Riseup Classes [RAJASTHAN]
REET, RPSC एवं RSMSSB द्वारा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का विषय वार, टॉपिक वाइज एवं Year Wise संकलन Riseup Classes App पर उपलब्ध है। App Link https://play.google.com/store/apps/details?id=co.lenord.xfewx
Mostrar más📈 Análisis del canal de Telegram Riseup Classes [RAJASTHAN]
El canal Riseup Classes [RAJASTHAN] (@riseupclasses) en el segmento lingüístico de Hindú es un actor destacado. Actualmente la comunidad reúne a 15 592 suscriptores, ocupando la posición 13 089 en la categoría Educación y el puesto 25 483 en la región India.
📊 Métricas de audiencia y dinámica
Desde su creación el невідомо, el proyecto ha mostrado un crecimiento acelerado, reuniendo a 15 592 suscriptores.
Según los últimos datos del 07 noviembre, 2026, el canal mantiene una actividad estable. En los últimos 30 días la variación de miembros fue de -48, y en las últimas 24 horas de 2, conservando un alto alcance.
- Estado de verificación: No verificado
- Tasa de interacción (ER): El promedio de interacción de la audiencia es 35.74%. Durante las primeras 24 horas tras publicar, el contenido suele obtener 8.07% de reacciones respecto al total de suscriptores.
- Alcance de las publicaciones: Cada publicación recibe en promedio 5 574 visualizaciones. En el primer día suele acumular 1 258 visualizaciones.
- Reacciones e interacción: La audiencia responde de forma activa: el promedio de reacciones por publicación es 49.
- Intereses temáticos: El contenido se centra en temas clave como #riseup_classes, अभ्यर्थी, भर्ती, राजस्थान, अपडेट.
📝 Descripción y política de contenido
El autor describe el recurso como un espacio para expresar opiniones subjetivas:
“REET, RPSC एवं RSMSSB द्वारा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का विषय वार, टॉपिक वाइज एवं Year Wise संकलन Riseup Classes App पर उपलब्ध है।
App Link https://play.google.com/store/apps/details?id=co.lenord.xfewx”
Gracias a la alta frecuencia de actualizaciones (últimos datos recibidos el 08 noviembre, 2026), el canal mantiene la vigencia y un amplio alcance. La analítica demuestra que la audiencia interactúa activamente con el contenido, lo que lo convierte en un punto de referencia dentro de la categoría Educación.
Cargando datos
| Fecha | Crecimiento de Suscriptores | Menciones | Canales | |
| 08 noviembre | 0 | |||
| 07 noviembre | +4 | |||
| 06 noviembre | +1 | |||
| 05 noviembre | 0 | |||
| 04 noviembre | +2 | |||
| 03 noviembre | 0 | |||
| 02 noviembre | +2 | |||
| 01 noviembre | +3 |
| 2 | Sin texto... | 1 207 |
| 3 | PYQs के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहाँ RPSC एवं RSSB द्वारा विगत 17 वर्षों में पूछे गए 50,000+ प्रश्नों का व्यवस्थित संकलन उपलब्ध है।
📘 विषय → 📂 टॉपिक → 📅 वर्ष चुनें और वर्ष 2010 से 2026 तक के संबंधित PYQs विस्तृत व्याख्या सहित एक ही स्थान पर प्राप्त करें।
राजस्थान इतिहास, राजस्थान भूगोल, कला-संस्कृति, राजव्यवस्था, हिंदी और अंग्रेजी सहित 12 विषय के PYQs एक ही स्थान पर व्याख्या सहित उपलब्ध हैं।
