fa
Feedback
Vaidic Physics

Vaidic Physics

رفتن به کانال در Telegram

If you are interested in VAIDIC PHYSICS and want to promote it, you can join the amazing Research on Aitarey Brahman being done by Rev. Acharya Agnivrat Ji. You can help us as per your interest and ability. Join Channel and contribute in this noble work.

نمایش بیشتر
1 727
مشترکین
اطلاعاتی وجود ندارد24 ساعت
-27 روز
-430 روز
آرشیو پست ها
🌌 *ब्रह्माण्ड की प्रारम्भिक अवस्था* 🌌 यह वक्तव्य श्री हिमांशु जी (संस्थापक, गुरुकुल क्रान्ति) के सुयोग्य पुत्र ब्रह्मचारी रियांशु (कक्षा 9) ने ‘परिचय वैदिक भौतिकी’ पुस्तक के आधार पर अत्यन्त सरल एवं तार्किक शैली में प्रस्तुत किया है। 🎥 वीडियो अवश्य देखें— https://youtu.be/0r-tSiZbVC4

🔥 आखिर पृथ्वी इतनी गर्म क्यों हो रही है? क्या सिर्फ Global Warming जिम्मेदार है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक रहस्य छिपा है? देखें पूरा वीडियो— https://youtu.be/VucQ900_xSI वीडियो पसंद आए तो शेयर अवश्य करें।

गोबर = Global Solution? | Ex-CGIAR Scientist Explained https://youtu.be/U7_eRHVt7kI

विनम्र श्रद्धांजलि: आर्यजगत् के अनमोल रत्न विनम्र भामाशाह माननीय दीनदयाल जी गुप्ता अभी-अभी हमें डॉलर फाउंडेशन (कोलकाता) के अध्यक्ष माननीय दीनदयाल जी गुप्ता के निधन का अत्यन्त दुःखद एवं हृदय विदारक समाचार प्राप्त हुआ। गुप्ता जी आर्यजगत् के एक ऐसे 'भामाशाह' थे, जिनके भीतर दान देते समय मैंने कभी अहंकार का लेशमात्र भी भाव नहीं देखा। वे अत्यन्त विनम्र और सहयोगी स्वभाव के धनी थे। चाहे कोई विद्यार्थी हो, गुरुकुल, विद्वान्, संन्यासी या कोई भी संस्था— जैसे ही उन्हें किसी की आवश्यकता की जानकारी मिलती और उन्हें कार्य उचित लगता, वे तुरन्त सहयोग के लिए तत्पर हो जाते थे। मेरी उनसे पहली मुलाकात वर्ष 2008 में अजमेर के ऋषि मेले में हुई थी। मेरे व्याख्यान के पश्चात् उन्होंने पीछे से आकर बड़े ही सरल भाव से अभिवादन किया और अपना परिचय दिया। उसके बाद वे मुझे अपने कमरे में ले गए और उस दिन से वे हमारे होकर रह गये और वह जीवनपर्यंत हमसे जुड़े रहे। वे हमारे ट्रस्ट के ट्रस्टी बने और वर्षों से उपाध्यक्ष पद की गरिमा बढ़ाते रहे। कई बार कुछ लोगों ने उन्हें हमारे विरुद्ध भड़काने का प्रयास भी किया, परन्तु गुप्ता जी अपनी अन्तरात्मा से निर्णय लेने वाले व्यक्तित्व थे। उन्होंने कभी भी हम पर संदेह नहीं किया, बल्कि सदैव यही चिंतन किया कि संस्था को आगे कैसे बढ़ाया जाए? यद्यपि हमारा अनुसंधान कार्य बहुत कठिन है, फिर भी उन्होंने बड़े उत्साह के साथ हमेशा सहयोग किया। वे हमारे कार्यक्रम में जब भी आते, बहुत उत्साहित होते। जब भी कोई बड़ा वैज्ञानिक या विशिष्ट व्यक्ति हमसे जुड़ता, तब वे बहुत प्रसन्न होते। जाते-जाते भी, जब भी मेरी उनसे फोन पर बात होती, वे यही पूछते— "आचार्य जी! सिरोही में अनुसंधान भवन कब बनने जा रहा है?" वे उसमें बड़ा सहयोग करना चाहते थे, पर दुर्भाग्यवश उनके रहते भूमि के कन्वर्जन (परिवर्तन) का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इस विलम्ब से वे काफी दुःखी रहते थे और बार-बार कहते थे— "आचार्य जी! अनुसंधान केन्द्र बनने में बहुत देर हो रही है।" वे केवल स्वयं ही सहयोग नहीं करते थे, बल्कि दूसरों को भी सहयोग के लिए प्रेरित करते थे। वर्तमान शोध संस्थान के निर्माण में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। वे हमारे प्रमुख आर्थिक आधार स्तम्भ थे। केवल हमारी ही नहीं, बल्कि आर्यसमाज की अनेकों संस्थाओं, गुरुकुलों और गौशालाओं को वे पल्लवित करते थे। वे स्वयं फोन करके पूछते थे कि आर्थिक स्थिति कैसी चल रही है? आज समाज में ऐसा निरहंकारी और निःस्वार्थ दानी मिलना अत्यन्त दुर्लभ है। ईश्वर की इच्छा के आगे किसी का वश नहीं चलता, पर यह निश्चित है कि हमारे ट्रस्ट के साथ-साथ आर्यजगत् की अनेक संस्थाओं को उनकी कमी सदैव खलती रहेगी। उनकी सेवा की प्रवृत्ति और हर कार्य के प्रति उनकी सहयोग करने की भावना हमें हमेशा याद आएगी। मैं श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास एवं समस्त वैदिक भौतिकी परिवार की ओर से माननीय गुप्ता जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। ईश्वर पुण्यात्मा को सद्गति प्रदान करे और उनके परिवार सहित हम सभी को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे। ओम् शम्। —आचार्य अग्निव्रत प्रमुख, वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान (श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा संचालित) भागलभीम, भीनमाल (राजस्थान)

