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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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तन्त्र की एक गुप्त विधि....
शरीर में सेक्स की उत्तेजना
अत्याधिक उठने लग जाये या
सम्भोग करने की इच्छा चरम पर हो तो
उस समय आँखें बन्द कर आसन लगा कर बैठ जाएँ ।
और गुदा द्वार को ऊपर खींच कर रोक कर रखें
और आँखे बन्द कर के ध्यान को
अपनी शीर की ओर सहस्त्रार पर केन्द्रित करें ।
ध्यान केन्द्रित करने के पाँच मिनिट के बाद ही
उठी कामोत्तेजना शान्त हो जाती है ।
और वीर्य ऊर्जा नीचे की ओर
लिंग योनि के मार्ग से निकलने के बजाय
ऊपर के चक्रों की ओर जाने लगती है ।
अर्थात ऊर्जा का अधोगमन होने के बजाय
उर्धगमन होने लग जाता है ।
यह तन्त्र की बहुत महत्वपूर्ण और गुप्त विधी है ।
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तन्त्र सेक्स.....
स्खलन करने की कला में
महारत हासिल करने के लिए
जोड़ों को सशक्त बनाने और
शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और
भावनात्मक स्तर पर
एक-दूसरे के साथ
गहरायी से जुड़ने के लिए
तन्त्र सेक्स एक गहन विज्ञान है ।
स्त्री और पुरुष दो ऊर्जा
सकारात्मक और नकारात्मक ध्रुव हैं ।
उन दो ध्रुवों का सही मिलन
एक गहनता पूरा करता है
और बिजली पैदा करता है ।
इस बिजली की समझ तभी सम्भव है,
जब सहवास की अवधि
अधिक समय तक रहता है ।
ऊर्जा के इस विद्युत प्रवाह का अनुभव करने वाला
एक जोड़ा जीवन का भरपूर आनन्द लेता है ।
वह भोग को गहरायी से भोगता है ।
कामवासना केवल आनन्द का साधन ही नहीं है ।
यह आध्यात्मिक उन्नति का
एक गुण साधन अर्थात मार्ग भी है ।
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यदि किसी टूटी हुई स्त्री ने आ कर
तुम्हारे कन्धे पर सर रख दिया हो
कभी चुपचाप
तो बेहिचक बताना सबको
कि सँसार के सबसे भरोसेमन्द
पुरुष हो तुम
यदि कोई रोता हुआ बच्चा
मुस्कुरा दिया हो अचानक
तुम्हें देख कर कभी
तो कह देना
कि सँसार का सब से निश्छल चेहरा
तुम्हारा है
यदि कोई परास्त पुरुष
तुम्हारे पुकारने पर आ कर टूट गया हो
और बह गया हो
फूट-फूट कर
तो कहना
कि सँसार के सबसे गहरे मित्र होने के
पात्र हो तुम
यदि तुम्हें नहीं सूझे कभी भी,
कोई भी सवाल उसके लिए
जिसके प्रेम में हो तुम
तो समझ लेना
कि सँसार के सबसे सच्चे
प्रेमी हो तुम
यदि अपनी भूख से अधिक एक दाना बेचैन कर दे तुम्हें
और तुम निकल पड़ो उसके असली हकदार को ढूँढ़ने
और ढूँढ़ें बिना लौट न पाओ थाली पर
तो मनुष्यों में सर्वाधिक मनुष्य कह देना
अपने आप को
बेहिचक____
🌺🌺
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चुंबन से होती है सेक्स की शुरुआत
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
सेक्स के जरूरी है कि पार्टनर को सेक्स के लिये तैयार किया जाय. यह प्रक्रिया फोरप्ले कहलाती है. इसका सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है चुंबन. हाल में हुए अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि पूरे आवेग से लिया गया चुंबन एक खास किस्म के कांप्लेक्स केमिकल को दिमाग की तरफ भेजता है, जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा उत्तेजित, खुश अथवा आरामदायक स्थिति में महसूस करता है।
प्यार का इजहार करने के लिए चुंबन से बढ़कर शायद ही कोई दूसरा माध्यम हो। एक प्यार भरा चुंबन प्रेमी या प्रेमिका को दिन भर की तमाम उलझनों से मुक्त करके एक प्यार भरे संसार में ले जा सकता है। चुंबन के महत्व को देखते हुए यहां चुंबन के विभिन्न प्रकारों को बताया जा रहा है ।
1.बिगिनर्स किस- इस किस का अर्थ दो होठों के साधारण मिलन से है। यह किस होठों को ब्रुश के समान स्पर्श करके या हल्का दबाकर किया जाता है। इस किस के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं होती। अपने लवर को चारों तरफ से चूमकर इस किस को अंजाम दिया जाता है।
