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टोडा जनजाति
Toda Tribe
COVID-19 के मद्देनज़र नीलगिरी क्षेत्र के टोडा (Toda) कारीगर, लोगों को संक्रमण से बचाने के लिये मास्क बनाने में अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर रहे हैं।
प्रमुख बिंदु:
टोडा जनजाति (Toda Tribe) दक्षिणी भारत की नीलगिरि पहाड़ियों की एक चरवाहा जनजाति है।
टोडा भाषा का संबंध द्रविड़ियन भाषा परिवार है किंतु यह द्रविड़ भाषा परिवार में सबसे असामान्य एवं अलग है।
ये लोग तीन से सात सदस्यों के समूह में छोटे घरों वाली बस्तियों में रहते हैं।
इनकी आजीविका डेयरी उत्पाद, बेंत एवं बाँस आदि के पारंपरिक व्यापार पर निर्भर है।
टोडा कढ़ाई (Toda Embroidery):
टोडा भाषा में इस कढ़ाई को ‘पोहर’ (Pohor) कहा जाता है। जबकि पारंपरिक टोडा पोशाक एक विशिष्ट शॉल है जिसे ‘पुटकुली’ (Putukuli) कहा जाता है।
यह एक भव्य परिधान माना जाता है इसे केवल विशेष अवसरों के लिये पहना जाता है जैसे- मंदिर, त्योहारों एवं अंत में कफन के रूप में।
यह कढ़ाई टोडा महिलाओं द्वारा बनाई जाती है और इसमें रूखे सफेद सूती कपड़े पर ज्यामितीय डिज़ाइनों में विशिष्ट लाल एवं काले (कभी-कभी नीले) धागे का प्रयोग होता है।
इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला है।
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COVID चटाई
COVID Mat
हाल ही में केरल सरकार ने बताया कि रोगज़नकों (जैसे- वायरस, बैक्टीरिया आदि) को घरों, कार्यालयों, दुकानों एवं संस्थानों में प्रवेश करने से रोकने के लिये ‘केरल स्टेट कोइर कॉरपोरेशन’ (Kerala State Coir Corporation) जल्द ही ‘COVID चटाई’ (COVID Mat) लॉन्च करेगा।
प्रमुख बिंदु:
‘केरल स्टेट कोइर कॉरपोरेशन’ ने इस चटाई के तीन मॉडल पेश किये हैं जिन्हें ‘श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’ द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है।
‘COVID चटाई’ को तैयार करने के लिये रबर या प्लास्टिक से बने होल्डिंग ट्रे में फाइबर मैट/बीसी20 मैट को लगाया जाएगा और कीटाणुनाशक को संतृप्त होने तक चटाई पर डाला जाएगा।
जब कोई व्यक्ति नंगे पैर या जूता पहने हुए चटाई पर कदम रखेगा तो कीटाणुनाशक उसे साफ कर देगा। ‘COVID चटाई’ पर पानी एवं कीटाणुनाशक को प्रत्येक तीन दिन में बदलना होगा।
इस चटाई’ के विकास में ‘राष्ट्रीय कोइर अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान’ (National Coir Research and Management Institute) ‘केरल स्टेट कोइर कॉरपोरेशन’ की मदद कर रहा है।
राष्ट्रीय कोइर अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान’
(National Coir Research and Management Institute- NCRMI):
NCRMI एक ऐसा संगठन है जो कोइर (नारियल रेशे) के पारंपरिक क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की खोज कर रहा है।
इसे वर्ष 1994 में केरल के कोइर क्षेत्र की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये C-DOCT नाम से स्थापित किया गया था।
यह त्रावणकोर-कोचीन साहित्यिक वैज्ञानिक एवं धर्मार्थ सोसायटी अधिनियम, 1956 (Travancore-Cochin Literary Scientific and Charitable Societies Act 1956) के तहत पंजीकृत है।
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सोहराई खोवर पेंटिंग और तेलिया रूमाल
Sohrai Khovar Painting and Telia Rumal
12 मई, 2020 को झारखंड की ‘सोहराई खोवर पेंटिंग’ (Sohrai Khovar Painting) और तेलंगाना के ‘तेलिया रुमाल’ (Telia Rumal) को 'भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री' (Geographical Indications Registry) द्वारा GI टैग दिया गया।
प्रमुख बिंदु:
‘सोहराई खोवर पेंटिंग’ झारखंड के हज़ारीबाग ज़िले में स्थानीय एवं प्राकृतिक रूप से विभिन्न रंगों की मिट्टी का उपयोग करते हुए फसल के मौसम एवं शादी-समारोह के दौरान स्थानीय आदिवासी महिलाओं द्वारा प्रचलित एक पारंपरिक एवं अनुष्ठानिक भित्ति कला है।
यह पेंटिंग मुख्य रूप से हज़ारीबाग ज़िले में ही प्रचलित है। हालाँकि हाल के वर्षों में इसके प्रचार-प्रसार के कारण इसे झारखंड के अन्य हिस्सों में भी निर्मित किया जा रहा है।