photo content

अन्तर्राष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक का वेद विज्ञान मन्दिर में आगमन आज हमारे संस्थान में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. चन्द्रश
अन्तर्राष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक का वेद विज्ञान मन्दिर में आगमन आज हमारे संस्थान में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. चन्द्रशेखर जी बिरादर, बेंगलुरु अपने जन्मदिन के अवसर पर पधारे और अपना जन्मदिन यज्ञ करके मनाया। उनके साथ प्रसिद्ध समाजसेवी श्री दिनेश कुमार जी जैन, बेंगलुरु का भी आगमन हुआ। डॉ. बिरादर नासा के अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्तर्गत विश्व के लगभग 50 देशों में कार्य कर चुके हैं। आप नंदी (बैल) आधारित कृषि के गहन अनुसंधानकर्ता वैज्ञानिक हैं। इन्होंने अरब के रेगिस्तान एवं अमेरिका के अत्यन्त गर्म व मरुस्थलीय क्षेत्रों में गोवंश के गोबर से हरित क्रान्ति की है। अब आपने करोड़ों रुपए की आय एवं अन्तर्राष्ट्रीय जॉब को ठुकरा कर भारत में श्री दिनेश कुमार जी जैन के साथ मिलकर भारत के 6 लाख गाँव में नंदी आधारित कृषि के द्वारा किसानों को समृद्ध बनाने का अभियान प्रारम्भ किया है। आपने संस्थान प्रमुख पूज्य आचार्य अग्निव्रत जी के साथ कृषि एवं वैदिक रश्मि सिद्धान्त पर व्यापक चर्चा की। इस चर्चा की वीडियो वैदिक फिजिक्स यूट्यूब चैनल पर शीघ्र ही अपलोड की जायेगी।

क्या अब आक्रान्ताओं का इतिहास बताना भी अपराध है? https://youtu.be/nqjQ7vjYhu8

सृष्टि से सीखें प्रबन्धन l Vedic Management Secrets from Creation https://youtu.be/e1LO-YOSKpo

सपा नेता की श्रीराम पर अभद्र टिप्पणी l क्या सनातन के ठेकेदार निर्दोष हैं? https://youtu.be/l7tSdib4YqA

