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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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जहां पुष्प दिख रहा है वह भगनासा अंग
छेड़छाड़ उससे करो तबहि चढ़ेगा रंग।
.... बच्चों / काम जिह्वा से होगा(.)
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ड़कों से सैटिंग करवाती हैं । उनके नंबर और घर के पते मुसलमान लड़कों को बताती हैं । जिससे कि बहुत सारी लड़कियाँ और महिलाएँ फँसती हैं ।
• मोबाईल ठीक करने और रिचार्ज कराने की दुकानों पर जहाँ पर मुसलमान युवक काम करते हैं । वे रिचार्ज करवाने आई हिंदू लड़कियों के नंबर अपने जिहादी दोस्तों को बाँटते हैं । और उन नंबरों के द्वारा भी मुसलमान लड़के ट्रेनिंग के हिसाब से काम करते हैं और कई हिंदू लड़कीयों को पटा लेते हैं ।
• कपड़े सिलने वाले जितने दर्जी होते हैं अधिकतर मुसलमान होते हैं । जिनकी दुकानों पर जो हिंदू महिलाएँ जाती हैं । उनके नाम और पते की लिस्ट ये लोग अन्य साथियों को मुहईया करवाते हैं । जिसका लाभ लेकर दुकान से ही लड़के उन महिलाओं और लड़कियों का पीछा करना शुरू कर देते हैं ।
• देखा गया है कि मुस्लिम लड़के उन हिंदू लड़कों से विशेष दोस्ती करते हैं जिनकी बहनें जवान और सुंदर हों । या जिनके घर में लड़कियाँ हों । तो ऐसे सैकुलर दोस्तों के घर में ये मुसलमान दोस्त आना जाना शुरू कर देते हैं । उनकी बहनों या भाभियों पर डोरे डालना शुरू कर देते हैं । और ऐसे ही कितनी ही हिंदू परिवार की लड़कियाँ खराब की जाती हैं या भगा ली जाती हैं ।
• जिस किसी आफिस में मुसलमान बास होगा वह सबसे पहले जाते ही हिंदू कर्मचारी लड़कियों को छांटकर अलग कर लेता है । और अपने पद का प्रयोग करके उनको अपने फाँसे में लेने की कोशिश करता रहता है । या फिर अपने आफिस में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों के साथ विशेष बैठक करके उनसे सैटिंग करने को बोलता है ।
• अधिकतर संस्थाओं में आपने देखा होगा कि मुस्लिम लड़कियाँ बहुत कम नौकरी करती हैं । क्योंकि वे नहीं चाहते कि मुसलमान लड़कियाँ आज़ाद होकर हिंदू लड़कों से प्रेम करें । लेकिन मुसलमान लड़कों को ही नौकरीयाँ करवाई जाती हैं । तांकी वहाँ पर काम करने वाली हिंदू लड़कियों से मज़े करें और उनको पटाकर शादियाँ करें । अधिकतर Jim Training Centres में मुस्लिम कोच जान बूझकर रखे जाते हैं । तांकि Jim करने वाली हिंदू लड़कियों पर हाथ साफ किया जा सके ।
*तो ऐसे अनेकों तरीकों से लव जिहाद फैलाया जा रहा है और हिंदू लड़कियों को खराब करके हिंदूओं को समाप्त करने की साज़िश चल रही है।
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लव जिहाद कैसे संचालित होता है ?
• स्कूलों में मुस्लिम लड़कियाँ अपनी हिंदू सहेलियों की सैटिंग अपने मुसलमान लड़कों से करवाती हैं और खुद किसी हिंदू लड़कों से दूर रहती हैं । क्योंकि स्कूलों में मुसलमान लड़के और लड़कियाँ झुंड बनाकर रहते हैं और वहाँ पर मुसलमान लड़कियों को समझाया जाता है कि हिंदू लड़कों से मत फँसना और मुसलमान लड़कों को समझाया जाता है कि हिंदू लड़कियों को पटाओ और मुस्लिम सहेलियों की सहायता लो ।
• कालेजों में भी हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुसलमानों की अलग से ही Fresher Party होती हैं जिसमें सभी सीनीयर और जूनियर लड़के लड़कियों की आपस में पहचान करवाई जाती है । और उनको भी यही समझाया जाता है कि मुस्लिम लड़कियाँ कैसे हिंदू लड़कों से दूर रहें ? और मुस्लिम लड़के कैसे हिंदू लड़कियों के पास आएँ ? कभी कभी तो होस्टल में किसी एक कमरे को खाली करके उसे मस्जिद बनाकर होस्टल के सारे मुसलमान लड़के नमाज़ पढ़ने आते हैं और यही नीतियाँ बनाते हैं कि कैसे हिंदू लड़कियों को पटाया जाए ? कैसे सैकुलरों को पीरखाने या दरगाहों पर ले जाकर मुसलमान बनाया जाए?