इसे परंपरागत रूप से मिट्टी के घरों की दीवारों पर चित्रित किया जाता था किंतु अब इसे अन्य सतहों पर भी चित्रित किया जाता है।
इस चित्रकला में लाइनों, बिंदुओं, जानवरों के चित्रों एवं पेड़-पौधों को प्रमुख स्थान दिया जाता है जो अक्सर ‘धार्मिक प्रतिमा-विधा’ (Religious Iconography) का प्रतिनिधित्व करती है।
‘तेलिया रुमाल’ को सूती कपड़े में जटिल हस्तनिर्मित प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है जिसमें तीन विशेष रंगों (लाल, काले व सफेद) में विभिन्न प्रकार के डिज़ाइन एवं रूपांकनों को प्रदर्शित किया जाता है।
आज़ादी मिलने से पहले हैदराबाद के निज़ाम के दरबार में कार्य करने वाले अधिकारी चितुकी तेलिया रुमाल (Chituki Telia Rumal) को प्रमुख प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्त्व के रूप में पहनते थे।
तेलिया रुमाल को राजस्थान के अजमेर शरीफ की दरगाह पर भी चढ़ाया जाता है।
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काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) एनएएल (नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज), बेंगलुरु ने ‘स्वस्थ वायु’ नामक एक वेंटिलेटर विकसित किया है। इस वेंटिलेटर को 36 दिनों के रिकॉर्ड समय में डिजाइन किया गया है।
मुख्य बिंदु
CSIR द्वारा विकसित यह वेंटिलेटर एक डॉन-इनवेसिव BiPAP वेंटीलेटर है। यह वेंटिलेटर बिल्ट-इन बायोकम्पैटिबल कपलर और एक उच्च दक्षता युक्त फिल्टर से बना है। ये सुविधाएँ वेंटीलेटर को COVID-19 के प्रति भय को कम करने में मदद करती हैं।
वेंटिलेटर के बारे में
वेंटिलेटर में ऑक्सीजन सांद्रता को बाहरी रूप से जोड़ने के प्रावधान शामिल हैं। वेंटिलेटर को NABL द्वारा मान्यता दी गई है।
NABL
NABL का पूर्ण स्वरूप National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories है। यह चिकित्सा उपकरणों, प्रयोगशालाओं, परीक्षण प्रदाताओं का परीक्षण और प्रमाणन करता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रत्यायन सहयोग और एशिया प्रशांत प्रयोगशाला प्रत्यायन सहयोग के साथ पारस्परिक मान्यता व्यवस्था है।
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12 मई, 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने नए नियमों के साथ लॉक डाउन 4.0 की घोषणा की। उन्होंने चौथे लॉक डाउन के दौरान लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की।
मुख्य बिंदु
लॉक डाउन 3.0 17 मई, 2020 को समाप्त हो रहा है, नए नियमों के साथ लॉक डाउन 4.0 18 मई, 2020 से लागू किया जाएगा। लॉक डाउन को बढ़ाया जा रहा है क्योंकि COVID-19 का प्रसार अभी तक सीमित नहीं हुआ है।
भारत के 5 स्तंभ
भारत अब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित आत्मनिर्भरता के 5 स्तंभों पर कार्य करेगा। ये स्तंभ भारत को 21वीं सदी में दुनिया का नेतृत्व करने में मदद करेंगे।
यह स्तंभ है:
आर्थिक परिवर्तन जो न केवल वृद्धिशील परिवर्तन लाएगा बल्कि क्वांटम जंप में मदद करेगा
अधोसंरचना आधुनिक भारत का प्रतीक बनेगी
सिस्टम तकनीक से संचालित होगा, यह 21वीं सदी के सपने को पूरा करने में मदद करेगा
भारत की जनसांख्यिकी आत्मनिर्भर भारत का स्रोत और ताकत है
आपूर्ति और मांग का चक्र यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित होगा कि देश अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सके
आर्थिक पैकेज
पीएम मोदी द्वारा विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई। यह पैकेज 20 लाख करोड़ रुपये का है। आवंटित राशि भारत की जीडीपी का 10% है। नए आर्थिक पैकेज का इस्तेमाल उन मजदूरों, मध्यम वर्ग, किसानों और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाना है, जिन्हें लॉक डाउन के कारण सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इस पैकेज के बारे में विस्तृत जानकारी वित्त मंत्री द्वारा बाद में प्रदान की जाएगी।
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) घरेलू सर्वेक्षण करेगा। इस सर्वेक्षण के तहत विभिन्न जिलों में 24,000 वयस्कों में एंटीबॉडी परीक्षण किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