चतुर्थ वेद सृष्टि कथा, ओढ़व, अहमदाबाद आर्यसमाज (वेद संस्थान) ओढ़व, अहमदाबाद में 10 से 12 अप्रैल को वेद सृष्टि कथा में मुख्य वक्ता के रूप में संस्थान के प्रमुख पूज्य आचार्य अग्निव्रत तथा वक्ता के रूप में प्राचार्य श्री विशाल आर्य ने भाग लिया। इसमें व्याख्यान के साथ श्रोताओं की शंकाओं का समाधान भी किए। इस कथा में अहमदाबाद के प्रतिष्ठित प्रबुद्ध नागरिक, उद्योगपति, युवा-युवती व छात्र-छात्रा लगभग 200-300 की संख्या में उपस्थित हुए। इसी समयावधि में नगर के कुछ प्रबुद्ध परिवारों में लघु संगोष्ठियों का आयोजन करके शंका-समाधान का कार्यक्रम भी रखा। सृष्टि कथा कार्यक्रम में मंच-संचालन श्री लाल चन्द जी आर्य ने किया और इसका संयोजन श्री प्रफुल जी वोरा, श्री दिनेश जी शाह और युवा विद्वान् श्री कृतेश पटेल जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त श्री ज्ञानेन्द्र सिंह जी मलिक से आवास पर वैदिक ज्ञान-विज्ञान पर चर्चा हुई। दिनांक 13 अप्रैल को भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला, जो ISRO की वैज्ञानिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाला प्रमुख अनुसंधान केंद्र है, के निदेशक प्रो० अनिल जी भरद्वाज से लगभग पौने दो घंटे तक उनके कार्यालय में वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी पर चर्चा हुई। उनका व्यवहार अत्यन्त सकारात्मक रहा। इसके पश्चात् पूर्व अन्तरिक्ष वैज्ञानिक नरेन्द्र जी भण्डारी से उनके कार्यालय में वैदिक भौतिकी तथा भारतीय चन्द्रयान मिशनों के बारे में चर्चा हुई।

सृष्टि कथा (तृतीय दिवस) आर्य समाज ओढ़व, अहमदाबाद https://youtube.com/live/9WpK-XeOyyE

सृष्टि कथा (द्वितीय दिवस) आर्य समाज ओढ़व, अहमदाबाद https://www.youtube.com/live/3ZXko_8HBPM

सृष्टि कथा, आर्य समाज ओढ़व, अहमदाबाद https://www.youtube.com/live/2sgM6djVGWA

एक प्रेरणादायक प्रसंग एक बार पूज्य आचार्य अग्निव्रत जी बस में यात्रा कर रहे थे। बस धीरे-धीरे अपनी गति से आगे बढ़ रही थी। उनके पास एक व्यक्ति बैठा था, जिसके मुँह में गुटका भरा हुआ था। वह बार-बार असहज हो रहा था और इधर-उधर देखने लगा। कुछ देर बाद वह व्यक्ति बोला, “जरा साइड में हटेंगे?” आचार्य जी ने शान्त स्वर में उसकी ओर देखा और कहा, “यदि यह थूकने की चीज थी, तो खाई क्यों? और यदि खाने की चीज है, तो थूकते क्यों हो?” यह सुनते ही वह व्यक्ति चुप रह गया। उसके पास कोई उत्तर नहीं था। उसके चेहरे पर लज्जा साफ दिखाई दे रही थी और उसका सिर झुक गया। उस क्षण उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। बिना किसी डांट-फटकार के, केवल एक वाक्य ने उसे उसकी गलती का बोध करा दिया। सन्देश— सच्ची शिक्षा वही है, जो बिना कठोरता के, सीधे मन को छू जाए और व्यक्ति को स्वयं अपनी भूल का बोध करा दे।

