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| 2 | जिनके अब्बा ले चुके पाकिस्तान अब उनका हिंदुस्तान थोड़ी है ? | 767 |
| 3 | ये है हुडा जरीवाला खुद को कभी पत्रकार तो कभी सामाजिक कार्यकर्ता बताती है हाल में यूपी में गैर कानूनी मस्जित को तोड़ा गया था कोर्ट के आदेश पे तो इसने योगी आदित्यनाथ को काफी उल्टा सीधा कहा था फिर यूपी पुलिस इनको पकड़ ली थी फिर रो पीट के निकली बाहर
अब खातून ने ऐसी बात कर दी जिस से मोमिना लोगों में खुशी की लहर आ जाएगी इनके मुताबिक जन्नत में मुस्लिम महिलाओं को 72 मर्द हूर मिलेंगे | 794 |
| 4 | 👆🎥
*चेन्नई में राहुल गांधी के मंच पर* एक मुस्लिम लड़की आई
और उसने तमिल भाषा में काफी कुछ बोला
*फिर जब ट्रांसलेटर ने उसे ट्रांसलेट किया कि यह कह रही है कि* मैं मुस्लिम लड़की हूं हमारे धर्म में पूरी तरह से पितृसत्तात्मक व्यवस्था है *हमें पढ़ने नहीं दिया जाता* हमें आगे बढ़ने नहीं दिया जाता *हमें तमाम बंदिशों में रखा जाता है* और दूसरी तमाम बातें चुपचाप राहुल गांधी सुने और कुछ नहीं बोले 😷
राहुल गांधी एक शब्द तक नहीं बोले 🤫 *और उस लड़की को मंच से उतार दिया गया*
*🔹अब सीन बदल देते हैं*
*अगर कोई हिंदू लड़की आई होती और राहुल गांधी से कहती कि* वह हिंदू है उसके धर्म में पितृसत्तात्मक व्यवस्था है *उसे बंदिशें में रखा जाता है*
*फिर राहुल गांधी 1 घंटे तक* हिंदू धर्म पर हिंदुओं पर हिंदू किताबों पर जहर उगलते🤬 और पूर्व में कई बार राहुल गांधी जहर उगल चुका है
*इसीलिए हिंदुओं से हम बार-बार कहते है कि* विदेशियों का औलाद कभी तुम्हारा नहीं हो सकता
*यह कभी हिंदुओं का तो क्या भारत देश का भी नहीं हो सकता 🤷🤷* | 657 |
| 5 | मेरी सिख भाइयों से प्रार्थना है कि इन जिहादियों से सावधान रहे
ये जो दिख रहा है ये कोई सिख नहीं बल्कि मोहम्मद नासिर है जो कि एक सिख के भेष में नफरत फैलाने आया था लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से पकड़ में आ गया
ये जेहादी मौका ढूंढते है बस किसी तरह भारत में आग लगे | 683 |
| 6 | नवरात्रि | 787 |
| 7 | गरबा | 821 |
| 8 | क्या नेहरू परिवार की इस बड़ी भूल के कारण अभी राहुल गाँधी कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे?
