हॉरर फिल्म वेयरवोल्फ जारी की गई। 1950 - एफआईए फॉर्मूला वन वर्ल्ड चैम्पियनशिप की पहली दौड़ इंग्लैंड के सिल्वरस्टोन में आयोजित की गयी। 1952 – स्वतंत्र भारत की पहली संसद का सत्र शुरु हुआ। 1962 – सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने। 1967 – प्रमुख शिक्षाविद डा. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने। वह भारत के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति थे। 1995 - चेल्सी स्मिथ मिस यूनिवर्स 1995 बनीं। 1998 - भारत ने राजस्थान के पोखरण में दो और परमाणु परीक्षण किये। 1998 - जापान ने भारत को दी जाने वाली सहायता पर रोक लगायी । 1999 - जापानी छात्र के नागुयी विश्व की सात सर्वोच्च चोटियों पर चढ़ने वाला दुनिया का सबसे कम उम्र (25 वर्षीय) का पर्वतारोही बना। 2000 - मिस इंडिया लारा दत्ता ने साइप्रस में सम्पन्न प्रतियोगिता मे मिस यूनीवर्स -2000 का ख़िताब जीता। 2003 - रियाद में आत्मघाती हमलों में 29 व्यक्ति मारे गये। 2008 - पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के सभी नौ मंत्रियों ने जजों की बहाली के मुद्दे पर इस्तीफ़ा दिया। 2010 - भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट को 2010 के निवानो शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2017- दुनियाभर में वॉनाक्राय रैनसमवेयर से 100 से अधिक देश प्रभावित। इस पंचांग को सीधे प्राप्त करने के लिए एवं सभी तरह की लेटेस्ट विविध एवं शैक्षणिक खबरों के लिए "हरियाणा एजुकेशनल अपडेट" फेसबुक पेज ज्वाइन करें। 2019 - भारत प्रशासित कश्मीर में एक तीन साल की बच्ची के साथ 8 मई को हुए कथित बलात्कार के ख़िलाफ़ बांदीपुरा ज़िले और घाटी के कई अन्य इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए , इन क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया । 2019 - ईडी ने एक्सिस बैंक मुद्रा मामले में 2.95 करोड़ की संपत्ति कुर्क की। 2019 - जम्मू के रामबन जिले में लश्कर के दो आतंकी पकड़े गए , भारी मात्रा में गोलाबारूद बरामद हुआ। 2019 - भारत ने ओडिशा के परीक्षण केंद्र से ‘अभ्यास'- हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टार्गेट (हीट) का सोमवार को सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 13 मई को जन्मे व्यक्ति 1901 - मथुरा प्रसाद मिश्र वैद्य - स्वतंत्रता सेनानी। 1905 - फ़ख़रुद्दीन अली अहमद - भारत के भू. पू. राष्ट्र्पति, आपात स्थिति की घोषणा के कारण इनका कार्यकाल काफ़ी अलोकप्रिय रहा। 1917 - असित सेन - हिंदी फ़िल्मों के हास्य अभिनेता थे। 1918 - टी. बालासरस्वती - 'भरतनाट्यम' की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना। 1956 - कैलाश विजयवर्गीय - मध्य प्रदेश सरकार में 'भारतीय जनता पार्टी' के राजनेता। 1985 - मेघा गुप्ता - भारतीय हिन्दी अभिनेत्री हैं। 13 मई को हुए निधन 1626 - मलिक अम्बर - मध्यकालीन भारत के सबसे बड़े राजनीतिज्ञों में इसकी गणना की जाती थी। 1951 - हसरत मुहानी - लखनऊ के प्रसिद्ध शायर। 2001 - आर. के. नारायण - अंग्रेज़ी में लिखने वाले उत्कृष्ट भारतीय लेखकों में से एक। 2006 - हेमलता गुप्ता - प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक थीं। 2011 - बादल सरकार - प्रसिद्ध अभिनेता, नाटककार, निर्देशक और इन सबके अतिरिक्त रंगमंच के सिद्धांतकार। 2013 - जगदीश माली - एक भारतीय फ़ैशन और फ़िल्म फ़ोटोग्राफ़र थे।  2016 - बाबा हरदेव सिंह - भारत के प्रसिद्ध संत और संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक गुरु थे। 13 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव संत बाबा हरदेव सिंह स्मृति दिवस। श्री फ़ख़रुद्दीन अली अहमद जयन्ती। श्री मथुरा प्रसाद मिश्र वैद्य जयन्ती।

