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MPPSC & MPESB EXAM

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Negetive marking nhi hai 😅
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Negetive marking nhi hai 😅

🚨MP police- constable 🚨
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“गुरु की सीख का असर शब्दों में नहीं, हमारी सोच, हमारे संस्कार और हमारी पहचान में दिखाई देता है।” 🌸🙏 ✨Happy Teacher day ✨
“गुरु की सीख का असर शब्दों में नहीं, हमारी सोच, हमारे संस्कार और हमारी पहचान में दिखाई देता है।” 🌸🙏 ✨Happy Teacher day ✨

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MPSI Notification out 👍
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Repost from MPPSC & MPESB EXAM
अब पुरे वन्दे मातरम् का गायन होगा।
अब पुरे वन्दे मातरम् का गायन होगा।

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳 आजादी के इस पावन पर्व पर उन सभी वीरों को नमन, जिनके त्याग और बलिदान से हमारा
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳 आजादी के इस पावन पर्व पर उन सभी वीरों को नमन, जिनके त्याग और बलिदान से हमारा देश स्वतंत्र हुआ। आइए, हम मिलकर देश की एकता, अखंडता और प्रगति में अपना योगदान दें। आप सभी को 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! ❤️🇮🇳

तिरंगे का सम्मान, हमारा अभिमान! 🇮🇳 15 अगस्त और 26 जनवरी — ये सिर्फ़ राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे गौरव, सम्मान और देशभक्
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तिरंगे का सम्मान, हमारा अभिमान! 🇮🇳 15 अगस्त और 26 जनवरी — ये सिर्फ़ राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे गौरव, सम्मान और देशभक्ति के प्रतीक हैं। ❤️🤍💚 आइए, तिरंगे की आन-बान-शान को समझें और हर भारतीय के दिल में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत करें। 🇮🇳✨ जय हिंद! 🇮🇳 | वंदे मातरम्! 🙏 #IndependenceDay #RepublicDay #Tiranga #HarGharTiranga #JaiHind #IndianFlag #DeshBhakti #ProudIndian #15August

*🖊️बाज़ और मुर्गियों की कहानी* एक बार एक किसान को जंगल में एक बाज़ (Eagle) का अंडा मिला। वह उस अंडे को घर ले आया और उसने उस अंडे को अपनी मुर्गियों के अंडों के बीच रख दिया। समय आने पर उस अंडे में से बाज़ का बच्चा बाहर निकला। वह बाज़ का बच्चा मुर्गियों के बच्चों के साथ ही बड़ा होने लगा। चूँकि वह मुर्गियों के बीच पल रहा था, इसलिए वह वही सब करता था जो बाकी मुर्गियां करती थीं। वह मिट्टी खोदकर दाने चुगता, मुर्गियों की तरह ही आवाज़ निकालता और उड़ने के नाम पर बस कुछ फीट तक ही पंख फड़फड़ा कर उड़ पाता, क्योंकि मुर्गियां भी बस उतना ही उड़ पाती थीं। उसने मान लिया था कि वह भी एक मुर्गी ही है। दिन बीतते गए। एक दिन उस बाज़ ने खुले आसमान में एक बहुत ही शानदार पक्षी को बड़ी शान से ऊंचाइयों पर उड़ते हुए देखा। वह बिना पंख फड़फड़ाए हवा के झोंकों के बीच कितनी आसानी से तैर रहा था। उस दृश्य को देखकर बाज़ का बच्चा बहुत हैरान हुआ। उसने अपनी साथ वाली मुर्गियों से पूछा, "आसमान में इतनी ऊंचाई पर उड़ने वाला वह शानदार पक्षी कौन है?" एक बूढ़ी मुर्गी ने जवाब दिया, "वह बाज़ है, पक्षियों का राजा! वह बहुत ताकतवर है और आसमान की ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन तुम उसके बारे में सोचना छोड़ दो, क्योंकि हम तो मुर्गियां हैं। हम कभी उसकी तरह उड़ान नहीं भर सकते।" उस बाज़ के बच्चे ने बिना किसी सवाल के मुर्गी की बात मान ली। उसने कभी आसमान में ऊंची उड़ान भरने की कोशिश ही नहीं की। वह अपनी पूरी ज़िंदगी एक मुर्गी की तरह ही जिया और एक दिन मुर्गी की तरह ही मर गया। इस कहानी से मिलने वाली सीख: *संगत का असर*: आप जिस माहौल में रहते हैं और जिन लोगों के साथ अपना समय बिताते हैं, आप वैसे ही बन जाते हैं। अगर आप हमेशा नकारात्मक, शिकायत करने वाले और छोटी सोच वाले लोगों (मुर्गियों) के बीच रहेंगे, तो आपकी सोच भी वैसी ही हो जाएगी। *अपनी क्षमता को पहचानें*: हममें से कई लोगों के अंदर उस बाज़ की तरह असीमित क्षमताएं होती हैं, लेकिन हम समाज और आस-पास के लोगों की बातों में आकर यह मान लेते हैं कि हम कुछ बड़ा नहीं कर सकते। ✨👍

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मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में भर्ती के 9662 नवीन पदों की स्वीकृति करों जोरदार अभिनंदन
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में भर्ती के 9662 नवीन पदों की स्वीकृति करों जोरदार अभिनंदन

सबसे खतरनाक अंधापन आँखों का नहीं, बल्कि सोच का होता है। जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि केवल वही सही है और बाकी सभी गलत हैं, तभी सीखने की प्रक्रिया रुक जाती है। ऐसी सोच इंसान को नए विचारों, अनुभवों और सच्चाई के करीब ले जाने के बजाय अपने ही बनाए हुए दायरे में कैद कर देती है। इतिहास गवाह है कि कई बड़े संघर्ष, युद्ध और सामाजिक विभाजन इसी विश्वास से शुरू हुए कि केवल एक ही दृष्टिकोण अंतिम सत्य है। वास्तविक बुद्धिमानी हर उत्तर जानने में नहीं, बल्कि यह स्वीकार करने में है कि हमारी समझ हमेशा अधूरी हो सकती है। दुनिया को हर व्यक्ति अपने अनुभवों, परवरिश, ज्ञान और परिस्थितियों के अनुसार देखता है। इसलिए अलग-अलग लोगों की सोच अलग होना स्वाभाविक है। जब हम दूसरे दृष्टिकोण को सुनने से इनकार कर देते हैं, तो हम केवल दूसरों को नहीं, बल्कि खुद को भी नई सच्चाइयों से दूर कर लेते हैं। सच्चा ज्ञान विनम्रता से शुरू होता है। जो व्यक्ति अपने विचारों पर भी प्रश्न उठाने का साहस रखता है, वही लगातार सीखता और आगे बढ़ता है। शायद सबसे बड़ी बुद्धिमानी हमेशा सही होने में नहीं, बल्कि सही को पहचानने के लिए अपने विचार बदलने की क्षमता रखने में है। यही मानसिक खुलापन इंसान को अज्ञान के सबसे गहरे अंधेरे से बाहर निकालता है।