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| 9 | Bachchon ko banna hai YouTuber... | 755 |
| 10 | बॉलीवुड का कला के नाम पे काला कारोबार | 997 |
| 11 | आप कौन से छाप हैं? | 413 |
| 12 | इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने अपनी खुफिया रिपोर्ट में यह खुलासा किया है:
काक्रोच ध्रुव राठी, जो हिंदू बनकर मोदी-विरोधी, भाजपा-विरोधी, आरएसएस-विरोधी और सनातन-विरोधी अभियान चला रहा है, असल में मुसलमान है! उसका असली नाम बदरु राशिद है, पूरा नाम बदरुद्दीन राशिद लाहौरी है। उसका जन्म लाहौर, पाकिस्तान में हुआ था।
उसकी पत्नी जूली (जिसका नाम ईसाई धर्म से मिलता-जुलता है) भी पाकिस्तानी मुसलमान है, जिसका असली नाम जुलेखा है। वे कुख्यात वैश्विक गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के कराची स्थित गुप्त अलीशान बंगले में रहते हैं, जहां उन्हें आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की वाई+ और जेड+ सुरक्षा प्रदान की जाती है।
बदरु राशिद (ध्रुव राठी) को पाकिस्तान, चीन, दुबई, मालदीव, कनाडा, रूस, तुर्की और पेंडोरा से धन मिलता है। कभी-कभी जॉर्ज सोरोस के खाते के माध्यम से भी। लेकिन अब इस हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी तत्व का भंडाफोड़ हो गया है।
सभी सनातनियों से अनुरोध है कि वे इस खुलासे को जितना हो सके साझा करें और हमारे देश के हित में बदरु राशिद/ध्रुव राठी की सच्चाई को उजागर करें।🇮🇳
आनंद रंगनाथन जी की wall से साभार। | 471 |
| 13 | بدون متن... | 441 |
| 14 | आस्था या मनोरंजन! हिंदू क्या कर रहा है?
बहुत ही विचारणीय प्रश्न 😳🤔
बात कड़वी है पर सच है…
- हिन्दू आस्था में नहीं,
- मनोरंजन में जी रहा है।
▪️क्या आप ने कभी ईद में मु&लमानों को मस्जिद के सामने नशा करके अश्लील गानों पर नाचते हुए देखा है…?
▪️क्या आप ने कभी ईशु मसीह के सामने क्रिस्चियन लोगों को शांताबाई गाने पर नाचते हुए देखा है…?
▪️क्या आप ने कभी सिक्ख लोगों को अपने भगवान के सामने, 'आला बाबुराव गाना लगाकर' नाचते हुए देखा है ?
ये सभी समाज अपने-अपने इष्ट का मान सम्मान बड़ी ईमानदारी से करते हैं। क्योंकि उनको उनका धर्म उनकी संस्कृति को टिकाना है।
फिर हमारे सनातन धर्म के भगवान, देवी-देवता के सामने नशा करके और डीजे लगाकर अश्लील गाने लगाकर ये भद्दा नाच करने की बीमारी क्यों हो गयी है।
घर में लाडली बेटी का विवाह है, दूल्हे राजा अपनी होने वाली गृहलक्ष्मी को लेने द्वार पर पहुँचा है और डीजे वाले बजाते हैं - ("तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त!" "अपनी तो जैसे तैसे, आपका क्या होगा जनाबे-आली!")
ये कलंक हमारे सनातन समाज पर ही क्यों लग गया है या हमने ही लगा लिया है। अन्य धर्म के लोग अपने धार्मिक, पारिवारिक, सामाजिक कार्यक्रम में ऐसी फालतूगीरी नहीं करते।
डीजे पर अश्लील गाने लगाकर, बारात में नाचकर, रिसेप्शन के नाम पर लाखों रुपया खर्च कर, अन्न देवता का अपमान कर क्या हम अपने ही इष्ट का अपनी ही सनातन संस्कृति पारिवारिक परम्परा का अपमान नहीं कर रहे है।
