کانال رسمی گنجور
📈 Аналитический обзор Telegram-канала کانال رسمی گنجور
Канал کانال رسمی گنجور (@ganjoorofficial) языкового сегмента Фарси является активным участником. Сейчас сообщество объединяет 14 088 подписчиков, занимая 2 650 место в категории Книги и 22 901 место в регионе Иран.
📊 Показатели аудитории и динамика
С момента создания невідомо проект демонстрирует стремительный рост, собрав аудиторию из 14 088 подписчиков.
Согласно последним данным от 08 июля, 2026, канал показывает стабильную активность. За последние 30 дней изменение числа участников составило 2, а за последние 24 часа — 4, при этом общий охват остаётся высоким.
- Статус верификации: Не верифицирован
- Уровень вовлечённости (ER): Средний показатель вовлечённости аудитории составляет 15.07%. В первые 24 часа после публикации контент обычно набирает 6.32% реакций от общего числа подписчиков.
- Охват публикаций: В среднем каждый пост получает 2 123 просмотров. В течение первых суток публикация набирает 890 просмотров.
- Реакции и взаимодействия: Аудитория активно поддерживает контент: среднее количество реакций на один пост — 45.
- Тематические интересы: Контент сосредоточен на ключевых темах, таких как گنجور, رباعی, شعر, خیام, چاپ.
📝 Описание и контентная политика
Автор описывает ресурс как площадку для выражения субъективного мнения:
“تنها کانال رسمی سایت گنجور
https://ganjoor.net”
Благодаря высокой частоте обновлений (последние данные получены 09 июля, 2026) канал поддерживает актуальность и высокий уровень охвата публикаций. Аналитика показывает, что аудитория активно взаимодействует с контентом, что делает его важной точкой влияния в категории Книги.
امروز میخواهم شما را با پروژهای آشنا کنم که برای من بسیار عزیز و ارزشمند است؛ پروژهای که تنها هدفش گشودن درهای زیبایی شعر فارسی به روی کسانی است که فارسیزبان نیستند. ...ادامه: https://blog.ganjoor.net/1405/04/05/zinderood-dot-com/
دردی بتر از علت نادانی نیست جز علم، دوای این پریشانی نیست با آنکه به روی گنج منزل دارد بدبخت و فقیرتر ز ایرانی نیست!● منابع: مختارنامه، ۱۴۹؛ مصیبتنامه، ۹۸؛ تاریخ جهانگشای، ۲: ۱۱۷؛ مقالات شمس، ۲۴۱؛ کلیات شمس، ۸: ۲۶۹؛ معارف سلطان ولد، ۵۴؛ معارف ترمذی، ۶۱؛ مناقب العارفین، ۵۵۸؛ دیوان بابا افضل، ۱۷۶؛ دیوان شاه نعمت الله، ۸۰۱؛ دیوان فرخی یزدی، ۲۱۱ ●● "چهار خطی" https://telegram.me/Xatt4
این کلمهٔ «خجالت» که شما در متن آوردهاید، غلط است؛ چون در عربی «خجالت» به کار نمیرود؛ «خِجلت» به کار میرود و مصدر «خجالت» در عربی وجود ندارد و شما نباید این را میگذاشتید در متن کتاب.دکتر یزگردی در پاسخ، نوشته بود:
این کلمهٔ «خجالت» از رودکی به بعد، بارها و بارها، در متونِ گذشتهٔ نظم و نثر ما به کار رفته و من چنین کلمهای را میبوسم میگذارم روی چشمم، روی سرم و به کار میبرم؛ چون رودکی گفته، سعدی گفته، حافظ گفته. چگونه سر ز خجالت برآورم برِ دوست کلمهای که سعدی و حافظ به کار بردهاند، جزء سرمایهٔ زبان فارسی است. من میبوسم میگذارم روی چشمم و سرم و به کار میبرم؛ حتّی اگر در کتاب المُنجد شما نیامده باشد! این را دکتر یزدگردی نوشته بود؛ یعنی حالا میخواهد توی عربی باشد، میخواهد نباشد! وقتی حافظ به کار برده، سعدی به کار برده، دیگران به کار بردهاند، از هر کلمهٔ فارسی، فارسیتر است! «یلدا» هم وقتی سنایی و خاقانی و حافظ و سعدی و دیگران، بارها، این کلمه را به کار بردهاند، بسیار کلمهٔ خوبی است. بهکاربردنش هم هیچ اشکالی ندارد. هرکس هم که دم زد از فارسیِ سره و اینکه کلمات بیگانه را باید ما بریزیم دور و اینها، شما خیلی جدیاش نگیرید و اعتنا نکنید. اینها در و دکّان است. هیچ چیز دیگری اسمش را نمیشود گذاشت؛ جز در و دکّان. با سرمایهٔ زبان فارسی دیگر نباید شوخی کرد. ▨ درسگفتار #کلیله_و_دمنه جلسهٔ سیاُم، ۲ دی ۱۴۰۳ ـــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــ ۱. اصحاب مذهب منسوخ @dr_mehdi_nourian