• दरगाहों, मज़ारों, पीरखानों, कब्रों और मस्जिदों से मुसलमान लड़के और लड़कियाँ एक विशेष किसम का प्रसाद लेकर आते हैं जिसे कि तव्वरुक्ख कहा जाता है । उसमें एक विचित्र प्रकार का नशीला पदार्थ मिला होता है । जिसे खाते ही किसी भी व्यक्ति की काम इच्छा कई गुना बढ़ जाती है और उसे सैक्स करने की तड़प सी होने लगती है । तो इसी तव्वरुक्ख को ये मुसलमान लड़के लड़कियाँ अपनी मित्र हिंदू लड़कियों को प्रसाद के रूप में खिलाते हैं । तो श्रद्धा के नाम पर जानकारी के अभाव में ये हिंदू लड़कियाँ अंजाने में ही उस तव्वरुक्ख को खाकर सैक्स के लिए पागल हो उठती है । और इसी मौके का फायदा उठाकर पहले से ही तैयार मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों का कौमार्य भंग कर देते हैं । और बाद में लड़की का जमकर शोषण किया जाता है । इसी तरह हिंदू लड़कियों को खराब किया जा रहा है ।
• फेसबुक आदि साईटों के माध्यम से मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों को अनेकों नकली IDs बनाकर request भेजते हैं । और भोली भाली सैकुलर हिंदू लड़कियों से मीठी मीठी बातें करके पहले उनसे दोस्ती गहरी करते हैं । फिर उनसे उनकी फोटोएँ माँगते हैं । भावनाओं में बही हुई लड़कियाँ फोटोएँ दे देती हैं । और फिर वही मुसलमान लड़के उन फोटो के आधार पर लड़की को Blackmail करते हैं । जिससे हताश होकर बहुत सी लड़कियाँ फँस जाती हैं और अपना कौमार्य उनपर लुटा देती हैं और या उनसे शादियाँ कर लेती हैं ।
• शहर की मस्जिदों में सभी मुसलमानों की मीटिंग रखी जाती है । जिसमें अमीर से लेकर गरीब मुसलमान तक । रेढ़ीवाला, कबाड़वाला, बर्तनवाला, धोबी, शाल कम्बल बेचने वाले कशमीरीयों, मोचीयों आदि सबको बुलाया जाता है । और उनसे हिंदू इलाकों में घूम घूम कर ये पता लगाने को कहा जाता है कि किस घर में कितनी लड़कियाँ हैं ? तो ये कबाड़वाले, कंबल वाले, बर्तनवाले समान बेचने की आढ़ में घरों में घुसते हैं और घरों की रेकी करके पता लगाते हैं कि कितना समान घर में चोरी करने के लायक है ? कितनी हिंदू जवान लड़कियाँ उस घर में हैं ? ये पता लगाने के बाद मस्जिदों में लड़कियों की लिस्टें बनाई जाती हैं उनके ईलाकों के हिसाब से । और फिर पहले से तैयार रखे हुए नौजवान दिखने में थोड़े सुंदर हट्टे कट्टे नौजवानों को पैसा और मोटरसाईकल देकर उन ईलाकों में घूमने को बोला जाता है और लड़कियों को फँसाने के लिए कहा जाता है । जब किसी इलाके कि कोई लड़की नहीं पटती तो उसे छोड़ दूसरी किसी लड़की को पटाने की कोशिश में मुसलमान लड़का लग जाता है । ऐसा होने से कोई न कोई हिंदू लड़की किसी न किसी से फँस ही जाती है । उदाहरण के तौर पर मेरठ और बरेली जैसे शहरों में हर महीनें 25-30 हिंदू लड़कियाँ भाग रही हैं ।
• लड़कियों के स्कूलों के आगे पंचर लगाने वाले, सब्जी या फल बेचने वाले, चाय वाले मुसलमान कड़ी नज़र रखते हैं । और अपनी पास की मस्जिदों में बताते हैं जिससे कि तैयार हुए मुसलमान लड़के छुट्टी के समय मोटरसाईकल लेकर हाथ में कलावा बांधकर माथे पर टीका लगाकर हिंदू लड़कीयों के आसपास मंडराते हैं और किसी न किसी को फँसा लेते हैं ।
• देखा गया है कि बड़े बड़े सेठों की दुकानों पर या उनके घर में काम करने वाले मुसलमान ही होते हैं । और उन ऊँचे घरों की लड़कियों के तो अधिकतर दिमाग खराब ही होते हैं । जिनका लाभ उठाकर मुसलमान नौकर उनको पटा लेते हैं और अपने अन्य मित्रों की सहायता से उसे भगा लेते हैं । ( ऐसा ही हुआ मुरादाबाद के एक सुनार की बेटी के साथ जो कि अपने यहाँ काम करने वाले मुसलमान लड़के के साथ 35 लाख रुपया लेकर भाग गई )
• बुटीक या बियूटी पारलर जिनमें मुस्लिम महिलाएँ काम करती हैं । वे वहाँ पर आने जाने वाली सुंदर हिंदू महिलाओं और लड़कियों को बहला फुसलाकर अपने मुसलमान साथी ल
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ढली है तो बस उम्र, चाहत तो अभी बाकी है!