2.बटरफ्लाई किस- अपनी आंखों की बरौनी से प्रेमी के होठों, आंखों के बाल, गाल और गर्दन के स्पर्श को बटरफ्लाई किस कहते हैं।
3.लार किस- इस प्रकार का किस को पूरी गर्मजोशी के साथ किया जाता है। जब आप अपने प्रेमी को पूरी आत्मीयता से किस करें तो अपने होठों को धीर से हटा लें और लार की कुछ बूंदे प्रेम से उनके मुख में टपका दें।
4.फ्रेंच किस- फ्रेंच किस में अपनी जीभ अपने प्रेमी के मुख की कोमल त्वचा में डालकर उसे चारों ओर घुमाया जाता है। मुख से मुख मिलाकर फ्रेंच किस किया जाता है।
5.लवर्स पास- जब आप अपने प्रेमी को कुछ उत्तेजना भरा संदेश देना चाहें तो यह किस अपनाया जाता है। इसमें चाकलेट, फल या बर्फ का टुकड़ा अपने होठों से दबाकर अपने प्रेमी के होठों का स्पर्श किया जाता है। स्पर्श के बाद अपनी जीभ के सहारे दबाया गया टुकड़ा अपने प्रेमी के मुख में डाल दिया जाता है।
6.लस्ट लैप- यह किस पूरे नियंत्रण के साथ किया जाता है। इस किस में होठों से दबाकर चाटा जाता है। अपने होठों से अपने प्रेमी के होठों और त्वचा को सख्ती से दबाकर इसका आनंद लिया जाता है।
7.मेडिवल नेकलेट- कहा जाता है कि इस प्रकार का किस मध्यकाल के नाइट्स अपनी प्रेमिका या पत्नी को करते थे, जब वह लो कट नेकलाइन्स पहनती थीं। इस किस में उनकी गर्दन को चारों तरफ से धीरे-धीरे चूमा जाता था। पुरूष और महिलाएं दोनों इस प्रकार के चुंबन का लुत्फ उठाते थे।
8.मेडिटिरनियन फ्लिक- कहा जाता है कि इस चुंबन की उत्पत्ति लैटिन के प्रेमियों ने की थी। इस चुंबन का आनंद लेने के लिए लैटिन प्रेमी मिठाई के दानों को अपने प्रेमी के शरीर पर डालते थे। उसके बाद अपनी जीभ से उनके शरीर पर धीरे से हमला करते थे। अपने प्रेमी के शरीर की मनपसंद जगह में इन मिठाई के दानों को डाला जाता था। स्तन और पेट के आसपास के चुंबन से इसका विशेष रूप से आनंद लिया जाता है।
9.नॉटी डॉग- यह किस शरीर के सर्वाधिक संवेदनशील हिस्सों खासकर गर्दन, छाती, पेट और निचली जांघों में किया जाता है। अधखुला मुंह खोलकर इन हिस्सों का स्पर्श किया जाता है। छाती के निचले हिस्सों विशेषकर स्तन के निप्पलों को चूमने में विशेषरूप से आनंद आता है।
10.स्लाइडिंग किस- इस चुंबन में जीभ आगे पीछे गति करती है। जिस प्रकार क्रीम या सॉस को चाटा जाता है ठीक उसी प्रकार स्लाइडिंग किस किया जाता है। फोरप्ले में यह किस काफी उपयोगी होती है।
#कामसूत्र #प्राचीन #भारतीय #काम #कला
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महिला का चरम आनंद
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
यह कोई आसन या स्थिति नहीं है जिसे अपनाकर गर्भधारण को आसान बनाया जाए, बल्कि यह इंटरकोर्स के दौरान होने वाली क्रिया है। इसमें महिला को चरमोत्कर्ष तक पहुंचना होता है। शोध कहते हैं कि यदि महिला इंटरकोर्स के दौरान चरमोत्कर्ष पर पहुंचती है और उसी समय पुरुष के स्पर्म बाहर आते हैं तो महिला का यह चरमोत्कर्ष पुरुष के स्पर्म को गर्भ की ओर धकेलने का काम करता है। ऐसा होने पर गर्भधारण सबसे आसान होता है।
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महिलाओं के लिए सेक्स के लाभ
महिलाएं सेक्स के दौरान न सिर्फ आंनद का अनुभव करती है बल्कि सेक्स से उन्हे कई प्रकार के शारीरिक और भावनात्मक लाभ भी होते है, सेक्स से महिलाओं के शारीरिक सरंचना में भी परिर्वतन आता है। सेक्स के दौरान अपने पार्टनर द्वारा मिले शारीरिक और भावनात्मक सर्पोट से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है। यूं तो महिलाओं में हमेशा सेक्स की चाहत होती है, लेकिन मासिक पूरा हो जाने के पांच से सात दिन तक महिलाएं सेक्स के मूड में ज्यादा होती हैं क्योंकि मासिक चक्र पूरा होने के बाद सेक्स वाले हार्मोस सक्रिय हो जाते हैं। महावारी के पांच से सात दिन में सेक्स करना ज्यादा ही आनंद की अनुभूति कराता है साथ ही इसका लाभ कम से कम 12 दिनों तक रहता है। महावारी के बाद महिलाओं में सेक्स की तीव्र इच्छा जागृत होना स्वाभाविक है, क्योंकि इन दिनों में गर्भधारण की संभावना कम हो जाती। वैसे तो यह शारीरिक जरूरत का एक आम हिस्सा है। सेक्स वैवाहिक संबंधों को सुखी बनाता है और भविष्य में दोनों के बीच सेक्स को लेकर दूरियां कभी नहीं आती। (सेक्स से संबंधी रोचक तथ्य)
