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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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एक स्त्री साथी के रूप में ऐसा पुरुष चाहती है जो आर्थिक और बौद्धिक रूप से उससे श्रेष्ठ हो। स्त्री को प्रेम आता है ऐसे पुरुष पर जो ऊँगली पकड़ उसे सड़क पार करवाए। वो ऐसे पुरुष के स्निग्धता पसंद करती है जो उसके पंखों को उड़ान दे और उसके लिए आसमान बना दे जिसमें वो निर्विघ्न दूर क्षितिज तक उड़ान भर सके।
पर समानता चाहने वाली स्त्री भी ऐसे पुरुष का हाथ थामने से सकुचाती है जिसकी ऊँगली पकड़ उसे रास्ता पार करवाना होगा, जिसके लिए उसे एक आसमान बनाना होगा।
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*🙏🌹,ॐ सुप्रभात*🌹🙏
*💐💐स्त्री का सम्मान*💐💐
एक भृंगी ऋषि थे,वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। वो शिवजी को गुरुतुल्य मानते थे,किन्तु माँ पार्वती को वो अनदेखा करते थे। एक तरह से वो माँ पार्वती को भी आम स्त्रियों की तरह साधारण और तुच्छ ही समझते थे। महादेव भृंगी ऋषि के इस स्वभाव से चिंतित और खिन्न थे।
एक दिन शिवजी ने माता से कहा- आज ज्ञान सभा में आप भी चले। माँ शिव जी के इस प्रस्ताव को स्वीकार की और ज्ञान सभा में शिव जी के साथ विराजमान हो गई।
सभी ऋषिगण और देवताओ ने माँ और परमपिता को नमन किया और उनकी प्रदक्षिणा की और अपना अपना स्थान ग्रहण किया..
किन्तु भृंगी ऋषि माँ और शिव जी को साथ देख कर थोड़े चिंतित थे, उन्हें समझ नही आ रहा था कि वो शिव जी की प्रदक्षिणा कैसे करे। बहुत विचारने के बाद भृंगी ऋषि ने महादेव जी से कहा कि वो पृथक खड़े हो जाये।
शिव जी जानते थे भृंगी ऋषि के मन की बात। वो माँ को देखे, माता ने उनके मन की बात पढ़ ली और वो शिव जी के आधे अंग से जुड़ गई और अर्धनारीश्वर रूप में विराजमान हो गई। अब तो भृंगी ऋषि और परेशान, कुछ पल सोचने के बाद भृंगी ऋषि ने एक राह निकाली।
भवरें का रूप लेकर शिवजी के जटा की परिक्रमा की और अपने स्थान पर खड़े हो गए। माता को भृंगी ऋषि के ओछी सोच पे क्रोध आ गया। उन्होंने भृंगी ऋषि से कहा- भृंगी ऋषि तुम्हे स्त्रियों से इतना ही परहेज है तो क्यूँ न तुम्हारे में से स्त्री शक्ति को पृथक कर दिया जाये !! माँ ने उन से स्त्रीत्व को अलग कर दिया। अब भृंगी ऋषि न तो जीवितों में थे न मृत थे। उन्हें आपार पीड़ा हो रही थी..वो माँ से क्षमा याचना करने लगे..
तब शिवजी ने माँ से भृंगी ऋषि को क्षमा करने को कहा। माँ ने उन्हें क्षमा किया और बोली - *संसार में स्त्री शक्ति के बिना कुछ भी नही। बिना स्त्री के प्रकृति भी नही पुरुष भी नही। दोनों का होना अनिवार्य है और जो स्त्रियों को सम्मान नही देता उन्हें जीने का अधिकारी नही।*
*👉आज संसार में अनेकों ऐसे सोच वाले लोग हैं। उन्हें इस प्रसंग से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। वो स्त्रियों से उनका सम्मान न छीने। खुद जिए और स्त्रियों के लिए भी सुखद संसार की व्यवस्था बनाए रखने में योगदान दें।*
*🌸हम बदलेंगे,युग बदलेगा।*🌸
*🌹🌹जय श्री राम🌹🌹*
*🌸🌹सादर सुमंगल सुप्रभात🌹🌸*
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यदि कोई क्षणिक सुख,भोग या किसी तरह के अन्य लोभ में आपसे जुड़ा है तो आपके प्रति कभी ईमानदार नही हो सकता। भोग की चाह में बने रिश्ते कभी स्थाई नही होते।
प्रेम में जलन स्वभाविक है परंतु कभी भी लड़ झगड़ के आप किसी को खुद के प्रति न तो जबरदस्ती ईमानदार बना सकते हैं न ही लंबा रिश्ता स्थापित कर सकते हैं।
प्रेम में ईमानदारी,निष्ठा और लगाव जहाँ बीस प्रतिशत आपके स्वभाव पर निर्भर करती है वहीं अस्सी प्रतिशत दूसरे व्यक्ति के स्वभाव और सोच पर निर्भर करता है।
इसलिए सस्ते लोगों से बहुमूल्य प्रेम की चाह मत करो!