क्या हुआ जो देर हो गई, लेकिन जीवन साथी से मिलने की तमन्ना अभी भी बाकी है!!
माना अब शादी की उम्र नहीं,
पर दिल की हसरतें अभी बाकी हैं।
❤
अधेड़ उम्र में भी प्यार होता है क्या?
उम्र के इस पड़ाव में भी दिल खोता है क्या?
दिल यौवन सा धड़कता है क्या?
किसी का इंतज़ार होता है क्या?
रातों में कोई याद आता है क्या?
कोई अचानक दिल धड़काता है क्या?
छुप छुप के कभी मुस्कुराहटें आती हैं
रह रह के दिल घबराता है क्या?
जो सोलहवें सावन में न कर पाए
घर समाज के डर से
कभी मिलने को न निकले
अपने घर से
वो अब करने को मन चाहता है क्या?
सारी वर्जनाएं तोड़ देने का मन
होता है क्या?
जो चाहा और नहीं मिला
उसे हासिल कर लेने का वचन होता है क्या?
हाँ ,प्यार शायद ऐसा ही है।
वो जाति , धर्म , उम्र नहीं देखता है।
वो देखता है
बस कोई अपना
फिर कोई लक्ष्मण रेखा नहीं देखता है ।।
ये चालीस की उम्र भी बड़ी अजीब होती है!
ना बीस जैसा जोश , न साठ जैसी समझ होती है।
पर मन करता है , जो जवानी में जो जो न कर सकें, सब कर जाऊं मैं! लोकलाज भी भला कोई डरने की चीज होती है?
सब कुछ होते हुए भी चालीस की उम्र में औरत केवल गरीब होती है।
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कहीं पढ़ा था कि हिंदु धर्म सबको आज़ादी देता है अपने अपने तरीके से रीति रिवाज , तीज -त्यौहार और संस्कार चुनने, उन्हें मानने मनाने और निभाने की.
विवाह भी एक ऐसा ही पवित्र संस्कार है जिसमें अग्नि को साक्षी मानकर दो लोग आजीवन साथ रहने की कसम खाते हैं.
मानो तो विवाह की रीति रस्मों से पवित्र कुछ भी नहीं और यदि न मानो तो इस विवाह नामक रस्म की भी कोई जरूरत नहीं.
इधर बीते कुछ समय से जहां मार्केटिंग स्टैट्जी के चलते तीज त्यौहारों का माड्रनाईजेशन और ड्रामाटाईजेशन तो हुआ ही है लेकिन विवाह को लेकर यह अलग ही निम्न स्तर पर पहुंच चुका है.
इन दिनों विवाह जैसा पवित्र संस्कार फोटोशूट की भेंट चढ़ चुका है जिसके चलते ईवेंट मैनेजमैंट वाले आपसी होड़ के चक्कर में हर दिन कुछ नया कर गुजरने में जी जान से जुटे हैं.
वैसे तो विवाह पर दुल्हन द्वारा क्या पहना जाए यह उसका निजी फैसला होता है लेकिन फोटोशूट में यह दिखाना कि मैं वैसे तो जींस पहनने वाली माड्रन लड़की हूं लेकिन विवाह के चक्कर में लहंगा चोली पहननी पड़ रही है यह निहायत ही हास्यास्पद है.