हमें अपने त्यौहार बड़े उत्साह और बड़े पैमाने पर मनाने चाहिए। साथ ही पारम्परिक वाद्य, ढोल मजीरों, पारम्परिक पोशाक में बड़े ही शान से प्रत्येक हिन्दू त्यौहारों में दिखनी ही चाहिए।
तभी हमारी सनातन संस्कृति टिकेगी। अब आप स्वयं ही विचार करें, और दूसरों को भी इस मुख्य विषय पर विचार करने को कहें।
वर्तमान समय में नवरात्रि, गणेशोत्सव, दशहरा आदि त्योहारों में ध्यान रखें और कोई आपके गावों-शहरों में ऐसा करता दिखे तो कृपया उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाए। समाज के जो कर्ता-धर्ता बनकर बैठे हैं उनको भी अपने-अपने सामाजिक संगठनों के प्रभाव व दबाव पूर्वक ऐसे करने वालो को बलपूर्वक रोकने का प्रयास करना चाहिये।
फूहड़ गानों की जगह हिन्दू भक्ति गीत व संगीत पर आधारित श्लोक व हरि धुन लगाएं।
आधे-अधूरे, कटे-फटे, भड़काऊ वस्त्र पहनना, अंतर्जातीय प्यार और विवाह करना, माता-पिता को रूढ़ीवादी बताना, लिव-रिलेशनशिप में बिंदास जीवन बिताना, बिना शादी किए अपने होने वाली जीवनसंगिनी के साथ अमर्यादित, अभद्र फोटो विडियो शूटिंग करा दुनिया को दिखाना आदि अनेक उदाहरण है जो बीमारी केवल और केवल हिन्दू समाज को ही लगी हुई है।
हिंदू संस्कृति का जितना नुकसान स्वयं हमने किया है, उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। अफसोस, क्या हम अपने घर परिवार के कोई भी आयोजन में जस मंडली, भजन मंडली, फाग मंडली, महिला मंडली, संस्कृत स्तोत्र उच्चारण करने वाले विद्वानों तथा लोकल व पारंपरिक वाद्य यंत्रों वाले कलाकारों को नहीं बुला सकते। अतः आज समस्त हिन्दू समाज एवं भारत के सभी संगठनों को इस पर आत्मचिंतन करना चाहिए।
कृपया अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपने परिवार, समाज, संस्कृति व धर्म से भी जोड़े। 👏 | 392 |
| 15 | بدون متن... | 399 |
| 16 | आस्था या मनोरंजन! हिंदू क्या कर रहा है?
बहुत ही विचारणीय प्रश्न 😳🤔
बात कड़वी है पर सच है…
- हिन्दू आस्था में नहीं,
- मनोरंजन में जी रहा है।
▪️क्या आप ने कभी ईद में मु&लमानों को मस्जिद के सामने नशा करके अश्लील गानों पर नाचते हुए देखा है…?
▪️क्या आप ने कभी ईशु मसीह के सामने क्रिस्चियन लोगों को शांताबाई गाने पर नाचते हुए देखा है…?
▪️क्या आप ने कभी सिक्ख लोगों को अपने भगवान के सामने, 'आला बाबुराव गाना लगाकर' नाचते हुए देखा है ?
ये सभी समाज अपने-अपने इष्ट का मान सम्मान बड़ी ईमानदारी से करते हैं। क्योंकि उनको उनका धर्म उनकी संस्कृति को टिकाना है।
फिर हमारे सनातन धर्म के भगवान, देवी-देवता के सामने नशा करके और डीजे लगाकर अश्लील गाने लगाकर ये भद्दा नाच करने की बीमारी क्यों हो गयी है।
घर में लाडली बेटी का विवाह है, दूल्हे राजा अपनी होने वाली गृहलक्ष्मी को लेने द्वार पर पहुँचा है और डीजे वाले बजाते हैं - ("तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त!" "अपनी तो जैसे तैसे, आपका क्या होगा जनाबे-आली!")