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पत्नी की देह परमात्मा की पहली पर्त:
_______________
तुम जब अपनी पत्नी में डूबते हो या अपने पति में डूबते हो, तब भी तुम परमात्मा का ही रस लेना चाह रहे हो।
सिर्फ तुमने ज़रा लंबा रास्ता चुना है देह, फिर देह के भीतर मन है, और मन के भीतर आत्मा है–और आत्मा के भीतर परमात्मा छिपा है। तुम पत्नी की देह में ही उलझ गए, तो ऐसा हुआ कि छीलने चले थे प्याज की गांठ को, बस पहली ही पर्त उघाड़ पाए।
पत्नी के मन तक पहुंचो–दूसरी पर्त उघड़ेगी। पत्नी की आत्मा तक पहुंचो–तीसरी पर्त उघड़ेगी। और पत्नी के भीतर भी तुम्हें परमात्मा के दर्शन होंगे, पत्नी मंदिर बन जाएगी।
और जब तक पत्नी मंदिर बन जाए और पति मंदिर न बन जाए, तब तक समझना कि प्रेम था ही नहीं, वासना ही थी।
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संभोग में सीधे घुसने की जगह एक-दूसरे को चूमना, सहलाना और छेड़छाड़ करने से प्यार प्रगाढ़ होता है। फिर संभोग केवल एक वासना नहीं होकर, प्यार बन जाता है। कामसूत्र में प्यार में गहरे उतरने से पहले चुंबन की सलाह दी गई हैा ऊपरी होंठ व अधर (निचले होंठ) के चुंबन में एक नशा सा छाता जाता है और स्त्री पुरुष प्यार में सरोबार होते चले जाते हैं।
जब नशा धीरे-धीरे बढ़ने लगात है तो चुंबन का दायरा, होंठ, मस्तक, आंख और गाल से नीचे उतरते हुए स्तन, उसके चुचूक, बगलों, नाभी, जांघों के जोड़ और फिर उसके नीचे सरकता चला जाता है। बदन के हर हिस्से में किया गया चुंबन, प्रेमियों के अंदर प्यार की ज्वार उत्पन्न कर देता है जो आखिर में संभोग में स्खलन के बाद ही उतरता है।
वात्स्यायन ने लिखा है कि होंठों व मुख के अलावा किए जाने वाले चुंबन का चार भेद है
*सम- यह चुंबन दोनों जांघों के जोड़, नितंब, बगलों और स्त्री द्वारा पुरुष के सीने पर किया जाता है
*पीडि़त- यह चुंबन स्तनों, दोनों गालों, नाभी और नाभी के नीचे पेड़ू पर किया जाता है
*अंचित- यह स्तनों और दोनों बगलों(कांख) पर किया जाता है
*मृदु- यह ललाट एवं आंखों पर किया जाता है
चुंबन भड़काती है वासना की आग- यह स्त्री या पुरुष में से कोई सो रहा हो और उसके दूसरे साथी का मन प्यार के लिए मचल रहा हो तो वह सोते हुए साथी पर चुंबनों की बौछार करते हुए उसे जगाने की चेष्टा करता है। इससे सोए हुए साथी के अंदर भी वासना भड़क उठती है और दोनों प्यार में सराबोर हो जाते हैं।
काम में मशगुल साथी को रिझाए- जब एक साथी काम में मशगुल हो और दूसरे का मन प्यार करने के लिए तड़प रहा हो तो वह उस पर सवार होकर चुंबनों की बौझार कर सकता है। इससे दूसरा साथी समझ जाता है कि उसका साथी क्या चाह रहा है। आज के संदर्भ में लैपटॉप और फेसबुक पर व्यस्त साथी को बिस्तर पर लाने के लिए चुंबन से बेहतर कोई हथियार नहीं हो सकता। यह चुंबन हर तरह के मर्यादा को तोड़ने वाली हो तो कितना ही व्यस्त साथी हो, संभोग के लिए मचल उठेगा।
