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ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜

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मंज़िल को खबर भी नहीं रास्तों ने क्या क्या छीना है ।। 🔥✍

तुम दिल से और वक्त हाथ से निकलता जा रहा है ।। ✍

मेरी मुद्दतों की तलाश में पूर्ण विराम हो तुम ..... 💙✍

इश्क़ की आयतें पढ़ लेता है ज़माना , मेरे अल्फाजो में भी , एक वो है जो मेरी आंखो की फ़िक्र और ज़ुबां का ज़िक्र तक नहीं पहचान पाया .... ✍

पलट कर देखने के शौक ना थे कभी , तुझे देखा तो दिल किया थोड़ा और देख लूं ।। ✍

बहने देती ही आंसू इसी ख़्याल से तेरी यादें जो निकल रही है ' क्यूं रोकूं '..... ? ✍

कुछ इस कदर याद करेंगे तुम्हे ' एक मुसाफिर मिला , रास्ते ज़रा अलग थे कलम एक क्या करते , किस्मत के पन्ने ज़रा अलग थे ।। ❤️✍

समय लग रहा है ख्वाहिशें पूरी करने में ए ज़िन्दगी ! ज़रा धीरे धीरे चल ।। ✍

रहने दो ना खामोश ही बोलेंगे तो फिर किसी को बुरा लग जाएगा ।। 🙂✍

कहीं ज़िद भी पूरी कहीं जरूरतें भी अधूरी कोई सुगन्ध का भी मोहताज किसी का पूरा जीवन कस्तूरी ..... 🔥✍

सुकून और परम्परा को जोड़े हैं , मेरे गांव की सी हवा कहीं चलती थोड़े है ।। 😌

उठाएं हैं कदम ज़रा , कायनात साथ चलेगी ही सफ़र शुरू हुआ है , मंज़िल मिलेगी ही ।। 😌✍

It's a special day because it's my birthday 🎂 Thank you so much everyone .... We completed ½K family . 🔥🥳🌈

बनारस की शामे , और उसकी सादगी सी उड़ती जुल्फें , इश्क़ हुआ ना था जनाब करवाया गया था ।। 💙✍

शिकायतें करते रहे हम किसी से लोग शायरी समझने लगे हैं ज़ुबां नाम ले तुम्हारा , बस इसलिए वो मुझसे उलझने लगे हैं ।। ✍

सुनो, तुम पैसों की फिक्र न करो बस कंगन और अंगूठी की साइज बताओ। ❤️🥀 . By ; Prince raj 💙

मुड़े मुड़े है मेरी किताब - ए - ग़ज़ल के पन्ने , मेरे पीछे जाने कौन पढ़ता है इन्हे ...... ❤️✍

त्योंहार की चकाचौंध के बाद एकांत का सुकून हो तुम .... ❤️

काबिल नहीं थे लोग , हमने वहां भी इकरार किया , उम्मीद नहीं थी लौटने की , हमने वहां भी इंतजार किया ... ✍

किसी के हिस्से शख्स आ गया किसी के हिस्से तस्वीरें किसी की अधूरी रही मन्नतें किसी की खिल उठी तकरीरें ..... 💙✍