Live । वेद सृष्टि कथा, रानीबाग दिल्ली https://www.youtube.com/live/ljK7I2VonXc

॥ ओ३म् ॥ 🌼 वेद सृष्टि कथा 🌼 📅 दिनांक: 02 अप्रैल 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक चैत्र शु० १५ से वैशाख कृ० ३ वि.सं. २०८३, सृ.सं.
+2
॥ ओ३म् ॥ 🌼 वेद सृष्टि कथा 🌼 📅 दिनांक: 02 अप्रैल 2026 से 05 अप्रैल 2026 तक चैत्र शु० १५ से वैशाख कृ० ३ वि.सं. २०८३, सृ.सं. १,९६,०८,५३,१२७ 📍 स्थान: आर्य समाज मन्दिर रानी बाग WZ-1194, महात्मा हंसराज मार्ग, मेन बाजार, रानी बाग, दिल्ली-110034 🎙️ मुख्य प्रवचन आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाये तथा सृष्टि के रहस्यों को जानकर मानव जीवन को सार्थक बनाने हेतु आप सपरिवार तथा इष्ट मित्रों सहित सादर आमन्त्रित है। 📅 02 अप्रैल 2026 से 04 अप्रैल 2026 तक 🔸 प्रातः कालीन कार्यक्रम ▪️ यज्ञ – प्रातः 07:30 बजे ▪️ प्रवचन – प्रातः 08:30 बजे 🔸 रात्रि कालीन कार्यक्रम ▪️ प्रवचन – रात्रि 08:30 बजे ▪️ ऋषिलंगर – रात्रि 09:30 बजे पूर्णाहुति एवं समापन समारोह 📆 रविवार, 05 अप्रैल 2026 ▪️ यज्ञ – प्रातः 08:00 बजे ▪️ प्रवचन – 11:00 बजे ▪️ ऋषिलंगर – 12:30 बजे सम्पर्क करें: जोगेन्द्र खट्टर (प्रधान) 📞 9810040982

ईश्वर रंगों से खेलता है! क्या आप जानते हैं कि ईश्वर रंगों से खेलता है? आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे सम्भव है। आइये विचार करते हैं— ऋषियों के अनुसार यह सम्पूर्ण सृष्टि वेद मन्त्रों के अनन्त स्पंदनों से प्रकट हुई है। [वागेवेदं सर्वम् —ऐतरेय आरण्यक] महर्षि पिंगल ने वेद मन्त्रों को सात मुख्य छन्दों में विभाजित किया और अपने छन्द शास्त्र में प्रत्येक छन्द का एक विशिष्ट रंग बताया है। जैसे गायत्री छन्द का सफेद माना गया, त्रिष्टुप् का लाल, पंक्ति का नीला आदि। [सितसारङ्गि॒पिशङ्कृष्णीलोहितगौरा वर्णाः] यह पूरी सृष्टि इन सात छन्दों का ही अद्भुत खेल है। हर छन्द के अपने गुण और प्रभाव हैं। महर्षि यास्क के अनुसार इन्हें ‘छन्द’ इसलिए कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक वेद मन्त्र किसी न किसी पदार्थ को आच्छादित किए हुए है। [छन्दांसि च्छादनात् —महर्षि यास्क] रंगों को देखकर उस दिव्य विज्ञान को याद करे कि सम्पूर्ण जगत् उस परम स्पंदन (ओम्) के विभिन्न रंग हैं, जिसका स्रोत परम चेतन सत्ता परमात्मा है। आप सभी को श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास और वैदिक भौतिकी परिवार की ओर से वासन्ती नवसस्येष्टि (होली) की हार्दिक शुभकामनाएँ। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि वासन्ती नवसस्येष्टि का यह पवित्र पर्व आपके जीवन को वैदिक ज्ञान-विज्ञान से भर दे। नोट— वैदिक विज्ञान से मिलने वाला आनन्द वा सुख ही इस संसार में स्थायी है। ज्ञान प्राप्त करने की कोई आयु नहीं होती, आप जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखना प्रारम्भ कर सकते हैं। यदि आप वैदिक विज्ञान सीखना चाहते हैं, तो इन पुस्तकों को निःशुल्क डाउनलोड करें— परिचय वैदिक भौतिकी https://tinyurl.com/IntroVPHi Introduction to Vaidic Physics https://tinyurl.com/IntroVPEn वैदिक रश्मिविज्ञानम् https://tinyurl.com/vaidicrashmivigyan सभी पुस्तकों के लिए— https://vaidicphysics.org/ebooks-download/