ये कलंक हमारे सनातन समाज पर ही क्यों लग गया है या हमने ही लगा लिया है। अन्य धर्म के लोग अपने धार्मिक, पारिवारिक, सामाजिक कार्यक्रम में ऐसी फालतूगीरी नहीं करते।
डीजे पर अश्लील गाने लगाकर, बारात में नाचकर, रिसेप्शन के नाम पर लाखों रुपया खर्च कर, अन्न देवता का अपमान कर क्या हम अपने ही इष्ट का अपनी ही सनातन संस्कृति पारिवारिक परम्परा का अपमान नहीं कर रहे है।
हमें अपने त्यौहार बड़े उत्साह और बड़े पैमाने पर मनाने चाहिए। साथ ही पारम्परिक वाद्य, ढोल मजीरों, पारम्परिक पोशाक में बड़े ही शान से प्रत्येक हिन्दू त्यौहारों में दिखनी ही चाहिए।
तभी हमारी सनातन संस्कृति टिकेगी। अब आप स्वयं ही विचार करें, और दूसरों को भी इस मुख्य विषय पर विचार करने को कहें।
वर्तमान समय में नवरात्रि, गणेशोत्सव, दशहरा आदि त्योहारों में ध्यान रखें और कोई आपके गावों-शहरों में ऐसा करता दिखे तो कृपया उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाए। समाज के जो कर्ता-धर्ता बनकर बैठे हैं उनको भी अपने-अपने सामाजिक संगठनों के प्रभाव व दबाव पूर्वक ऐसे करने वालो को बलपूर्वक रोकने का प्रयास करना चाहिये।
फूहड़ गानों की जगह हिन्दू भक्ति गीत व संगीत पर आधारित श्लोक व हरि धुन लगाएं।
आधे-अधूरे, कटे-फटे, भड़काऊ वस्त्र पहनना, अंतर्जातीय प्यार और विवाह करना, माता-पिता को रूढ़ीवादी बताना, लिव-रिलेशनशिप में बिंदास जीवन बिताना, बिना शादी किए अपने होने वाली जीवनसंगिनी के साथ अमर्यादित, अभद्र फोटो विडियो शूटिंग करा दुनिया को दिखाना आदि अनेक उदाहरण है जो बीमारी केवल और केवल हिन्दू समाज को ही लगी हुई है।
हिंदू संस्कृति का जितना नुकसान स्वयं हमने किया है, उसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। अफसोस, क्या हम अपने घर परिवार के कोई भी आयोजन में जस मंडली, भजन मंडली, फाग मंडली, महिला मंडली, संस्कृत स्तोत्र उच्चारण करने वाले विद्वानों तथा लोकल व पारंपरिक वाद्य यंत्रों वाले कलाकारों को नहीं बुला सकते। अतः आज समस्त हिन्दू समाज एवं भारत के सभी संगठनों को इस पर आत्मचिंतन करना चाहिए।
कृपया अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपने परिवार, समाज, संस्कृति व धर्म से भी जोड़े। 👏 | 1 |
| 17 | सौरव दास, अभिजीत डीपके, रंका, ध्रुव राठी - इन सब को हिरासत तो में तो ले लिया किंतु इन सब के पीछे क्या फंडिंग है, उसका क्या परमानेंट तोड़ है?
ये लोग ना कहीं नौकरी करते है, ना कोई व्यापार तो इनके पास महंगे फ़ोन, फ्लाइट से आने जाने का खर्चा, उच्च जीवन स्तर कैसे मिल रहा है? आप कहेंगे - फॉरेन फंडिंग तो सरकार उस फंडिंग पे रोक क्यों नहीं लगा पा रही, कैसे ऐसे तत्व बैठे बिठाए मौज लेते हुए देश में आग लगाते फिर रहे है।
आ आ पा - केजरीवाल की ये युवा मोर्चा टीम है, केजरीवाल पार्टी का एक्सटेंशन, जिसे फंडिंग से अधिक कहीं और से पैसा मिल रहा है। सोशल मीडिया मॉनेटाइजेशन।
यूट्यूब, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम- सब ऐप पर इनके वीडियो लाखों व्यू में जाते है। एक बात नोट करना- ये लोग और इनके समर्थक सब के सब इस बात पे वाहवाही बटोरते है कि हमारे पास इतने फॉलोवर है और इतने व्यूज़ और मुद्दीज़ी के पास हमसे कम व्यूज।
ये सारा खेल इन सोशल मीडिया ऐप से उत्पन्न हुए पैसे का है। और इसी चक्कर के चलते देश में अपार सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर दर्जनों के भाव से पैदा हो रहे है। हर किसी को कंटेंट चाहिए ताकि वायरल कंटेंट से पैसे बना सकें। यह पैसा ना केवल लीगल है बल्कि इस पे टैक्स देके इसे वाइट मनी के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी से देश में शहर कस्बों गाँव देहात में वीडियो और रील बनाने का फ़ितूर सर चढ़ के बोल रहा है!