जरूरी नहीं कि फोटोशूट वाले जो कहें वो हर बात सही ही हो, या कोरियोग्राफर जिस गाने पर जो कोरियोग्राफी करे वो शोभनीय हो ही, थोड़ा अपना दिमाग लगाने में कोई हर्ज़ नहीं है. यहां एक वीडियो की बात करना चाहूंगी जिसमें दुल्हन 'मेरा सैंया सुपर स्टार' पर अजब गजब का भौंडा नृत्य करती हुई पंडाल मैं प्रवेश करती है.
नई दुल्हनें जब बालिवुड की फिल्मों की नकल करती हैं तो उन्हें यह अवश्य देखना चाहिए कि उन फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्रियां अपनी असल जिंदगी में किए विवाह को पूरी शिद्दत, संस्कार और रीति रिवाज से संपन्न कराती हैं बिना किसी फूहड़पन के.
हां बीते कुछ वर्षों में विवाह की पवित्रता वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की होड़ में सबसे शर्मनाक स्तर पर पहुंची है.
कभी समय मिले तो देखना चाहिए कि पश्चिमी देशों में हुए विवाहों में लड़कियां कितने सौम्य तरीके से विवाह संस्कार पूरे करती हैं.
पहले विवाह की एलबम बनती थी
लेकिन अब एलबम के लिए विवाह होता है.
दुखद है़ .
ईवेंट वाले ईश्वर नहीं हैं कि जो वो कहें वो करना ही करना है और वही अच्छा लगेगा.
'लहंगा उठा के चलूं ' गीत के बोल पहने हुए लहंगे को थोड़ा ऊंचा उठाकर चलने के लिए हैं लेकिन हमारी दुल्हनों ने शायद इसे लहंगा हैंगर में उठाकर साथ चलने के लिए समझ लिया है.
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पुरूषों की ऐसी कौनसी बातें है
जो स्त्रियां कभी समझ नहीं पाती हैं?
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१- पुरुषों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी सेक्स की इच्छा से जोड़के उनको ज़िन्दगी भर दबाने की कोशिश करती है काफ़ी महिलाएँ। कई परिवारों में बहुत बेशर्मी से लड़कियों को सिखाया जाता है की पति को सेक्स के लिए मना करती रहना। ताकि वो तुम्हारी मुट्ठी में रहे। कई जगह ये बात कामयाब भी हो जाती है। और कई समझदार पुरुष ऐसी बीवियों के दबाव में ना करके समझदारी से ऑनलाइन डेटिंग से अपनी इच्छायें पूरी कर लेते हैं।
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२- हर आदमी अपने माता पिता को उतना ही प्यार करता है जितना की महिलाएँ। पर कुछ बेशर्म स्वार्थी आदमी होते हैं जो बीवी की आड़ में अपने कर्तव्ये से मुँह मोड़ लेते हैं।
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३- कई बार पुरुष महिलाओं के कंधे पर बंदूक़ रख के अपने उल्लू सीधे करते हैं।
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४- कई बल्कि नब्बे प्रतिशत पुरुष इस बात को झेल नहीं पाते की उनकी बीवी या प्रेमिका पराए मर्दों से मोबाइल पर लम्बी लम्बी बातें करती है। वो दिल ही दिल में गालियाँ देते हैं।
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५- खूब शोपिंग करने वाली औरतों को तो उनके पति दिल दिल में इतने ताने मारते हैं की पूछिए मत। वोहि हाल उन औरतों के पतियों का भी है जो बच्चे पैदा नहीं करती, बच्चा गोद लेने नहीं देतीं, अपने पति को जूते के नीचे रखती हैं और हर वक़्त मायका मायका करती हैं। ऐसी महिलाओं के पति अक्सर विवाहेतेर संबंधो में अपना ग़म कम करते हैं।
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६- हर पति को अपनी पत्नी को दिया एक एक पैसा पता होता है। वो बस प्यार और लिहाज़ के मारे चुप रहते हैं। उनको पता होता है की उनकी घरेलू पत्नी कहाँ कहाँ बेदर्दी से उनका मेहनत का कमाया पैसा उड़ा रही है।
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७- मायके में उल जलूल ख़र्चा करने वाली औरतों के सौ प्रतिशत पति उनके ऊपर कभी भी भरोसा नहीं करते और अपने ससुराल वालों को निहायत ही लीचड़ और गिरी हुई मानसिकता का मानते हैं। चाहें वो कुछ कहें नहीं।
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८- हर पुरुष चाहता है की उसकी पत्नी हर वक़्त उसके साथ रहे, ईमानदार रहे और इसका ध्यान रखे। उसके बदले वो उसको दुनिया की हर ख़ुशी देने को तैयार रहते हैं।
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खतना
इसलिये की जाती है
ताकि
महा मद के जेहादियों का ध्यान
ला लिल्लह से हटे ही नहीं ...