घरेलू सर्वेक्षण वर्तमान में चल रहे सर्वेक्षणों से पूरी तरह से अलग है। इस सर्वेक्षण के तहत, सभी जिलों के व्यक्तियों का परीक्षण किया जाएगा। हर जिले में सर्वेक्षण करने के लिए 10 स्वास्थ्य सुविधाओं को नियोजित किया जाएगा। इनमें से 6 सार्वजनिक होंगे और 4 निजी होंगे। ये स्वास्थ्य सुविधाएं 100 स्वास्थ्य देखभाल श्रमिकों और 50 आउट पेशेंट का चयन करेंगी। इसके अलावा, जिन व्यक्तियों में इन्फ्लूएंजा नहीं है उन्हें चुना जाना है।
पृष्ठभूमि
ICMR पहले पूलिंग परीक्षण और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (SARI) पर आधारित सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित करता था। इस सर्वेक्षण में आईजीजी एंटीबॉडी की उपस्थिति की जांच की जाएगी। यह एंटीबॉडी 10 और 14 दिनों के बीच दिखाई देती है।
SARI निगरानी
SARI निगरानी एक चालू निगरानी पद्धति है जिसे RT-PCR परीक्षणों का उपयोग करके अस्पताल में भर्ती मरीजों पर लागू किया जा रहा है। यह निगरानी वर्तमान में नए COVID-19 मामलों का पता लगाने में मदद करती है।
सीरो सर्वे
यह सर्वेक्षण 10 समूहों में किया जाएगा। चुने गए हर जिले में 400 यादृच्छिक घर होंगे। इन घरों में एक वयस्क व्यक्ति का COVID-19 एंटीबॉडी के लिए परीक्षण किया जाएगा। इसे सेरो सर्वे कहा जाता है
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जम्मू और कश्मीर दिसंबर 2022 तक प्रत्येक परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराएगा
जम्मू और कश्मीर ने जल जीवन मिशन (जेजेएम्) के तहत दिसंबर, 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों को पानी की आपूर्ति के लिए नल का कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाई है। वर्तमान वर्ष के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) 3 जिलों – गंदरबल, श्रीनगर और रायसी के सभी 5,000 गांवों के 100 प्रतिशत कवरेज के लिए योजना बना रहा है।
यूटी के अधिकारियों ने जेजेएम के तहत प्रत्येक परिवार को नल द्वारा जल आपूर्ति से सम्बंधित अपनी कार्ययोजना कल पेयजल और स्वच्छता विभाग को पेश की। यूटी के अधिकारियों ने कहा कि यूटी में 18.17 लाख घर हैं, जिनमें से 5.75 लाख घरों को पहले ही चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) दिए जा चुके हैं। शेष घरों में से 1.76 लाख घरों को 2020-21 तक नल का कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना है।
इस वित्तीय वर्ष के लिए संघ शासित प्रदेश को जेजेएम के तहत केंद्र के हिस्से के रूप में 680 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। केंद्र शासित प्रदेश, भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त आवंटन के योग्य है। यूटी प्रशासन दिसंबर 2022 तक 100 प्रतिशत कवरेज की योजना बना रहा है, जबकि राष्ट्रीय लक्ष्य 2024-25 के लिए निर्धारित किया गया है। प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन प्रदान करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के बाद जे एंड के का नाम एक प्रमुख उदाहरण की तरह लिया जायेगा।
संघ शासित प्रदेश ने चालू वर्ष के दौरान 98 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से 10 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता दिलाने की योजना बनाई है। पानी की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए सामुदायिक स्तर पर फील्ड परीक्षण किट प्रदान किए जाएंगे। इसके आधार पर सुधारात्मक उपाय किये जाएंगे। यूटी प्रशासन ने सभी 4 गुणवत्ता-प्रभावित बस्तियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। समुदाय में स्वामित्व की भावना को बढ़ाने के लिए गांवों में ग्राम जल और स्वच्छता समितियों के गठन पर जोर दिया जा रहा है। गाँवों के लिए ग्राम कार्य योजनाएँ चलाई गई हैं, जिसके आधार पर उपरोक्त कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया है।
कोविड -19 महामारी के इस कठिन समय के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करने के प्रयासों से जीवन जीने में आसानी होगी खासकर महिलाओं और लड़कियों को कठिन परिश्रम से निजात मिलेगी और उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।
