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काम संहिता🙏
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सेक्स से जुड़ी हुई प्रेम से जुड़ी हुई सभी जानकारी के लिए सन्देश भेजे जय कामदेव कामसूत्र यौन स्थानों का सच्चा गुरु ग्रंथ है। अपने यौन जीवन में विविधता लाने के तरीके खोज रहे हैं? तब आप सही जगह पर आए हैं .. !!
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प्रेम वासना और सम्भोग वासना दोनों में दूरी है।
प्रेम वासना रूह से जुड़ा है जबकि सम्भोग वासना देह से।
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Your admin need blood in ahemdabad kindley reply if someone have ૦ negetive blood if someone have Kindly reply here
Nirmal valand / tarang pandya
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सेक्स का दमन ना करे - ओशो
Sex Ka daman na kare osho
हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो बात करने में भयभीत होते हैं। हमने तो सेक्स को इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे वह है ही नहीं, जैसे उसका जीवन में कोई स्थान नहीं है। जब कि सच्चाई यह है कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है। लेकिन उसको छिपाया है, उसको दबाया है। दबाने और छिपाने से मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया। दमन उलटे परिणाम लाया है...।'
सेक्स को समझों :
युवकों से मैं कहना चाहता हूँ कि तुम्हारे माँ-बाप तुम्हारे पुरखे, तुम्हारी हजारों साल की पीढ़ियाँ सेक्स से भयभीत रही हैं। तुम भयभीत मत रहना। तुम समझने की कोशिश करना उसे। तुम पहचानने की कोशिश करना। तुम बात करना। तुम सेक्स के संबंध में आधुनिक जो नई खोजें हुई हैं उसको पढ़ना, चर्चा करना और समझने की कोशिश करना कि क्या है सेक्स?
सेक्स का विरोध ना करें : सेक्स थकान लाता है। इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि इसकी अवहेलना मत करो, जब तक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा सकते। जब तक तुम इसकी व्यर्थता को नहीं पहचान लेते तब तक बदलाव असंभव है।
मैं बिलकुल भी सेक्स विरोधी नहीं हूँ। क्योंकि जो लोग सेक्स का विरोध करेंगे वे काम वासना में फँसे रहेंगे। मैं सेक्स के पक्ष में हूँ क्योंकि यदि तुम सेक्स में गहरे चले गए तो तुम शीघ्र ही इससे मुक्त हो सकते हो। जितनी सजगता से तुम सेक्स में उतरोगे उतनी ही शीघ्रता से तुम इससे मुक्ति भी पा जाओगे। और वह दिन भाग्यशाली होगा जिस दिन तुम सेक्स से पूरी तरह मुक्त हो जाओगे।
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सेक्स क्या है, हम जानते हैं कि नहीं, लेकिन यह आग का किसी प्रकार का होना चाहिए यह हमेशा गर्मी की भावना संचार, चमक. और जब चमक एक शुद्ध चमक बन जाता है, तो हम सुंदरता की भावना महसूस करते है ।
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💓निगाहें तो बस ज़रिया हैं..
इज़हार का...!!❣️
💗ज़रा...मेरे दिल में झांककर देख..
एक दरिया हैं प्यार का...!!❣️❣️
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इतना भी बेपरवाह मत बनिये
हमारी मोहब्ब्त से मेरे सरकार
ऐसा न हो कि वक्त ने बदल लिया
जो करवट तो फिर हम छुप जायेगे
किसी धुन्ध मे और आप ढून्ढते फिरे
मुझे हर गलियो मे......
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इन जुल्फों से ढककर मेरे चेहरे को
अपनी मदमस्त ओठों के रस का
रसपान कर मुझे मदमस्त कर दो प्रिये
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करने से पहले सही से वेजिना और पेनिस की सफाई कर ले ताकि फॉरप्ले के समय चाटने चुसने में बदबू न आवे । हो सके तो काँख और जांघ में इत्र लगा लें।
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प्रियतमा !
सात फेरों में कहा सिमटती है ये मोहब्बत की रिवायतें!!!!!
तन को छूने वाले अक्सर मन को अनछुआ ही छोड़ देते है!!!!!
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प्रियतमा !
स्त्रियों का मन ब्लाउज़ के हुक में
फँसा हुआ नही होता कि
जिसको खोलते ही
उसका मन भी खुल जाए।
न मंगलसूत्र की तरह गले में बंधा होता है
कि उसके बंधते ही
उसका मन भी बंध जाये।।
स्त्री का मन एक यात्रा है!!
और ये हम पुरुषों पर निर्भर है कि
हम इस यात्रा रूपी स्त्री में कहाँ तक पहुँचते है ❤️🌹
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आँखें तुम्हारी..........
बडी ही खूबसूरत है आँखें तुम्हारी !
बिजलियाँ गिराती है आँखें तुम्हारी !!
