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हिन्दूराष्ट्र प्रकल्प 🌞🚩 | Jagadguru Shankaracharya Hindurashtra Prakalp | जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान् की जय

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श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य जी की सेना 🚩 @Dharmveer_Dal @TradDigvijay @ShankaracharyaPhotos @AdiShankaracharyaPhotos @DharmsamratKarpatriJiPhotos

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☀️ समस्त सनातनवैदिकधर्म्मावलम्बियों को सहर्ष सूचित किया जाता है कि – अनन्तश्रीसमलङ्कृत अभिनवशङ्कर यतिचक्रचूडामणि राजराजेश्वर
☀️ समस्त सनातनवैदिकधर्म्मावलम्बियों को सहर्ष सूचित किया जाता है कि – अनन्तश्रीसमलङ्कृत अभिनवशङ्कर यतिचक्रचूडामणि राजराजेश्वर विश्ववन्द्य सर्वभूतहृदय श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ वेदभाष्यकार धर्मसम्राट् स्वामी श्रीहरिहरानन्दसरस्वतीजी 'श्रीकरपात्रीजी' महाभाग का ११९वाँ प्राकट्यमहोत्सव आगामी श्रावणशुक्ल द्वितीया - शुक्रवार, तदनुसार - १४ जुलाई २०२५ को मनाया जाएगा। धर्मब्रह्मशरीराय करपात्रमहात्मने। वेदोद्धारप्रवृत्ताय नित्याय गुरवे नम:॥ 🪷🙏🏻

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गुरुपूर्णिमा महोत्सव एवं चातुर्मास्यव्रत-निमन्त्रणपत्र+1
गुरुपूर्णिमा महोत्सव एवं चातुर्मास्यव्रत-निमन्त्रणपत्र
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🌸🌸 हर हर शंकर जय जय शंकर 🌸🌸
🌸🌸 हर हर शंकर जय जय शंकर 🌸🌸
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🔴 LIVE प्रसारण https://www.youtube.com/live/ERe3HTZHo6g
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परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य, गोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज के 84वें प्राकट्योत्सव महोत्स
परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य, गोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज के 84वें प्राकट्योत्सव महोत्सव - राष्ट्रोत्कर्ष दिवस 2026 के पावन अवसर पर आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं। 📅 दिनांक: 12 जुलाई 2026 (रविवार) ⏰ समय: प्रातः 10:30 बजे 📍 स्थल: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टेडियम, नॉर्थ कैंपस, विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के निकट, दिल्ली 📲 पंजीकरण हेतु QR कोड स्कैन करें।
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☀️ राष्ट्रोत्कर्ष दिवस ☀️ अनन्तश्रीविभूषित ऋग्वेदीय-पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठपुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्दसरस्वतीजी महाभाग का 84वाँ प्राकट्य महोत्सव - 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' आषाढकृष्ण० त्रयोदशी तदनुसार 12 जुलाई 2026 (रविवार) प्रातःकाल 11:00 बजे से 📍 आयोजन स्थल : दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टेडियम, नार्थ कैंपस, निकट दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो (दिल्ली)