संभोग के प्रति उदासीन साथी में भी भरता है रोमांच- संभोग के प्रति यदि एक साथी काफी दिनों से उदासीनता भरा बर्ताव कर रहा हो तो उसके अंदर इच्छा जागृत करने के लिए पहले उसके शरीर की मालिश से शुरुआत करनी चाहिए। फिर मसाज के साथ-साथ एक-एक अनावृत अंग पर गर्म होठों की तपिश उसके अंदर चिंगारी भड़काना शुरू कर देता है।
ऐसे क्षण में जांघों पर किया जाने वाला चुंबन सीधे तीर की तरह सारे बदन में उतर जाता है और सिहरन पैदा कर देता है। फिर पैर, उसकी ऊंगलियों व उसके पोरों पर चुंबन और उसे मुंह में भरकर चूसने की प्रक्रिया उदासीन साथी को संभोग के लिए आतुर कर देगा।
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■ विज्ञान कहता हैं कि एक नवयुवक स्वस्थ पुरुष यदि सम्भोग करता हैं तो, उस समय जितने परिमाण में वीर्य निर्गत होता है उसमें चालीस से नब्बे करोड़ शुक्राणु होतें हैं। यदि इन्हें स्थान मिलता, तो लगभग इतने ही संख्या में बच्चे जन्म ले लेते !
वीर्य निकलते ही ये अस्सी निब्बे करोड़ शुक्राणु पागलों की तरह गर्भाशय की ओर दौड़ पड़ते है...भागते भागते लगभग तीन सौ से पाँच सौ शुक्राणु पहुँच पाता हैं उस स्थान तक। बाकी सभी भागने के कारण थक जाते है बीमार पड़ जाते है और मर जातें हैं।
और यह जो जितने डिम्बाणु तक पहुंच पाया, उनमे सें केवल मात्र एक महाशक्तिशाली पराक्रमी वीर शुक्राणु ही डिम्बाणु को फर्टिलाइज करता है यानी कि अपना आसन ग्रहण करता हैं।
और यही परम वीर शक्तिशाली शुक्राणु ही आप हो, मैं हूँ , हम सब हैं !!
कभी सोचा है इस महान घमासान के विषय में ? इस महान युद्ध के विषय में ?
आप उस समय भाग रहे थे...तब जब आपकी आँखें नहीं थी, हाथ पैर सर दिमाग कुछ भी नही था...फिर भी आप विजय हुए थे !!
आप तब दौड़े थे जब आप के पास कोई सर्टिफिकेट नही था। किसी नामी दामी कॉलेज का नाम नही था।आप का कोई पहचान ही नही था।
फिर भी आप जीत गए थे !!!
आप तब दौड़े थे
जब आप न हिन्दू थे न मुसलमान
न भक्त न भगवान
फिर भी आप जीत गए !!
बिना किसी से मदद लिए बिना किसी के सहारे खुद अपने बलबूते पर विजय को प्राप्त हुए थे !
उस समय आप भागे थे दौड़े थे जब आप का एक निर्दिष्ट गन्तव्य स्थल था...उसी की ओर लक्ष्य था...आप का संकल्प बस उस तक पहुंचना था...थके बिना एकाग्र चित्त से आप भागे दौड़े और उद्देश्य पूरा किये, गन्तव्य तक पहुंच गए !
अस्सी निब्बे करोड़ शुक्राणुओं को आप ने हरा दिए थे ! हैं न ?
और आज देखो ?
थोड़ा बहुत भी तकलीफ या परेशानी आई, और आप घबरा जाते हैं...निराश हो जातें है...हाल छोड़ बैठ जातें हैं...
क्यो आप अपना उस आत्मविश्वास को गँवा बैठते हैं ??
