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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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💕जिस औरत ने भी इसे लिखा है कमाल लिखा है💕
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मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना -
मुझे अच्छा लगता है जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझ से कहता है "रुको! मैं तुम्हे ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ "
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझ से एक कदम आगे चलता है - गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता है उसे मेरा ख्याल खुद से ज्यादा है
मुझे अच्छा लगता है जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़ मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार बार अपना हाथ बढ़ाता है -
मुझे अच्छा लगता है जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना हिचक किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है - और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह रखते वक़्त उसका यह कहना कि "तुम छोड़ दो यह मेरा काम है "-
मुझे अच्छा लगता है जब वह मेरी वजह से शर्द मौसम में सवारी गाड़ी का इंतज़ार करने के लिए खुद स्टेशन पे इंतजार करता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे ज़रूरत की हर चीज़ घर पर ही मुहैय्या कर देता है ताकि मुझे घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ बाहर जाने की दिक़्क़त ना उठानी पड़े और लोगों के नामुनासिब रावैय्यों का सामना ना करना पड़े -
मुझे बहोत अच्छा लगता है जब रात की खनकी में मेरे साथ आसमान पर तारे गिनते हुए वह मुझे ढंड लग जाने के डर से अपना कोट उतार कर मेरे कन्धों पर डाल देता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे मेरे सारे गम आंसुओं में बहाने के लिए अपना मज़बूत कंधा पेश करता है और हर कदम पर अपने साथ होने का यकीन दिलाता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह खराब हालात में मुझे अपनी जिम्मेदारी मान कर सहारा देने केलिए मेरे आगे ढाल की तरह खड़ा हो जाता है और कहता है " डरो मत मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा" -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे गैर नज़रों से महफूज़ रहने के लिए समझाया करता है और अपना हक जताते हुए कहता है कि "तुम सिर्फ मेरी हो " -
लेकिन अफसोस हम में से अक्सर लड़कियां इन तमाम खुशगवार अहसास को महज मर्द से बराबरी का मुकाबला करने की वजह से खो देती हैं
फिर ۔۔۔۔۔۔۔۔
जब मर्द यह मान लेता है कि औरत उस से कम नहीं तब वह उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना छोड़ देता है - तब ऐसे खूबसूरत लम्हात एक एक करके ज़िन्दगी से कम होते चले जाते हैं , और फिर ज़िन्दगी बे रंग और बेमतलब हो कर अपनी खुशीया खो देती है
मुक़ाबला आधुनिकता की इस दौड़ से निकल कर अपनी ज़िंदगी के ऐसे हसीन लम्हो का अहसास कर लीजिए .. .. ..
🌹 🌺 ❤ 😊 💖🌺🌹
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सुनो न !
चलो उठो प्रियत्मा
सूरज ने भी ले ली अंगड़ाई
दिन निकल कर आई
तुम भी उठो प्रियत्मा
अपनी आलिंगन से हटाओ मुझे
तेरी काँख की खुशबू
ओठो की मदहोश चुम्बन
तेरे योनि का रसपान
उफ़्फ़फ़फ़ !!
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नशा तो यारों कुछ बेमानी है,
कौन सा ऐसा नशा है जो उतरा नहीं....
महफ़िलो में हो रहे थे उनके नाम के चर्चे,
लफ्जों पर मेरा ध्यान गया ही नहीं....
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ये घनघोर जुल्फे
जिसकी छांव में आ जाऊं मैं
ये नशीली नयन
ये मदहोश ओठ
जिसे चूम हो जाऊं बेहोश
ये गोरा वदन
अंगड़ाती जवानी
काले वस्त्र
मेरे रोम रोम को
प्रेम में उत्तेजित
कर रहा प्रियत्मा ।।
🌹💓💋
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पुरुष का अहंकार पिघल जाता है
स्त्री के प्रेम में ,
उसकी जुल्फों की छांव में,
उसकी शीतल स्पर्श से ,
उसकी आँचल की आगोश में,
उसकी शांत आभामंडल की तेज में,
उसकी गोद मे सिर रख लेने से
पुरुष तो प्रेम में बालक हो जाता है
स्त्री की स्त्रितत्व में
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तेरी नथिया रे
जब भी इन मदहोश ओठों
के रस को चूसना चाहता हूँ न
तो तेरी ये नथिया
हम दोनों के ओठों के बीच
दीवार बन जाता है
प्रियत्मा
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पुरुष में वासना की उत्पति पानी के बुलबुले की तरह क्षणिक होती है किन्तु स्त्री में यह एक लहर कि तरह होती जो बहुत गहराई तक जाती है और सहज शांत भी नहीं होती।
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ये घनघोर जुल्फे
जिसकी छांव में आ जाऊं मैं
ये नशीली नयन
ये मदहोश ओठ
जिसे चूम हो जाऊं बेहोश
ये गोरा वदन
अंगड़ाती जवानी
काले वस्त्र
मेरे रोम रोम को
प्रेम में उत्तेजित
कर रहा प्रियत्मा ।।
🌹💓💋
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Chandni Bhabhi (2021) #Fliz #Hindi
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शाकाहारी बनिये !!