'जल जीवन मिशन' (जेजेएम) का उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पीने के पानी के लिए एक एफएचटीसी उपलब्ध कराना है ताकि परिवार को किफायती दर पर निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप और नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पीने के पानी मिल सके जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।
केंद्र सरकार का यह प्रयास है कि वर्त्तमान कोविड-19 स्थिति के दौरान प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीण घरों में पानी के नल कनेक्शन प्रदान किये जाएँ, ताकि ग्रामीण लोगों को सार्वजनिक जगहों से पानी लाने और बड़ी कतार में खड़े होने की कठिनाई से गुजरना न पड़े। ।
सरकार कोविड-19 महामारी के कारण ग्रामीण समुदायों व समाज के गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को उनके घर में ही नल कनेक्शन के माध्यम से पानी की आपूर्ति उपलब्ध कराना चाहती है ताकि उन्हें संक्रमित होने से सुरक्षित रखा जा सके। उन्हें पानी लाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर जाना नहीं पड़े और वे सामाजिक दूरी बनाये रखने के मानदंडों का पालन करते हुए अपने आप को सुरक्षित रख सकें।
राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल से संबंधित कार्य करने के लिए परामर्श जारी किए गए हैं ताकि ग्रामीण परिवारों को जल आपूर्ति के लिए नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों और प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
पिछले 3 महीनों में, राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किये गए हैं, जिसमें प्रत्येक गाँव की जलापूर्ति योजनाओं का विश्लेषण किया गया है ताकि परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान किये जा सकें।
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हरियाणा में दिसंबर 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों को नल से पीने का पानी उपलब्ध कराने की तैयारी
हरियाणा में दिसंबर 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों को पाइप लाइन के जरिए नल का पानी पहुंचाने की तैयारी हो रही है। राज्य ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत 2019-20 में 1.05 लाख नल कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। अब राज्य सरकार 2024-25 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले दिसंबर 2022 तक ग्रामीण परिवारों को 100 प्रतिशत नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। ऐसा करके हरियाणा प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन प्रदान करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने वाले अग्रणी राज्यों मे से एक हो जाएगा।
जेजेएम के तहत हर घर तक नल से जल आपूर्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कल राज्य के अधिकारियों ने पेयजल और स्वच्छता विभाग को एक कार्य योजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि हरियाणा में 28.94 लाख परिवार हैं, जिनमें से 18.83 लाख परिवारों को पहले से नलों के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। शेष 10.11 लाख घरों में से 2020-21 तक 7 लाख घरों में नल कनेक्शन देने की योजना है।
मौजूदा वर्ष राज्य सरकार ने एक जिले और कुल 6,987 गाँवों में से 2,898 गाँवों में नल के जरिए घरों तक पीने का पानी पहुंचाने का काम सौ फीसदी पूरा करने की योजना बनाई है। इसमें सूखा संभावित क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। राज्य को इस वित्त वर्ष के लिए जेजेएम के तहत केंद्रे से मिलने वाले हिस्से के रूप में 290 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना है। राज्य की ओर से भी योजना के लिए इतनी ही राशि दी जाएगी। राज्य के पास भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त आवंटन की मांग का अधिकार है।