विशेष सुविधा- RPSC एवं RSSB की आगामी परीक्षा के प्रश्न उत्तर कुंजी जारी होने के मात्र 7 दिनों के भीतर संबंधित कोर्स में अपडेट मिलेंगे।
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| 4 | 40% की कसौटी पर अटकी भर्तियाँ: पद खाली, युवा निराश
कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती में 40-40% अंक पूरे नहीं कर पाने के कारण करीब 1800 पद खाली रहने की खबर चिंता बढ़ाने वाली है। इससे पहले RPSC की स्कूल व्याख्याता और वरिष्ठ अध्यापक परीक्षाओं में भी कई अभ्यर्थी 40% की तय सीमा पार नहीं कर पाए और पद खाली रह गए।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसके कई कारण हो सकते हैं—प्रश्नपत्र का कठिन होना, कुछ प्रश्नों का अस्पष्ट होना, परीक्षा का दबाव और हर पेपर में अलग-अलग न्यूनतम अंक लाने की शर्त। ऐसी स्थिति में एक विषय में अच्छे अंक पाने के बाद भी अभ्यर्थी दूसरे विषय की तय सीमा पूरी न होने से चयन से बाहर हो सकता है।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन होना जरूरी है, लेकिन बड़ी संख्या में पद खाली रहना भी ठीक नहीं। पद खाली रहने से स्कूलों में पढ़ाई और दूसरे काम प्रभावित होते हैं। वहीं, लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं को निराशा हाथ लगती है।
इसलिए RPSC, RSSB को प्रश्नपत्र के स्तर और तय मानदंडों की समीक्षा करनी चाहिए। प्रश्न पाठ्यक्रम के अनुसार और स्पष्ट होने चाहिए। चयन के नियम पहले से साफ हों और परीक्षा ऐसी हो कि अभ्यर्थियों की वास्तविक योग्यता का सही आकलन हो सके।
भर्ती का उद्देश्य केवल परीक्षा लेना नहीं, योग्य अभ्यर्थियों का चयन करके खाली पदों को भरना भी है। गुणवत्ता बनी रहे और पद भी खाली न रहें—यही संतुलन जरूरी है।
— पुष्पेन्द्र बेनिवाल | 2 103 |
| 5 | RPSC एवं RSSB के PYQs अब खोजें आसान तरीके से!
किसी खास विषय, टॉपिक या वर्ष के प्रश्नपत्र ढूँढ़ने के लिए अब अलग-अलग जगहों पर समय बिताने की जरूरत नहीं।
RiseUp Classes App पर बस चुनें—
📘 विषय → 📂 टॉपिक → 📅 वर्ष
और पाएं 2010 से 2026 तक RPSC एवं RSSB परीक्षाओं में पूछे गए टॉपिक-वाइज और वर्षवार प्रश्न, विस्तृत व्याख्या सहित—एक ही जगह पर।
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| 6 | !“सर, RPSC एवं RSSB के PYQs कहाँ से पढ़ें?”
यह प्रश्न सुनते ही मुझे अपनी स्कूल व्याख्याता परीक्षा की तैयारी के दिन याद आ जाते हैं। उस समय किसी विशेष टॉपिक या वर्ष के प्रश्न खोजने के लिए मुझे अलग-अलग प्रश्नपत्र डाउनलोड करने पड़ते थे। फिर उनमें से प्रश्न छाँटना, उत्तर जाँचना और उन्हें टॉपिक के अनुसार व्यवस्थित करना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में बहुत समय और मेहनत लगती थी।
उसी दौरान मेरे मन में एक विचार आया—क्यों न विद्यार्थियों को ऐसी सुविधा मिले, जहाँ वे केवल—
📘 विषय → 📂 टॉपिक → 📅 वर्ष चुनें और संबंधित सभी प्रश्न एक ही स्थान पर देख सकें।
आज RiseUp Classes App ने मेरे उसी विचार को साकार कर दिया है। यदि आप वर्ष 2010 से 2026 तक किसी भी वर्ष के प्रश्न देखना चाहते हैं, तो केवल विषय, टॉपिक और वर्ष चुनिए। उस टॉपिक से RPSC एवं RSSB द्वारा पूछे गए सभी प्रश्न विस्तृत व्याख्या सहित आपके सामने होंगे।
राजस्थान इतिहास, भूगोल, कला-संस्कृति, और राजव्यवस्था सहित 10 से अधिक विषयों के PYQs को टॉपिक-वाइज एवं वर्षवार व्यवस्थित किया गया है।
