fa
Feedback
DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

DR NARAYAN DUTT SHRIMALI

رفتن به کانال در Telegram
1 735
مشترکین
اطلاعاتی وجود ندارد24 ساعت
+37 روز
-730 روز
آرشیو پست ها
Document from Chandan

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भगवान् का होने से ऐसा नहीं होता कि "मैं भगवान् का हूं, दूसरे भगवान् के नहीं हैं," प्रत्युत ऐसा भाव होता है कि सारा संसार भगवान् का है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५८* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *मनुष्य योनि भोगयोनि नहीं है, प्रत्युत साधनयोनि है, प्रेमयोनि है, भक्तियोनि है । भोगयोनि वह होती है, जिसमें नया कर्म करने का अधिकार न हो ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५५* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भगवान् के सामने अपने पाप कहने से पाप नष्ट हो जाते हैं । भगवान् निर्दोषता की अंतिम सीमा हैं ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५४* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *साधक में साधन विरुद्ध बात नहीं आनी चाहिए। साधन - विरुद्ध बात न आए तो समझो बहुत काम हो गया ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५४* 👏👏

Document from Chandan

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *मनुष्य में यह सामर्थ्य और योग्यता है कि वह अपना उद्धार भी कर सकता है और जगत् तथा परमात्मा को प्रसन्न भी कर सकता है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५१* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *प्रेम के भोक्ता भगवान् हैं, निष्काम भाव से यदि कुत्ते से भी प्रेम करें तो वह भगवान् तक पहुंचता है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५१* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *हम भगवान् के हैं, भगवान् हमारे हैं - इस प्रकार भगवान् के साथ सम्बन्ध जोड़ने से ज्ञानी और भक्त के सब लक्षण अपने - आप आ जाएंगे ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५१* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *संसार की प्रवृत्ति रोकने से परमात्मा की तरफ गति अपने आप होती है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५१* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *मां के उपकार से कोई उऋण हो ही नहीं सकता । पहले कर्जा उतारो, फिर दान - पुण्य करो । ईमानदार आदमी पहले कर्जा उतारता है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *घर से सेबा क्यों शुरू करें ? क्योंकि घर वालों से सुख लिया है, सेवा ली है । उनको सुख देकर कर्जा उतारो ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *सेवा अपने घर से शुरू करे । जो घर में सेवा नहीं कर सकता, वह बाहर भी सेवा नहीं कर सकता । वह मान बड़ाई का भूखा है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *कभी किसी को किंचिन्मात्र भी कष्ट न हो, यह भाव उपकार के भाव से भी ऊंचा है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *चेला बनाने का अधिकार उसी को है, जो उद्धार करने की शक्ति रखता हो ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १५०* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *जैसे पहले पुत्र उत्पन्न होता है, फिर व्यक्ति पिता बनता है। पुत्र हुए बिना पिता कैसे हुआ ?शिष्य का कल्याण हुए बिना गुरु कैसे हुआ ?* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४९* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! अपना कोई है तो केवल भगवान् हैं, मनुष्य के सिवाय किसी में भी ताकत नहीं कि भगवान् को मेरा कह दे । *मनुष्य ही भगवान् को अपना मान सकता है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४८* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! परा, अपरा और परमात्मा - तीनों वास्तव में एक ही हैं । परंतु इनमें राग- द्वेष करके द्वेधी भाव करने से जन्म - मरण होता है । *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *भगवान् को अपना मान लो तो फिर संसार की गुलामी, गरज नहीं करनी पड़ेगी । प्रत्युत संसार ही आपकी गरज करेगा ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏

राम ! राम !! राम !!! राम !!!! *अग्नि से अलग होने पर ही कोयला काला है । अग्नि से जुड़ने पर कोयला उज्जवल हो जाता है । चमकते हुए कोयले से भी लकीर खींचे तो काली ही खिंचेगी । ऐसे ही परमात्मा से अलग होने पर सब काली लकीर है ।* *परम श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज जी द्वारा विरचित ग्रंथ गीता प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित स्वाति की बूंदें पृष्ठ संख्या १४७* *राम ! राम !! राम !!! राम !!!!* 👏👏