राज्य ने 44 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से, चालू वर्ष के दौरान 18 प्रयोगशालाओं के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त करने की योजना बनाई है। सुधारात्मक उपाय करने के लिए पानी की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए सामुदायिक स्तर पर फील्ड परीक्षण किट प्रदान किए जाएंगे। राज्य ने सभी 35 गुणवत्ता-प्रभावित बस्तियों में पीने का पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम स्तर पर नियोजन के लिए जीपी या उनकी उप-समिति यानी ग्राम जल और स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। गाँवों के लिए ग्राम कार्य योजनाएँ चलाई गई हैं, जिसके आधार पर कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के डैशबोर्ड का शुभारंभ किया है जिसमें गांवों, नल के कनेक्शन और वित्तीय प्रगति आदि का विवरण वास्तविक समय के आधार पर देखा जाता है।
कोविड महामारी के इस कठिन समय के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन देने के इस तरह के प्रयासों से निश्चित रूप से महिलाओं और लड़कियों के लिए जीवन सुगम बनेगा और उन्हें सुरक्षित बनाने तथा सम्मानजनक जीवन जीने में मदद दी जा सकेगी।
भारत सरकार ने जल जीवन मिशन राज्यों के साथ मिलकर लागू कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए उन्हें पाइप लाइन के जरिए पीने का पानी किफायती दरों में पर्यापत मात्रा में और नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा सके।
केंद्र सरकार का यह प्रयास है कि कोविड-19 के मौजदा हालात में प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन प्रदान किया जाए, ताकि ग्रामीण लोगों को सार्वजनिक स्थलों से पानी लाने के लिए बड़ी कतार में खड़े होने की कठिनाई से न गुजरना पड़े। । सरकार चाहती है कि ग्रामीण समुदाय कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षित रहे और समाज के गरीब और वंचित तबकों को उनके घर परिसर के अंदर नल कनेक्शन के माध्यम से पानी की आपूर्ति उपलब्ध हो जाए जिससे सामाजिक दूरियों के नियम का पालन करते हुए उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर पानी लाने जाने से रोका जा सके। राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल से संबंधित कार्य करने के लिए आदेश जारी किए गए हैं ताकि ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों और प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकें।
पिछले 3 महीनों के दौरान राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से व्यापक अभ्यास किया गया, जिसमें गांवों में नल कनेक्शन प्रदान करने के लिए हर गांव की जल आपूर्ति योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
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एक संकल्प, एक लक्ष्य - आत्मनिर्भर भारत: श्री अमित शाह
01 जून 2020 से देशभर में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों और स्टोरों पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल देश को आत्मनिर्भर बनाने और भारत में बने उत्पाद उपयोग करने की एक अपील की। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने इस अपील को आने वाले समय में भारत को विश्व का नेतृत्व करने का मार्ग प्रशस्त करने वाला मार्गदर्शन बताया है।
https://twitter.com/AmitShah/status/1260472519347310595?s=20
इसी दिशा में आज गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों और स्टोरों पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी। 01 जून 2020 से देशभर की सभी CAPF कैंटीनों पर यह लागू होगा, जिसकी कुल खरीद लगभग 2800 करोड़ रूपए के करीब है। इससे लगभग 10 लाख CAPF कर्मियों के 50 लाख परिजन स्वदेशी उपयोग करेंगे।
गृह मंत्री ने देश की जनता से भी अपील करते हुए कहा कि "आप देश में बने उत्पादों को अधिक से अधिक उपयोग में लायें व अन्य लोगों को भी इसके प्रति प्रोत्साहित करें। यह पीछे रहने का समय नहीं बल्कि आपदा को अवसर में बदलने का समय है।"
श्री शाह के अनुसार यदि हर भारतीय भारत में बने उत्पादों (स्वदेशी) का उपयोग करने का संकल्प ले तो पांच वर्षों में देश आत्मनिर्भर बन सकता है।
देश की जनता से अपील करते हुए गृह मंत्री ने कहा, "आइए हम सब स्वदेशी उत्पादों का उपयोग कर आत्मनिर्भर भारत की इस यात्रा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथ मजबूत करें।