े बाद दूसरा चरण 14 अप्रैल को और तीसरा चरण 4 मई से शुरू हुआ था। 17 मई को यह समाप्‍त होने जा रहा है। देश में कोरोना संक्रमण पर अभी काबू नहीं पाया जा सका है। दिनों दिन मामले बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को पीएम मोदी ने देश भर के मुख्‍यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से मीटिंग की थी, इसमें कई राज्‍यों ने लॉकडाउन बढ़ाए जाने की मांग की थी। पीएम मोदी ने कहा कि एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया है विश्‍व भर में करोडो लोग संकट का सामना कर रहे हैं सारी दुनिया जिंदगी बचाने की जंग में जुटी हैं हमने ऐसा संकट न देखा है न सुना है यह मानव जाति के लिए अल्‍कपनीय है अभूतपूर्व है लेकिन थकना हारना टूटना बिखरना मानव को मंजूर नहीं है सतर्क रहते हुए सभी नियमों का पालन करते हुए संकल्‍प करना होगा मोदी ने कहा कि आज भारत के पास साधन है सामार्थ है आज दुनिया की सबसे बेहतर टेलेंट हैं हम अच्‍छे प्रोडक्‍ट बनाएंगे क्‍वालिटी अच्‍छी करेंगे सप्‍लाई चेन और बढाएंगें ये हम कर सकते हैं मोदी ने कहा कि मैंने अपनी आंखों के सामने कच्‍छ भूकंप के वो दिन देखें हैं जहां हर तरफ मलवा ही मलवा था उस परिस्‍थिति को कभी सोच नहीं सकते थे कि हालत बदल जाएंगे लेकिन देखते ही देखते कच्‍छ उठ खडा हुआ यही भारत की शक्‍ति है यदि हम ठान लें तो आज कोई मुश्‍किल नहीं मोदी ने कहा कि कोरोना संकट में आज विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं यह आत्‍म निर्भर अभ्यिान में काम करेगा यह पैकेज 20 लाख करोड रुपए है जो भारत की जीडीपी का दस फीसदी है इससे देश के विभिन्‍न वर्गों को 20 लाख करोड रुपए का पैकेज मिलेगा जो देश की विकास को गति देगा पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 6 सालों में भारत सक्षम बना है सरकार का भेजा पैसा सीधे गरीब तक पहुंचा उन्‍होंने कहा कि सरकार कई तरह के बदलाव लाने जा रही है मेक इन इंडिया के संकल्‍प को आगे बढाएंगे भारत ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाए ये समय की मांग है कोरोना संकट इतना बडा है कि बडे से बडे देशों की व्‍यवस्‍थाएं हिल गईं हैं लेकिन भारत के श्रमिक वर्ग ने इस दौरान बहुत कष्‍ट झेलें हैं अब हमारा कर्तव्‍य है उनको ताकतवर बनाने का उनके लिए आर्थक पैकेज में ऐलान किया जाएगा मोदी ने कहा कि लोकल ने ही हमें बताया है समय ने सिखया है कि आपको लोकल को बढाना ही होगा आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है लोकल खरीदें और गर्व से प्रचार करें आत्‍मि‍निर्भर भारत के पांच पीलर पहली इकोनॉमी दूसरा पीलर इंफ्रास्‍टक्‍चर जो आधुनिक भारत की पहचान बने तीसरा पीलर एक ऐसा सिस्‍टम जो 21 वीं सदी के सपनों के साकार करने वाली टेक्‍नोलॉजी पर आधारित हो चौथ पीलर डेमोग्राफी हमारी ताकत है पांचावा पीलर डिमांड अर्थव्‍यवस्‍था में डिमांड और सप्‍लाई की ताकत को बढाने की जरूरत है कोरोना वायरस महामारी (CoronaVirus) के बीच एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के तीसरे चरण 17 मई को खत्म होने के पहले पीएम मोदी का यह राष्ट्र के नाम पांचवां संबोधन था. राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के साथ सोमवार को हुई बैठक के बाद पीएम का यह संबोधन काफी अहम माना जा रहा था. मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के बाद पीएम मोदी बोले- जारी रखना होगा लॉकडाउन पीएम मोदी ने देश के तमाम मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार को करीब छह घंटे तक चली वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 17 मई के बाद भी लॉकडाउन को जारी रखना होगा. पीएम मोदी ने इस दौरान आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी जोर दिया और इसके लिए कंटेनमेंट जोन के बाहर लॉकडाउन के नियमों में ढील के भी संकेत दिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले चरण में लॉकडाउन के जिन कदमों की जरूरत थी, उनकी दूसरे चरण में नहीं थी, तीसरे चरण में जरूरी कदमों की चौथे में आवश्यकता नहीं.

