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I.A.S.(हिंदी माध्यम)

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काला हिरण Blackbuck हाल ही में महाराष्ट्र के गोंदिया शहर में दीवार से टकराने के कारण ‘काला हिरण’ (Blackbuck) की मौत हो गई। प्रमुख बिंदु: काला हिरण (Blackbuck) जिसे ‘भारतीय मृग’ के रूप में भी जाना जाता है यह भारत के अतिरिक्त भारतीय उपमहाद्वीप में नेपाल एवं पाकिस्तान में भी पाया जाने वाला एक मृग है। इसे बांग्लादेश से विलुप्त घोषित किया जा चुका है। यह आंध्रप्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा का राजकीय पशु है। यह उन घास के मैदान एवं कम घने जंगलों में निवास करता है जहाँ जल की नियमित उपलब्धता होती है। यह मध्य एवं पश्चिमी भारत (मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र एवं ओडिशा) और दक्षिणी भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु) में पाया जाता है। राजस्थान का बिश्नोई समुदाय विश्व भर में ‘काले हिरण’ एवं चिंकारा के संरक्षण के लिये किये गए प्रयासों के लिये जाना जाता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की अनुसूची-I के तहत भारत में काला हिरण (Blackbuck) का शिकार निषिद्ध है। इसे ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ’ (International Union for Conservation of Nature- IUCN) की रेड लिस्ट में ‘संकटमुक्त’ (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।

10 मई, 2020 को भारत सरकार ने COVID-19 महामारी के बीच एक आउटरीच कार्यक्रम “मिशन सागर” लॉन्च किया है। इस मिशन का उद्देश्य खाद्य पदार्थों, COVID-19 से संबंधित आयुर्वेदिक दवाओं और एचसीक्यू टैबलेट की आपूर्ति मालदीव, मेडागास्कर, सेशेल्स और कोमोरोस को करना है। मुख्य बिंदु भारतीय नौसेना जहाज केसरी को इस मिशन के तहत तैनात किया गया है। यह ऑपरेशन रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के घनिष्ठ सहयोग के तहत किया जा रहा है। इस मिशन को हिंद महासागर में भारत के “SAGAR” विज़न के साथ घनिष्ठता के तहत तैनात किया गया है। SAGAR विजन क्या है? 2015 में, भारत ने हिंद महासागर के अपने विज़न की शुरुआत की जिसे “SAGAR” कहा जाता है, ‘SAGAR’ का पूर्ण स्वरुप Security and Growth for All in the Region है। भारत का लक्ष्य अपने पड़ोसियों (विशेषकर समुद्री पड़ोसियों) के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग प्राप्त करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत सूचनाओं के आदान-प्रदान, बुनियादी ढांचे के निर्माण, तटीय निगरानी और आपसी क्षमताओं को मजबूत करने में सहयोग करेगा। विश्लेषण इस मिशन में शामिल सभी चार देशों में भारत की नौसेना की मजबूत उपस्थिति है। 2019 में, भारत और मालदीव ने मालदीव में पहले से बंद तटीय रडार निगरानी प्रणाली (सीएसआरआर) को पूरा करने के लिए सहमत हुए। 2018 में, भारत और सेशेल्स ने द्वीप पर एक नौसैनिक अड्डा स्थापित करने पर सहमती प्रकट की। अक्टूबर 2019 में, भारत और कोमोरोस ने रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत ने हाई-स्पीड इंटरसेप्टर नावों की खरीद के लिए कोमोरोस को 20 मिलियन अमरीकी डालर की लाइन ऑफ़ क्रेडिट जारी की थी।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (BBIL) के साथ करार किया है। इस वैक्सीन को वायरस के उपभेदों का उपयोग करके विकसित किया जायेगा जिसे पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) में COVD-19 रोगियों से अलग किया गया है। महत्व टीके बीमारियों को रोकने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। चेचक के उन्मूलन के लिए टीके ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान परिदृश्य पूरी दुनिया में 40 से अधिक टीके विभिन्न चरणों में चल रहे हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने हाल ही में घोषणा की कि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने COVID-19 के खिलाफ एक टीके का परीक्षण शुरू कर दिया है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इस कार्यक्रम के भागीदारों में से एक है। अमेरिकी कंपनी मॉर्डना वैक्सीन के नैदानिक ​​परीक्षणों के चरण I में है। इसके अलावा, हांगकांग बेस्ड एक बायोटेक फर्म ने घोषणा की है कि यह टीकों के नैदानिक ​​परीक्षणों के दूसरे चरण में पहुँच गयी है। वैक्सीन कैसे कार्य करता है? एक वैक्सीन वास्तव में रोगज़नक़ वाली बीमारी का मुकाबला करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है। टीकाकरण का उद्देश्य शरीर में वायरस पैदा करने वाली बीमारी के एक निष्क्रिय हानिरहित स्ट्रेन को इंजेक्ट करना है। इसके बाद इन रोग पैदा करने वाले एजेंटों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर का बचाव करना शुरू कर देती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने COVID-19 के लिए स्वदेशी रूप से एंटीबॉडी डिटेक्शन किट विकसित की है। यह किट COVID-19 संक्रमण की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्य बिंदु यह किट 2.5 घंटे में 90 नमूनों का परीक्षण करने में सक्षम है। इस किट को संयुक्त रूप से ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और NIV द्वारा विकसित किया गया है। यह किट नमूने में IGG एंटीबॉडी की उपस्थिति का परीक्षण करेगी। यह संवेदनशील, लागत प्रभावी और तेजी से है। इस किट का प्रमुख लाभ यह है कि आरटी-पीसीआर परीक्षण की तुलना में इसे न्यूनतम जैव-सुरक्षा और जैव-सुरक्षा आवश्यकताओं की आवश्यकता होती है। RT-PCR रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन है। यह परीक्षण विशिष्ट आरएनए की मात्रा को मापता है। ICMR ने चीन से लगभग 5 लाख COVID-19 एंटीबॉडी परीक्षण किट रद्द कर दिए थे क्योंकि वे गलत परिणाम दे रहे थे। गुजरात स्थित Zydus Cadila बड़े पैमाने पर इस किट का उत्पादन करेगी। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का कार्य NIV द्वारा किया जाएगा। COVID-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई की प्रगति में यह एक बड़ी छलांग है क्योंकि भारत अपनी अधिकांश नैदानिक ​​सामग्रियों का आयात कर रहा है। महत्व किट एलिसा आधारित परीक्षण करने में भी सक्षम है। ELISA का पूर्ण स्वरुप है Enzyme-linked Immunosorbent Assay है। एलिसा का उपयोग संक्रमणों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) के तहत स्थापित पंजीकरण समिति ने सिफारिश की है कि स्ट्रेप्टोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन जैसे टीबी दवाओं के फसलों पर उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। मुख्य बिंदु पंजीकरण समिति ने 1 मई, 2020 को अपनी 114वीं बैठक आयोजित की। इसकी उप-समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट का 9% और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड का 1% फसलों पर उपयोग किया जाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं का उपयोग दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में सबसे अधिक किया गया है। मामला क्या है? CIBRC आठ फसलों में स्ट्रेप्टोसाइक्लिन दवा के उपयोग की अनुमति देता है। हालाँकि, अब यह पाया गया है कि इसका उपयोग कीटनाशक के रूप में अधिक फसलों पर किया जा रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने पहले सिफारिश की थी कि फसलों पर टीबी की किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश CIBRC के साथ भी साझा किया गया था। समाधान इस रिपोर्ट में 2022 तक इन दवाओं के उपयोग को रोकने का सुझाव दिया गया है क्योंकि अब इन दवाओं के लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। तब तक, उपयोगकर्ताओं को लेबल निर्देशों के अनुसार इन एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना चाहिए। अनुशंसाएँ पंजीकरण समिति ने एकीकृत कीट प्रबंधन के माध्यम से फसलों में रोगों और कीटों के प्रबंधन की सिफारिश की है। CIBRC ने ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) को बेहतर और सुरक्षित प्रथाओं पर शोध शुरू करने की भी सिफारिश की है।