मुद्दीज़ी- मुफ़्त की सलाह है और काफ़ी हटकर है।
भारत में रील और वीडियो आदि से होने वाली कमाई रोक दीजिए। किसी भी रील वीडियो से मिलने वाली सोशल मीडिया आय पे रोक लगाइए या फिर कम से कम पचास प्रतिशत टैक्स। इस से क्या क्या लाभ होंगे?
- इन जैसे तत्वों की लीगल फंडिंग पे लगाम लगेगी, नंबर दो की फंडिंग आराम से पकड़ में आएगी।
- उलजलूल वीडियो रील की भरमार कम होगी।
- गाँव देहात में बढ़ रही नाच अश्लील वीडियो, भौंडे वीडियो पे रोक लगेगी। ये बीमारी वहाँ एक अलग रूप ले चुकी है। सब सोशल मीडिया से मिलने वाले ईजी मनी के चक्कर में है!
- इंस्टाग्राम पे नंगा नाच बंद होगा , जिसे देखों वो एक्सक्लूसिव मेम्बरशिप बेच कर देह उघाड़ रही है।
- यूट्यूब पे भी फ़र्ज़ी ख़बरों का सिलसिला बंद होगा।
- जो जो पत्रकार बेरोजगार है उनका सब का खर्च पानी यूट्यूब और एक्स से चल रहा है, सब खुन्नस में है। इस रोक से इन्हें और ऑक्सीजन नहीं मिलेगी।
- गली गली में पैदा हो रहे फ़ूड ब्लॉगर बनने बंद होंगे:
और सबसे अहम-
- इस से मिलने वाला टैक्स बहुत बहुत अधिक होगा। इतना कि निर्मला ताई जी को मिडल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग की जेब पे निगाह रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कई बार असाध्य बीमारी का इलाज बहुत साधारण तरीके से होता है। बड़े फोड़े को सही करने के लिए एक सुई काफ़ी है। और वैसे भी नए नए टैक्स लगाने में निर्मला ताई जी का कोई मुक़ाबला नहीं।
सोच कर देखिए- इस तरकीब से साँप भी मरेगा, लाठी भी नहीं टूटेगी, सरकारी ख़ज़ाना भी भरेगा। | 389 |
| 18 | بدون متن... | 329 |
| 19 | "कानान" यह कृष्ण कन्हैया जैसा ही कृष्ण प्रदेश का द्योतक था।
यहूदी लोगों को भविष्यवाणी के अनुसार भटकते - भटकते सन् १९४६ में उनकी अपनी भूमि प्राप्त हो ही गई जिसका नाम उन्होंने Isreal रखा जो Isr=ईश्वर और ael = आलय इस प्रकार का "ईश्वरालय" संस्कृत शब्द है।
यह एक और प्रमाण है कि यहूदी लोगों की परम्परा वैदिक संस्कृति और संस्कृत भाषा से निकली है।
हिटलर उनसे टकराकर नामशेष हो गया। मुसलमान भी यहूदियों से टकराने के लिए आतुर हैं तो उनका भी हिटलर जैसा ही अन्त होगा।
यहूदी ग्रन्थ की भविष्यवाणी कृस्ती बायबल का Testament नाम का जो पूर्व खण्ड है उससे समय समय पर ईश्वर का अवतरण होता है ऐसी भविष्यवाणी है। वह भगवद्गीता से ही यहूदी धर्मग्रन्थ में उतर आई है। भगवद्गीता में भगवान कहते हैं —
यदा यदा हि धर्मस्यग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्"।
यहूदी नेता Moses की जन्मकथा श्रीकृष्ण की जन्मकथा जैसी ही है। और तो और श्रीकृष्ण का जैसा विराट रूप कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने देखा वैसा ही विराट रूप यहूदी लोगों ने रेगिस्तान में मोझेस का देखा, ऐसी यहूदियों की दन्तकथा है।
पूर्ववर्ती पर्वत यदुईशालयम् उर्फ जेरूसलेम नगरी में दो पहाड़ियाँ हैं।
उनमें से पूर्व वी पहाड़ी पर #Dome_on_the_Rock और #अलअक्सा नाम के दो प्राचीन वैदिक मन्दिर हैं, जो सातवीं शताब्दी से मुसलमानों के कब्जे में होने के कारण मस्जिदें कहलाती हैं।
Dome on the Rock स्वयम्भू महादेव का मन्दिर है और अल्अक्सा अक्षय्य भगवान कृष्ण का मन्दिर है, एवं शक्तिपीठ भी। पूर्ववर्ती पहाड़ी पर ये मन्दिर बनाए जाना उनकी वैदिक विशेषता का द्योतक है।