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देश भर में खाद्यान्न उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एफसीआई की ओर से विविध कदम उठाए गए
लगभग 160 एलएमटी खाद्यान्न राज्यों/संघशासित प्रदेशों को वितरित किया गया, 671 एलएमटी से अधिक भंडार में मौजूद
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की 12.05.2020 की रिपोर्ट के अनुसार, एफसीआई में वर्तमान में 271.27 एलएमटी चावल और 400.48 एलएमटी गेहूं मौजूद है। अत: कुल 671.75 एलएमटी खाद्यान्न भंडार (गेहूं और धान की वर्तमान में जारी खरीद के अलावा, जो अभी तक गोदामों तक नहीं पहुंचा है) में मौजूद है। एनएफएसए और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत महीने भर के लिए लगभग 60 एलएमटी खाद्यान्न की आवश्यकता है।
लॉकडाउन के बाद से, 2880 रेल रैक्स के माध्यम से लगभग 80.64 एलएमटी खाद्यान्न का उठाव और ढुलाई हो चुकी है। रेल मार्ग के अलावा सड़क एवं जल मार्ग के माध्यम से भी परिवहन किया गया। कुल 159.36 एलएमटी की ढुलाई की जा चुकी है। 15,031 एमटी खाद्यान्नों की 11 पोतों के माध्यम से ढुलाई की गई है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कुल 7.36 एलएमटीअनाज का परिवहन किया गया है। एनएफएसए और पीएमजीकेएवाई के अंतर्गत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अगले 3 महीनों के लिए कुल 11 एलएमटी अनाज की आवश्यकता है।
मुक्त बाजार बिक्री योजना
लॉकडाउन के दौरान राहत शिविर चला रहे गैर सरकारी संगठन और सामाजिक संस्थान सीधे एफसीआई डिपो से मुक्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) की दर पर गेहूँ और चावल खरीद सकते हैं। राज्य सरकारें भी एफसीआई से सीधे अनाज खरीद सकती हैं।
राज्य सरकारें गैर- एनएफएसए परिवारों को,जिन्हें राज्य सरकार द्वारा राशन कार्ड जारी किया गया है,अगले तीन माह तक के लिए चावल/गेहूँ भी उपलब्ध करा सकती है। ओएमएसएस के अंतर्गत चावल की दरें 22 रुपये किलो और गेहूं की दरें 21 रुपये किलो निर्धारित की गई हैं। इसबीच,लॉकडाउन की अवधि में एफसीआई ने ओएमएसएस के द्वारा से 4.68 एलएमटी गेहूँ एवं 6.58 एलएमटील चावल की बिक्री की है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
अनाज (चावल/गेहूं)
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत अगले 3 माह के लिए कुल 104.4 एलएमटी चावल एवं 15.6 एलएमटी गेहूं की आवश्यकता है, जिसमें से 69.65 एलएमटी चावल एवं 10.1 एलएमटी गेहूँ का उठाव विभिन्न राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों द्वारा कर लिया गया है। कुल 79.75 एलएमटी का उठाव किया गया है। भारत सरकार इस योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय भार वहन कर रही है जो लगभग 46,000 करोड़ रुपये है। गेहूँ का आवंटन 6 राज्यों - पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली एवं गुजरात में किया गया है एवं शेष राज्यों में चावल का आवंटन किया गया है।
दालें
दालों के संबंध में, अगले तीन माह के लिए कुल 5.87 एलएमटी दालों की आवश्यकता है। अभी तक 3.15 एलएमटी दाल प्रेषित जा चुकी है, जबकि 2.26 एलएमटी दाल राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों में पहुँच चुकी है और 71,738 एमटीका वितरण किया जा चुका है। दिनांक 12मई, 2020 तक बफर स्टॉक में 12.75 एलएमटी दालें (तूर-5.70 एलएमटी, मूंग-1.72 एलएमटी, उड़द-2.44 एलएमटी, चना-2.42 एलएमटी और मसूर-0.47 एलएमटी) उपलब्ध है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम
उपभोक्ता मामले विभाग ने कोविड-19 के कारण बढ़ी मांग को देखते हुए फेस मास्क और सैनिटाइजर्स को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित किया है। मास्क, सैनिटाइजर्स और उनके विनिर्माण में उपयोग किए जाने वाले संघटकों के मूल्यों की भी अधिकतम दर तय कर दी गई है।
लॉकडाउन के कारण आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में कोई बाधा उत्पन्न न हो और सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित रहें, इसके लिए राज्यों को दिशानिर्देश दिए गए हैं। केंद्र ने राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत निर्णय लेने के लिए सभी शक्तियाँ सौंप दी हैं।
