Devendra Choudhary IAS
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: The Power of Mangroves over Seawalls : © The Hindu
चक्रवात और समुद्र के बढ़ते जलस्तर जैसी जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए मैंग्रोव, समुद्री घास (seagrass) और कोरल रीफ जैसे प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र (जिसे Ecosystem-based Adaptation - EbA कहा जाता है), कंक्रीट की दीवारों (seawalls) और बांधों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और टिकाऊ हैं। इसके बावजूद, भारत की नीतियों और बजट में प्राकृतिक उपायों के बजाय महंगे और कृत्रिम 'ग्रे इंफ्रास्ट्रक्चर' (Grey Infrastructure) को प्राथमिकता दी जा रही है। लेखकों का सुझाव है कि भारत को अपनी तटीय सुरक्षा के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों को मुख्य नीति में शामिल करना चाहिए।
📌 मुख्य बिंदु (Key Points)
प्राकृतिक सुरक्षा का महत्व: चक्रवात 'दाना' (Cyclone Dana) के दौरान ओडिशा के भीतरकनिका में मैंग्रोव ने अरबों रुपये के तटीय बुनियादी ढांचे और स्थानीय लोगों की आजीविका की चुपचाप रक्षा की। मैंग्रोव और कोरल रीफ तटीय क्षेत्रों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं।
कृत्रिम दीवारों (Seawalls) के नुकसान: कंक्रीट की दीवारें और बांध न केवल बहुत महंगे होते हैं, बल्कि वे जलवायु जोखिमों को पूरी तरह खत्म नहीं करते, बल्कि कटाव (erosion) को दूसरे तटीय इलाकों में ट्रांसफर कर देते हैं (जैसे केरल में देखा गया)।
बजट में भारी असमानता: पिछले एक दशक में भारत के तटीय राज्यों ने कृत्रिम सुरक्षा उपायों पर ₹2,641 करोड़ खर्च किए। इसके विपरीत, राष्ट्रीय तटीय मिशन (National Coastal Mission) का बजट साल 2022-23 के ₹195 करोड़ से घटकर 2024-25 में केवल ₹50 करोड़ रह गया है।
सफल उदाहरण (सुंदरबन): भारत तटीय EbA के मामले में दुनिया का एक 'हॉट-स्पॉट' है। सुंदरबन में 18,000 से अधिक महिलाओं ने 4,600 हेक्टेयर मैंग्रोव को पुनर्जीवित किया, जिसने 'अम्फान' और 'यास' जैसे भयानक चक्रवातों के असर को कम किया और साथ ही शहद और केकड़ा पालन के जरिए स्थानीय आजीविका को मजबूत किया।
नीतियों में स्पष्टता की कमी: EbA (पारिस्थितिकी-आधारित अनुकूलन) को अभी भी भारत के मुख्य अनुकूलन एजेंडे में किनारे रखा गया है। 'मिष्टी' (MISHTI - Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes) जैसी बड़ी योजनाओं को जलवायु अनुकूलन रणनीति के बजाय केवल एक 'वृक्षारोपण/पुनर्स्थापना कार्यक्रम' के रूप में देखा जाता है।
भविष्य की राह: भारत को बिखरे हुए प्रोजेक्ट्स पर काम करने के बजाय एक ऐसी ठोस और एकीकृत नीति अपनानी चाहिए, जो EbA को तटीय योजना और विकास रणनीतियों का मुख्य हिस्सा बनाए। इससे देश की प्राकृतिक पूंजी सुरक्षित होगी और तटीय समुदायों को एक मजबूत सुरक्षा तंत्र मिलेगा।
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