जिस प्रकार भारत में दो कुटुम्बों के बुजुर्गों से विवाह प्रस्ताव सम्मत होने पर युवक - युवतियों के विवाह होते हैं वैसी ही प्रथा - यहूदियों में भी है।
वे भी भारतीयों की तरह प्रेम - विवाह को अच्छा नहीं समझते।
वैदिक विवाहों के लिए मण्डप बनाए जाते हैं।
यहूदियों में भी वही प्रथा है।
वे भी मण्डपों में विवाह - संस्कार कराना शुभ समझते हैं।
यहूदियों में भी अनेक दीप लगाकर वैसा ही एक त्यौहार मनाया जाता है जैसे भारतीय लोग दीपावली मनाते हैं। वृक्ष - पूजन वैदिक संस्कृति में जिस प्रकार तुलसी, पीपल, बड़ आदि वृक्षों का पूजन किया जाता है,
उन्हें पानी दिया जाता है और उनकी परिक्रमा की जाती है ल, वैसे ही यहूदी भी वृक्षों को पूज्य मानते हैं।
यही शत्रु मुसलमान लोग यहूदियों को उतना ही कट्टर शत्रु मानते हैं जितना वे भारत के हिन्दू लोगों को मानते हैं।
यहूदियों में वेदों का उल्लेख मार्कोपोलो के प्रवास वर्णन के ग्रन्थ में पृष्ठ ३४६ पर एक टिप्पणी इस प्रकार है — "Much has been written about the ancient settlement of Jews at Kaifungfu (in China) . One of the most interesting papers on the subject is in Chinese Reposi tory , Vol . XX . It gives the translation of a Chinese Jewish inscription ... Here is a passage " with respect to the Israeli tish religion we find an inquiry that its first ancestor , Adam came originally from India and that during the (period of the) Chau State the sacred writings were already in existence . . The sacred writings embodying eternal reason consist of 53 sections . The principles therein contained are very abstruse and the external reason therein revealed is very mysterious being treated with the same veneration as Heaven . The founder of the religion is Abraham , who is considered the first teacher of it . Then came Moses , who established the law , and handed down the sacred writings . After his time this religion entered China . " " इसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार होगा
" चीन के कायपुंगफू नगर में यहूदियों की एक बस्ती थी जिसके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है । उसमें एक बड़ा ही रोचक लेख #Chinese_Repository नाम के ग्रन्थ के बीसवें खण्ड में सम्मिलित है । चीन में प्राप्त एक यहूदी शिलालेख का वह अनुवाद है । उसमें ऐसा उल्लेख है कि " यहूदियों के मूल धर्मसंस्थापक अँडम् ( यह " आदिम " ऐसा संस्कृत शब्द है । उसी से इस्लामी भाषा में आदमी यह शब्द बना है ) भारत - निवासी था । #चौ शासन के पूर्व ही उनके पवित्र ग्रन्थ उपलब्ध हो गए थे । उन ग्रन्थों में अनादि , अनन्त तत्स्व का विवरण ५३ भागों में प्रस्तुत है ।उसके तत्त्व बड़े गूढ़ हैं और उसमें दिया अनादि - अनन्त का वर्णन बड़ा रहस्यमय है ।
प्रत्यक्ष परमात्मा के जितना ही उनका महत्त्व माना गया है ।
विक्रम वर्मा जी की पोस्ट से
साभार - वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास पुस्तक
#We_support_hindutava_unity | 336 |
| 20 | #यहूदी_धर्म_का_वैदिक_इतिहास....(यहूदी भी हमारे ही भाई हैं)
विश्व के केवल दो समुदाय ऐसे हैं, जो पुनर्जन्म को मानते हैं, एक तो हमारे यदुवंशी यहूदी भाई, और एक हिन्दू ....