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| 7 | एक चुनाव, दो भूमिकाएँ—मतदाता से रिटर्निंग ऑफिसर तक का यादगार सफ़र
प्रथम चरण में मतदाता बनकर घंटों कतार में खड़े होकर अपना वोट दिया और लोकतंत्र के प्रति अपना फ़र्ज़ निभाया। मतदान के दौरान चुनावी टीम की मेहनत को भी करीब से देखा।
द्वितीय चरण में सरपंच चुनाव के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में मतदान से लेकर मतगणना तक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला। मेरी पूरी टीम ने निष्पक्षता, पारदर्शिता और अनुशासन के साथ काम किया। सभी पक्षों को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देकर उनका विश्वास बनाए रखने का प्रयास किया, ताकि किसी को शिकायत का अवसर न मिले। गांववासियों ने जिस सम्मान, स्नेह और भरोसे के साथ हमारा साथ दिया, वह मेरे लिए बेहद भावुक और यादगार रहा।
इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने वाले सभी गांववासियों और अपनी समर्पित टीम का हृदय से धन्यवाद।
— पुष्पेन्द्र बेनिवाल | 3 672 |
| 8 | "जीवन के हर ठहराव को तुम पुनः आरंभ समझना अंत नहीं।" | 5 587 |
| 9 | https://www.instagram.com/reel/DevtMRjpUsV/?psln=MXkyazF4c2g5dzU2eg== | 1 |
| 10 | 2,031 पदों में सिर्फ 906 अभ्यर्थी पास… और एक ही कमरे से चयनित हुए दो दोस्त!
वरिष्ठ अध्यापक विज्ञान परीक्षा में 2,031 पद थे, लेकिन 906 अभ्यर्थी ही 40% अंक का मानदंड पार कर पाए। बाकी पदों के रिक्त रहने की स्थिति पर RPSC को गंभीरता से विचार करना चाहिए। लाखों युवा मेहनत से परीक्षा देते हैं—ऐसे में परीक्षा के कठिनाई स्तर और भर्ती प्रक्रिया पर ध्यान देना ज़रूरी है।
इसी परीक्षा से एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है। एक ही कमरे में रहकर तैयारी करने वाले श्रवण जानी और बरकत खान—दोनों का चयन हो गया। साथ पढ़े, एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और संघर्ष के दिनों में एक-दूसरे का सहारा बने। आज उनकी सफलता पूरे राजस्थान के अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है।
श्रवण जानी और बरकत खान अलग-अलग धर्मों से हैं, लेकिन उनकी दोस्ती और सफलता एक ही संदेश देती है—मेहनत, भाईचारे और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। एक कमरे में साथ रहकर उन्होंने साबित किया कि अच्छी संगति आपको मंज़िल तक पहुँचने का हौसला दे सकती है।
दोनों RiseUp Classes के विद्यार्थी रहे हैं। उनकी इस खुशी में शामिल होने और उन्हें बधाई देने RiseUp Classes की टीम भी पहुँची और दोनों को मिठाई खिलाकर उनकी सफलता का जश्न मनाया। अपने विद्यार्थियों की मेहनत को मुकाम तक पहुँचते देखना पूरी टीम के लिए गर्व और भावुकता का पल था।
जो अभ्यर्थी इस बार सफल नहीं हो पाए, वे निराश न हों। अच्छी संगति बनाए रखिए, अपनी कमियों को पहचानिए और पूरे हौसले से तैयारी में जुट जाइए। आज श्रवण और बरकत की कहानी है; कल आपकी सफलता भी किसी और के लिए प्रेरणा बनेगी।
- पुष्पेंद्र बेनिवाल | 7 469 |
| 11 | Sin texto... | 6 145 |
| 12 | ⚡ऑफर का अंतिम दिन आज
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| 13 | कविता बेरोज़गार के संघर्ष, माता-पिता की दुआओं और चयन से मिली उस खुशी की कहानी है, जिसने बरसों के दर्द को मुस्कान में बदल दिया। | 6 288 |