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के कारण अपने लक्ष्‍यों को दूर नहीं होने देंगे इसलिए लॉकडाउन 4 पूरी तरह नए नियमों वाला होगा राज्‍यों से मिले सुझाव के आधार पर 18 मई से इसकी जानकारी दी जाएगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्‍ट्र को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने आज कोरोना संकट के दौर में 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। उन्‍होंने कहा, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, 'आत्म निर्भर भारत अभियान' की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है। इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए, इस पैकेज में Land, Labour, Liquidity और Laws, सभी पर बल दिया गया है। ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग,गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे MSME के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है। ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है। जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है। आपने भी अनुभव किया है कि बीते 6 वर्षों में जो Reforms हुए, उनके कारण आज संकट के इस समय भी भारत की व्यवस्थाएं अधिक सक्षम, अधिक समर्थ नज़र आईं हैं। अब Reforms के उस दायरे को व्यापक करना है, नई ऊंचाई देनी है। ये रिफॉर्मस खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो उन्‍होंने कहा है कि, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है। एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत ही अहम मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है। जब कोरोना संकट शुरू हुआ, तब भारत में एक भी पीपीई (PPE) किट नहीं बनती थी। एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है। जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो,कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है। जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा होती है, तो हर भारतीय गर्व करता है। दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है, मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है -कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है- 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प। आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy, एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए, दूसरा पिलर Infrastructure, एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर- हमारा System- एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी Demography- दुनिया की सबसे बड़ी Democracy में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। देश में सबसे पहले 25 मार्च को लॉकडाउन लगाया गया था। इसक

50 से कम श्रमिकों को नियुक्त करने वाले ठेकेदार अनुबंध श्रम (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत पंजीकरण के बिना भी कार्य करने में सक्षम होंगे। राज्य में स्थापित होने वाली नई औद्योगिक इकाइयों के लिये प्रमुख छूट हैं:नई औद्योगिक इकाइयों को पंजीकरण करने और समय-समय पर होने वाले निरीक्षण की औपचारिकताओं से छूट दी गई है और अपनी सुविधानुसार औद्योगिक इकाइयों के कार्य संचालन का समय निर्धारित करने की भी शक्ति दी गई है। श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामले में नियोक्ता को दंड से भी छूट प्रदान की गई है। सरकार का पक्ष राज्यों में निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिये श्रम कानूनों का उदारीकरण करना बहुत आवश्यक है। इन प्रयासों के द्वारा ही मौजूदा कार्मिकों