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जोनल रेलवे को रेलवे स्टेशनों पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार सुनिश्चित करने का निर्देश दिये गये हैं, ताकि आवाजाही के समय यात्रियों का आमना-सामना न होने पाए। जोनल रेलवे, स्टेशनों और ट्रेनों पर सामाजिक दूरी के मानक दिशा-निर्देशों द्वारा निर्देशित होंगे और उन्हें सुरक्षा, संरक्षा और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। सभी यात्रियों को आरोग्य सेतु एप्लिकेशन को डाउनलोड करने और उसका उपयोग करने की सलाह दी जाती है। ट्रेन के भीतर किसी तरह की चादर, कंबल और पर्दे उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। यात्रियों को अपनी चादर लाने की सलाह दी जाती है। इस उद्देश्य के लिए एसी कोचों के अंदर का तापमान उपयुक्त रूप से नियंत्रित किया जाएगा। प्लेटफार्मों पर कोई स्टॉल/बूथ नहीं खोले जाएंगे। किसी भी तरह की ट्रेन साइड वेंडिंग की अनुमति नहीं होगी। यात्रियों को हल्का-फुल्का सामान लाने की सलाह दी जाती है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यात्रियों की आवाजाही साथ ही साथ यात्रियों को रेलवे स्टेशन तक लाने और ले जाने वाले वाहनों के चालकों को कन्फर्म्ड ई-टिकट के आधार पर अनुमति दी जाएगी।

भारतीय रेल की यात्री सेवाएं 12 मई 2020 से क्रमबद्ध तरीके से आंशिक रूप से बहाल होंगी विशेष रेलगाड़ियों की 15 जोड़ी (30 ट्रेनों) का परिचालन किया जाएगा ये सेवाएं श्रमिक स्पेशल के अतिरिक्त होंगी वर्तमान में शुरू की गई इन विशेष रेलगाड़ियों में केवल वातानुकूलित श्रेणियां अर्थात फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड एसी होंगी आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से केवल ऑनलाइन ई-टिकटिंग ही की जाएगी अधिकतम अग्रिम आरक्षण अवधि (एआरपी)अधिक से अधिक 7 दिन की होगी यात्रियों को अपना भोजन और पेयजल लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग को सुगम बनाने के लिए यात्री कम से कम 90 मिनट पूर्व स्टेशन पर पहुंचेंगे ट्रेन के भीतर किसी तरह की चादर, कंबल और पर्दे उपलब्ध नहीं कराएं जाएंगे, यात्रियों को अपनी चादर लाने की सलाह दी जाती है यात्रियों की आवाजाही साथ ही साथ यात्रियों को रेलवे स्टेशन तक लाने और ले जाने वाले वाहनों के चालकों को कन्फर्म्ड ई-टिकट के आधार पर अनुमति दी जाएगी रेल मंत्रालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के परामर्श से 12 मई 2020 से भारतीय रेल की यात्री सेवाएं क्रमिक तरीके से आंशिक रूप से बहाल करने का फैसला किया है। अनुलग्नक में दिए गए विवरण के अनुसार विशेष रेलगाड़ियों की 15 जोड़ी (30 ट्रेनों) का परिचालन किया जाएगा। (लिंक नीचे दिया गया है) ये सेवाएं फंसे हुए व्यक्तियों को ले जा रहीं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त होंगी, जिनका परिचालन 1 मई, 2020 से किया जा रहा है। समस्त मेल/एक्सप्रेस, सवारी और उपनगरीय सेवाएं सहित अन्य नियमित यात्री सेवाएं अगले परामर्श तक रद्द रहेंगी। वर्तमान में शुरू की गई इन विशेष रेलगाड़ियों में केवल वातानुकूलित श्रेणियां अर्थात फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड एसी होंगी। ‘स्पेशल ट्रेन्स’ के लिए किराया संरचना नियमित समय सारिणी वाली राजधानी एक्सप्रेस (कुछ खास प्रभारों को छोड़कर) के लिए लागू किराया संरचना के समान होगा। आईआरसीटीसी वेबसाइट या मोबाइल एप के माध्यम से केवल ऑनलाइन ई-टिकटिंग ही की जाएगी। किसी भी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर कोई भी टिकट बुक नहीं होगा। ‘एजेंट्स’ (आईआरसीटीसी एजेंट और रेलवे एजेंट दोनों) के माध्यम से टिकटों की बुकिंग की अनुमति नहीं होगी। अधिकतम अग्रिम आरक्षण अवधि (एआरपी) अधिक से अधिक 7 दिन की होगी। केवल कन्फर्म्ड