अभी तो सब हैं आप के पास हाथ पैर से मष्तिष्क दिमाग से लेकर परिवार भाई बहन सब हैं ! मेहनत करने के लिए हाथ पैर हैं
प्लानिंग के लिए दिमाग हैं बुद्धि हैं शिक्षा हैं...सहायता के लिए लोग हैं !
फिर भी आप निराश हो जीवन को नरक बना बैठे हैं !!
जब आप जीवन की प्रथम दिन प्रथम युद्ध नही हारे तो आज भी हार मत मानिये !
आप पहले भी जीतें थे...आज भी और कल भी जीतेंगे...
ऐसा मुझे विश्वास हैं आप पर ।।
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थाम लूँ तेरा हाथ और,
तुझे इस दुनिया से दूर ले जाऊ,
जहा तुझे देखने वाला,
मेरे सिवा कोई और ना हो.
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तराशा है उनको बड़ी फुर्सत से,
जुल्फे जो उनकी बादल की याद दिला दे,
नज़र भर देख ले जो वोह किसी को,
नेकदिल इंसान की भी नियत बिगड़ जाए.
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थाम लूँ तेरा हाथ और,
तुझे इस दुनिया से दूर ले जाऊ,
जहा तुझे देखने वाला,
मेरे सिवा कोई और ना हो.
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💕💕💕अथर्ववेद से 💕💕💕💕
💞💞हे पत्नी! मैं साम हूँ और तू ऋचा है। मैं आकाश हूँ और तू पृथ्वी है। मैं विष्णु रूप हूँ और तू मेरी लक्ष्मी है। हम इस लोक में साथ-साथ निवास करते हुए संतान को उत्पन्न करें। 💗(१४-२-७१)
💖💖 हे स्त्री। तू प्रसन्न होती हुई इस पलंग पर चढ़ तथा पति हेतु संतान उत्पन्न कर। तू अपने पति के समान बुद्धि से सम्पन्न बन तथा नित्य उषा काल में जागने वाली बन। (१४-२-३१)
🌹🌹हे पुरुष। तू सांड़ के समान गर्भाधान समर्थ हो एवं जीवित रहे। तेरे अंगों का विकास हो और तेरा शरीर विस्तीर्ण हो। जैसे तेरी जननेंद्रिय बढ़े वैसे वैसे ही तू संभोग की इच्छुक नारी के समीप जा।
(६-१०१-१)
💓💓हे वीर्य के इच्छुक। हम तेरी पुरुषेन्द्रिय को धनुष की डोरी के समान विस्तृत करते हैं। तू गर्भाधान में समर्थ बैल के समान अपनी पत्नी पर आरूढ़ हो।
(६-१०१-३)
दीलविश की और से 💋😘
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कहीं अव्वल तो कहीं ज़्यादातर महिलाएं सेक्स से ज्यादा इंटरेस्टेड नही होती। एक लिमिट टाइम पीरियड में ही उनका मन व्याकुल हो सकता है। नही तो ज्यादातर नीरस मिलेगा मूड। बहुत कोशिश लगती है तैयार करने में। तो अगर कभी ऐसा ख्याल आये की महिला पार्टनर के एक्स्ट्रा अफेयर हो सकते है तो भूल जाइये। ये संभव नही। और अगर ऐसा है तो वहाँ रिश्ता कभी था ही नही। एक औरत बहुत ही वर्स्ट केस में चिट करती है। मर्द को तो बस मौका मिलना चाहिए, पैंट की जीप खोलने को।
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अगर मेरे नाम से कभी दिल धड़क उठे तुम्हारा......
