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Uppcs की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए Up की सभी परीक्षाओं के लिए Pcs RO/ARO
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फ़र्श से अर्श तक:—
मैडम सविता प्रधान IAS -दर्द,तकलीफ़ और इम्तिहानों की क़ैद से IAS तक का सफ़र तय करने वाली और मौत से हाथ छुड़ाकर लौटने वाली एक महिला की कहाँनी:-
महज 16 साल की उम्र में सविता प्रधान की शादी हो गई थी। उनकी शादीशुदा जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई। पति का सभी के सामने धमकाना, पीटना और बेइज्जती करना आम होने लगा था। ससुराल में ठीक से खाना खाना भी मुश्किल हो गया था। घर की सफाई करने के बाद खाना बनाने के लिए कहा जाता था। नौकरों की तरह ट्रीट किया गया। वो कहती हैं, 'मैं कई बार अपने अंडरगारमेंट्स में रोटी छिपाकर बाथरूम जाती थी और वहां सिर्फ रोटी से पेट भरती थी। उस समय भी मुझे अहसास नहीं हो रहा था कि आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है।'
वे बताती हैं, 'शोषण बढ़ता ही गया। मुझे छोटी-छोटी बातों पर पीटा जाता था। दिन-रात मैं शारीरिक हिंसा का शिकार होती थी।' जब एक दिन पिता मिलने आए, तो उन्होंने घर ले जाने की विनती की। 'उन्होंने शाम तक वापस आने और उसे घर ले जाने का वादा किया। लेकिन वे वापस नहीं आए। उस दिन, समझ आ गया कि इस नरक से मुझे बचाने कोई नहीं आएगा।'
'मैं फांसी लगाने ही वाली थी...'
इस समय तक वह दो बच्चों की मां बन चुकी थीं, फिर भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था। वे बताती हैं 'मेरा माथा फटा हुआ है, हाथ पर कट के निशान हैं, पीठ जली हुई है। रोज-रोज के अत्याचार अब सहन करना मुश्किल हो गया था। पता था कि खुद की जान लेना गलत है लेकिन इसके अलावा कोई और रास्ता नजर नहीं आ रहा था।' एक दिन उन्होंने अपनी जान देने का फैसला किया।
उन्होंने बताया, 'मैंने अपने बेटे को सुला दिया। दूसरे बेटे को फीड कराया। माथा चूमा जैसे कि आखिरी बार सुला रही हूं। एक स्टूल खींचा और पंखें पर साड़ी लटका दी। मैं फांसी लगाने ही वाली थी कि खिड़की से मेरी सास का चेहरा दिखाई दिया। उन्होंने मुझे देखा, लेकिन उन्होंने रोका नहीं, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। वे वहां से ऐसे चली गईं जैसे उन्होंने कुछ देखा ही नहीं या उनके लिए कोई मायने नहीं रखता।' यह उनके लिए एक निर्णायक पल था। उन्होंने कहा, 'तब मुझे एहसास हुआ कि मैं ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं दे सकती।' हिम्मत जुटाकर वे ससुराल से भाग निकलीं।
'बाल्टी में पेशाब करके मुझपर फेंक दिया, बच्चों के सामने पीटा'
ससुराल से भागने के बाद सविता अपनी चचेरी बहन की भाभी के घर में रहने लगी थीं। पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और संघर्ष करते-करते आगे की पढ़ाई की। लेकिन अभी सब खत्म नहीं हुआ था। अलग होने के बाद भी पति कभी-कभी आता था और मारपीट करता था। उन्होंने बताया, 'वह बच्चों के सामने मुझे पीटता था। एक दिन एक बाल्टी में पेशाब किया और मुझ पर फेंक दिया। उस समय मैं एग्जाम देने जा रही थी। मैं फिर से नहाई, कपड़े बदले और अपना पेपर देने चली गई। मेरा दिल वाकई में कठोर हो गया था।'
पहले अटेंप्ट में PCS और फिर UPSC CSE क्रैक कर IAS ऑफिसर बनीं
सविता का लक्ष्य अच्छी सरकारी नौकरी पाने का था। उन्होंने अकेले बच्चों की परवरिश करते हुए सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी की और बहुत जल्द उनकी मेहनत रंग लाई। कई सालों के संघर्ष और परेशानियों से जूझते हुए सविता ने अपने पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। वे एक सरकारी अधिकारी बन गईं। एक आदिवासी छात्रा के तौर पर अपनी इस उपलब्धि के लिए, सरकार ने उन्हें 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी दी।
इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2017 का फॉर्म भरा। पहले ही अटेंप्ट में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू कर लिया था। आज, सविता प्रधान एक IAS अधिकारी हैं। वे अपने पद का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने के लिए करती हैं, खासकर गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों की। वे उनके शिक्षा के अधिकार और एक निडर जीवन के लिए संघर्ष करती हैं।
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यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा के नाम पर ठगी करने वाला युवक गिरफ्तार, STF की कार्रवाई
लखनऊ/आगरा। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक एवं समकक्ष भर्ती परीक्षा–2025 के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले एक युवक को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया, खासकर टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से पैसे वसूल रहा था।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान आयुष बघेल पुत्र मनोज बघेल निवासी इंजीनियर्स कॉलोनी, थाना न्यू आगरा, जनपद आगरा के रूप में हुई है। उसे 13 मार्च को आगरा स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली उपनिरीक्षक एवं समकक्ष भर्ती परीक्षा–2025 के नाम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ठगी का नेटवर्क सक्रिय है। इसके बाद एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के पुलिस उपाधीक्षक शुधांशु शेखर के पर्यवेक्षण में टीम ने निगरानी शुरू की।
जांच के दौरान टेलीग्राम पर “UP SI UP POLICE-2026”, “RESULT PANEL PVT TM” और “UP SI EXAM PAPER UP SI-2026” नाम से संचालित चैनलों पर पेपर लीक कराने के संदेश वायरल किए जा रहे थे। इन चैनलों के माध्यम से परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर ऑनलाइन भुगतान कराया जा रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर टेलीग्राम चैनल बनाता था और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कराने का दावा करता था। विश्वास दिलाने के लिए वह किसी पुराने प्रश्नपत्र के पहले पेज को पीडीएफ एडिटर से एडिट कर केवल प्रश्न और विकल्प दिखाकर चैनल में भेज देता था। इससे अभ्यर्थियों को पेपर असली लगने लगता था और वे पैसे ट्रांसफर कर देते थे।
आरोपी ने बताया कि भुगतान के लिए विभिन्न लोगों के बैंक खातों और यूपीआई आईडी का इस्तेमाल किया जाता था। बदले में उन्हें कमीशन दिया जाता था। ठगी से प्राप्त रकम का हिस्सा वह अमेजन ऐप के वॉलेट में 2000 रुपये के कूपन कोड के रूप में प्राप्त करता था।
इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की शिकायत पर थाना हुसैनगंज, लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 221, 270, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश 2024 तथा आईटी एक्ट की धारा 66-D के तहत कार्रवाई की जा रही है।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी जांच की जा रही है।
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