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युधिष्ठिरशके २६५५ वैशाखशुक्लदशम्यां दिग्विजयान्तराले पुरुषोत्तमक्षेत्रप्रतिगमनं तत्र दारुमयस्य जगदीशस्य प्रतिष्ठापनं तत्क्षेत
युधिष्ठिरशके २६५५ वैशाखशुक्लदशम्यां दिग्विजयान्तराले पुरुषोत्तमक्षेत्रप्रतिगमनं तत्र दारुमयस्य जगदीशस्य प्रतिष्ठापनं तत्क्षेत्रमर्यादाप्रबन्धः। गोवर्द्धनमठस्थापनम्। पद्मपादाचार्याणां तत्पीठाभिषेचनञ्च। [ चित्रोंमें~ ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्रीमधुसूदनतीर्थमहाभाग। ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्रीभारतीतीर्थमहाभाग। ब्रह्मलीन जगद्गुरु श्रीनिरञ्जनदेवतीर्थमहाभाग। वर्तमान जगद्गुरु श्रीशङ्कराचार्य ऋग्वेदीय-पूर्वाम्नाय-पुरीपीठाधीश्वर स्वामिश्रीनिश्चलानन्दसरस्वतीजीमहाराज। ]
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महोदधेस्तटे क्षेत्रे पुरुषोत्तमसंज्ञके। जगन्नाथं दारुमयं प्रतिष्ठाप्य यथाविधि॥ भूतेन्द्रियाङ्गनेत्राब्दे युधिष्ठिरशकस्य वै। २६५५ वैशाखे शुक्लगे पक्षे दशम्यां शोभने दिने॥ गोवर्द्धनमठे रम्ये विमलापीठसंज्ञके। पूर्वाम्नाये भोगवारे श्रीमत्काश्यपगोत्रजः॥ माधवस्य सुतः श्रीमान्‌ सनन्दन इति श्रुतः। प्रकाशब्रह्मचारी च ऋग्वेदी सर्वशास्त्रवित्‌॥ श्रीपदापादः प्रथमाचार्यत्वेनाभ्यषिच्यत। श्रीमत्परमहंसादिविरुदैरखिलैः सह॥ (श्रीशङ्करदिग्विजयमकरन्दः ३१.१४-१८)
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भगवान्भाष्यकार श्रीशिवावतार जगद्गुरु भगवत्पाद श्रीशङ्कराचार्य महाभागने वैशाखशुक्ल दशमीके दिन युधिष्ठिरसम्वत् २६५५में महोदधिके
भगवान्भाष्यकार श्रीशिवावतार जगद्गुरु भगवत्पाद श्रीशङ्कराचार्य महाभागने वैशाखशुक्ल दशमीके दिन युधिष्ठिरसम्वत् २६५५में महोदधिके तटपर अपने चिन्मयकरकमलोंसे मूर्त्तिभञ्जकोंके शासनकालमें उच्छिन्न श्रीजगन्नाथादि-दारुब्रह्मको पुनः प्रतिष्ठित किया तथा उसी दिन उन्होंने अपने प्रथम शिष्य काश्यपगोत्रोत्पन्न श्रीमाधवनन्दन सनन्दन संज्ञक ऋग्वेदी सर्वशास्त्रवित् श्रीपद्मपादको ऋग्वेदीय-पूर्वाम्नाय श्रीपुरुषोत्तमपुरीक्षेत्रस्थ परमसुरम्य श्रीगोवर्द्धनमठ-भोगवर्द्धनपीठ (श्रीविमलाम्बा-उड्याणपीठ) पर श्रीमत्परमहंसादि निखिलविरुदावलिसमलङ्कृत प्रथम जगद्गुरु-शङ्कराचार्य-आम्नायपीठाधीश्वरके पदपर प्रतिष्ठित तथा अभिषिक्त किया।
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॥ श्रीहरिः ॥ ॥ जय श्रीजगन्नाथ ॥ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः। श्रीमन्नारायणाय नमः। श्रीशङ्कराय नमः। श्रीमात्रे नमः। श्रीभास्कराय नमः। श्रीसुब्रह्मण्याय नमः। ☀️ वर्तमान कल्पके १ अरब ९७ कोटि २९ लक्ष ४९ सहस्र १२७ वर्षोंसे पुष्पित, पल्लवित 'नारायणसमारम्भाम्...' गुरूपरम्परामें आस्थान्वित समस्त सनातनी-वैदिक-आर्य-हिन्दुओंको नूतनवर्षाभिनन्दन। सनातन नववर्ष समस्त सनातनधर्मावलम्बियों हेतु शुभप्रद सिद्ध हो। 