महिलाओं में सेक्स के दौरान से शरीर में कैलोरी का जलन होता है जिससे महिलाओं में वजन कम होता है, यह एक शारीरिक व्यायाम है जो आपको स्वस्थ रखता है।
महिलाओं में सेक्स उन्मुक्ति को बढ़ाता है, और एक अलग ही आनंद का अनुभव कराता है।
महिलाओं में सेक्स कई बीमारियों को कम करता है जैसे सर्दी और अन्य बीमारियों के संक्रमण से शरीर की प्रतिरक्षा करता है, और आपको स्वस्थ बनाता हैं।
महिलाओं में सेक्स तनाव को कम करता है और उन्हें खुश रखने में मदद करता है।
महिलाओं में सेक्स रक्तचाप को भी कम करता है सेक्स से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
सेक्स दिल को मजबूत बनाता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों की संभावना कम होती एक सप्ताह में सेक्स दो बार या दो से अधिक बार सेक्स करने से महिलाओं में घातक दिल के दौरे की संभावना उन महिलाओं के तुलना में कम हो जाती है, जो कम सेक्स करती है
सेक्स महिलाओं में आत्मसम्मान को बढ़ाता है।
सेक्स अंतरंगता और रिश्तों को बेहतर बनाता है। वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाता है।
सेक्स करने से कई बीमारियों के दर्द से राहत मिल सकती हैं, जैसे गठिया, सिर दर्द इत्यादि में सेक्स के बाद कुछ राहत पा सकते हैं।
सेक्स महिलाओं कैंसर, सिस्ट जैसी बीमारियों के भी खतरे को भी कम करता है।
महिलाओं में सेक्स पैल्विक मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। संभोग के दौरान उनकी पैल्विक मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिससे महिलाओं में असंयम का जोखिम कम हो जाता है।
बेहतर नींद के लिए सेक्स जरूरी है। संभोग के बाद, महिलाओं को बेहतर नींद आती है और स्वास्थ्य लाभ होता है।
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कैसे बढ़ाए यौन-शक्ति
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
अकसर लोग यौन-शक्ति को बढ़ाने कि लिए तरह-तरह के उपचार, उपाए और नुस्खे खोजते रहते है। कई लोग तो यौन-शक्ति की कमी को लेकर इतने परेशान हो जाते है कि वो महंगे से महंगा उपाए भी करने से परहेज नहीं करते। लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है, अगर आप कुछ घरेलु नुस्खों को अपनाए तो आपकी सेक्स लाइफ की परेशानियां भी हो सकती है छूमंतर।
लहुसन:- कच्चे लहसुन की 2-3 कलियो का प्रतिदिन सेवन करना यौन-शाक्ति बढ़ाने का बेहतरीन घरेलु उपचार है।
प्याज:- लहसुन के बाद प्याज एक और कारगर उपाय है। सफेद कच्चे प्याज का प्रयोग अपने नित्य आहार मे करें।
काले चने:- काले-चने से बने खाद्य-पदार्थ जैसे डोसा आदि का हफ्ते मे 2-3 बार प्रयोग काफी लाभकारी होता है।
गाजर:- 150 ग्राम बारीक कटी गाजर को एक उबले हुए अंडे के आधे हिस्से मे एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में एक बार सेवन करे। इसका प्रयोग लगातार 1-2 महीने तक करें।
भिंडी:- प्राचीन भारतीय साहित्य के अनुसार 5-10 ग्राम भिंडी की ज़ड के पाउडर को एक गिलास दूध तथा दो चम्मच मिश्री मे मिलाकर नित्य सेवन करने से आपकी यौन-शक्ति कभी कम नही प़डेगी।
सफे द मूसली:- यूनानी चिकित्सा के अनुसार सफेद मूसली का प्रयोग भी बेहद लाभदायक होता है। 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से यौन-शक्ति बढ़ती है।
सहजन:- 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। यौन-टौनिक के रूप मे इसका सेवन करे।