श्री इंदु शेखर चतुर्वेदी ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव पद का कार्यभार संभाला श्री इंदु शेखर चतुर्वेदी (आईएएस) ने आज नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव पद का कार्यभार संभाल लिया। श्री चतुर्वेदी भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1987 बैच के झारखंड कैडर से संबद्ध अधिकारी हैं। उन्‍होंने मंत्रालय में श्री आनंद कुमार का स्‍थान लिया है, जो पहले ही संस्‍कृति मंत्रालय में सचिव का पद का कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के बाद श्री चतुर्वेदी ने मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों से मुलाकात की और मंत्रालय के कार्यों और उसके समक्ष मौजूद मामलों का जायजा लिया। इस नियुक्ति से पहले, श्री चतुर्वेदी जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, झारखंड सरकार में अपर मुख्‍य सचिव और अपर सचिव (जलवायु परिवर्तन विभाग) पर सेवाएं प्रदान कर रहे थे। श्री चतुर्वेदी ने आईआईटी कानपुर से इलैक्‍ट्रीकल इंजीनियरिंग में बी-टैक किया है और हार्वर्ड यूनि‍वर्सिटी (अमेरिका) से अंतर्राष्‍ट्रीय विकास में स्‍नातकोत्‍तर शिक्षा प्राप्‍त की है। उन्‍होंने झारखंड सरकार और भारत सरकार में फील्‍ड एवं नीतिगत स्‍तर पर विभिन्‍न पदों पर कार्य किया है। वह प्रधानमंत्री कार्यालय, आर्थिक कार्य विभाग, वित्‍त मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव या समकक्ष पद पर कार्य किया है। उन्‍हें योजना आयोग, कृषि मंत्रालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेन्‍शन मंत्रालय जैसे अन्‍य विभागों में कार्य करने का व्‍यापक अनुभव है। श्री चतुर्वेदी ने वित्‍तीय प्रबंधन, सामुदायिक संघटन एवं सहभागितापूर्ण प्रबंधन तकनीकों में भी प्रशिक्षण ग्रहण किया है।