ई-टिकटें ही बुक की जाएंगी। आरएसी/वेटिंग लिस्ट टिकट की बुकिंग और टिकट चेकिंग स्टॉफ द्वारा यात्रा के दौरान टिकटों की बुकिंग किए जाने की इजाजत नहीं होगी। करंट बुकिंग, तत्काल और प्रीमियम तत्काल बुकिंग की इजाजत नहीं होगी। अनारक्षित टिकटों (यूटीसी) की अनुमति नहीं होगी। किराये में किसी भी तरह के खानपान का शुल्क शामिल नहीं किया जाएगा। प्री-पेड मील बुकिंग, ई-कैटरिंग के प्रावधान निष्क्रिय रहेंगे। हालांकि, आईआरसीटीसी भुगतान के आधार पर खान-पान की सीमित वस्तुओं और पैकेज्ड पेय जल का प्रावधान करेगा। इस आशय की जानकारी टिकट बुक करते समय यात्रियों को उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रियों को अपना भोजन और पेयजल लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ट्रेनों के अंदर सूखा तैयार भोजन और बोतलबंद पानी मांग करने पर, भुगतान के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। सभी यात्रियों की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी और केवल उन्हीं यात्रियों को ट्रेन में प्रवेश /सवार होने की अनुमति होगी, जिनमें रोग का कोई लक्षण नहीं होगा। इन विशेष सेवाओं से यात्रा करने वाले यात्री निम्नलिखित सावधानियों का पालन करेंगे: (ए) केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही रेलवे स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। (बी) सभी यात्रियों को प्रवेश करते समय और यात्रा के दौरान फेस कवर/मास्क पहनने होंगे। (सी) स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग की सुविधा के लिए यात्री कम से कम 90 मिनट पहले स्टेशन पर पहुंचेंगे। केवल उन्हीं यात्रियों को यात्रा करने की अनुमति होगी, जिनमें रोग के कोई लक्षण नहीं होंगे। (डी) यात्री स्टेशन और ट्रेनों दोनों स्थानों पर सामाजिक दूरी रखने का पालन करेंगे। (ई) अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच जाने पर, यात्रियों को गंतव्य राज्य/संघशासित प्रदेश द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से 24 घंटे पहले तक ऑनलाइन टिकट रद्द कराने की अनुमति होगी। ट्रेन के प्रस्थान से 24 घंटे से कम अर्सा पहले टिकट रद्द कराने की अनुमति नहीं है। टिकट रद्द कराने का शुल्क किराये की 50% राशि होगी।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने ओडिशा विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए संज्ञानात्मक भावनात्मक पुनर्वास सेवाओं पर आधारित ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय हेल्पलाइन "भरोसा" की शुरूआत की केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज नई दिल्ली में एक आभासी मंच के माध्यम से ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ) हेल्पलाइन “भरोसा” और इसका हेल्पलाइन नंबर 08046801010 का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कठिन समय के दौरान छात्र समुदाय की परेशानियों को दूर करना है। इस हेल्पलाइन का उद्देश्य ओडिशा के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों को संज्ञानात्मक भावनात्मक पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना है। इस अवसर पर ओडिशा राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग, ओडिशा सरकार, डॉ अरुण कुमार साहू भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समन्वय ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. आई रामाब्रह्मम द्वारा किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए, श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के घातक संक्रमण के कारण देश कठिन दौर से गुजर रहा है और उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावशाली नेतृत्व में इस महामारी को फैलने रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने नए शैक्षणिक कैलेंडर और शिक्षा के आभासी प्रणाली के संबंध में उठाए गए कदमों पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति चिंता करना बहुत जरूरी है और ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किया गया हेल्पलाइन इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने औपचारिक रूप से इस हेल्पलाइन की शुरूआत की और छात्रों, उनके अभिभावकों और अन्य को लाभ पहुंचाने के लिए इसके नंबर की घोषणा की। केंद्रीय मंत्री ने हेल्पलाइन लोकार्पण समारोह में उपस्थित कुलपतियों, संस्थानों के प्रमुखों, ओडिशा के विभिन्न संस्थानों के कुलसचिवों और संकाय सदस्यों सहित उपस्थित लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश भर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से भी ‘भरोसा’ पहल का अनुकरण करने का आग्रह किया। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो आई. रामाब्रह्मम ने सीयूओ हेल्पलाइन 'भरोसा' की प्रमुख विशेषताओं और सेवाओं पर प्रकाश डाला जो कोविड-19 के कारण परेशान हुए छात्रों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उन्होंने इस तथ्य को दोहराया कि सीयूओ हेल्पलाइन 'भरोसा' ओडिशा के किसी भी विश्वविद्यालय के छात्र की चिंताओं को संबोधित करती है और कहा कि सीयूओ हेल्पलाइन के प्रायोगिक चरण में 400 से ज्यादा कॉलें प्राप्त हो चुकी हैं। श्री मधुसूदन मिश्रा, जिलाधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट, कोरापुट ने 'भरोसा' पहल को संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसका आज औपचारिक रूप से शुभारंभ किया गया है। डॉ. अरुण कुमार साहू उच्च शिक्षा विभाग मंत्री, ओडिशा सरकार ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह छात्रों को कोविड-19 के दौरान परेशानियों से बाहर निकलने में मदद करेगा।

गृह मंत्रालय की राज्‍यों को हिदायत: बिना किसी बाधा के अधिक ‘श्रमिक स्‍पेशल’ ट्रेनें चलाने में रेलवे के साथ सहयोग करें ताकि दूसरे राज्‍यों में पलायन करके गए श्रमिक तेजी से अपने घर पहुंच सकें मंत्रिमंडल सचिव ने बसों और ‘श्रमिक स्‍पेशल’ ट्रेनों से जाने वाले श्रमिकों को सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा प्रदान की गई सहायता की समीक्षा करने के लिए 10 मई 2020 को वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के जरिये एक बैठक की अध्‍यक्षता की। इस बैठक के परिणामस्‍वरूप, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों /संघ शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा कि वे पलायन करके आए श्रमिकों को उनके मूल स्थानों तक पहुंचने के लिए सड़क और रेलवे पटरियों पर चलने से रोकें। इस बात पर जोर दिया गया कि ‘श्रमिक स्‍पेशल’ट्रेनों और बसों को चलने की अनुमति दी जा चुकी है। इसलिए, उन्‍हें अपने घर जाने के लिए ‘श्रमिक स्‍पेशल’ट्रेनों या बसों की सुविधा दी जा सकती है और तब तक पलायन करके आए श्रमिकों को परामर्श दिया जा सकता है और उन्हें पास के आश्रयों में ले जाया जा सकता है। इस बात पर भी जोर दिया गया कि सभी राज्य / संघ शासित प्रदेशों की सरकारों को बिना किसी बाधा के और ‘श्रमिक स्‍पेशल’ ट्रेनें चलाने में रेलवे के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि फंसे हुए श्रमिक तेजी से अपने घर तक पहुंच सकें।