अदरक:- आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करे।
खजूद:- बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करे।
किशमिश:- 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन करे। ध्यान रखिए की प्रत्येक बार ताजा मिश्रण तैयार करे। धीरे धीरे 30 ग्राम किशमिश की मात्रा को 50 ग्राम तक करें।
ताजे फलो का सेवन:- यौन-शक्ति कमजोरी से पीडित रोगियो को शुरू में 5-5 घंटे के अंतराल से विशेष रूप से ताजा फलो का आधार लेना चाहिए उसके बाद वह पुन: अपनी नियमित खुराक धीरे-धीरे प्रारंभ कर सकते है। रोगी को धूम्रपान , शराब चाय तथा कॉफी के सेवन से बचना चाहिए, और विशेष रूप से सफेद चीनी तथा मैदे या उनसे बने उत्पादो का परहेज करना चाहिए।
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योनि को टाइट करने का घरेलू उपाय और तरीका
#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला
योनि औरतो के शरीर का प्राइवेट पार्ट होता है। लगभग हर लड़की चाहती है कि उसके योनि की मांसपेशियों में खिंचाव रहे। लेकिन कुछ समस्या के कारण उनकी योनि ढीली हो जाती है। योनि ढीली होने का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि वह सेक्स का भरपूर लाभ नही उठा पाती है। अगर आपका भी किसी वजह से योनि ढीला होगा है तो यह नुस्खा बस आपके लिए है। इस नुस्खे का प्रयोग करके आप अपनी योनि को दोबारा टाइट कर सकते है -
योनि को टाइट करने का घरेलू उपाय और तरीका
1. ताजा एलोवेरा के डंठल से जैल निकालकर प्राइवेट पार्ट के अंदर और बाहर लगाकर मालिस करने से योनि टाइट हो जाएगी।
2. जंगली रतालू की जड़ो के अर्क को योनि की दीवारों पर लगाने से योनि पहले जैसी टाइट हो जाती है।
3. आंवले के पानी(आंवले को पानी मे भिगो दें) से रात को सोने से पहले योनि पर मालिस करने से योनि बिल्कुल टाइट हो जाती है।
4. भांग को पीसकर एक साफ कपड़े में बांधकर पोटली बना ले। तैयार पोटली को रात को सोते समय योनि पर रखे। कुछ दिनों में ऐसा करने से योनि पहले जैसी टाइट हो जाएंगी।
5. योनि टाइट करने के लिए ब्लैक कोहोश के पौधे के पानी से अर्क बनाकर प्राइवेट पार्ट पर लगाने से योनि में कसाव वापस आ जाता है।
6. योनि का ढीलापन दूर करने के लिए हेज़ल की पत्तियों और छाल के रस से अपने प्राइवेट पार्ट् को साफ करे।
7. माजूफल के सेवन से योनि कुछ ही दिनों से पहले जैसी टाइट हो जाएगी। यह उपचार योनि को टाइट करने के लिए रामबाण माना जाता है।
8. रोज सुबह शाम दूध से साथ 4 से 5 सुपारी का सेवन करने से योनि टाइट हो जाती है।
9. कड़वी तुम्बी और लोध्र के फल को एक साथ पीसकर योनि पर लेप करने से योनि पहले जैसी टाइट हो जाती है।
10. पहले जैसी योनि टाईट करने के लिए, भांग के पत्तों को पीसकर छान लें। और फिर एक पोटली बनाकर 3-4 घंटे तक योनि में रख लें। ऐसा करने से योनि पहले जैसी टाइट हो जाती है।
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अंग में ताकत ही नहीं
१। मुलैठी का चूर्ण २० ग्राम + अश्वगंधा का चूर्ण २० ग्राम + विधारा चूर्ण १० ग्राम ; इन सबको कस कर घोंट लीजिये और फिर इस मिश्रित चूर्ण में से तीन ग्राम मात्रा लेकर सिद्ध मकरध्वज एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम) मिला कर मिश्री मिले दूध के साथ दिन में दो बार भोजन के बाद लीजिये।
२. मन्मथ रस एक गोली + पानी में भिगो कर छिलका निकाला इमली के बीज जिसे चियां या चिंचोका भी कहते हैं १ ग्राम पीसा हुआ + दो ग्राम गुड़ मिला कर सुबह शाम दूध से लीजिये।औषधि सेवन काल में सम्भोग से परहेज करिये फिर चालीस दिन बाद जब आपकी समस्या हल हो जाए तो आप सामान्य जीवन जियें। कब्जियत न होने दें आवश्यकता होने पर त्रिफ़ला चूर्ण ले लीजियेगा
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मेरी पुस्तक "मैं वही बदलाव हूं" से एक कविता यहां साझा कर रही हूं..
चालीस के पार..