#यहूदी_पंथ को #Judaism कहा जाता है।
वह Yeduism का अपभ्रंश है।
सौराष्ट्र यह यदु लोगों का प्रदेश था।
श्रीकृष्ण की द्वारिका उसी प्रदेश में है।
वहाँ के शासक जाडेजा कहलाते हैं।
जाडेजा यह "यदु-ज" शब्द का वैसा ही अपभ्रंश है जैसे Judaism है।
जाडेजा और Judaism दोनों का अर्थ है यदु उर्फ जदुकुलवंशी।
उसी पंथ का दूसरा नाम है Xionism |
उसका उच्चार है "जायोनिज्म्" जो "देवनिज्म्" का अपभ्रंश है।
भगवान कृष्ण देव थे अत : उनका यदुपंथ देवपंथ कहलाने लगा।
द या ध का अन्य देशों में "ज" उच्चार होने लगा।
उसी प्रकार "देवनिजम्" का उच्चार ज्ञायोनिजम हुआ।
यहूदी परम्परा के प्रथम नेता अब्रह्म माने गए हैं।
यह "ब्रह्म" शब्द का अपभ्रंश है।
उनके दूसरे नेता "मोजेस्" कहलाते हैं,
जो महेश शब्द का विकृत उच्चार है।
मोझेस् की जन्मकथा कृष्ण की जन्मकथा से मेल खाती है, अत : वह महा-ईश भगवान कृष्ण ही हैं, इसके सम्बन्ध में किसी को शंका नहीं रहनी चाहिए।
महाभारतीय युद्ध के पश्चात् द्वारिकाप्रदेश में शासकों के अभाव से लूटपाट, दंगे आदि आरम्भ हुए।
धरती कम्प आदि से सागर तटवर्ती प्रदेश जलमग्न होने लगा।
अत : यादव लोग टोलियाँ बनाकर अन्यत्र जा बसने के लिए निकल पड़े। कुल २२ टोलियों में वे निकले।
उनमें से १० टोलियाँ उत्तर की ओर कश्मीर की दिशा में चल पड़ी और कश्मीर, रूस आदि प्रदेशों में जा बसीं।
अन्य १२ टोलियाँ इराक, सीरिया, पॅलेस्टाईन, जेरूसलेम, ईजिप्त, ग्रीस आदि देशों में जा बसीं।
मध्य एशिया के १२ देशों में यदुवंशियों की वही १२ टोलियाँ हैं। वही यहूदियों की १२ टोलियाँ कहलाती हैं। भगवान कृष्ण के अवतार समाप्ति के पश्चात् यहूदी लोगों को जब कठिन और भीषण अवस्था में द्वारिका प्रदेश त्यागना पड़ा तभी से यहूदी लोगों ने मातृभूमि से बिछड़ने के दिन गिनने शुरू किए। उसी को यहूदियों का passover गक कहा जाता है। उसका अर्थ है मातृभूमि त्यागने के समय से आरम्भ की गई कालगणना।
अब कोई बताएं की यहूदियो की मातृभूमि कौनसी थी?