समंदर सी गहरी है आँखें तुम्हारी !
नशा है, जाम है, यह आँखें तुम्हारी !!
लगाती मुझपे इल्ज़ाम है आँखें तुम्हारी !
मेरी सुबह, शाम है, आँखें तुम्हारी !!
इजहार जब करती है आँखें तुम्हारी !!
क़ातिल है,शातीर है, आँखें तुम्हारी !!
गुमसूम सी रहती है आँखें तुम्हारी !
बहोत कुछ कहती है आँखें तुम्हारी !!
देती दिलका पैगाम है आँखें तुम्हारी !
मेरा चैन है, सुकून है आँखें तुम्हारी !!
✍.......... देवांग की कलम से
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सेक्स क्या है, हम जानते हैं कि नहीं, लेकिन यह आग का किसी प्रकार का होना चाहिए यह हमेशा गर्मी की भावना संचार, चमक. और जब चमक एक शुद्ध चमक बन जाता है, तो हम सुंदरता की भावना महसूस करते है ।
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प्रियतमा को #Online______बुलाना 😒और
प्रियतमा को घोड़ी 🐎 बनाकर खुद🤦♀️🤦♀️ #घोड़े बेच कर #सो जाना🙈🙈
ऐ #साहेब .....#ये ठीक💔 नही 😂😹😹😂😂😜😜
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हिन्दुओं को भ्रमित किया गया ।
आज भी बहुतायत हिन्दू इस दिव्य ज्ञान से अनभिज्ञ है।
हिन्दू सनातन धर्म व उसके त्यौहार विज्ञान पर आधारित है।जोकि हमारे पूर्वजों ,संतों ,ऋषियों-मुनियों तपस्वीयों की देन है।आज विज्ञान भी हमारी हिन्दू संस्कृति की अदभुत हिन्दू संस्कृति व इसके रहस्यों को सराहनीय दृष्टि से देखता है व उसके ऊपर रिसर्च कर रहा है।
🙏 ओम् नमः शिवाय🙏
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#शिवलिंग को गुप्तांग की संज्ञा कैसे दी गई..... ?
और अब सनातन संस्कृति के लोग खुद ही शिवलिंग को शिव् भगवान का गुप्तांग समझने लगे है और दूसरों को भी ये गलत जानकारी देने लगे हैं।
परन्तु सही तथ्यों को जानना बहुत जरूरी है...
कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते हैं...
छोटे छोटे बच्चों को बताते हैं कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते हैं । उन मूर्खों को संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है और अपने बच्चों को सनातन संस्कृति के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते हैं। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है । इसे देववाणी भी कहा जाता है।
लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है…
जबकी जनेन्द्रिय को संस्कृत मे शिशिन कहा जाता है।
>शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक….
>पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक
इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ नपुंसक का प्रतीक।
अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य की जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है..तो वे बताये ”स्त्री लिंग” के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग होना चाहिए?
शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है।
स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है और ना ही शुरुआत।
शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता ।
दरअसल यह गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मलेच्छों यवनों के द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने पर तथा बाद में मुगलों और षडयंत्रकारी अंग्रेजों के द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है ।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं, उदाहरण के लिए यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही ले लें तो
सूत्र का मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।
उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और मतलब, आशय, अभिप्राय (मीनिंग) भी ।
ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय, चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है । धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।तथा कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है। जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग (cosmic pillar/lingam)
ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे हैं: ऊर्जा और प्रदार्थ। हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है। विज्ञान का भी यही सिद्धांत है e=mc२
इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं। ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा ऊर्जा शिवलिंग में निहित है। वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है.
The universe is a sign of Shiva Lingam
शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी है। अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान हैं।
अब बात करते है योनि शब्द पर-
मनुष्ययोनि, पशुयोनी, पेड़-पौधों की योनी, जीव-जंतु योनि.....
योनि शब्द का संस्कृत में प्रादुर्भाव, प्रकटीकरण अर्थ होता है....जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है। किन्तु कुछ धर्मों में पुर्जन्म की मान्यता नहीं है नासमझ बेचारे। इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत अर्थ को नहीं जानते हैं। जबकी हिंदू धर्म मे 84 लाख योनि बताई जाती है।यानी 84 लाख प्रकार के जन्म हैं। अब तो वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि धरती में 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़, कीट, जानवर, मनुष्य आदि) है।
#मनुष्य_योनि
पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है।अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है। तो कुल मिलकर अर्थ यह है:-
लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक, दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई , बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं । हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है। इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया। ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लग सके । लेकिन कुछ विकृत मुग़ल काल व गंदी मानसिकता बाले गोरे अंग्रेजों के गंदे दिमागों ने इस में गुप्तांगो की कल्पना कर ली और झूठी कुत्सित कहानियां बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले
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