तो समझ लेना प्यार झूठा नहीं था हमारा
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काली किशमिश खाने के सेहत लाभ
इम्यूनिटी बूस्टर फूड है काली किशमिश
काली किशमिश रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती है। ऐसे में सुबह खाली पेट 10-15 काली किशमिश जरूर खाएं
काली किशमिश में अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है, जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है।
हाई ब्लड प्रेशर करे लो
ब्लड प्रेशर हाई है, तो काली किशमिश खाएं। ब्लड प्रेशर रक्त वाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर डाले गए दबाव को कहते हैं। धमनी एक नलिका होती है, जो रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाती है। काली किशमिश के साथ ही अन्य आहारों का सेवन करके भी उच्च रक्तचाप के स्तर को नियंत्रण में रखा जा सकता है। रोज सुबह काली किशमिश खाएं। रक्तचाप को बढ़ाने के लिए सोडियम अधिक जिम्मेदार होता है, इसलिए कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से दूर रहने के लिए रोजाना काली किशमिश खाएं।
कोलेस्ट्रॉल करे कम
रक्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ना यानी हृदय रोग होना। काली किशमिश का सेवन करके कोलेस्ट्रॉल पर काबू पा सकते हैं। शरीर में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) या बैड कोलेस्ट्रॉल के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने में मदद करता है। शोध के अनुसार, काली किशमिश (Benefits of Black Raisins) में कई घुलनशील फाइबर शामिल होते हैं, जो मूल रूप से एक विरोधी कोलेस्ट्रॉल कंपाउंड हैं। इसमें मौजूद कार्बनिक एंटीऑक्सिडेंट की विशेष श्रेणी पॉलिफेनॉल, विभिन्न कोलेस्ट्रॉल-अवशोषित एंजाइम्स को रोककर शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद करते हैं।
एनीमिया में जरूर खाएं
एनीमिया होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है। एनीमिया के कारण सुस्त और थकान महसूस होती है, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है। एनीमिया में पीड़ित लोगों को आयरन से भरपूर आहार लेना चाहिए। ऐसे में काली किशमिश का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद आयरन कई अन्य आयरन से समृद्ध फलों और सब्जियों की तुलना में बहुत अधिक होते हैं। यदि आप इसका सेवन करते हैं, तो आसानी से एनीमिया रोग पर काबू पा सकते हैं।
अगर आपके बाल लगातार झड़ते हैं, तो भी ये काले किशमिश आपकी मदद कर सकते हैं। आपको बस हर दिन इनका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। इससे बालों का झड़ना कम होगा, साथ ही बालों की लंबाई भी बढ़ने लगेगी। इसके अलावा आप शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या से जूझ रहे हैं, तो भी आपको काली किशमिश खाना चाहिए। ये आयरन से भरपूर होती हैं, और ये आपके हीमोग्लोबिन का स्तर भी सुधारती है। साथ ही खून की कमी को भी दूर करती है।
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाए काली किशमिश
ऑस्टियोपोरोसिस में नितंब, कलाई और रीढ़ की हड्डियां प्रभावित होती हैं। इसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ये आसानी से टूटती हैं। इस बीमारी में हड्डियां इस हद तक कमजोर हो जाती हैं कि कुर्सी उठाने और झुकने में भी वे टूट जाती हैं। पोटेशियम के अलावा, काली किशमिश में उचित मात्रा में कैल्शियम होता है। कैल्शियम बोन सिस्टम के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में इसकी कमी से हड्डियों की बीमारी जैसे ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। काली किशमिश (Benefits of Black Raisins) शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ा सकते हैं, ऐसे में इसे खाना लाभदायक है।
पुरुषों का वीर्य गाढ़ा और मर्दाना ताकत बढ़ाने में बहुत लाभदायक होता है काली किशमिश का सेवन
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*वीर्य की कमी और पतलापन दूर करने का घरेलु उपाय*
शारीरिक और मानसिक असंतुलित की स्थिति में शरीर के अन्दर वीर्य [Semen] नहीं बन पाता या ठहर नहीं पाता और इस कारण शरीर तेजहीन, उदास और निष्काम हो जाता है। ऐसी स्थिति में वीर्य बन भी जाता है तो पतला या बिना शुक्र के ही बन पाता है जिसे हम वीर्य की कमी कहते हैं।
*क्या हैं कारण ?*
वीर्य की कमी के कई कारण होते है। जैसे हस्तमैथुन, अधिक सहवास, खान-पान में सही देखभाल न करना, स्वप्नदोष, कमजोरी, मानसिक कमजोरी, चिन्ता करना आदि।
*क्या हैं लक्षण ?*
हमेशा उदास सा रहना, किसी काम में मन का न लगना, सुस्ती, कमजोरी, अपंगता और मानसिक कमजोरी आदि के लक्षण वीर्य की कमी में देखे गये हैं।
कुछ ही मिनटों में योनि कैसे टाइट करें !