के रोज़गार की रक्षा और उन श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करने की संभावना है जो अपने राज्यों में वापस चले गए हैं। लंबे चलने वाले इस संकट के दौरान प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को अवसरों में बदलना होगा। COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के कारण गिरने वाले राज्यों के राजस्व को बढ़ाने के लिये यह एक कारगर विकल्प साबित होगा। श्रम सुधार का विचार अचानक से नहीं आया है बल्कि यह लंबे समय से उद्योगों की मांग रही है। वर्तमान में परिवर्तन आवश्यक हो गए थे क्योंकि निवेशक जटिल कानूनों और लालफीताशाही के जाल में फँस गए थे। इस संकट के दौरान तमाम कंपनियाँ चीन से बाहर निकल रही हैं, ऐसे में उन कंपनियों तथा विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिये आकर्षित करने हेतु श्रम कानूनों में सुधार की आवश्यकता थी। वर्तमान में 24.6 प्रतिशत की भारी बेरोज़गारी दर का सामना कर रहे राज्यों के लिये रोज़गार सृजन का यह एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकता है। चिंताएँ उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम सहित लगभग सभी श्रम कानूनों को सरसरी तौर पर निलंबित कर दिया है। इसलिये इस कदम को ‘शोषण के लिये एक सक्षम वातावरण निर्मित करने’ के रूप में देखा जाना स्वाभाविक है। श्रम कानूनों के निलंबन से मज़दूर, पूँजीपतियों पर पूरी तरह से निर्भर हो गए जिससे बंधुआ मज़दूरी के एक नए स्वरुप में प्रचलित होने की प्रबल संभावनाएँ हैं। श्रम कानूनों के निष्प्रभावी होने से मज़दूरों को मिलने वाली समस्त सुविधाएँ जैसे- भविष्य निधि, बोनस, न्यूनतम मज़दूरी, स्वास्थ्य सुरक्षा आदि निष्प्रभावी हो गईं हैं। संशोधित श्रम सुधारों के द्वारा मजदूरों को प्राप्त होने वाली सामाजिक सुरक्षा से भी समझौता किया गया है, जो निश्चित तौर पर एक चिंता का विषय है। श्रम कानूनों के निष्प्रभावी होने से संगठित क्षेत्र के रोज़गार भी असंगठित क्षेत्र के रोज़गार में परिवर्तित हो जाएँगे। जिससे मज़दूरी दर में तीव्र गिरावट आएगी। क्या वास्तव में संशोधन रोज़गार को बढ़ावा देंगे? सैद्धांतिक रूप से, कम श्रम विनियम वाले बाज़ार में अधिक रोज़गार उत्पन्न करना संभव है। हालाँकि, जैसा कि अतीत में श्रम कानूनों में ढील देने वाले राज्यों के अनुभव बताते हैं कि श्रमिक संरक्षण कानून, निवेश को आकर्षित करने और रोज़गार बढ़ाने में विफल रहे हैं। यदि यह सुनिश्चित करने का इरादा था कि अधिक लोगों को रोज़गार मिले, तो राज्यों को काम की अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे नहीं करनी चाहिये थी। उन्हें इसके बजाय प्रत्येक 8-घंटे की दो शिफ्ट की अनुमति देनी चाहिये थी, ताकि अधिक लोगों को रोज़गार मिल सके। अन्य देशों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया बांग्लादेश में श्रम कानूनों के तहत ट्रेड यूनियन शुरू करने के लिये श्रम बल के 30 प्रतिशत की सहमति की दरकार होती है। वहाँ निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों में कानूनी रूप से श्रमिक संगठन स्थापित करने की अनुमति नहीं है। इसी तरह, विदेशी भागीदारी में स्थापित कारखानों में आरंभिक तीन वर्षों में हड़ताल की अनुमति नहीं है। इसके विपरीत भारत में ट्रेड यूनियन का काफी दबदबा है, जिससे भारत में हमेशा आर्थिक उत्पादन प्रभावित होता रहा है। वियतनाम ने भी एक नई श्रम नीति बनाई है। वर्ष 2021 से प्रभावी होने वाली इस नीति के तहत कंपनियों को अपने स्तर पर वेतन-भत्ते तय करने की अधिक स्वतंत्रता होगी, साथ ही सरकारी हस्तक्षेप या प्रशासनिक निपटान की जगह आंतरिक सुलह प्रक्रिया को बढ़ावा देकर विवाद सुलझाने के तंत्र को अधिक लचीला बनाया जाएगा।