शाकाहार अधिक श्रेष्ठ होता है..
मांसाहार की तुलना में..
क्युकिं संभोग की ज्यादा क्षमता भी शाकाहार में है
अक्सर घास खाने वाले "सांड ,हाथी और घोड़े" का लम्बा ,तगड़ा होता है और उदाहरण भी लोग कहते हैं घोड़ा जैसा ल*्ड है।
ना कि मांसाहारी "सिंह" का
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संभोग के पूर्व स्त्री पुरुष दोनों के पान का सेवन श्रेष्ठ माना गया है। इससे उत्तेजना बढ़ती है,होंठो पर रस प्रणय में भी आंनद देता है।
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जिन्होंने भी थोड़ा भी जीवन में प्रेम जाना है, वे जानते होंगे कि प्रेम के निकट शब्द खो जाते हैं और मौन आ जाता है। और उलटा भी सच है। अगर मौन आ जाए तो भी प्रेम आ जाता है। वे दोनों एक—दूसरे के छोर हैं। मौन आ जाए तो प्रेम आ जाता है, प्रेम आ जाए तो मौन आ जाता है। नहीं, ऐसा मत सोचें कि मौन से आप कठोर हो जाएंगे। बड़ी कृपा होगी आपकी, बड़ी करुणा होगी दूसरों पर कि आप मौन हैं, आप चुप हैं।
मौन में और करुणा में विरोध नहीं है। मौन से ही करुणा पैदा होती है। और करुणावान व्यक्ति धीरे— धीरे मौन होता चला जाता है। वह बोलता है तो इसलिए नहीं कि उसके भीतर बोलने की कोई जरूरत है। वह बोलता है तो इसलिए कि बाहर कोई जरूरत है, अन्यथा वह नहीं बोले। उसका बोलना रोग नहीं है, उसका बोलना बीमारी नहीं है, उसके भीतर कुछ घुमड़ नहीं रहा है जिसे उसे बरसा देना है। उसका बोलना जिससे वह बोल रहा है; उसकी जरूरत है, उसका इलाज है, उसका उपचार है।
दो तरह से लोग बोलते हैं, वे जो करुणावान हैं— इसलिए कि उनका बोला हुआ किसी के काम पड़ सकता है। और वे जो करुणावान नहीं हैं—इसलिए नहीं कि उनका बोला किसी के काम पड़ सकता है, बल्कि इसलिए कि वे इतने भरे हुए हैं शब्दों और विचारों से कि जब तक उसे उलीचने को कोई न मिल जाए, किसी पर फेंकने का अवसर न मिले तब तक वे दिन भर परेशानी, बोझिलता अनुभव करेंगे। वह कठोरता नहीं मालूम हुई होगी। वह मालूम हुआ होगा बोझिलपन, क्योंकि रोज—रोज जो निकाल देते हैं हम— आज निकालने का अवसर न रहा; वह इकट्ठा हो गया होगा, घना हो गया होगा, मस्तिष्क भारी हो गया होगा।
वह भार कठोरता के कारण नहीं है, वह गलत आदत के कारण है। प्रयोग करेंगे धीरे— धीरे तो वह आदत चली जाएगी और तब मौन से करुणा का जन्म होगा और करुणा से मौन पैदा होता है। उन दोनों में विरोध नहीं है
ओशो
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मुस्लिम लोगो का मित्रता स्वीकार नही करने का कारण वश इतना है कि अधिकतर लोग वफादार नही होते ज्यादा झूठ बोलेंगे, नकाब में रहेंगे और नकाब के अंदर से आपकी काट करेंगे।
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सांवली स्त्रियां अन्य स्त्रियों की तुलना में अधिक उत्तेजक और कामुक होती है वह शर्मीली किन्तु मुखर होकर प्रणय के समय साथी का हर रूप से साथ देती हैं
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स्त्री की ओर झुकाव दो तरह से हो सकता है,
एक वासना के कारण
और दूसरा प्रेम के कारण ।
वासना लालची चित्त की अवस्था है
और प्रेम निस्वार्थ भाव दशा है ।
वासना संसार है
और प्रेम आध्यात्म है ।
जो समय के साथ बढता जाये वो प्रेम है
और जो समय के साथ घटता जाये वो वासना है।
वासनाग्रस्त चित्त सदैव अशांत रहता है
और प्रेमपूर्ण चित्त सदैव शांत रहता है, आनन्दित रहता है ।
जिसने स्त्री में वासना देखी, उसे स्त्री का प्रेम कभी उपलब्ध नहीं हो सकता है ,
और जिसने स्त्री को प्रेम किया, उसे स्त्री में परमात्मा दिखाई पडने लगता है,
प्रेम में इतनी शक्ति है कि स्त्री परमात्मा ही हो जायेगी ।