हो सकता है प्यार
चालीस के पार
बढ़ सकती है धड़कन एक बार
चालीस के पार..
उम्र है सिर्फ एक अंक
दिल से ना इसका संपर्क
आत्मीयता का बन सकता है संबंध
चालीस के पार..
भावनाओं का घुल सकता है रंग
भा सकता है किसी का संग
बिन नाम का रिश्ता अतरंग
चालीस के पार..
मन उड़ सकता है स्वच्छंद
खुश हो बिन कोई उलझन
तोड़ कर बेड़ियों की जकड़न
चालीस के पार..
आत्मा का यह मिलन
हर बंधन से परे एक सम्मिलन
प्रेम की पराकाष्ठा जो हो पावन
चालीस के पार..
#रिया अग्रवाल ✍️
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कामसूत्र के मुताबिक सेक्स ऐसे कमरे में करना चाहिए जिसमें चारों ओर हल्की सुगंध व रोशनी हो, यह माहौल आपके निजी पल को और खास बना देता है। दम्पति को सेक्स क्रिया से पूर्व अपनी सभी चिंताओं को भूल जाना चाहिए। इस समय महिला व पुरुष को अपने दिमाग व भावनाओं को केवल प्रेम पर एकाग्र करना चाहिए। प्रेम और भावनाओं के साथ किया गया सेक्स दोनों ही साथियों को पूर्ण संतुष्टि प्रदान करता है।
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अगर व्यक्ति संभोग में उतावला न हो, केवल गहरे विश्राम में ही शिथिल हो तो वह एक हजार वर्ष जी सकता है। अगर स्त्री और पुरुष एक दूसरे के साथ गहरे विश्राम में हो एक दूसरे में डूबे हों कोई जल्दी न हो, कोई तनाव न हो, तो बहुत कुछ घट सकता है रासायनिक चीजें घट सकती हैं। क्योंकि उस समय दोनों के जीवन-रसों का मिलन होता है दोनों की शरीर-विद्युत, दोनों की जीवन-ऊर्जा का मिलन होता है। और केवल इस मिलन से–क्योंकि ये दोनों एक दूसरे से विपरीत हैं–एक पॉजिटिव है एक नेगेटिव है। ये दो विपरीत धुरव हैं–सिर्फ गहराई में मिलन से वे एक दूसरे को और जीवतंता प्रदान करते हैं।
वे बिना वृद्धावस्था को प्राप्त हुए लंबे समय तक जी सकते हैं। लेकिन यह तभी जाना जा सकता है जब तुम संघर्ष नहीं करते। यह बात विरोधाभासी प्रतीत होती है। जो कामवासना से लड़ रहे हैं उनका वीर्य स्खलन जल्दी हो जाएगा, क्योंकि तनाव ग्रस्त चित्त तनाव से मुक्त होने की जल्दी में होता है।
नई खोजों ने कई आश्चर्य चकित करने वाले तथ्यों को उद्धाटित किया है। मास्टर्स और जान्सन्स ने पहली बार इस पर वैज्ञानिक ढंग से काम किया है कि गहन मैथुन में क्या-क्या घटित होता है। उन्हें यह पता चला कि पचहत्तर प्रतिशत पुरुषों का समय से पहले ही वीर्य-स्खलन हो जाता है। पचहत्तर प्रतिशत पुरुषों का प्रगाढ़ मिलन से पहले ही स्खलन हो जाता है और काम-कृत्य समाप्त हो जाता है। और नब्बे प्रतिशत स्त्रियां काम के आनंद-शिखर ऑरगॉज्म तक पहुंचती ही नहीं, वे कभी शिखर तक गहन तृसिदायक शिखर तक नहीं पहुंचतीं नब्बे प्रतिशत स्त्रियां।
इसी कारण स्त्रियां इतनी चिड़चिड़ी और क्रोधी होती हैं और वे ऐसी ही रहेंगी। कोई ध्यान आसानी से उनकी सहायता नहीं कर सकता, कोइ दर्शन, कोई धर्म, कोई नैतिकता उसे पुरुष–जिसके साथ वह रह रही है–के साथ चैन से जीने में सहायक नहीं हो सकता। और तब उनकी खीझ उनका तनाव…क्योंकि आधुनिक विज्ञान तथा प्राचीन
तंत्र दोनों ही कहते हैं कि जब तक स्त्री को गहन काम-तृप्ति नहीं मिलेगी, वह परिवार के लिए एक समस्या ही बनी रहेगी। वह हमेशा झगड़ने के लिए तैयार होगी।