खाद्यान्न खरीद
दिनांक 12 मई, 2020 तक कुल 268.9 एलएमटी गेहूं (आरएमएस 2020-21) और 666.9 एलएमटी चावल (केएमएस 2019-20 ) की खरीद की गई।
शुरु से अंत कम्प्यूटरीकरण
ई-पीओएस के माध्यम से कुल 90 प्रतिशत एफपीएस ऑटोमेशन किया जा चुका है, जबकि कुल 20 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में यह शत- प्रतिशत कर लिया गया है।
90 प्रतिशत राशन कार्डों की आधार सीडिंग की जा चुकी है, जबकि 11 राज्यों/संघशासित प्रदेशों में यह शत- प्रतिशत कर लिया गया है।
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कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कीटनाशक उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ रेगिस्तानी टिड्डी नियंत्रण पर चर्चा की
श्री तोमर ने कहा, ‘इस समस्या से निपटने के लिए ब्रिटेन से आएंगी नई मशीनें’
राजस्थान और पंजाब में 14,000 हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर टिड्डी नियंत्रण किया गया
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खेतों में टिड्डियों के हमलों को रोकने हेतु एक रणनीति तैयार करने के लिए आज यहां कीटनाशक कंपनियों के प्रमुखों और अन्य प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा की। इस दौरान श्री तोमर ने कहा कि कृषि एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है जिस पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष जोर दिया जा रहा है। श्री तोमर ने कहा कि सरकार निर्बाध बुवाई एवं कटाई संचालन सुनिश्चित करने में कोई भी परेशानी नहीं आने देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें रेगिस्तानी टिड्डी पर नियंत्रण करने के उपायों पर एक साथ काम कर रही हैं जिसमें काफी हद तक सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन से नई मशीनें जल्द ही आ जाएंगी, जिनका ऑर्डर दिया जा चुका है। .
इस चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री तोमर के साथ कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला व श्री कैलाश चौधरी तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। श्री तोमर ने कहा कि कृषि मंत्रालय ने टिड्डी समस्या को लेकर अनेक कदम उठाए हैं। यह ज्वलंत विषय है। लंबे अरसे बाद पिछले साल टिड्डी दलों का हमला हुआ, तो सभी लोग एकाएक घबरा गए, लेकिन संतोष की बात यह है कि किसानों के साथ ही हम सबने मिलकर इससे मुकाबला किया और टिड्डी दलों को नष्ट कर नुकसान रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को नुकसान हुआ, उन्हें केंद्र एनडीआरएफ से मदद दे रहा है। उन्होंने बताया कि युद्ध स्तर पर हमारे सामूहिक प्रयत्नों को देखते हुए पूरी दुनिया में भारत की प्रशंसा हुई। कीटनाशक कंपनियों का भी इसमें योगदान रहा।
उन्होंने बताया कि पिछली बार समस्या को देखते हुए उच्चस्तरीय बैठकें की गईं, जिनमें कर्मचारियों एवं मशीनों सहित सारे साधन बढ़ाने की तैयारी की गई है एवं सभी उपाय किए जा रहे हैं। आपदा से निपटने का जज्बा हम सबमें है, जिससे मिल-जुलकर इस संकट से निजात पा लेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कीटनाशक कंपनियों के प्रमुखों / प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्र तय करने का भी सुझाव दिया, ताकि सभी को सुविधा हो। इस पर मंत्री महोदय ने सहमति जताई। सभी कंपनियों के प्रमुखों ने अपने सीएसआर व अन्य संसाधनों का उपयोग करने संबंधी आश्वासन दिया एवं बताया कि वे राज्य सरकारों तथा कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर इस समस्या को नियंत्रण करने हेतु हरसंभव प्रयास करेंगे।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक राजस्थान के जैसलमेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर व नागौर जिले तथा पंजाब के फाजिल्का में डेढ़ सौ जगहों पर 14,300 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया है। वर्तमान में श्रीगंगानगर, फलौदी (जोधपुर), बाड़मेर, अजमेर व नागौर जिले में टिड्डी झुंड सक्रिय हैं।