अटल पेंशन योजना (एपीवाई)- 5 वर्ष पूरे 5 वर्ष के सफल कार्यान्‍वयन के साथ, अटल पेंशन योजना ने 2.23 करोड़ लोगों का नाम दर्ज कर असाधारण कार्य किया भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना ‘अटल पेंशन योजना’ (एपीवाई) ने सफल कार्यान्वयन के पांच साल पूरे कर लिए हैं। 9 मई 2015 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों को वृद्धावस्था आय सुरक्षा देने और 60 वर्ष की आयु के बाद न्यूनतम पेंशन की गारंटी प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। इस योजना के दायरे में 2.23 करोड़ श्रमिकों के आने के बाद भी यह योजना भारत में वृद्धजनों की तेजी से बढ़ती आबादी की चुनौतियों से निपटने के लिए नि:संदेह महत्‍वपूर्ण है। असाधारण तरीके से नाम दर्ज करने के अलावा, इस योजना को पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू किया गया है, जिसमें सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है और इसमें पुरुष के साथ महिला सदस्यता अनुपात 57:43 है। इन पांच वर्षों में एपीवाई की यात्रा अभूतपूर्व रही है और 9 मई 2020 तक, इस योजना के तहत कुल 2,23,54,028 नाम दर्ज किए गए। इसकी शुरूआत के पहले दो वर्षों के दौरान, लगभग 50 लाख ग्राहकों के नाम दर्ज किए गए थे जो तीसरे वर्ष में दोगुने होकर 100 लाख हो गए और चौथे वर्ष में यह संख्‍या 1.50 करोड़ पर पहुंच गई। पिछले वित्तीय वर्ष में योजना के तहत लगभग 70 लाख ग्राहकों के नाम दर्ज किए गए थे। अटल पेंशन योजना का प्रबंध करने वाले पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के अध्‍यक्ष श्री सुप्रतिम बन्दोपाध्याय ने कहा, 'समाज के सबसे कमजोर वर्गों को पेंशन के दायरे में लाने का यह असाधारण कार्य सार्वजनिक और निजी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, भुगतान बैंकों, लघु वित्त बैंकों, डाक विभाग और राज्य स्तर के बैंकरों की समितियों के अथक प्रयासों से ही संभव हुआ है। एपीवाई को 18-40 वर्ष की आयु का कोई भी ऐसा भारतीय नागरिक ले सकता है जिसके पास बैंक खाता है और इसकी विशिष्टता तीन विशिष्ट लाभों के कारण है। सबसे पहले, यह 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन प्रदान करता है, दूसरी बात यह है कि ग्राहक की मृत्यु पर पति या पत्नी को आजीवन पेंशन की राशि की गारंटी दी जाती है और अंत में, दोनों ग्राहकों की मृत्यु की स्थिति में और पति / पत्नी, पेंशन की पूरी राशि नामित व्यक्ति को भुगतान कर दी जाती है। पीएफआरडीए के अध्‍यक्ष (श्री सुप्रतिम बन्दोपाध्याय) ने कहा ‘आगे बढ़ने पर हमारे पास पेंशन कवरेज बढ़ाने का एक विनम्र कार्य है क्योंकि अब तक पात्र जनसंख्या के केवल पांच प्रतिशत हिस्से को एपीवाई के अंतर्गत शामिल किया गया है और इस योजना के सामाजिक महत्व को पहचानते हुए, हम असाधारण वृद्धि हासिल करने के लिए लगातार सक्रिय हैं और अप्रत्याशित परिदृश्यों का समाधान करने के लिए पहल कर रहे हैं।' पीएफआरडीए के बारे में पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और पेंशन योजनाओं, जिन पर यह अधिनियम लागू होता है, की क्रमिक वृद्धि को विनियमित करने, बढ़ावा देने और सुनिश्चित करने के लिए संसद के एक कानून द्वारा स्थापित वैधानिक प्राधिकरण है। एनपीएस को 1 जनवरी 2004 में केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अधिसूचित किया गया था और बाद में अपने कर्मचारियों के लिए लगभग सभी राज्य सरकारों द्वारा अपनाया गया। एनपीएस को स्वैच्छिक आधार पर और अपने कर्मचारियों के लिए कॉर्पोरेट्स के लिए सभी भारतीय नागरिकों (निवासी / अनिवासी / विदेशी) तक बढ़ाया गया था। 30 अप्रैल 2020 तक, एनपीएस और अटल पेंशन योजना के तहत ग्राहकों की कुल संख्या 3.46 करोड़ और इसके प्रबंधन के अंतर्गत परिसम्‍पत्ति (एयूएम) 4,33,555 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। 68 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस के तहत नामांकित किया गया है और 22.60 लाख ग्राहकों ने कॉर्पोरेट्स के रूप में पंजीकृत 7,616 संस्थाओं के साथ निजी क्षेत्र में एनपीएस की सदस्यता ली है।

▪️ Current Affairs ▪️ June 2020 ▪️ Hindi Medium ▪️ Mahendra Publication ▪️ Size 5 MB | Page 116

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