इसलिए अगर तुम्हारी पत्नी हमेशा झगड़े के भाव में रहती है तो सारी बातों पर फिर से विचार करो। केवल पत्नी ही नहीं, तुम भी इसका कारण हो सकते हो। और क्योंकि स्त्रियां काम संवेग, ऑरगॉज्म, तक नहीं पहुंचती, वे काम-विरोधी हो जाती हैं। वे संभोग के लिए आसानी से तैयार नहीं होतीं। उनकी खुशामद करनी पड़ती है; वे काम- भोग के लिए तैयार ही नहीं होतीं। वे इसके लिए तैयार भी क्यों हो उन्हें कभी इससे कोई सुख भी तो प्राप्त नहीं होता। उलटे, उन्हें तो ऐसा लगता है कि पुरुष उनका उपयोग करता है उन्हें इस्तेमाल किया गया है। उन्हें ऐसा लगता है कि वस्तु की भांति उपयोग कर उन्हें फेंक दिया गया है।
पुरुष संतुष्ट है क्योंकि उसने वीर्य बाहर फेंक दिया है। और तब वह करवट लेता है और सो जाता है और पत्नी रोती है। उसका उपयोग किया गया है और यह प्रतीति उसे किसी भी रूप में तृप्ति नहीं देती। इससे उसका पति या प्रेमी तो छुटकारा पाकर हल्का हो गया लेकिन उसके लिए यह कोई संतोषप्रद अनुभव न था।
नब्बे प्रतिशत स्त्रियों को तो यह भी नहीं पता कि ऑरगॉज्म क्या होता है? क्योंकि वे शारीरिक संवेग के ऐसी आनंददायी शिखर पर कभी पहुंचती ही नहीं जहां उनके शरीर का एक-एक तंतु सिहर उठे और एक-एक कोशिका सजीव हो जाए। वे वहां तक कभी पहुंच नहीं पातीं। और इसका कारण है समाज की काम-विरोधी चित्तवृत्ति। संघर्ष करनेवाला मन वहां उपस्थित है इसलिए स्त्री इतनी दमित और मंद हो गई है।
और पुरुष इस कृत्य को ऐसे किए चला जाता है जैसे वह कोई पाप कर रहा हो। वह स्वयं को अपराधी अनुभव करता है वह जानता है ”इसे करना नहीं चाहिए। ” और जब वह अपनी पत्नी या प्रेमिका से संभोग करता है तो वह उस समय किसी महात्मा के बारे में ही सोच रहा होता है। ”कैसे किसी महात्मा क पास जाऊं और किस तरह
काम-वासना से, इस अपराध से, इस पाप से पार हो जाऊं। ”
तंत्र अध्यात्म और काम
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सपना है आँखों में
पर नींद कहीं और है..........
दिल तो है जिस्म में
मगर धड़कन कहीं और है.....
कैसे बयाँ करें अपना हाल ए दिल
जी तो रहे हैं हम यहाँ
मगर ज़िंदगी कहीं और है........
मस्ती शबाब भरी हो के तो
खयालों की निशानी हो गई...
हलक से घूँट जो उतरे तो
यूं मदहोश हो दीवानी हो गई...
सुरूर मोहब्बत का जब
ले आया हमें ही उनके सामने...
तो मस्तानी आँखों में
उनकी दिल की कहानी खो गई..
सुनो ना यार
तेरे वक़्त पर मेरा
कोई हक नहीं पर
मेरा वक़्त तेरे सिवा
किसी और का नहीं.....
सुनो तो सही....
एक ही बार बहकती है नज़र....
इश्क़ सौ बार नहीं होता
ये दिल का सौदा है ज़नाब.....
जो बार बार नहीं होता
मेरी ख्वाहिशें हज़ारों हैं
पर ज़रुरत सिर्फ़ तुम हो.....
सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा
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खामोश रहकर भी आपका तील कमाल करता है ।
शांत दिल में मेरा बबाल करता है।।
देखा आज तुझे वर्षों बाद
अंग अंग में आ गया निखार है
पता नहीं तेरे यौवन ने क्या रंग लाई
मेरे तो चेहरे को हुस्न ने बेरंग कर दिया।
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रवींद्रनाथ के एक उपन्यास में एक युवती अपने प्रेमी से कहती है कि मैं विवाह करने को तो राजी हूं, लेकिन तुम झील के उस तरफ रहोगे और मैं झील के इस तरफ।
प्रेमी की बात समझ के बाहर है। वह कहता है: तू पागल हो गई है?