| 14 | ‘बेरोजगार हूँ…’ कविता उस युवा की अनकही पीड़ा को आवाज़ देती है, जो भीतर से टूटकर भी परिवार के सामने मुस्कुराता है।
पिता से पैसे माँगने की झिझक, माँ से अपना दर्द छिपाना और हर नतीजे के बाद घर फोन करने का डर—ये पंक्तियाँ मन को गहराई तक छूती हैं। | 6 022 |
| 15 | सरकारी नौकरी : एक पूरे परिवार की उम्मीद
छोटे-से कमरे में बैठकर तैयारी करने वाला युवा केवल प्रश्न हल नहीं करता, वह अपने परिवार का भविष्य सँवारने का सपना भी देखता है।
उसकी तैयारी में माँ की प्रार्थनाएँ, पिता की मेहनत और अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद जुड़ी होती है। त्योहार छूटते हैं, इच्छाएँ टलती हैं और असफलता के बाद भी उसे फिर किताबें खोलनी पड़ती हैं।
इसलिए “अभी तक नौकरी नहीं लगी?” कहने से पहले उसके संघर्ष को समझिए। कई बार कुछ अंकों की कमी के पीछे वर्षों की मेहनत होती है।
जिस दिन उसका चयन होगा, उस दिन घर में केवल खुशियाँ नहीं आएँगी—माँ-पिता की आँखों में वर्षों का इंतज़ार भी छलकेगा। | 5 604 |
| 16 | https://www.youtube.com/live/Ki7B0HUnSsY?si=lbf1pOXwtWFegkbw | 5 363 |
| 17 | PYQs के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहाँ RPSC एवं RSSB द्वारा विगत 17 वर्षों में पूछे गए 50,000+ प्रश्नों का व्यवस्थित संकलन उपलब्ध है।
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| 18 | PYQs के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहाँ RPSC एवं RSSB द्वारा विगत 17 वर्षों में पूछे गए 50,000+ प्रश्नों का व्यवस्थित संकलन उपलब्ध है।
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| 19 | राजस्थान GK के सभी PYQs एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर टॉपिक वाइज, वर्षवार एवं व्याख्या सहित
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| 20 | वरिष्ठ अध्यापक हिंदी का परिणाम : एक महत्त्वपूर्ण सीख
कल आए वरिष्ठ अध्यापक हिंदी के परिणाम ने हमें प्रथम प्रश्नपत्र की कठिनाई के साथ-साथ एक महत्त्वपूर्ण सीख भी दी है कि केवल प्रथम प्रश्नपत्र के कठिन स्तर को देखकर दोनों प्रश्नपत्रों को समान समय और महत्त्व न देना, बल्कि अपनी तैयारी का पूरा आधार केवल एक ही प्रश्नपत्र को बना लेना, हमें वांछित परिणाम तक नहीं पहुँचा सकता।
सीधे तौर पर मेरे संपर्क में ऐसे कई साथी रहे, जिन्होंने प्रथम प्रश्नपत्र की तैयारी में अधिक समय लगाया। परिणामस्वरूप, उनका प्रथम प्रश्नपत्र आसानी से निकल गया, लेकिन समय का संतुलन नहीं बना पाने के कारण वे द्वितीय प्रश्नपत्र यानी विषय में मात खा गए। आज वे अपने चयन को लेकर संशय की स्थिति में खड़े हैं।
यदि उन्होंने समय का संतुलित नियोजन करते हुए दोनों प्रश्नपत्रों को समान महत्त्व दिया होता, तो शायद आज वे संशय में नहीं, बल्कि अपने चयन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होते।
समस्या तब शुरू होती है, जब हम सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र को ही चयन का आधार मान लेते हैं और यह सोचते हैं कि इसे पार करने के बाद चयन की रेखा पार करना आसान हो जाएगा। जबकि वास्तविकता यह है कि चयन की राह तभी आसान होती है, जब हम दोनों प्रश्नपत्रों के महत्त्व को समझते हुए संतुलित तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं।
सीख स्पष्ट है—किसी एक प्रश्नपत्र में मजबूत होना पर्याप्त नहीं, दोनों में संतुलित प्रदर्शन ही चयन का वास्तविक आधार है।
— हनुमान विश्नोई | 4 686 |