लिंग मे
चौबीसों घंटे ...बेहिसाब खाज मची रहे
लिंग मे ...
अनियन्त्रित खाज का अनुसंधान ही .... आसुरी कर्मकांड हैं .
यही एकमात्र आसुरी दीक्षा हैं .
अब भागते रहो....
अपनी अम्मी , खाला , बहू , औलाद
बकरी , कुतिया , बिल्ली के पीछे ..(जो भी मिले)
◾
खतने के कारण .. मानव
खजैला कुत्ता बनकर ...दानव का रुप धारण कर लेता है
और उसके जीवन का
एक ही लक्ष्य होता है --- (काफिर की योनि)
________
note
भाषा की शुचिता को छोडो
और असली चीज को समझो ...
◾
मेरे पास अमृत कलश भी है
और मदिरा पात्र भी
भाषा की शुचिता का पालन ना कर पाने के लिए
मुझे अफसोस रहता है.
यदि मैं अधिक शिष्टाचार के चक्कर मे रहूंगा तो
असली चीज , आपकी पकड़ मे आयेगी नहीं .
माल खींचते रहो ...
भाषा की अधिक चिन्ता मत करो .
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अगर चूसना है तुझे चूस नारि के अंग
चालिस ऊपर उमर हो आ जाएगा रंग । बच्चों को सलाह मेरी
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लूट करके लुटाने से क्या फायदा
पहुंच कर लौट जाने से क्या फायदा,
ठहर जाएगा बच्चा , न गलती करो
दूध अंदर गिराने से क्या फायदा। ।। फ्री की सलाह
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देखते है कब तक चलती है जंग 😔😢 हा में ही हारा हु
पर बिका नही
पर अब में बिकाऊ हु
बिका हुआ आशिक 😢😞
आपके आप को खत्म करने जा रहा हु
बिकने और मरने जा रहा हु 😔😞
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हम हमारे प्रियतमा के प्रियतम थे
कोई आज तक खरीद नही पाया
पर आज हम बिकाऊ बन गए और किसी को खरीदना हो तो के देना
बिकाऊ दिल विश बिना
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संभोग में फोरप्ले
जानवर से भी सीखो हम इंसान पेंटी खोले डाले वीर्य गिरा और शांत हो गए चाहे स्त्री छटपटाती रहे काम वासना में जलती रहे हमे क्या फर्क परता है अपना पानी गिरा काम खत्म ।
गाय भैंस या कोई जानवर भी पहले योनि को सहलाता है,जीभ से चाटता है योनि से स्राव होता है कई बार देखते होंगे मादा जानवर पेशाब कर देती है तो नर जानवर उसे चाट कर मुंह ऊपर कर लेता है।
यानी ये जानवर प्राकृतिक हैं प्रकृति की नियम का पालन करते हैं फोरप्ले करते हैं और जब पूर्ण रूप से मादा जानवर तैयार हो जाती है फिर लिंग को योनि में डालकर वीर्यपात करते हैं ।
परंतु ध्यान रखो ये जानवर संतति के लिए संभोग करते हैं हस्तमैथुन नही, गुदा मैथुन नही,मुंह में नही,या बिना कामुक हुए मादा को ये संभोग नही करते ।
प्राकृतिक बनाए हम इंसान भी ।
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हर वक्त डूबे रहते हैं तेरे ख़यालो में,
पुकारता है कोई और आवाज तेरी सुनाई देती है।
"शुभ रात्रि"
विश💋❤️
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पता है तकलीफ़ क्या होती है..??..सांवरी...
पहले किसी को चाहना..
फिर उसे खो देना..
और खामोश हो जाना..!!
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मैं बन जाऊं रेत सनम,,
तुम लहर बन जाना…
भरना मुझे अपनी बाहों में
अपने संग ले जाना..!!
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दिसम्बर की सर्द रात और तेरी इश्क़ से आनाकानी
मुझको तो चलो ठंड लगेगी, पर तुम को पाप लगेगा रानी..!
विश 💋💋💋
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