प्रेम करने के बाद लोग एक ही घर में रहते हैं।
उसने कहा कि प्रेम करने के पहले भला एक घर में रहें, प्रेम करने के बाद एक घर में रहना ठीक नहीं, खतरे से खाली नहीं। एक-दूसरे के आकाश में बाधाएं पड़नी शुरू हो जाती हैं। मैं झील के उस पार, तुम झील के इस पार। यह शर्त है तो विवाह होगा। हां, कभी तुम निमंत्रण भेज देना तो मैं आऊंगी। या मैं निमंत्रण भेजूंगी तो तुम आना। या कभी झील पर नौका-विहार करते अचानक मिलना हो जाएगा। या झील के पास खड़े वृक्षों के पास सुबह के भ्रमण के लिए निकले हुए अचानक हम मिल जाएंगे, चौंक कर, तो प्रीतिकर होगा। लेकिन गुलामी नहीं होगी। तुम्हारे बिना बुलाए मैं न आऊंगी, मेरे बिना बुलाए तुम न आना। तुम आना चाहो तो ही आना, मेरे बुलाने से मत आना। मैं आना चाहूं तो ही आऊंगी, तुम्हारे बुलाने भर से न आऊंगी। इतनी स्वतंत्रता हमारे बीच रहे, तो स्वतंत्रता के इस आकाश में ही प्रेम का फूल खिल सकता है।
एक तो साधारण प्रेम है जिसको तुम जानते हो। इस प्रेम ने तुम्हारे जीवन को नरक बना दिया है। इस प्रेम की बात नहीं कर रहा प्रेम-पंथ ऐसो कठिन! यह तो कठिन है ही नहीं। यह तो बड़ा सरल है। दुनिया में सभी इसको सम्हाल लेते हैं। इसमें कठिनाई क्या होगी? हर घर में चल रहा है, हर परिवार में चल रहा है, हर व्यक्ति में चल रहा है। यह तो बड़ा सरल है।
इससे ऊंचा एक प्रेम होता है। उसको प्रेम में गिरना नहीं कह सकते। उसको हम कहेंगे: प्रेम में होना, बीइंग इन लव। वह बड़ी और बात है। उसका स्वभाव मैत्री का है। खलील जिब्रान ने ठीक कहा है कि सच्चे प्रेमी मंदिर के दो स्तंभों की भांति होते हैं। बहुत पास भी नहीं, क्योंकि बहुत पास हों तो मंदिर गिर जाए। बहुत दूर भी नहीं, क्योंकि बहुत दूर हों तो भी मंदिर गिर जाए।...देखते हो ये स्तंभ, जिन्होंने च्वांग्त्सु-मंडप को सम्हाला हुआ है? ये बहुत पास भी नहीं हैं, बहुत दूर भी नहीं हैं। थोड़ी दूरी, थोड़े पास। तो ही छप्पर सम्हला रह सकता है। एकदम पास आ जाएं तो छप्पर गिर जाए; बहुत दूर हो जाएं तो छप्पर गिर जाए। एक संतुलन चाहिए।
असली प्रेमी न तो एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं, न बहुत दूर होते हैं। थोड़ा सा फासला रखते हैं, ताकि एक-दूसरे की स्वतंत्रता जीवित रहे। ताकि एक-दूसरे की स्वतंत्रता में व्याघात न हो, अतिक्रमण न हो। ताकि एक-दूसरे की सीमा में अकारण हस्तक्षेप न हो।
प्रेम में होने का अर्थ होता है: हम पास भी होंगे इतने कि हमें एक-दूसरे से कोई भय का कारण नहीं, और हम इतने दूर भी होंगे कि हम एक-दूसरे को रौंद भी न डालेंगे, हमारे बीच आकाश होगा। और तुम्हारा निमंत्रण होगा तो मैं आऊंगा, और मेरा निमंत्रण होगा तो तुम मेरे भीतर आओगे। मगर निमंत्रण पर। यह हक न होगा, अधिकार न होगा।
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#वासना
शरीर में उमड़ती वासना अक्सर उम्र नहीं देखती, चरमसुख भोगना चाहती है, बस वह केवल संतुष्टि चाहती है, तृप्त होना चाहती है।
बदन में उमड़ती हरेक अंग अंग की तपती आग को बुझाना चाहती है। शारीरिक सुख का परमानंद पाने के लिये समागम करना चाहती है। अपने को पूरा समर्पित करके संभोग का चरम आनंद पाना चाहती है। शारीरिक आकर्षण व आनन्द निर्लज्जता नहीं बल्कि प्राकृतिक आवश्यकता है, समय की मांग है अवहेलना अवसाद की ओर ले जाती है।
पर बिना विवाह शारीरिक संबंध बनाना व शारीरिक सुख प्राप्त करना सर्वथा निर्लज्जता की श्रेणी में आता है।
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NAME :- Rahul D. Shah
ADDRESS :- 506/3063 G.H.B. b/h sharma studio new bapunager
CONTACT :- 9979743153
E-MAIL ID :- diljeetsharma1999@gmail.com
POSITION :- Sales Executive
DEPARTMENT :- Sales
OFFICE ADDRESS :- Renault Karnavati West, Ground Floor, shaival complex opp Rajpath club bodakdev sg highwayAhmedabad.