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लेखिनी कॉपी है संगीत सौंदर्य सुधा जी की वाल से।
जब स्त्री किसी को गले लगेगी, तो आंख बंद कर लेगी। इसलिए स्त्रियों को पुरुषों के रंग में, रूप में, आकृति में उतनी उत्सुकता नहीं होती, जितनी उनकी संस्कारशीलता में उत्सुकता होती है। स्त्रियां अलग चीजों से प्रभावित होती हैं--पुरुष अलग चीजों से। पुरुष देखता है कि रंग कैसा है, रूप कैसा है, नक्श कैसा है। नख से शिख तक वह पूरा का पूरा रूप-रंग-आवरण--सब देखता है। बाल का रंग, चमड़ी का रंग, नाक का ढंग, आंख का ढंग! स्त्री इन चीजों में उतना रस नहीं लेती। उसका रस कुछ और है। वह देखती है: पुरुष में कितना प्रसाद है; कितना विनम्र, कितना सरल है। कितना आनंदित व्यक्ति है, आह्लादित व्यक्ति है! अब आह्लाद का, आनंद का, प्रसाद का नाक की लंबाई से कोई संबंध नहीं है। न रंग से कोई संबंध है।
और स्त्री को जब तुम आलिंगन करोगे, तो वह आंख बंद कर लेगी, क्योंकि वह तुम्हें भीतर से पकड़ना चाहती है। वह तुम्हारे भीतर डूब जाना चाहती है। वह अंतर्मुखी है। पुरुष बहिर्मुखी है। वह स्त्री को प्रेम भी करना चाहता है, तो बिजली का बल्ब जला कर करना चाहता है। वह देखना चाहता है कि उसके चेहरे पर क्या भाव आते हैं। यहां तक ही नहीं--यहां तक पागल पुरुष हैं कि आईने लगा रखते हैं अपने बिस्तर के ऊपर, कि अगर ठीक से न देख पाएं, तो आईने में दिखाई पड़ता रहे!
जीवन भीतर ऊंचाइयां छूने लगे। तुम्हारे भीतर शिखर उठने लगें चैतन्य के। वह आत्मा को आविष्कृत करने का विज्ञान है।
पुरुष को रस है उनमें। स्त्रियों को इस बात में बहुत रस नहीं है। बहुत उत्सुकता नहीं है कि वे पुरुषों के नग्न चित्र देखें। उसे पुरुष की आत्मा में रस है, देह में कम।
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पुरुषों के अंडरगारमेंट्स घर में इधर उधर पड़े रहें तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर महिलाओं के अंडरगारमेंट्स कहीं दिख जाएं तो शर्म की बात।
उठते बैठते अगर लड़कियों के कपड़ों में से ब्रा या अंडरवियर दिखे तो वो बेहया - बेशर्म। वहीं अगर लड़को के उठते बैठते बनियान या अंडरवियर दिखे तो कोई फर्क नहीं पड़ता।
महिलाओं का पुरुषों के अंडरगारमेंट्स धोना आम बात है पर अगर पुरुष महिलाओं के अंडरगारमेंट्स धोए तो परिवारों में शर्म या मज़ाक की बात।
कितनी बेतुकी सी बातें है ये। कपड़ा ही तो है! अश्लीलता या शर्म कैसी? वो भी सिर्फ लड़कियों के कपड़ो में!? ये छुपा - छुपी, शर्म - हया सब पितृ सत्ता की बनाई हुई चीज़े है।
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दुखद समाचार!
देश ने खोया अपना एक वैज्ञानिक।
सब लोग हर हर मोदी घर घर मोदी में लगे रहो, इधर मेक इन इंडिया को धक्का लग गया,
वैज्ञानिक नूरैन मियाँ नहीं रहे ..!
बिहार के बेतिया में नुरैन खान "मस्जिद" में बम बना रहे थे, प्रैक्टिकल के दौरान बम फटने से इस महान वैज्ञानिक ने सीधे पृथ्वी से 72 हूरों के बीच लैंड कर लिया।
भगवान देश को इस अभूतपूर्व क्षति से जल्दी उबारने की कृपा करें।
आज पंचर और कबाड़ की सभी दुकानें बंद रखी जाएँगी।
कॉपी ध्रुव स्वामिनी
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ज्यादा जंगल से दिक्कतें होती हैं तो सोचता हूँ कि आज जंगल की कटाई करवा दू ताकि हाइजेनिक सम्भोग कर सकूँ ।
तो आपलोग भी कर लीजिय कटाई छटाई जिनके घुंघराले बाल बड़े हो गए हैं।
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इस विस्तर पर जब तुम मेरे आलिंगन में आती हो
तब सिर्फ तुम्हारी सिसकियाँ ,
और गीले अंग से अंग के मिलन का
फच फच सी आवाज और
पलंग की चरचराहट सुनाई देती है । उफ़्फ़फ़फ़
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