ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜
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कुछ लोग जो हम पर मानसिक हुकूमत करते है साधारण नहीं होते। उनके प्रेम बीज धंसे होते है हमारे मन के अंतिम कोने में। ऐसे लोग कभी भूले नहीं जाते बस मन मे इधर से उधर होते है। उनकी दरारे जीवन पर्यंत चलती रहती है। और वे सदैव के लिए विद्धमान हो जाते है मन मे सबसे भीतरी कमरे में!
और कभी याद आते है पुरविया हवा के दर्द की तरह!
~Abhiwrites✅
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सर्द सवेरा,गर्म सांसे,ठंडी फिजाएं, जालिम हवाएं!
चाय तो ठीक है बस खुदा मोहब्बत से बचाए!
~🩷
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ना बात रही , ना बेकरारी रही
ना शौक रहे , ना यारी रही ,
कुछ यूं खुद को हमने हर पहर बदल लिया
उसने ज़िंदगी बदल ली , हमने शहर बदल लिया .... 🌸
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यकीनन कमी है मुझमें,इंसान हूँ ना मैं,
तुम फरिश्ते जो ठहरे, खुद सा कहा ढूंढोगे!
~💙
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मैं नहीं कह सकती हूं कि मैं तुमसे समंदर जितना प्रेम करती हूं ,
मुझे लगता है कि समंदर में अब भी पानी कम है .... ❤️
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ना हक दीजिए इतना की,तकलीफ़ हो आपको,
ना वक्त दीजिए इतना की, ग़ुरूर हो उन्हें..!!
~💗
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चाह कर भी मेरा मोह नहीं छूटता तुमसे
मानो ,
पानी मिला हो किसी रेगिस्तान के भटके को ... 🫠
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मेरी तकदीर में सुबह नहीं..शाम लिखा है,
हर लफ्ज़ ग़ज़ल का तुम्हारे नाम लिखा है,
लोग बस दाद देंगे,मगर तुम गौर से पढ़ना,
लफ़्ज़ों के लिबास में तुम्हे पैगाम लिखा है।।
~❤️
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सौ पल ग़ुज़ारे है उसके बगैर मैंने ,
जाने कितनी हज़ार याद के बाद आया है ,
सीने से लगाया मैंने , हाल पूछा है , खयाल पूछा है
मेरे दर पर आज मेरा चांद आया है .... 💜🐸🦋
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इस खूबसूरती की शुक्रगुजार हूं मैं , मगर ये शहर नहीं है मेरा ,
आसरा है चार दीवारों और एक छत का , मगर सुकून नहीं है, ये घर नहीं है मेरा 🥺
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Repost from 💓सुकूँन 🍁
क्यों पुरुष की पीड़ा को ,उसके फर्ज का नाम दिया जाता है !
क्यों पुरुषों को रोने नहीं दिया जाता है!
क्यों कहते हैं की पुरुष सख्त होते हैं
क्या पुरुषों के दो दो मस्तक होते हैं!
क्यों कहते है पुरुष घर नहीं बनाते है,
क्या दूर रहकर आप ईश्वर नहीं सजाते है!
जहां ने पुरुषों को एकतरफ ला दिया है,
जिसको इज़्ज़त दी उसी ने खा लिया है!
पुरुषों ने प्रेम का मतलब समझाया है,
बेशक़ कोई दूर हो,नाराज़ हो,खामोश हो, पुरुषों ने ही पहले मसला सुलझाया है!
अगर जहाँ में ,पुरूष कौरव हो सकते है,
वही सती अनुसुइया का गौरव हो सकते है!
Happy men's day
~अभिमंद🩵
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.... और तुम वो लड़के हो , जिसे रखा जाना चाहिए संभालकर ,
संवार कर , प्यार कर , नज़रें उतार कर
जिनका ज़िक्र नहीं किया गया किसी कहानी में
जिन्होंने निभाये रिश्ते , प्रेम हार कर
जिन्हें फ़िक्र रही मां की , घर की ,
जिन्हें ज़मीनें मिली शहर दर शहर की
जिन्हें यादें बीते ज़माने की बेहिसाब रही
मैं न रही गले लगाने को तो शराब रही
संजोकर रखा जाना चाहिए तुम्हारी इस हंसी को
झुमके , बिंदी और दुपट्टा ... सब तुम्हारी खुशी को
तुम वो लड़के हो जिसके साथ के लिए लड़ा जाना चाहिए ,
जिसे जीता जाना चाहिए दुनिया जहां हार कर
जिसे रखा जाना चाहिए बाहों में संभालकर ❤️
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कभी पिता होकर घर की छत बने
कभी प्रेम में रहकर फिर बच्चे बने
कभी बेटा होकर सपनों से समझौता किया
कभी जिम्मेदारियों का बस्ता उम्र से पहले कंधों पर लिया
कभी लड़े जंग के मैदान में डटकर
कभी हार गए लड़ाई अपनो की खातिर
कभी तेज़ बरसात में गाड़ी चलाते
कभी हॉस्पिटल में मरीज़ को दिन रात संभालते
कभी लाइनों में धक्के खाकर टिकट कटवाते
कभी बसों में अपनी सीट देकर घंटों खड़े रह जाते
इन पुरुषों ने निरंतर वे सभी ज़रूरी किरदार निभाए
जहां ज़रूरत थी , थककर कुछ देर बैठ जाने की
~ Aishwarya Sharma
( जाना ज़रूरी है क्या )
Happy international man's day
And thankyou so much to all men in my life. ❤️
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ये सर्द हवा,ये ओस के कतरे,
लगता है...
अब दर्द हुआ है नवम्बर को,
सितंबर के जाने का..!!
~GoodMorning