Dear Sir,
Please Accept This Letter Of Resignation From Today. My Last Day Of Parklane Auto Pvt. Ltd. Will Be 31/01/2022
I Would Like To Take This Opportunity To Thank My Colleagues And Superior For There Support And Motivation. Last Eight Month I Spend In This Company Helped Me Grow And Learn Lot Of Qualities And Skill Which Would Help Me In My Future Endeavors.
I Have Enjoyed Working At Parklane Auto Pvt. Ltd. And Will Miss My Colleagues.
I Wish You, And PARKLANE AUTO PVT LTD Continued Growth And Success In The Future.
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रवींद्रनाथ के एक उपन्यास में एक युवती अपने प्रेमी से कहती है कि मैं विवाह करने को तो राजी हूं, लेकिन तुम झील के उस तरफ रहोगे और मैं झील के इस तरफ।
प्रेमी की बात समझ के बाहर है। वह कहता है: तू पागल हो गई है?
प्रेम करने के बाद लोग एक ही घर में रहते हैं।
उसने कहा कि प्रेम करने के पहले भला एक घर में रहें, प्रेम करने के बाद एक घर में रहना ठीक नहीं, खतरे से खाली नहीं। एक-दूसरे के आकाश में बाधाएं पड़नी शुरू हो जाती हैं। मैं झील के उस पार, तुम झील के इस पार। यह शर्त है तो विवाह होगा। हां, कभी तुम निमंत्रण भेज देना तो मैं आऊंगी। या मैं निमंत्रण भेजूंगी तो तुम आना। या कभी झील पर नौका-विहार करते अचानक मिलना हो जाएगा। या झील के पास खड़े वृक्षों के पास सुबह के भ्रमण के लिए निकले हुए अचानक हम मिल जाएंगे, चौंक कर, तो प्रीतिकर होगा। लेकिन गुलामी नहीं होगी। तुम्हारे बिना बुलाए मैं न आऊंगी, मेरे बिना बुलाए तुम न आना। तुम आना चाहो तो ही आना, मेरे बुलाने से मत आना। मैं आना चाहूं तो ही आऊंगी, तुम्हारे बुलाने भर से न आऊंगी। इतनी स्वतंत्रता हमारे बीच रहे, तो स्वतंत्रता के इस आकाश में ही प्रेम का फूल खिल सकता है।
एक तो साधारण प्रेम है जिसको तुम जानते हो। इस प्रेम ने तुम्हारे जीवन को नरक बना दिया है। इस प्रेम की बात नहीं कर रहा प्रेम-पंथ ऐसो कठिन! यह तो कठिन है ही नहीं। यह तो बड़ा सरल है। दुनिया में सभी इसको सम्हाल लेते हैं। इसमें कठिनाई क्या होगी? हर घर में चल रहा है, हर परिवार में चल रहा है, हर व्यक्ति में चल रहा है। यह तो बड़ा सरल है।
इससे ऊंचा एक प्रेम होता है। उसको प्रेम में गिरना नहीं कह सकते। उसको हम कहेंगे: प्रेम में होना, बीइंग इन लव। वह बड़ी और बात है। उसका स्वभाव मैत्री का है। खलील जिब्रान ने ठीक कहा है कि सच्चे प्रेमी मंदिर के दो स्तंभों की भांति होते हैं। बहुत पास भी नहीं, क्योंकि बहुत पास हों तो मंदिर गिर जाए। बहुत दूर भी नहीं, क्योंकि बहुत दूर हों तो भी मंदिर गिर जाए।...देखते हो ये स्तंभ, जिन्होंने च्वांग्त्सु-मंडप को सम्हाला हुआ है? ये बहुत पास भी नहीं हैं, बहुत दूर भी नहीं हैं। थोड़ी दूरी, थोड़े पास। तो ही छप्पर सम्हला रह सकता है। एकदम पास आ जाएं तो छप्पर गिर जाए; बहुत दूर हो जाएं तो छप्पर गिर जाए। एक संतुलन चाहिए।
असली प्रेमी न तो एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं, न बहुत दूर होते हैं। थोड़ा सा फासला रखते हैं, ताकि एक-दूसरे की स्वतंत्रता जीवित रहे। ताकि एक-दूसरे की स्वतंत्रता में व्याघात न हो, अतिक्रमण न हो। ताकि एक-दूसरे की सीमा में अकारण हस्तक्षेप न हो।
प्रेम में होने का अर्थ होता है: हम पास भी होंगे इतने कि हमें एक-दूसरे से कोई भय का कारण नहीं, और हम इतने दूर भी होंगे कि हम एक-दूसरे को रौंद भी न डालेंगे, हमारे बीच आकाश होगा। और तुम्हारा निमंत्रण होगा तो मैं आऊंगा, और मेरा निमंत्रण होगा तो तुम मेरे भीतर आओगे। मगर निमंत्रण पर। यह हक न होगा, अधिकार न होगा।
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