यहूदी बायबल में कृष्ण का #बाल नाम स्पष्टतः उल्लेखित है।
#हिब्रू_भाषा यानी "हरिबूते इति हब्रू"
यहूदियों की भाषा का नाम “हिब्रू" है। यहूदियों के आंग्ल ज्ञानकोष का नाम है Encyclopaedia Judaica |
उसमें "हब्रु" शब्द का विवरण देते हुए कहा है कि उस शब्द का पहला अक्षर जो "ह" है वह परमात्मा के नाम का संक्षिप्त रूप है।
अब देखिए कि ऊपरले विवरण में दो न्यून हैं।
एक न्यून तो यह है कि "ह" से निर्देशित होने वाला यहूदियों के भगवान का पूरा नाम क्या है? यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया l करेंगे भी कैसे, जब ज्ञानकोषकारों का ही ज्ञान अधूरा है।
हम वैदिक संस्कृति के आधार पर उस कमी को दूर करते हैं। "हरि" यह कृष्ण का नाम है, उसी का "ह" अद्याक्षर है। अब दूसरा न्यून यह है कि यहूदी ज्ञानकोष वालों ने हब्रू शब्द में ब्रू अक्षर क्यों लगा है? यह कहा ही नहीं। उस महत्त्वपूर्ण बात का उन्हें ज्ञान न होने से वे उसे टाल गए। #ब्रु अक्षर का तो बड़ा महत्त्व है। "#ब्रूते" यानी बोलता है इस संस्कृत शब्द का वह अद्याक्षर है। अतः हब्रू का अर्थ है "हरि (यानी कृष्ण) बोलता था वह भाषा"। ठीक इसी व्याख्यानुसार संस्कृत और हब्रू में बड़ी समानता है।
यहूदी लोगों वा धर्मचिह्न यहूदी लोगों के मन्दिर को Synagogue कहते हैं।
उसका वर्तमान उच्चार “सिनेगॉग" मूल संस्कृत "संगम" शब्द है।
"संगम" शब्द का अर्थ है "सारे मिलकर प्रार्थना करना"।
संकीर्तन, संतसमागम आदि शब्दों का जो अर्थ है वही सिनेगॉग उर्फ संगम शब्द का अर्थ है।
यहूदी मन्दिरों पर षट्कोण चिह्न खींचा जाता है।
वह वैदिक संस्कृति का शक्तिचक्र है।
देवीभक्त उस चिह्न को देवी का प्रतीक मानकर उसे पूजते हैं।
वह एक तांत्रिक चिह्न है।
घर के प्रवेश द्वार के अगले आँगन में हिन्दु महिलाएं रंगोली में वह चिह्न खींचती हैं।
दिल्ली में हुमायूं की कब्र कही जाने वाली जो विशाल इमारत है वह देवीभवानी का मन्दिर था। उसके ऊपरले भाग में चारों तरफ बीसों शक्तिचक्र संगमरमर प्रस्तर पट्टियों से जड़ दिए गए हैं।
यहूदी लोगों में David नाम होता है वह "देवि + द" यानी देवी का दिया पुत्र इस अर्थ से डेविदु उर्फ डेविड कहलाता है। अरबों में उसी का अपभ्रंश दाऊद हुआ है। अतः हब्रू और अरबी दोनों संस्कृतोद्भव भाषाएँ हैं।
भारत में यादव का उच्चार जाधव और जाडेजा जैसे बना वैसे ही यदु लोग यहूदी, ज्यूडेइस्टस् , ज्यू और झायोनिटस् कहलाते हैं।
निर्देशित देश ज्यू लोग जब द्वारिका से निकल पड़े तो उन्हें साक्षात्कार हुआ जिसमें उन्हें कहा गया कि "Canaan प्रदेश तुम्हारा होगा" | | 376 |