*क्या न करें ?*
गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।
*आइए जानते हैं वीर्य को गाड़ा करने के ये 6 घरेलु उपाय*👇
1. चोब चीनी : चोब चीनी को दूध में उबालकर 3 से 6 ग्राम को मस्तगी, इलायची और दालचीनी के साथ सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है।
2. छोटी माई : छोटी माई का चूर्ण 2 से 4 ग्राम सुबह-शाम खाने से धातु (वीर्य) की कमी व कमजोरी दूर होती है।
3. गुरुच : गुरुच का चूर्ण आधे से एक ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ खाने से लाभ होता है।
4. गुंजा : गुंजा की जड़ 2 ग्राम को दूध में पकाकर रोज रात को खाना खाने से पहले खाने से वीर्य के सभी रोग खत्म हो जाते हैं।
5. गुलशकरी : गुलशकरी की जड़ 6 ग्राम से 10 ग्राम को मिश्री मिले दूध के साथ दिन में सुबह और शाम खाने से वीर्य की कमी दूर होती है।
6. शतावरी : शतावरी का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम चीनी और दूध के साथ पेय बना कर सुबह-शाम सेवन करने से धातु (वीर्य) का पतलापन मिट जाता है।
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*औरत के साथ और बाद का जीवन*
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब वो चली जाती है,
और वापस लौट कर नहीं आती
छत पर लगे जाले व आँगन की धूल
हटाने में संकोच आता है।
" तुम्हारी ये सफाई " कहने का मौका
नहीं मिल पाता !!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब कालरों की मैल छुटाने में
पसीना छूट जाता है
चूडियां साथ में नहीं खनकती
उसका "मेहनतकश" होना याद आता है !!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब घर में देर से आने पर
रोटियां ठंडी हो जाती है सब्जियों में
तुम्हारी पसंद का जायका नहीं रहता
और तुमसे यह कहते नही बनता
"मुझे ये पसंद नहीं "!!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब बच्चा रात को ज़ोर से रोता है
आप अनमने से उठ जाते हो
और यह नहीं कह पाते
"कितनी लापरवाह हो तुम"!!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब आप रात में अकेले सोते हैं
करवट बदलते रहते हैं बगल में
पर हाथ धरने पर कुछ नहीं मिलता!!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब त्यौहारों के मौसम में
नयी चीज़ों के लिए कोई नहीं लड़ता
और तुमसे ये कहते नही बनता
"और पैसे नहीं हैं "!!
एक औरत की कमी तब अखरती है
जब आप गम के बोझ तले दबे होते हैं ,
निपट अकेले रोते हैं
और आपके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं होता
आप किसी से कुछ नहीं कह पाते
हाँ,
औरत की कमी तब अखरती जरूर है!
महिलाएं कभी अपने लिए नहीं जीती।।
🙏🙏🙏🙏
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आज की अहमदाबाद की खबर है
एक कोई मूर्ख इंसान था उसकी गर्लफ्रेंड उससे नाराज हो गई थी
तब वह अपनी रूठी हुई गर्लफ्रेंड को मनाने के लिए तांत्रिक के शरण में गया और उस तांत्रिक ने उससे 43.65 लाख रुपए गर्लफ्रेंड को मनाने का वायदा करके ठग लिए
इतने पैसे देने के बाद भी जब उसकी रूठी हुई गर्लफ्रेंड नहीं मानी तब वह पुलिस के शरण में गया
वैसे मैं यदि पुलिस इंस्पेक्टर रहता तो कहता बेटा पीछे घूम और उसके पिछवाड़े कम से कम 10 लठ्ठ बजाता
अबे चूतिये मेरे पास आ गया होता मैं तेरे को ऐसा प्रवचन देता कि तुझे गर्लफ्रेंड पत्नी घर मकान सब कुछ क्षणभंगुर नजर आता.. तू झोला उठाकर हिमालय पर चला जाता जैसे ओशो ने मृत्यु के बारे में ढेर सारे प्रवचन दिए हैं और उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब है मैं मृत्यु सिखाता हूं यूट्यूब पर उनकी मृत्यु के बारे में कई प्रवचन है जिसे सुनने के बाद आदमी को मृत्यु से कोई भय नहीं लगता
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दो स्त्रियों का आपसी प्रेम पुरुषों कि अपेक्षा अधिक गहरा और भावात्मक होता है उनमें एक दूसरे के प्रति आकर्षण और कामवासना भी बहुत होती है।
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