🌸 आप सभी को चैत्रशुक्ल प्रतिपदासे नवीन- 'रौद्र' संज्ञक विक्रमसम्वत् २०८३, 'पराभव' संज्ञक शक्सम्वत् १९४८ तथा सनातन सृष्टिसंवत्सर १,९७,२९,४९,१२७ के शुभारम्भ एवं वासन्तिक-नवरात्रा - श्रीश्रीललितानवरात्र व रक्तदन्तिकापूजा की अनन्तानन्त मङ्गलकामनाएँ। ब्रह्मविद्यासम्प्रदायके कर्ता, भर्ता एवं संरक्षक भगवान् श्रीमन्नारायण एवं उनके अभिन्नस्वरूप भगवान् सदाशिव (श्रीदक्षिणामूर्ति)से आरम्भ होने वाली एवं श्रीब्रह्मा, श्रीवसिष्ठ, श्रीशक्ति, श्रीपराशर, श्रीबादरायण-कृष्णद्वैपायन-वेदव्यास, श्रीशुकदेव, श्रीगौडपादाचार्य, श्रीगोविन्दभगवत्पाद, भगवत्पाद शिवावतार श्रीशङ्कराचार्य, श्रीपद्मपादाचार्यादि अमलात्मापरमहंसमहामुनीन्द्रों, सिद्धों, ब्रह्मात्मतत्त्ववेत्ताओं द्वारा प्रवर्तित; अबतक १५५ गुरुओंकी इस अनाद्यविच्छिन्नगुरुपरम्परामें जहाँ औपनिषद्ब्रह्मविद्या अपने वास्तविक स्वरूपमें सुस्थित है और जो सदासे सकललोककल्याणार्थतत्पर है, ऐसी अभ्युदय-निःश्रेयसप्रद एवं धर्मग्लान्यधर्माभ्युत्थाननिवृत्तिपूर्वक धर्मसंस्थापनार्थ निरन्तर सङ्घर्षरत इस गुरुपरम्परा का नूतनवर्ष आरम्भ हो रहा है। यह नूतनवर्ष इस गुरुपरम्परामें आस्थान्वित सज्जनों हेतु धर्म, अध्यात्म, भक्ति, विरक्ति एवं भगवत्प्रबोधकी प्राप्तिमें अग्रसर करने वाला सिद्ध हो। आपका जीवन अपने और सबके हितमें प्रयुक्त तथा विनियुक्त हो। नारायण। सर्वेषां मङ्गलं भूयात् सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ (श्रीगरुडमहापुराण, उत्तरखण्ड(२), ३५.५१)
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🌺 नवसंवत्सर की हार्द्दिक मङ्गलकामनाएँ 🌺 शम्भुं विष्णुं च सूर्यं च देवीं गणपतिं तथा । पञ्चायतनपूजाभिः स्मार्तधर्मः प्रवर्धताम् ॥ भगवान् शम्भु (श्रीशिव), भगवान् श्रीविष्णु, भगवान् श्रीसूर्य, श्रीदेवी (आदिशक्ति) और भगवान् श्रीगणपति — इन पञ्चदेवों की पञ्चायतन-पूजा के द्वारा स्मार्त धर्म की उन्नति हो। वेदवेदान्तसिद्धान्तः श्रुतिस्मृतिपुरःसरः । नववर्षे प्रबुद्धोऽयं धर्ममार्गः प्रकाशताम् ॥ वेद और वेदान्त का सिद्धान्त, जो श्रुति और स्मृति के मार्ग का अनुसरण करता है — वह धर्ममार्ग इस नववर्ष में जागृत होकर प्रकाशित हो। भजामि शंकराचार्यं अद्वैतामृतवर्षिणम् । यत्पादाम्भोजशरणं मोक्षमार्गप्रदायकम् ॥ मैं शिवावतार जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य का भजन करता हूँ, जो अद्वैत रूपी अमृत की वर्षा करने वाले हैं; जिनके चरणकमलों की शरण मोक्ष का मार्ग प्रदान करती है। शरणं ते जगद्गुरो शंकराचार्य सर्वदा । नवसंवत्सरेऽस्माकं बुद्धिर्भवतु शाश्वती ॥ हे जगद्गुरु शंकराचार्य! हम सदा आपकी शरण में हैं। इस नवसंवत्सर में हमारी बुद्धि स्थिर, शाश्वत और विवेकयुक्त हो। भवतु ब्रह्मनिष्ठा नः भवतु श्रुतिसेवना । सदाचाररतिः स्थेयं शान्तिर्भूयात् पुनः पुनः ॥ हममें ब्रह्मनिष्ठा हो; श्रुति-सेवा (वेदाध्ययन एवं पालन) हो; सदाचार में स्थिर प्रेम हो; और बार-बार शांति की स्थापना होती रहे।
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